Some Short Stories Ch. 1

हसीन चेहरा- Chapter 1

Posted by Miss Aina • Aug 07, 2026 09:08 AM

डार्क रेड लहंगे में जेवरात से सजी नगीन आज बेतहाशा खूबसूरत लग रही थी।

भई नगीन जितनी खूबसूरत है ना उस के लिए तो कोई कहानियों में पाया जाने वाला शहज़ादा ही होना चाहिए।" उस की कजिन उस को छेड़ती और शहज़ादे के नाम पर उस की दिल की धड़कनें तेज़ हो जातीं।

"तुम तो जैसे परी लग रही हो।" उस की एक दोस्त ने कहा था। तब वह बहुत खुश हुई थी ,

वह लाखों में एक थी और इस बात का एहसास उसे कदम कदम पर दिया गया । शादी के बाद हर लड़की की तरह उस के दिल में भी एक खूबसूरत मर्द का तसव्वुर था जो उसी की सी आन बान रखता हो।

उस ने सामने दीवार पर देखा जहां उस शख़्स की तसवीर सजी थी जिसे उस का शहजादा बनने का आनर हासिल हुआ था और उसे एक बार फिर ज़ोर से रोना आया।

रो रोकर उस का बुरा हाल हो गया था। उस ने "ऐसा कब सोचा था।" उस ने जेवर उतार कर दूर फेंका।

स्याह सूट में छह फिट की शानदार पर्सनाल्टी और मज़बूत **** के साथ वह एक काबिले तारीफ शखसीयत का मालिक होता अगर उस का रंग सफेद होता। उसे उस का रंग और उस के सूट का रंग एक सा लगा था। तस्वीर को देख नगीन ने सोचा था !

"मेरी दोस्तों ने कितना मज़ाक उड़ाया होगा।"

"हूं शहज़ादा।" उस ने सोचा।

"पता है यार! जितने खूबसूरत तुम्हारे हाथ है मुझे लगता है तुम्हारे शहज़ादा हुजूर तुम्हें काम नहीं करने देंगे।"

नगीन को अपनी सहेलियों की बाते याद आ रही थी , और वो बेतहाशा रोए जा रही थी !!

"अम्मां! आप ने मेरे साथ अच्छा नहीं किया। मैं आप को मुआफ नहीं करूंगी कभी नहीं।"

तक़रीबन दो बजे के करीब वह कमरे में दाखिल हुआ । लेकिन अन्दर का मन्ज़र देख कर वह वहीं खड़ा रह गया,

सारा जेवर बैड पर पड़ा था। टूटी चूड़ियां कालीन पर पड़ी थीं। जब कि वह जिस की तारीफें वह उस दिन से सुन रहा था जिस दिन से रिश्ता पक्का हुआ था और जिसे देखने के लिए वह बेचैन हो उठा था, वह कहीं नहीं थी।

इन अजीब से हालात पर वह अभी तक हैरान था। तभी वह टावल से मुन्ह साफ करती कमरे में दाखिल हुई। उसे देख कर एक लम्हे को सटपटाई।

असद ने गौर से उसे देखा जब कि वह चलती हुई सोफे पर बैठ गई। ज़्यादा रोने से आंखें सुर्ख हो गई थीं। उसे उलझन सी हुई !

इस तरह के इसतकबाल की उस ने उम्मीद नहीं रखी थी। इस सादगी में भी वह सर से पैर तक हुस्न थी। असद को तसलीम करना पड़ा। लेकिन उसे सजे संवरे देखने की ख़्वाहिश अधूरी रह गई। उस ने एक ठन्डी सांस भरी वह खामोशी से उठा और ड्रेसिंग रुम की तरफ बढ़ गया ।

सादा से टराउज़र शर्ट में वापस आया तो वह उसी कैफियत में थी। उस ने गला खन्खार कर उसे अपनी मौजूदगी का एहसास दिलाना चाहा ।

यह सब सूरते हाल उस के लिए हैरान कुन थी। फितरतन वह नर्म मिज़ाज था लेकिन इस तरह की सूरतेहाल किसी भी शख़्स को गुस्सा दिला सकती थी।

"इस सारे तमाशे की वजह-जान सकता हूं?" उस की मुसलसल खानोशी से चिड़ कर वह उसे कुछ कहने ही वाला था कि उसे लगा वह रो रही है।

उस का गुस्सा एक दम से झाग की तरह बैठ गया। वह ऐसा ही था वह किसी को रोते हुए नहीं देख सकता था। धीरे से चलते हुए वह उस के बराबर बैठ गया।

"कोई प्राब्लम है?" नर्मी से असद ने पूछा। उस के रोने में और तेज़ी आ गई।

"मेरा खयाल है आप थक चुकी हैं।

रीलैक्स हो कर बैठें। आप सोना चाहें तो सो सकती हैं।" वह कहते हुए वाश रुम की तरफ बढ़ गया। जब कि नगीन ने उस के उठने पर शुक्र अदा किया। वह वहीं सोफे पर लेट गई और आइन्दा ज़िन्दगी के बारे में सोचने लगी जो कि इस शख़्स के साथ गुज़ारना उसे तकलीफ देह लग रहा था।

☆☆☆

हलकी सी आहट पर उस की आंख खुली। उस के बिल्कुल सामने वह ड्रेसिंग टेबिल के आगे खड़ा बाल संवार रहा था। सफ़ेद सूट में उस का रंग पहले से भी स्याह लग रहा था।

"स्याह मर्द मुझे बहुत बुरे लगते हैं।" उस ने एक दफा अपने दोस्तों से कहा था उसे याद आया। उस का सारा जेवर ड्रेसिंग टेबिल पर पड़ा था। जब कि कालीन पर टूटी चूड़ियां अब कहीं नज़र नहीं आ रही थी। उस की तय्यारी हो चुकी थी। उसे उठते देख कर वह धीरे से चलता हुआ उस की तरफ आया ।

"यह आप का मुन्ह दिखाई का तोहफा है। उस के बराबर बैठते हुए उस ने नर्मी से उस का हाथ पकड़ा और नर्मो नाजुक हाथ में ब्रेसलेट डाल दिया। इजाजत लेने की ज़रुरत उसे महसूस नहीं हुई। ताबिश की निगाह असद के हाथों पर जा ठहरी।

अपने सफ़ेद हाथों के नज़दीक उसे उस के हाथ कुछ ज़्यादा ही बदनुमा लगे। उसे कराहियत सी महसूस हुई। एक झटके से हाथ छुड़ाते हुए वह खड़ी हो गई।

"मैं ज़रा मुन्ह धो लूं।" नागवारी से कहते हुए वह वहां रुकी नहीं थी। असद को उलझन सी महसूस हुई। उस का रवय्या उस की समझ से बाहर था। उस के रात के रविय्ये पर वह कुछ हैरान और उलझा तो था लेकिन शायद थकान और घर छोड़ने के वजह से ऐसा रिएक्ट कर रही ये सोच के उसने अपना खयाल झटक दिया था !

आज उसका वलीमा था, वलीमा बहुत शानदार हुआ था। हालांकि उसे मेकअप की जरुरत नहीं थी। वह बिला शुब्हा कुदरती हुस्न का खूबसूरत शाहकार थी।

अहद कितनी ही देर उस के हुस्न को देखता चला गया। लेकिन उस की खूबसूरती के बावुजूद कुछ लोग थे जिन्होंने उस की उदासी को बड़ी गहराइ से नोट किया था।

वलीमे के बाद वह अम्मी वगैरह के साथ ही आ गई। उसे उन से बात करनी थी और उस के पास और वक्त नहीं था। ना पसन्द आदमी के साथ रहना कितना दुशवार होता है। यह उसे एक रात में ही अन्दाज़ा हो चुका था। अपने घर में दाखिल होते ही उसे आज़ादी का एहसास हुआ था। एक सुकून सा महसूस हुआ। सब लोग बातों में मसरुफ थे। उस की कज़िन उसे छेड़ रहे थे। जब कि वह खामोश बैठी रही। उसे लगा वह सब मिल कर उस का मजाक उड़ा रहे हैं। उसे लगा जैसे वह अभी रो देगी। चाय सर्व करते हुए भाभी ने गौर से उस का चेहरा देखा।

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