इश्क़ तेरा हम पे तारी... Ch. 1

इश्क़ तेरा हम पे तारी... - Chapter 1

Posted by Ira Rajput • Aug 24, 2026 08:51 PM

एक नई कहानी… एक नई शुरुआत...

कुछ अनकहे जज़्बात, कुछ अनजाने रिश्ते और एक ऐसा इश्क़, जो शायद दोनों की ज़िंदगी बदलने वाला है।।❤️…

तो चलिए... शुरू करते हैं एक ऐसी दास्तान, जहाँ इश्क़ होगा... मगर तारी भी होगा।।

Welcome to my new story — इश्क़ तेरा हम पे तारी…🤌

शुरू करते है…

"इश्क़ की राहो मे मुकद्दर का खेल भी अजीब होता है..

जिसे पाने की चाहत न हो.. वही रूह मे उतर जाता है..."

मिट्टी की सौंधी खुशबू समेटे, अपनी पुरानी हवेलियों, गौरवशाली विरासत और सुनहरे धोरो (रेत के टीलों) की गाथा गाता राजस्थान... जहाँ की हर शाम एक नया किस्सा कहती है और हर हवेली के पीछे कोई न कोई अनकहा दर्द छुपा रहता है। जयपुर की इस तंग और भीड़भाड़ वाली गली में भी आज कुछ ऐसा ही शोर गूंज रहा था जिसके बीच एक अनसुलझा तूफ़ान पल रहा था।।

गली के एक कोने में कुछ लड़के बदतमीजी पर उतरे हुए थे। जमीन पर एक बुजुर्ग और उनकी लगभग सोलह साल की डरी-सहमी पोती हाथ जोड़े बैठे थे जिन्हे वे मनचले बुरी तरह परेशान कर रहे थे।।

तभी उन गुंडो का मुखिया हसते हुए बोला,.... "क्यो बे बुड्ढे हमसे जो कर्जा लिया था उसका ब्याज बढ़ता जा रहा है और तू है कि पैसे देने का नाम नही ले रहा.. अब पैसे नही है तो तेरी ये जवान पोती चाहिए हमे।।",.... उसके इतना कहते ही बाकी गुडे गंदी और भद्दी हसी हंसने लगे।।

वह बात सुनकर पास बैठी सोलह साल की वो मासूम लड़की बुरी तरह कांप उठी। डर के मारे उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं और उसने अपने दोनों हाथों से अपने दादा जी की बांह को कसकर पकड़ लिया। उसका पूरा बदन सुन्न पड़ गया था।।

बुजुर्ग ने रोते हुए कापते हाथो से गिड़गिड़ाए,....."साहब कुछ समय और दे दो.. हाथ जोड़ता हू मै.. मेरा बेटा बहु अभी कुछ दिन पहले चल बसे.. अब घर मे कमाने वाला कोई नही है। कसम से आपके एक-एक पाई लौटा दूगा.. प्लीज मेरी पोती को छोड़ दो।।"

लेकिन उन दरिंदों पर उस बुड्ढे के आंसुओं का कोई असर नहीं हुआ। गुंडे का मुखिया अपनी गंदी हंसी हँसते हुए आगे बढ़ा और बोला,..... "बहुत नाटक देख लिए तेरे! अब तो यह लड़की ही चुकाएगी तेरा कर्जा...।।"

उस लड़की डरकर कांपते हुए चलते हुए कहा,...." दादू..।।"

गुंडा अपनी गंदी नीयत से उस लड़की की तरफ बढ़ा और जैसे ही उसने उस डरी-सहमी लड़की को पकड़ने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया ही था कि...

"अगर उस लड़की को हाथ लगाया तो ज़मीन में गाड़ कर रख दूगी।।"

गली के बीचो-बीच गूंजी एक कड़क और खतरनाक रूप से सर्द आवाज़ ने माहौल में सन्नाटा खींच दिया।।

भीड़ चीरकर एक लड़की आगे आई , , उसकी पर्सनैलिटी किसी खूंखार शेरनी जैसी थी। उसने ब्लू जींस, एक स्टाइलिश क्रॉप टॉप और उसके ऊपर हाफ जैकेट पहन रखी थी , , जिससे उसका पेट साफ नजर आ रहा था। उसके चेहरे पर एक दुपट्टा कसकर बंधा हुआ था , , जिससे सिर्फ उसकी कातिलाना और गुस्से से अंगारे की तरह लाल आंखें दिखाई दे रही थी।।

गुंडे ने उसे ऊपर से नीचे घूरते हुए तेवर में पूछा,..... "तू कौन है बे, जो बीच में टांग अड़ा रही है तेरी औकात क्या है जो हमारे मामलो में दखल दे।।"

उस लड़की ने अपनी कड़क आवाज़ में जवाब दिया,..... "औकात की बात तो तू ऐसे कर रहा है जैसे कल ही तूने राजस्थान की गद्दी संभाल ली हो.. पर भूल मत औकात तुम्हारी उस कुत्ते जैसी है जो भोकता तो बहुत है पर औकात सिर्फ अपनी गली तक सीमित रहती है।।"

गुंडे का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा। उसने परी को ऊपर से नीचे तक घूरते हुए जहरीली मुस्कान के साथ कहा,.....

"वाह छोरी... जुबान तो बड़ी तेज है तेरी। लेकिन ये तेवर सिर्फ बातें करने तक अच्छे लगते हैं... असली दुनिया में इनका अंजाम भी होता है।।"

वहा खड़े आस-पास के लोग और दुकानदार डर के मारे सहम गए। किसी में भी आगे बढ़कर बोलने की हिम्मत नही थी सब बस चुपचाप तमाशा देख रहे थे।।

बुजुर्ग आदमी ने कांपते हुए हाथों से अपनी पोती को अपनी बाहों में और कसकर छिपा लिया। उनकी आँखों से बहते आंसुओं और डर के मारे कांपते शरीर को देखकर लग रहा था कि वे अंदर से पूरी तरह टूट चुके हैं।।

वही उनकी पोती अपनी आखें भींचकर सुबक रही थी, और उसके मन में बस एक ही प्रार्थना थी कि भगवान कैसे भी करके इस दीदी की रक्षा करे।।

वही उस लड़की से थोड़ी दूर एक लड़की ओर खड़ी तो जो पहली लड़की को बिना डरे हुए देख रही थी वह एकदम चिल मूड में मजे लेते हुए अपनी को सपोर्ट करते हुए बोली,..... "अरे यार ले ले जल्दी इनकी क्लास.. मुझे तो पॉपकॉर्न की कमी खल रही है बस।।"

उस लड़की ने अपनी साथी लड़की की तरफ देखा, शरारत भरी एक आख मारी और फिर अपनी गर्दन को हल्का सा झटका देकर उन सारे गुंडों को इस तरह घूरा कि सामने वाले के पसीने छूट जाए।।

गुंडे का मुखिया अपनी बेइज्जती बर्दाश्त नहीं कर पाया। उसने गुस्से में दाँत पीसते हुए आगे कदम बढ़ाया और चीखा,...... "तू जानती नहीं है तू किससे पंगा ले रही है इस इलाके का असली भाई हू मै... एक इशारे पर तेरी ये अकड़ जमीन मे मिला दूंगा।।"

उस लड़की ने अपनी जगह से एक इंच भी हिले बिना अपनी उन दहकती और गहरी लाल आखों से उस गुडे की तरफ देखा। उसके चेहरे पर कोई डर नही बल्कि एक खामोश और खतरनाक ठहराव था। उसने बेहद ठंडे और कड़क लहजे में कहा,......

"इलाके के भाई अपने घर की सीमाओं तक ही ठीक लगते है बाहर कदम रखने से पहले औकात का दायरा याद रखना चाहिए था। और जहा तक पंगे की बात है... तो मैं ज़ुबान से नही सीधे अंजाम से बात करती हू अगली बार आख उठाने से पहले सोच लेना कि जयपुर मे किस बला से पाला पड़ा था।।"

उस लड़की के इस बेखौफ और खूंखार जवाब को सुनकर वहा खड़े गुडे का सिर चकरा गया। उसके होश उड़ गए कि इतनी सी लड़की के सीने में इतना बड़ा कलेजा कहा से आया है।।

गुंडे का खून खौल उठा। उसने अपने पास खड़े दूसरे गुंडे को घूरते हुए इशारे से कहा,...... "देख क्या रहा है बे ले आ इसे जमीन पर, आज इसकी ये हेकड़ी हमेशा के लिए खत्म कर दूंगा।।"

एक गुंडा अपने हाथ में लोहे की चेन लपेटते हुए आगे बढ़ा , , उसके चेहरे पर एक गंदी और क्रूर हसी थी। वह अपनी ताकत के नशे में चूर होकर उस लड़की की तरफ लपका और अचानक से उस पर वार करने के लिए झपटा।।

लेकिन वो लड़की अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई। जैसे ही सुगन करीब आया, उस लड़की ने बिजली सी फुर्ती दिखाई। उसने गुंडे के हाथ को हवा में ही दबोच लिया और एक ही झटके में उसका हाथ ऐसा मरोड़ा कि उस भारी-भरकम गुंडे की चीख निकल गई।।

गुंडा दर्द से छटपटाने लगा,..... "आऽऽह... मेरा हाथ।।"

उस लड़की ने बिना एक सेकंड गंवाए अपना पैर हवा में उठाया और सीधे गुडे की छाती पर एक जोरदार लात जड़ दी। वह उड़ते हुए सीधे जाकर सड़क किनारे रखे लोहे के कबाड़ पर जा गिरा और बेसुध हो गया।।

यह सब इतनी जल्दी हुआ कि गली में खड़े लोग और बाकी गुंडे हक्के-बक्के रह गए , , किसी को समझ ही नहीं आया कि एक दुबली-पतली दिखने वाली लड़की ने इतने तगड़े गुंडे को पलक झपकते कैसे धूल चटा दी।।

तभी दूसरी लड़की ने ताली बजाई और मजे लेते हुए जोर से चिल्लाई,...... "ओए होए क्या किक मारी है मेरी शेरनी मान गए भाई।।"

बाकी बचे गुडों के चेहरों का रंग उड़ गया। सामने खड़ी लड़की ने अकेले ही उनके साथी को धूल चटा दी थी। अपनी बेइज्जती का बदला लेने के लिए वे गुस्से मे गालियां बकते हुए एक साथ उस लड़की पर टूट पड़े।।

लड़की ने बिना घबराए बिजली जैसी फुर्ती दिखाई और एक-एक करके उन्हे पीछे धकेलने लगी , , किसी को घूंसा पड़ा तो कोई लात खाकर जमीन पर जा गिरा। गली में धूल उड़ने लगी और गुंडों की चीख-पुकार गूंज उठी।।

तभी ठीक उसी वक्त... उस तग गली के मुहाने पर एक भारी-भरकम और बेहद शानदार लग्जरी गाड़ी आकर रुकी।।

गाड़ी के अंदर दो शख्स बैठे थे , , ड्राइविंग सीट पर बैठे लड़के की पर्सनैलिटी एकदम चुस्त, स्टाइलिश और जिंदादिल थी , , उम्र करीब उनतीस - तीस साल, चेहरे पर एक कूल और एनर्जेटिक वाइब, और उसने महंगे ब्रांड की डेनिम जैकेट पहन रखी थी , , उसके बाल करीने से सेट थे और आखो में एक अलग ही बेताबी झलक रही थी।।

उसने बराबर मे बैठे दूसरे लड़के की तरफ देखा , , जो अपनी गोद मे रखे लैपटॉप की स्क्रीन पर पूरी तरह डूबा हुआ था और उसकी उंगलियां कीबोर्ड पर बेहद तेजी से चल रही थी , , उसने अपने साथी को इस तरह काम में बिजी देखकर नजरे हटाई और बाहर सड़क पर जुटी भारी भीड़ और लोगों का शोरगुल देखा।।

माजरा समझने के लिए उसने तुरत गाड़ी का दरवाज़ा खोला और बाहर निकल आया।।

उधर वह लड़की अब भी पूरी तरह बेखौफ थी , , एक गुंडा जैसे ही उस पर झपटा, उसने फुर्ती से उसका वार बचाया और अगले ही पल उसे जमीन पर पटक दिया , , बाकी गुंडो की हालत देखकर उसके चेहरे पर हल्की-सी तिरछी मुस्कान उभरी , , जैसे अब उन्हें देखकर उसे बिल्कुल मजा आने लगा हो।।

तभ उसी गहमागहमी के बीच... गाड़ी के बाहर खड़े उस जिंदादिल लड़के (ड्राइविंग सीट वाले) ने जब अपनी आखें फाड़कर यह खूनी और धमाकेदार नजारा देखा , , , तो उसका मुह खुला का खुला रह गया , , वह हक्का-बक्का होकर कभी परी को देखता और कभी अपनी गाड़ी के अंदर बैठे उस खामोश दोस्त को।।

उससे नही रहा गया , ,वह हड़बड़ाते हुए वापस गाड़ी की तरफ दौड़ा, तेजी से दरवाजा खींचकर अंदर झाका और अपने दोस्त के कधे को जोर से हिलाते हुए लगभग चीखा,.....

"भाई भगवान कसम ऐसी शेरनी तूने अपनी पूरी जिंदगी में नही देखी होगी.. वो अकेले पाच-छह आदमियो को ऐसे कूट रही है जैसे चक्की में आटा पिसता है बाहर आ वरना जीवन का सबसे बड़ा तमाशा मिस कर देगा।।"

लेकिन अंदर बैठा वो दूसरा शख्स.. अपनी जगह से एक इंच भी नही हिलता , , उसके चेहरे पर उस शोर-शराबे या तमाशे का कोई असर नही था , , वह अभी भी अपनी गोद में रखे प्रीमियम स्लीक लैपटॉप की स्क्रीन पर टिका हुआ था , , और उसकी लंबी, साफ़-सुथरी उंगलियां बिना किसी रुकावट के कीबोर्ड पर टाइप कर रही थी , , उसकी गहरी, संजीदा आखें कोडिंग या किसी बड़े बिजनेस डेटा के आंकड़ो मे उलझी थी।।

ड्राइविंग सीट वाले लड़के ने उसे इस तरह पत्थर की मूरत बने काम मे डूबे देखा तो वह गुस्से मे अपना सिर पीटते हुए झल्लाया,......

"ओ भाई ये लैपटॉप छोड़ भी दे अब बाहर ऐसा नजारा चल रहा है जो तूने जिंदगी में शायद ही कभी देखा होगा। एक लड़की अकेले कितनों की हड्डियां तोड़ चुकी है , , चल जल्दी.. वरना जिंदगी का सबसे शानदार लाइव शो मिस कर देगा।।”

आखिरकार उस लगातार पड़ रहे शोर और सिरदर्द से बचने के लिए अदर बैठे उस दूसरे शख्स ने अपनी ठंडी, सख्त और बेहद उबाऊ नज़रो से अपने उस बातूनी लड़के को ऊपर से नीचे घूरा। उसकी आखो मे एक अजीब सी झुंझलाहट तैर रही थी।।

उसने एक लंबी और भारी सांस छोड़ी अपनी स्क्रीन पर खुला हुआ जरूरी सॉफ्टवेयर बंद किया और क्लोजर पर क्लिक करके लैपटॉप को एक झटके में बद कर दिया। इसके बाद उसने गाड़ी के अंदर ही अपने कोट के कफ्स को थोड़ा सा ठीक किया और भारी कदमो से गाड़ी का दरवाज़ा खोलकर बाहर निकला।।

जमीन पर कदम रखते ही उसकी पूरी शख्सियत हवा में छा गई।।

बाहर आते ही दोनों की पर्सनैलिटी का फर्क साफ नजर आ रहा था , , ड्राइविंग सीट से उतरा लड़का जहा जोश में भरा हुआ और हर बात पर थोड़ा हड़बड़ाने वाला था , , वही उसके पीछे से उतरा करीब तीस साल का वह शख्स बिल्कुल शांत और ठहरा हुआ था।।

उसकी लंबी, कड़क कद-काठी और चौड़े कंधे पहली नजर मे ही उसके रुतबे का एहसास करा रहे थे , , गोरा रंग, तीखे नैन-नक्श और चेहरे पर छाया सर्द बेपरवाही का भाव उसे और भी खतरनाक बना रहा था , , उसकी हल्की हरी आखे जो सामने वाले को कुछ पल के लिए ठहर जाने पर मजबूर कर दे।।

उसने अंदर एक क्लासी ब्लैक शर्ट और उसके ऊपर प्रीमियम वाइन कलर का ऐसा रॉयल कोट पहन रखा था जो उसकी चौड़ी छाती और रोबदार शरीर पर बिल्कुल फिट बैठ रहा था।।

वह अपनी जगह पर खड़ा रहने के बजाय, आगे बढ़कर भीड़ को चीरते हुए थोड़ा और करीब आ गया , , वह बिल्कुल शांत और ठंडे अंदाज़ में उस लड़की की तरफ देखने लगा , , जो अभी भी गुस्से से लाल होकर बाकी गुडों को धूल चटा रही थी।।

उधर बीच सड़क पर गुडो से लड़ते-लड़ते अचानक पीछे से एक गुडे ने चालाकी दिखाते हुए लड़की को जोर से धक्का दिया।।

धक्का इतना जोरदार था कि उस लड़की का शरीर असंतुलित हो गया और वह संभलने का मौका पाए बिना सीधे आगे की तरफ लड़खड़ाते हुए पास ही खड़े उस शख्स की मजबूत और चौड़ी छाती से जा टकराई।।

लड़की ने झटके से अपना सिर उठाया और गुस्से से लाल आखो से सामने देखा। शोर-शराबे के बीच पहली बार उसकी नजरे उस अजनबी की हरी आखों से टकराई।।

बस एक पल लेकिन उस एक पल मे जैसे दोनो के बीच कुछ अनकहा ठहर गया।।

कुशाग्र की नजरे अनायास ही उसकी उन दहकती लाल आखो पर टिक गई , , न जाने क्यों, इतनी भीड़ और इतने शोर के बीच भी उसका ध्यान सिर्फ उसी लड़की पर अटक गया था।।

लेकिन अगले ही सेकंड उस लड़की का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुच गया , , वह बिजली की तेजी से पीछे मुड़ी अपनी उन अगारे जैसी लाल आखो से उस गुडे को घूरा और गुस्से से खौलते हुए दात पीसकर बोली,....

"Bloody coward.. सामने से भिड़ने की हिम्मत नही है तो पीछे से धक्का मारकर अपनी मर्दानगी दिखा रहे हो What a **** loser."

उस लड़की की उस कड़क और आग उगलती आवाज़ ने वहा खड़े हर शख्स को सन्न कर दिया , , उस मनचले गुंडे की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई , , क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि यह लड़की इतनी बेबाकी से उसकी घटिया हरकत की धज्जिया उड़ा देगी।।

उधर भीड़ से थोड़ा हटकर खड़ा वह शख्स अभी भी उसी जगह पर पूरी तरह स्तब्ध खड़ा था , , उसके दिमाग मे अभी भी वही एक पल घूम रहा था जब वह लड़की लड़खड़ाकर सीधे उसके सीने से आ लगी थी और उनकी नज़रे आपस मे उलझी थी , , , उसके भीतर दिल की धड़कनो का जो शोर उठा था , , वह अभी थमा नही था। उस सर्द और बेपरवाह रहने वाले इंसान के भीतर पहली बार किसी ने ऐसी खामोश हलचल पैदा कर दी थी वह बिना पलक झपकाए बस एकटक उस शेरनी को देख रहा था , , जिसके गुस्से में भी एक अजीब सा नशा था।।

तभी उसके पास खड़ा उसका दोस्त आखे फाड़े, मुह खुला का खुला छोड़े कभी उस लड़की को देखता और कभी अपने पास खड़े अपने दोस्त को। उससे रहा नहीं गया, तो उसने कोहनी से दूसरे लड़के को जोर से धक्का देते हुए फुसफुसाकर कहा,....

"भाई... कसम से ये लड़की है या चलती-फिरती आंधी जिस तेवर से इसने उस गुंडे की क्लास ली है ना.. भाई सच मे इसके आगे अच्छे-अच्छो के पसीने छूट जाए।।"

उस सख्श ने उसकी इस बात का कोई जवाब नही दिया। उसकी ठंडी हरी आखें अभी भी सिर्फ और सिर्फ उस लड़की के उन कातिलाना और गुस्से से अंगारे बन चुकी आखों पर टिकी थी।।

उधर मारपीट के इस शोर मे लड़की को भयंकर गर्मी लगने लगी। उसने बिना एक पल गंवाए अपनी वो हाफ जैकेट उतारी और पास खड़ी लड़की के ऊपर उछालते हुए बोली,..... "पकड़ इसे।।"

इसके बाद उसने मैदान में अपना एक पैर पीछे किया, हल्का सा आगे की तरफ झुकी, और अपने हाथों की उंगलियों से उन बाकी बचे हुए गुंडों को ललकारते हुए आगे आने का इशारा किया— 'आओ सामने!'

वही जैकेट उतरते ही... उस लड़की के गोरे और खुले कंधे पर उस शान्त लड़के की नजरे अचानक जा टिकी , , वहा चमकता हुआ एक छोटा सा लाल तिल साफ नजर आ रहा था , , उस तिल को देखते ही उस सख्श की पलकें एक सेकंड के लिए ठहर सी गई।।

लेकिन लड़की को इस बात की कोई परवाह नही थी। उसने बिना वक्त गंवाए अपना सिर झटके से झटका, और बचे-कुचे गुडों को सबक सिखाने के लिए वापस उन पर टूट पड़ी।।

गुडे डरते हुए भी आखिरी बार एक साथ लड़की पर टूट पड़े , , लड़की उन्हे सभाल ही रही थी कि तभी पीछे से एक गुडे ने मौका देखकर उसके सिर पर भारी डंडे से वार करने के लिए हाथ उठा दिया।।

दूसरी लड़की घबराकर जोर से चिल्लाई,..... "परी पीछे।।"

लेकिन उससे पहले कि डंडा उस लड़की मतलब परी को लगता किसी मजबूत और फौलादी हाथ ने हवा में ही उस डंडे को कसकर पकड़ लिया।।

परी ने झटके से पीछे मुड़कर देखा।

वहा वो शख्स बेहद गुस्से मे खड़ा था , , उसकी आखों में शोले भड़क रहे थे , , उसने उस गुडे को एक जोरदार घूसा जड़ते हुए कड़क और सख्त आवाज़ में,....

"शर्म नही आती.. एक लड़की से मार खा रहे हो और ऊपर से पीछे से वार करते हो.. नामर्द कही के।।”

परी ने चौककर उसकी तरफ देखा। उसकी आखों के सामने एक पल के लिए जैसे कोई धुंधला सा पर्दा हटा हो लेकिन उसने तुरंत अपना सिर झटके से झटका और खुद को सभालते हुए फिर से बाकी गुडों को सबक सिखाने में लग गई।।

देखते ही देखते परी के उन खौफनाक तेवरों और उस लड़के के गुस्से के आगे गुंडे बुरी तरह घबरा गए और अपनी जान बचाकर वहां से भाग खड़े हुए।।

गली में धीरे-धीरे सन्नाटा छाने लगा। परी ने अपनी उंगलियो के पोर चटकाए एक गहरी सांस ली और अपने बिखरे बालों को ठीक करते हुए पास खड़ी दूसरी लड़की की तरफ देखते हुए कहा,....

"ताशवी मेरा बैग दे।।"

ताशवी ने तुरंत उसका बैग आगे बढ़ाया। उस लड़की ने बैग से कुछेक नोट निकाले और उस डरी हुई सोलह साल की लड़की के हाथ में थमाते हुए, प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा और बोली,......

"डरो मत... और कभी खुद को कमजोर मत समझना। जिंदगी में ऐसे लोग मिलेंगे लेकिन तुम्हें डरकर उनके सामने झुकना नही है बल्कि इन जैसों की आँखें निकाल लेना।।"

वह बुजुर्ग दादाजी कांपते और लड़खड़ाते कदमों से आगे आए। उनकी आँखों में आंसू थे और हाथ जुड़े हुए थे। उन्होंने गदगद गले और भारी आवाज में हाथ जोड़कर कहा,.....

"बेटी... भगवान तुम्हें सदा लंबी उम्र दे। आज तुमने इस बच्ची और इस लाचार बूढ़े की इज्जत बचा ली, वरना हम तो दुनिया के सामने मुंह दिखाने लायक भी नहीं रहते। तुम्हारा यह एहसान यह बूढ़ा कभी नही भूलेगा।।"

पास ही खड़ी उस बुजुर्ग की पोती भी सुबकते हुए आगे बढ़ी और उसने भी हाथ जोड़कर भीगी हुई आँखों से परी का शुक्रिया अदा किया।।

वहा कुछ ही दूरी पर खड़े वे दोनों लड़के अपनी जगह पर पत्थर बने सब देख रहे थे। उस शान्त लड़के की गहरी और शांत नज़रें लगातार बस परी के हर एक अंदाज़ को देख रही थी उसकी आखों में एक अजीब सा ठहराव था।।

तभी पीछे से ताशवी की हड़बड़ाई हुई तेज़ आवाज़ गूंजी,..... "अरे परी अब चल जल्दी.. वरना घर जाकर मम्मी के हाथ के जोरदार डंडे पड़ेंगे.. वैसे ही बहुत देर हो चुकी है।।"

दोनो लड़कों ने चौक कर उस आवाज़ की तरफ देखा।।

ताशवी वहा खड़ी थी उसका लुक एकदम कूल और ट्रेंडी था , , उसने एक ओवरसाइज़्ड ग्राफिक टी-शर्ट और रिप्ड जींस पहन रखी थी , , , , गले में एक स्टाइलिश सिल्वर चेन थी और चेहरे पर हल्की सी चिंता और बेताबी का मिला-जुला भाव था।।

ताशवी की बात सुनते ही परी के माथे पर हाथ लग गया और वह झेपते हुए बोली,.... "ओय शिट मै तो भूल ही गई थी।।"

उसने तुरंत मुड़कर उस डरी हुई छोटी बच्ची के सिर पर दुलार से हाथ फेरा और जाते-जाते एक बार उस शांत खड़े लड़के को ऊपर से नीचे देखा , , वो लड़का भी पलके झपकाए बिना एकटक बस उसी को देखे जा रहा था। परी बिना एक पल गंवाए वहा से उल्टे पाव भागी।।

वह सीधे गली के कोने में खड़ी एक भारी-भरकम ब्लैक बुलेट के पास गई , , किक मारकर उसे स्टार्ट किया और बुलेट दहाड़ उठी। ताशवी दौड़कर पीछे बैठी, और एक कान फाड़ती दहाड़ और टायर के धुएं के साथ परी अपनी बुलेट को हवा की रफ्तार से भगा ले गई।।

दोनो लड़के एकटक उस धूल उड़ते रास्ते को देखते रह गए जहा से अभी वो आंधी गुजरी थी।।

कुछ पल की खामोशी के बाद उस शान्त दिखने वाले लड़के ने अपनी नजरें उस रास्ते से हटाईं और पास खड़े बुजुर्ग परिवार की तरफ देखा। उसने अपनी ठंडी और सख्त आवाज़ में विहान से कहा,......

"विहान, जाओ और उस परिवार की मदद करो। यह सुनिश्चित करो कि वो घटिया गुंडे दोबारा कभी इस शहर में नज़र न आएं, और इन्हें जिस भी चीज की जरूरत हो, फौरन मुहैया कराई जाए।।"

विहान ने अपने दोस्त के चेहरे के बदलते तेवर और उसकी आँखों की उस अजीब सी चमक को भांपते हुए एक हल्की सी मुस्कान दी और सिर हिलाते हुए बोला,...... "Don't worry कुशाग्र... मै अभी सब सभालता हू।।"

विहान ने तुरत उस बुजुर्ग परिवार की सारी जरूरतें और सुरक्षा का जिम्मा संभाला। अपनी जेब से मोटी रकम निकालकर सीधे उस बुजुर्ग के कांपते हाथों में थमाई, ताकि उन्हें आगे कभी पैसों की तंगी या इन गुंडों का डर न सताए।।

सब कुछ व्यवस्थित करने के बाद वह तेजी से कदम बढ़ाता हुआ वापस अपनी लग्जरी गाड़ी की तरफ लौटा और ड्राइविंग सीट पर आकर बैठ गया।।

कुशाग्र पहले ही आकर अपनी सीट पर बैठ चुका था। उसके चेहरे पर वही पुरानी, गंभीर और सर्द परतें थीं, लेकिन उसकी आखो में अब भी उस बुलेट की दहाड़ और उस लड़की के तेवर की एक हल्की सी चिंगारी सुलग रही थी।।

विहान ने गाड़ी का दरवाजा बंद किया , , इंजन स्टार्ट किया और स्टेयरिंग घुमाते हुए गाड़ी को मुख्य सड़क की तरफ मोड़ा , , जैसे ही गाड़ी ने रफ्तार पकड़ी, विहान से रहा नहीं गया। वह स्टेयरिंग पर हाथ थपथपाते हुए जोश में भर गया,....

"भाई... कसम से, आज दिन बन गया। जयपुर की गलियों में ऐसी आंधी मैंने आज तक नहीं देखी थी। वो लड़की... मतलब क्या तेवर थे उसके... और जिस तरह उसने अपनी बुलेट भगाई है ना कसम से अच्छे-अच्छे रेसर पानी भर ले.. और उसका नाम क्या बोला था दूसरी लड़की ने... 'परी’... नाम से तो बिल्कुल भी परी जैसी मासूम नहीं है कसम से पूरी की पूरी खूंखार और खतरनाक बला है।।"

विहान लगातार हसते हुए उस लड़की की बातें किए जा रहा था , , लेकिन कुशाग्र ने उसकी तरफ देखा तक नहीं। उसकी ठंडी, गहरी हरी आखें खामोशी से सामने की विंडशील्ड पर जमी थी , , उसके कानों में अभी भी वो गूजती हुई आवाज और आखों के सामने उस लड़की की वो लाल आखे थी।।

विहान ने जब देखा कि उसका पक्का यार हमेशा की तरह उसकी किसी बात पर रिएक्ट नहीं कर रहा , , तो उसने गाड़ी थोड़ी धीमी करते हुए तिरछी नजरों से कुशाग्र को देखा। उसने अपना कंधा हिलाते हुए छेड़ते हुए कहा,.....

"ओए मिस्टर गंभीर बहरे हो गए हो क्या.. कब से बोल रहा हू... कुछ तो बोलो कही ऐसा तो नही कि उस शेरनी ने तेरी भी बोलती बद कर दी है जिस तरह तू आखें फाड़कर उसे जाते हुए देख रहा था भाई.. मैने आज तक तुझे किसी लड़की के लिए ऐसे पिघलते नही देखा।।"

कुशाग्र ने अपनी पलके झपकाई.. उसके माथे पर एक हल्की सी बल खाई और उसने अपनी ठडी और सख्त नज़रे घुमाकर विहान को ऊपर से नीचे घूरा , , उसकी उन हरी आखो मे सुलगती हुई झुझलाहट साफ दिखाई दे रही थी उसने अपने बेहद भारी, कड़क और चेतावनी भरे लहजे मे कहा,......

"विहान.. गाड़ी चलाओ और मुह बंद रखो अपना वरना सच मे जबान सिल दूंगा तुम्हारी।।”

विहान कुशाग्र की इस खतरनाक टोन को अच्छे से जानता था , , उसे अच्छे से अंदाजा हो गया था कि इस वक्त कुशाग्र का मूड किसी भी जोक के मूड मे नही है। उसके तेवर देखकर विहान की हवा टाइट हो गई।।

वह तुरंत हड़बड़ाते हुए लगभग सफाई देते हुए डरते-डरते बोला,.....

"अरे-अरे... भाई-भाई... सॉरी मै तो बस मज़ाक कर रहा था.. इतना सीरियस क्यो हो रहा है मैने तो बस इतना कहा कि लड़की कमाल की थी।।”

विहान ने तुरंत अपनी नजरें वापस सामने सड़क पर टिका दीं और चुपचाप गाड़ी चलाने लगा।।

कार के अंदर एक बार फिर गहरी खामोशी छा गई, लेकिन कुशाग्र के भीतर उठा वह बवंडर अब भी शांत होने का नाम नहीं ले रहा था।।

आज के लिए इतना ही…..

तो दोस्तो ये था इश्क़ तेरा हम पे तारी का पहला चैप्टर।।❤️

परी और कुशाग्र की पहली मुलाकात तो हो गई… लेकिन क्या ये महज़ एक इत्तेफ़ाक था… , , या फिर मुकद्दर ने दोनों के लिए कुछ और ही लिख रखा है।।

अभी तो कहानी शुरू हुई है… आगे का सफ़र यकीनन और भी दिलचस्प होने वाला है , , बताइएगा ज़रूर परी और कुशाग्र की पहली मुलाकात आपको कैसी लगी।।

और हाँ दोस्तों… इस कहानी का अगला पार्ट तभी आएगा जब इस पार्ट पर आपके अच्छे-अच्छे कमेंट्स आएँगे…. आपके कमेंट्स का इंतज़ार रहेगा।।🤌

मिलते है अगले पार्ट मे… तब तक के लिए इजाज़त।। ❤️

जारी है…..

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