crowns of shadows Ch. 3

crowns of shadows - Chapter 3

Posted by Ishra Aalam • Aug 30, 2026 09:03 PM

अब आगे ---

मीरा सावंत उस सुनसान सड़क के किनारे अकेली खड़ी रह गई। ठंडी हवा उसके बालों को उड़ा रही थी। उसकी पच्चीस साल की पूरी जिंदगी में यह पहली बार हुआ था

कि किसी अनजान इंसान ने अपनी जान पर खेलकर उसकी जान बचाई थी, और फिर बिना अपना नाम बताए, बिना कोई एहसान जताए, एक किसी हॉलीवुड फिल्म के हीरो की तरह चलते ट्रक पर कूदकर हवा में गायब हो गया था।

मीरा को अपनी लाइफ में कंट्रोल पसंद था। उसे हर चीज़ का हिसाब चाहिए होता था। लेकिन यह पूरी घटना उसके कंट्रोल से बाहर थी, और उसे यह बिल्कुल पसंद नहीं आया। और सबसे ज्यादा चिढ़ उसे इस बात से हो रही थी

कि उसका दिमाग बार-बार उस मास्क वाले अजनबी की शरारती आंखों और उसकी आवाज़ के बारे में सोच रहा था।

लगभग आधे घंटे बाद... पुलिस की गाड़ियो के सायरन का शोर अब पूरी तरह से शांत हो चुका था। सुनसान हाईवे का वह टुकड़ा अब एक क्राइम सीन में बदल चुका था, जहां चारों तरफ पीले रंग की पुलिस टेप लगी हुई थी।

हमलावर गुंडा, जिसकी कलाई मोक्ष ने मरोड़ दी थी, वह ज़मीन पर पड़ा कराह रहा था और दो हथियारबंद पुलिसकर्मियों ने उसे घेर रखा था। फॉरेंसिक टीम और कुछ पुलिस अधिकारी उस काली लक्जरी कार, टूटे हुए शीशों और सड़क पर पड़े निशानों की बारीक जांच कर रहे थे।

मीरा सावंत सड़क के किनारे बनी एक कंक्रीट की बेंच पर बैठी हुई थी। उसकी टूटी हुई हील उसके पैरों के पास पड़ी थी। उसके दूसरे पैर में अभी भी जूता था, जबकि उसका घायल टखना अब काफी सूज चुका था और लाल पड़ गया था।

इसके बावजूद, मीरा के चेहरे पर बेबसी या दर्द का एक भी भाव नहीं था। वह वहां किसी रानी की तरह सीधी बैठी थी उसका चेहरा सख्त, आंखें शांत और विचार गहरे थे।

उसके ठीक सामने शहर का वरिष्ठ पुलिस इंस्पेक्टर खड़ा था, जो अपने हाथ में पकड़ी एक छोटी डायरी में पेन से कुछ नोट करते हुए लगातार उससे सवाल पूछ रहा था।

“मिस सावंत, आप बिल्कुल निश्चिंत रहिए। हमने इस हमलावर को कस्टडी में ले लिया है। हमारी टीम इसे तुरंत अस्पताल ले जाकर इसकी कलाई का इलाज कराएगी और फिर लॉकअप में डालकर इससे कड़ाई से पूछताछ करेगी। बहुत जल्द पता चल जाएगा कि इस पूरी साजिश के पीछे किस मास्टरमाइंड का हाथ था और उसने किसे सुपारी दी थी।”

मीरा ने उस इंस्पेक्टर की बात सुनकर कोई खास उत्साह नहीं दिखाया, बस अपनी गर्दन को हल्का सा एक बार हिला दिया।

इंस्पेक्टर ने अपनी पेन की कैप को बंद करते हुए आगे पूछा,

“क्या आपने इस हमलावर को या इस गाड़ी के फर्जी ड्राइवर को पहले कभी अपने ऑफिस, घर या आसपास कहीं देखा था?”

मीरा ने सपाट आवाज़ में जवाब दिया।

“नहीं। कभी नहीं।”

ऑफिसर ने फिर से सवाल किया।

“कोई खास रंजिश? कोई ऐसा इंसान जिस पर आपको शक हो कि वह आपकी जान का दुश्मन बन सकता है?”

मीरा ने सर हिला दिया जवाब दिया।

“नहीं।”

ऑफिसर ने फिर कहा,

“क्या पिछले कुछ दिनों में आपका बिजनेस में या पर्सनल लाइफ में किसी के साथ कोई बड़ा विवाद या झगड़ा हुआ था?”

मीरा ने कुछ पल के लिए अपनी नीली आंखें बंद कर लीं। उसके दिमाग के परदे पर एक साथ कई चेहरे तेज़ी से घूमने लगे।

F&D ग्रुप के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में बैठे उसके कुछ कट्टर विरोधी... वो राइवल कॉर्पोरेट कंपनियां जो इस नए प्रोजेक्ट की वजह से अरबों के नुकसान में जा रही थीं... और इन सबसे बढ़कर... उसके अपने सावंत पैलेस में रहने वाले रिश्तेदार।

उसकी नफरत करने वाली सौतेली मां, उसकी जलन से भरी चाची, और वो ताऊ-ताई जिन्हें परदादा जी ने जायदाद से बेदखल कर दिया था।

उस विशाल हवेली का हर एक कोना दुश्मनों से भरा पड़ा था।

लेकिन मीरा सावंत अपने घर के गंदे कपड़ों को पुलिस के सामने धोना पसंद नहीं करती थी। उसने अपनी आंखें खोलीं और बिल्कुल शांत आवाज़ में कहा,

“बिजनेस में दुश्मन बहुत होते हैं इंस्पेक्टर, लेकिन किसी एक का नाम लेना अभी जल्दबाजी होगी।”

इंस्पेक्टर ने उसकी बात को समझा और अपनी नोटबुक जेब में डालते हुए कहा,

“ठीक है मिस सावंत। हम अपने स्तर पर हर एंगल से जांच करेंगे।”

तभी वहां खड़ी उसकी सेक्रेटरी रागिनी, जो मीरा का इमरजेंसी मैसेज मिलते ही पुलिस के साथ मौके पर पहुंची थी, बेहद परेशान और चिंतित हालत में आगे आई।

रागिनी के चेहरे पर अपनी बॉस की ऐसी हालत देखकर साफ तौर पर डर और गुस्सा दिखाई दे रहा था।

“इंस्पेक्टर साहब, आपको इस मामले में सिर्फ खानापूर्ति नहीं करनी चाहिए, बल्कि बेहद सख्त कदम उठाने चाहिए!”

रागिनी ने थोड़े कड़े लहजे में कहा,

“यह मीरा मैम पर हुआ कोई पहला हमला नहीं है!”

वरिष्ठ इंस्पेक्टर ने चौंककर रागिनी की तरफ देखा।

“क्या कहा आपने? पहला हमला नहीं है? क्या इससे पहले भी ऐसा कुछ हो चुका है?”

रागिनी ने गुस्से में कहा,

“जी हां! अभी तीन दिन पहले ही F&D ग्रुप के हेड ऑफिस की अंडरग्राउंड पार्किंग में किसी ने मैम की लिफ्ट के केबल को जानबूझकर डैमेज करने की कोशिश की थी। गनीमत यह रही कि टेक्नीशियन की नज़र सही समय पर पड़ गई और बड़ा हादसा टल गया। हमने उसी दिन से सिक्योरिटी बढ़ा दी थी, लेकिन आज देखिए... इन अपराधियों की हिम्मत इतनी बढ़ गई कि उन्होंने हमारे पर्सनल ड्राइवर जगन्नाथ को रास्ते में ही बेहोश करके गाड़ी में खुद बैठ गए और मैम को किडनैप करने की कोशिश की!”

मीरा का नया यंग पर्सनल असिस्टेंट अमन भी वहीं पास में खड़ा था। हालांकि उसकी उम्र कम थी और वह हमेशा मज़ाकिया मूड में रहता था, लेकिन इस वक्त मीरा की बिखरी हालत देखकर उसका चेहरा पूरी तरह संजीदा हो चुका था।

अमन ने आगे बढ़कर कहा,

“और इंस्पेक्टर सर, अगर मैम ने अपनी सूझबूझ से उस ड्राइवर पर हमला न किया होता और वह उन्हें उस सुनसान जगह पर ले जाने में कामयाब हो जाता तो... तो क्या होता आप सोच भी सकते हैं?”

अमन का गला डर के मारे रुक गया, वह अपना वाक्य पूरा नहीं कर पाया। रागिनी ने अमन की तरफ देखा और धीमी आवाज़ में कहा,

“अमन, खुद पर कंट्रोल रखो।”

इंस्पेक्टर ने मामले की गंभीरता को समझते हुए सिर हिलाया और बेहद संजीदगी से कहा,

“मामला वाकई बहुत ज्यादा गंभीर है। सावंत फैमिली और F&D ग्रुप की चेयरवूमन पर इस तरह के बार-बार हमले होना शहर की कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है। मिस सावंत, मेरी आपको सख्त सलाह है कि जब तक हमारी जांच पूरी नहीं हो जाती, आप अकेली कही अकेली कहीं भी आना-जाना पूरी तरह बंद कर दें और अपनी पर्सनल सिक्योरिटी को तुरंत चार गुना बढ़ा लें।”

मीरा ने अपनी जगह से उठने की कोशिश करते हुए इंस्पेक्टर की आंखों में सीधे देखा। उसकी आवाज़ में वही पुरानी ना झुकने वाली ज़िद थी,

“सलाह के लिए शुक्रिया इंस्पेक्टर, लेकिन मैं अपने काम या अपनी लाइफ को किसी अज्ञात खतरे के डर से रोकना या बंद करना नहीं सीख पाई हूं। F&D ग्रुप का काम कल भी चलेगा और मैं ऑफिस भी जाऊंगी।”

इंस्पेक्टर ने उसे समझाने के लिए मुंह खोला ही था कि रागिनी ने एक हल्की सी उदास सांस छोड़ते हुए धीरे से कहा,

“रहने दीजिए इंस्पेक्टर साहब... इन्हें समझाना दुनिया का सबसे मुश्किल काम है। यह अपनी बात के आगे किसी की नहीं सुनतीं।”

अमन ने अपने कोट को ठीक करते हुए पूछा,

“तो सर, क्या अब हम मैम को घर ले जा सकते हैं?”

ऑफिसर ने सर हिला कर कहा,

“जी हां, बिल्कुल। हमारी दो पुलिस गाड़ियां आपकी कार को सावंत पैलेस तक एस्कॉर्ट करेंगी। लेकिन प्लीज, आप लोग सावधान रहिएगा।”

मीरा अपने एक पैर के बल खड़ी हो गई। उसके टखने में तीखा मीठा दर्द उठ रहा था जो उसकी पूरी टांग में फैल रहा था, लेकिन उसने किसी का भी हाथ थामने या सहारा लेने से साफ इंकार कर दिया।

वह बहुत ही संतुलित और स्थिर कदमों से अपनी दूसरी कार की तरफ बढ़ने लगी। चलते-चलते, मीरा के कदम अचानक एक पल के लिए थमे। उसने अनजाने में ही अपनी गर्दन घुमाकर पीछे उस अंधेरी ढलान की तरफ देखा, जहां से वह अजनबी छलांग लगाकर गायब हुआ था।

वहां अब सिर्फ बिखरी हुई पुलिस की गाड़ियां और झाड़ियां थीं। वह अजनबी वहां नहीं था।

मीरा ने तुरंत अपनी नज़रें फेर लीं और कार के अंदर जाकर बैठ गई। लेकिन उसके बंद दिमाग के कमरों में वही सवाल किसी हथौड़े की तरह बार-बार बज रहे थे वह कौन था? उसने पुलिस के आने से पहले खुद को क्यों छिपाया?

उसमें इतनी गज़ब की फाइटिंग स्किल्स कहां से आईं? और सबसे बड़ा सवाल उसने अपनी जान जोखिम में डालकर एक अनजान लड़की की रक्षा क्यों की?

रात का आखिरी पहर शुरू हो चुका था और घड़ी में डेढ़ बज रहे थे।

सड़क पर सन्नाटा गहरा चुका था। रागिनी खुद मीरा की लक्जरी मर्सिडीज को चला रही थी, जबकि अमन आगे की पैसेंजर सीट पर बैठा हुआ था। मीरा कार की पिछली सीट पर अकेली बैठी हुई थी।

कार की काली खिड़की का शीशा आधा नीचे उतरा हुआ था। रात की ठंडी, नम हवा मीरा के चेहरे से टकरा रही थी और उसके गालों पर बिखरी काली लटों को बार-बार पीछे उड़ा रही थी।

मीरा ने अपने सिर को सीट के पीछे टिका रखा था और अपनी आंखें पूरी तरह बंद कर रखी थीं।

वह शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत थकी हुई थी। उसकी पीठ, घुटने और टखना दर्द से कराह रहे थे। लेकिन नींद उसकी नीली आंखों से मीलों दूर थी।

जब भी वह अपनी पलकें मूंदती, उसकी बंद आंखों के सामने वही भयानक दृश्य किसी फिल्म के सीन की तरह चलने लगता। वह गाड़ी का अचानक रुकना... वह हमलावर की खौफनाक मुस्कान... उसकी कलाई में चमकता हुआ वह धारदार चाकू... और फिर... अचानक अंधेरे से निकलकर आता वो लंबा, बेफिक्र अजनबी।

रागिनी ने कार के रियर-व्यू मिरर में अपनी बॉस के थके हुए चेहरे को देखा। कुछ देर के भारी सन्नाटे के बाद, रागिनी ने बहुत ही धीरे से कहा,

“मैम...”

मीरा ने अपनी आंखें खोले बिना ही एक ठंडी सी सांस भरी,

“हम्म?”

रागिनी ने बैक व्यूह मिरर से मीरा को देखते हुए कहा,

“मैम... मुझे लगता है कि अब वक्त आ गया है जब आपको अपने साथ 24 घंटे रहने वाला एक पर्सनल एलीट बॉडीगार्ड रख लेना चाहिए। कोई ऐसा जो हर पल आपके साथ रहे।”

मीरा ने अपनी पलकें बहुत धीरे से खोलीं और खिड़की से बाहर गुज़रते हुए स्ट्रीट लाइट्स के खंभों को देखते हुए कहा,

“तुम्हें अच्छी तरह पता है रागिनी कि मुझे अपने आसपास बॉडीगार्ड्स का घेरा बिल्कुल पसंद नहीं है।”

रागिनी की आवाज़ में चिंता की घबराहट साफ़ थी।

“लेकिन मैम! आज जो कुछ भी हुआ... उसके बाद भी आप यही कहेंगी?”

मीरा ने खाली आवाज में कहा,

“हां। आज के बाद भी मेरा फैसला वही है।”

अमन भी अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा,

“लेकिन आपकी जान को बहुत बड़ा खतरा है मीरा मैम! कोई बहुत ही चालाकी से आपको रास्ते से हटाने पर तुला हुआ है!”

मीरा ने बेहद शांत आवाज़ में कहा।

“मुझे अच्छी तरह पता है कि मेरी जान को खतरा है।”

रागिनी ने परेशान होते हुए कहा,

“फिर आप अपनी ज़िद पर क्यों अड़ी हुई हैं?”

मीरा ने सीधे बैठकर शीशे में रागिनी की आंखों में देखा। उसकी आवाज़ में एक अजीब सा आत्मसम्मान था,

“क्योंकि मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं है कि कोई अनजान इंसान चौबीस घंटे मेरी परछाई बनकर मेरे पीछे-पीछे घूमता रहे। मेरे आगे चले, मेरे पीछे चले, मेरी प्राइवेसी में दखल दे और हर वक्त मुझे बच्चों की तरह हिदायतें दे कि मुझे कहां जाना चाहिए और कहां नहीं। मैं अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जीती हूं।”

रागिनी ने एक लंबी सांस खींची और हार मानते हुए मुस्कुराई,

“ठीक है मैम... जैसी आपकी मर्ज़ी। तो फिर हम बॉडीगार्ड नहीं रखेंगे।"

मीरा ने राहत की सांस ली और दोबारा अपना सिर पीछे टिका लिया। लेकिन रागिनी इतनी आसानी से हार मानने वाली नहीं थी। उसने कुछ सेकंड बाद बड़े ही प्यार से कहा,

“लेकिन कल से मैं खुद आपको घर से पिक करूंगी, पूरे दिन आपके साथ रहूंगी और खुद ही आपको घर ड्रॉप करने आऊंगी। इसमें तो आपको कोई एतराज नहीं होगा?”

मीरा ने तुरंत अपनी आंखें खोलीं और कड़े लहजे में कहा,

“रागिनी, मैं अपना ध्यान खुद रख सकती हूं। तुम्हें मेरे लिए ड्राइवर बनने की ज़रूरत नहीं है।”

मीरा की उस एक सख्त नज़र ने रागिनी का मुंह पूरी तरह बंद कर दिया। सामने बैठा अमन अपनी हंसी को दबाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसके मुंह से एक छोटी सी फुसफुसाहट निकल ही गई।

रागिनी ने तुरंत शीशे में अमन को घूरकर देखा।

“अमन! तुम्हें बहुत मज़ा आ रहा है इस सब में?”

अमन ने तुरंत अपना चेहरा एकदम सीरियस बना लिया और हाथ जोड़कर बोला,

“अरे नहीं-नहीं रागिनी मैम! मैं तो बस सोच रहा था कि हमारी बॉस को हराना इस दुनिया में किसी के बस की बात नहीं है!”

मीरा ने उन दोनों की इस बातचीत पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वह चुपचाप बाहर देखती रही।

आगे जानने के लिए बने रहीए ✨ 🙂

....

By ishra zafar aalam....

Continue.....

100%