पचेल्डा प्रथा (Complete ) Ch. 3

पचेल्डा प्रथा - Chapter 3

Posted by Mamta Meena • Aug 19, 2026 08:38 PM

पूजा की बात सुनकर सलोनी जैसे कहीं खो सी गई थी उसके चेहरे पर गुस्से के भाव उभर आऐ,,,,,,,,

फिर बह पूजा की तरफ देखते हुए किसी सोच मे डूबे हुए बोली पूजा कितने निष्ठुर होते हैं ऐसे लोग जो जरा भी इस  बारे में नहीं सोचते है कि जिस इंसान को हम अपनी जिंदगी मान चुके होते हैं,,,,,,,

जिसके साथ सात जन्मो तक जीने मरने की कसमें खाते हैं अपनी जिंदगी में सबसे ज्यादा प्यार जिससे करते हैं अगर वही इंसान हमसे दूर हो जाए तो हम पर क्या गुजरती है यह हमारा दिल ही जानता है,,,,,,,

लेकिन यह समाज और रूढ़िवादी लोग यह नहीं समझेंगे उन्हें तो समाज में बस अपनी झूठी इज्जत चाहिए,,,,,,,,

पूजा मैं तुम्हारी बहन की लक्ष्मी का दर्द समझ सकती हूं कि उस पर क्या गुजर रही है,,,,,,

जिस इंसान को उसने अपना सबकुछ मान लिया था इतने साल जिसके साथ उसने गुजारे हर सुख दुख अपने साथ निभाने का वादा एक दूसरे से किया था,,,,,,,,,

जब वह इंसान उसे हमेशा के लिए छोड़कर चला गया तो उसे सबके अपनेपन और प्यार की जरूरत है लेकिन यह सब समझने की बजाय हर कोई अपने स्वार्थ को पूरा करने में लगा हुआ है,,,,,,,

सब इस पचेंल्डा प्रथा के नाम पर अपने दिखावें और मतलब के लिऐ उसकी जिंदगी को नर्क बनाने में लगे हुए हैं,,,,,,,

यह सब कुछ जान कर भी पूजा तुम चुप क्यों बैठी हुई हो अपनी बहन की हक की लड़ाई के लिए लड़ो,,,,,,,

यह सुनकर पूजा उदास होते हुए बोली यही तो बात है सलोनी तुम्हें तो पता है कि मेरे चाचा और पापा में बिल्कुल भी नहीं बनती,,,,,,,,

मेरे पापा भी खुद लक्ष्मी के बारे में सोच कर बहुत दुखी है अगर बह इस बारे में कुछ बोलेंगे तो चाचा को लगेगा कि हम जानबूझकर उसकी बेटी के मामले में टांग अड़ा रहे हैं और उसकी बेटी की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं,,,,,,,

यह सुनकर सलोनी उसकी तरफ देखते हुए जोर से बोली यह तुम क्या कह रही हो पूजा,,,,,,,,,

भूल गई तुम कि तुम एक पत्रकार हो तुम अपना और पराया कैसे करने लग गई,,,,,,,

अरे हर पत्रकार का हक होता है सही के बारे में लड़ना, एक पत्रकार समाज का आईना होता है समाज में जितनी भी बुराइयां है बह एक पत्रकार ही दुनिया के सामने लाता है,,,,,,,,

अगर आज तुम इस तरह सोच कर पीछे हट जाओगी तो क्या तुम्हारी बहन की जिंदगी बच पाएगी उसकी जिंदगी तो नर्क से भी बदतर हो जाएगी,,,,,,,,

पूजा आखिर कब तक तुम्हारी बहन यह दर्द बर्दाश्त करती रहेगी, पूजा इस समय तुम यह मत सोचो कि तुम्हारे चाचा और पापा में क्या मतभेद है,,,,,,,,,

इस समय तुम एक इंसानियत के नाते सोचो एक पत्रकार होने के नाते सोचो यह सोचो कि एक पत्रकार बह होता है जो समाज को सही और गलत की राह दिखाता है,,,,,,,,

तुम्हारी बहन लक्ष्मी के हक के लिए लड़ने में एक पत्रकार और तुम्हारी दोस्त होने के नाते पूजा मैं तुम्हारे साथ हूं,,,,,,,,,

यह सुनकर पूजा बोली लेकिन सलोनी,,,,,,,

तब सलोनी बोली लेकिन क्या पूजा क्या तुम अब भी पीछे हटना चाहती हो क्या तुम चाहती हो तुम्हारी बहन इसी तरह घुट-घुट कर जीती रहे, भूल गई अपना फर्ज की एक पत्रकार क्या क्या फर्ज होता है,,,,,,,,,

सलोनी दीदी बिल्कुल सही कह रही है पूजा बाहर से अंदर आते हुए सुबोध ने कहा,,,,,,,

हां पूजा सलोनी दीदी बिल्कुल ठीक कह रही है पूजा के होने बाले पति और बायफ्रेंड सुबोध ने कहा,,,,,,,,

फिर बह सलोनी की तरफ देखते हुए बोला दीदी मैंने भी पूजा कोई यहीं समझाया था कि हम पत्रकार है हम लक्ष्मी के हक की लड़ाई लड़ेंगे,,,,,

लेकिन पूजा को लगता है कि ऐसा सब करने से उसके पापा और चाचा के रिश्ते में खटास पैदा हो जाएगी,,,,,,

यह सुन कर सलोनी बोली पूजा अगर कुछ सही करने से रिश्ते में खटास आती है तो आने दे उसको लेकिन किसी की जिंदगी तो बच जाएगी,,,,,,,

यह सुनकर पूजा बोली यह सब कुछ इतना आसान नहीं है सलोनी,,,,,,, अभी लक्ष्मी के पति की मौत को मात्र पांच छै दिन हुए है अगर ऐसे में हम बहा पर जाएंगे तो बहा लोग हमारे विरोध में खड़े हो जाएंगे,,,,,,,

यह सुनकर सलोनी बोली पूजा चाहे जो भी हो लेकिन हम वहां पर जाएंगे पुलिस की मदद लेकर जाएंगे,,,,,,,

तुम्हें तो पता है की जय का एक दोस्त पुलिस ऑफिसर है बह हमारी जरुर मदद करेगा कई मामलों में उसने हमारी मदद भी की है, हम उसकी मदद लेकर लक्ष्मी को न्याय दिलाएंगे,,,,,,,,

अगर हम इसी तरह हाथ पर हाथ रखे बैठे रहे तो तुम्हारे चाचा और लक्ष्मी के ससुराल वाले जबरदस्ती उसके देवर का रिश्ता उस पर थोप देंगे उडा देंगे उसे उसके देवर के नाम का पचेंल्डा फिर हम चाह कर भी कुछ नहीं कर पाएंगे इसलिए जो करना है अभी करना है,,,,,,,,,

यह सुनकर पूजा बोली हां लक्ष्मी तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो लेकिन इस स्थिति में शायद लक्ष्मी हमारा कुछ साथ ना दे पाए,,,,,,,

यह सुनकर सलोनी बोली मैं लक्ष्मी की हालत समझ सकती हूं पूजा लेकिन हम लक्ष्मी को हिम्मत बधाएंगे,,,,,,

तब पूजा बोली अगर लक्ष्मी ने सब के दबाव में आकर अपने देवर का पचेंल्डा ओढने की बात मान ली तो क्या होगा, अगर उसने हमारा साथ नहीं दिया तो हम क्या कर पाएंगे,,,,,,,,

यह सुनकर सलोनी बोली तुम उसकी चिंता मत करो पूजा एक बार लक्ष्मी से मिलने का हमें मौका मिल जाए हम उसे अच्छे से समझा कर सही गलत का फर्क समझाएंगे,,,,,,,

और तुम ही तो कहती हो कि बह अपने देवर से सख्त नफरत करती है इतनी समझदार तो है कि अपने सही गलत का फैसला खुद ले सकती है और तुम उसकी चिंता मत करो,,,,,,,,

और हा पूजा हम आज दोपहर को ही निकलेंगे अब तुम चलने की तैयारी करो दोपहर तक मैं अपने कुछ जरूरी काम भी मैं निबटा देती हूं,,,,,,,

यह सुनकर पूजा सलोनी का हाथ अपने हाथों में लेकर बोली सालोनी तुमने तो सच में मेरी सारी प्रॉब्लम ही दूर कर दी मैं बहुत उदास थी,,,,,,,,

तुम जो कह रही हो बह बिल्कुल सही कह रही हो एक पत्रकार बही होता है जो समाज के सामने सही और गलत ला कर रखता है कुछ समय के लिए मैं अपने फर्ज को भूल गई थी,,,,,,,,,

लेकिन अब नहीं अब मैं अपनी बहन को उस नरक की जिंदगी में नहीं जीने दूंगी मैं कदम कदम पर उसका साथ दूंगी और उसे जीने के लिए एक नई राह दिखाने की कोशिश करूंगी,,,,,,,,

यह सुनकर सलोनी के चेहरे पर मुस्कान आ गई, तब सुबोध बोला सलोनी दीदी मैं भी तुम्हारे और पूजा के साथ चलूंगा,,,,,,,

यह सुनकर सलोनी बोली सुबोध भला ऐसा कभी हुआ है कि ऐसे मामलों में तुमने हमें कहीं अकेले जाने दिया हो  ठीक है हम सब साथ चलेंगे,,,,,,,,

फिर सुबोध बोला चलो पूजा हम भी अपना कुछ जरूरी काम कर लेते हैं फिर हमें दोपहर में निकलना भी तो है,,,,,,,,,

यह सुनकर पूजा बोली हां,,,,,,,

फिर बह सुबोध के साथ वहां से चली गई, पूजा और सुबोध के जाने के बाद भी सलोनी के मन में जैसे कोई भयंकर तूफान उठ रहा हो,,,,,,,

उसके दिमाग में अपने अतीत की काली परछाईया तैरने लगी, एकाएक उसका सिर चकराना लगा उसने अपना सिर सामने टेबल पर टिकाया और आंखें बंद कर अपने अतीत में खो गई,,,,,,,,

बह अतीत जिसे बह कभी भूल कर भी याद नहीं करना चाहती थी, लेकिन आज पूजा ने जब अपनी चचेरी बहन लक्ष्मी के पचेंल्डा ओढने की बात कही, तो सलोनी के सामने अपना अतीत घूमने लगा था,,,,,,,,

पचेंल्डा यह एक ऐसा शब्द था जिस शब्द से जैसे सलोनी का बरसों पुराना नाता था,तब का जब उसे अपने सही गलत की पहचान तक नहीं थी,,,,,,,,यह सब सोचते सोचते सलोनी अपने अतीत मैं खो गई,,,,,,

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