Three devil's dark desire - Chapter 3
Episode 3
“मुझे देवदारघाट जाना है… मेरे पापा समर प्रताप वहीं रहते हैं।”
एशाना के मुंह से ये शब्द निकलते ही दानिश का चेहरा जैसे पत्थर का हो गया।
कुछ सेकंड पहले तक उसकी आवाज सामान्य थी, लेकिन अब उसकी आंखों में ऐसा गुस्सा था जिसे देखकर सामने वाला बिना वजह भी अपनी बात भूल जाए।
उसकी उंगलियां मुट्ठी में बदल गईं।
समर प्रताप!
इतने सालों बाद यह नाम उसके सामने इस तरह आएगा, उसने सोचा भी नहीं था।
दानिश ने एशाना को ऊपर से नीचे तक देखा।
“तुम… समर प्रताप की बेटी हो?”
एशाना को उसका बदला हुआ अंदाज बिल्कुल पसंद नहीं आया।
“हां। कोई problem है?”
दानिश की आंखें सिकुड़ गईं।
“Problem?”
वह हल्का-सा हंसा, लेकिन उस हंसी में गर्मजोशी नहीं थी।
“तुम्हें लगता है मुझे कोई problem नहीं होनी चाहिए?”
एशाना ने भौंहें चढ़ाईं।
“मुझे नहीं पता आपको क्या problem है। मैंने तो बस अपने गांव का नाम और पापा का नाम बताया है।”
दानिश उसके सामने आकर रुक गया।
“तुम्हें इस इलाके के बारे में कुछ नहीं पता।”
“और आपको मेरे बारे में कुछ नहीं पता।”
एशाना का जवाब सुनकर दानिश कुछ पल शांत रहा।
उसे उम्मीद नहीं थी कि शहर से आई यह लड़की इतनी आसानी से उसके सामने खड़ी होकर जवाब देगी।
आमतौर पर उसके सामने लोग सोच-समझकर बोलते थे।
लेकिन यह लड़की…
जैसे उसे देखकर बिल्कुल nervous ही नहीं हुई।
दानिश ने ठंडी आवाज में कहा—
“तुम्हें यहां के rules सीखने होंगे।”
एशाना ने तुरंत कहा—
“Rules? मैं किसी boarding school में नहीं आई हूं।”
दानिश की भौंह ऊपर उठ गई।
“तुम्हें लगता है तुम बहुत smart हो?”
“नहीं।”
एशाना ने अपने बाल पीछे किए।
“मुझे पता है मैं smart हूं।”
ड्राइवर ने अपनी हंसी रोकने के लिए मुंह दूसरी तरफ कर लिया।
दानिश ने उसे घूरकर देखा।
ड्राइवर तुरंत गंभीर हो गया।
एशाना ने अपनी कार की तरफ बढ़ते हुए कहा—
“वैसे आपकी मदद के लिए thanks. अब मैं निकलती हूं।”
दानिश ने उसका रास्ता रोक दिया।
“रुको।”
एशाना रुक गई।
“अब क्या?”
दानिश ने कहा—
“मैं तुम्हें गांव तक छोड़ूंगा।”
“जरूरत नहीं है।”
“मैंने पूछा नहीं।”
“और मैंने permission नहीं मांगी।”
दोनों की नजरें टकराईं।
कुछ सेकंड तक सड़क पर सिर्फ पहाड़ी हवा की आवाज सुनाई देती रही।
दानिश की आंखों में गुस्सा था।
लेकिन एशाना के चेहरे पर सिर्फ irritation।
आखिरकार दानिश ने रास्ता छोड़ दिया।
“Fine.”
एशाना अपनी कार में बैठ गई।
जैसे ही कार आगे बढ़ी, उसने पीछे के शीशे से दानिश को देखा।
वह अभी भी वहीं खड़ा था।
उसका चेहरा देखकर एशाना के मन में एक सवाल आया—
“मेरे पापा का नाम सुनकर इसे इतना गुस्सा क्यों आया?”
करीब आधे घंटे बाद एशाना आखिरकार देवदारघाट पहुंच गई।
पहाड़ों के बीच बसा गांव बेहद खूबसूरत था।
लकड़ी के घर, छोटे-छोटे खेत, दूर मंदिर की घंटियां और पहाड़ों से आती ठंडी हवा…
एशाना कुछ देर के लिए सब भूल गई।
“Okay… ये जगह तो सच में beautiful है।”
उसकी नजर सामने बने एक बड़े घर पर पड़ी।
वह धीरे-धीरे गाड़ी से उतरी।
लेकिन जैसे ही उसने घर के बाहर कदम रखा, उसे कई लोगों की नजरें अपनी तरफ महसूस हुईं।
गांव में हर कोई उसे देख रहा था।
किसी के चेहरे पर curiosity थी, किसी के चेहरे पर surprise।
आखिर शहर से आई लड़की पूरे गांव में चर्चा का विषय जो बन चुकी थी।
एशाना ने धीरे से कहा—
“क्या यहां सब लोग ऐसे देखते हैं?”
ड्राइवर मुस्कुराया।
“मैडम, कई साल बाद समर साहब की बेटी गांव आई है। सब आपको देखेंगे।”
एशाना ने सिर हिलाया।
“अच्छा… तो आज मैं गांव की celebrity हूं।”
घर के अंदर उसके पिता बेसब्री से उसका इंतजार कर रहे थे।
जैसे ही उन्होंने एशाना को देखा, तुरंत उसे गले लगा लिया।
“बेटा…”
एशाना ने उन्हें कसकर पकड़ लिया।
“पापा!”
कुछ पल तक दोनों कुछ नहीं बोले।
फिर एशाना ने पूछा—
“दादी कैसी हैं?”
पिता का चेहरा गंभीर हो गया।
“बहुत कमजोर हैं। लेकिन तुझे देखकर शायद उन्हें हिम्मत मिले।”
एशाना तुरंत दादी के कमरे की तरफ जाने लगी।
लेकिन तभी बाहर से गाड़ियों के रुकने की आवाज आई।
एशाना ने पलटकर देखा।
एक के बाद एक तीन गाड़ियां घर के बाहर आकर रुकीं।
पहली गाड़ी से दानिश उतरा।
उसका चेहरा अभी भी उतना ही serious था।
दूसरी गाड़ी से शिवांश बाहर आया।
Formal black outfit, चेहरे पर attitude और आंखों में वही natural anger।
तीसरी तरफ से देवांश उतरा।
हाथ में फोन, चेहरे पर smile और personality बिल्कुल बाकी दोनों से अलग।
देवांश ने घर के बाहर खड़े लोगों को देखा।
फिर उसकी नजर एशाना पर पड़ी।
वह कुछ सेकंड उसे देखता रहा।
“ओह…”
शिवांश ने उसे देखा।
“क्या हुआ?”
देवांश
“भाई… ये वही शहर वाली लड़की है?”
शिवांश ने एशाना की तरफ देखा।
“शायद।”
देवांश धीरे से बोला—
“Interesting.”
तभी एशाना की नजर तीनों पर पड़ी।
वह नहीं जानती थी कि ये कौन हैं।
लेकिन तीनों के अंदाज देखकर इतना समझ गई कि ये आम लोग नहीं थे।
दानिश सबसे ज्यादा intimidating था।
शिवांश के चेहरे पर साफ arrogance था।
और देवांश…
वह बाकी दोनों के मुकाबले बिल्कुल अलग लग रहा था।
देवांश आगे बढ़ा।
“Hi, मैं देवांश।”
एशाना ने हल्की मुस्कान दी।
“एशाना।”
देवांश ने कहा—
“Welcome to देवदारघाट।”
एशाना ने तुरंत कहा—
“Thank you.”
फिर उसकी नजर दानिश पर गई।
दानिश ने सिर्फ उसे देखा।
न कोई hello।
न कोई smile।
न कोई introduction।
एशाना ने मन ही मन कहा—
“Attitude की दुकान।”
देवांश ने उसकी expression पढ़ ली।
वह हंस पड़ा।
“आपने भैया को देखकर कुछ कहा?”
“नहीं।”
“चेहरा तो बहुत कुछ कह रहा है।”
एशाना ने उसे देखा।
“तुम बहुत जल्दी लोगों को पढ़ लेते हो।”
देवांश ने मुस्कुराकर कहा—
“मैं college में psychology नहीं पढ़ता, लेकिन लोगों के expressions समझने में expert हूं।”
शिवांश ने बीच में कहा—
“देवांश, चुप रहो।”
देवांश ने कंधे उचका दिए।
“Okay, politician साहब।”
एशाना की हंसी छूट गई।
शिवांश ने उसे देखा।
“आपको बहुत मजाकिया लग रहा है?”
एशाना ने सीधा जवाब दिया—
“थोड़ा।”
देवांश हंस पड़ा।
“भाई, पहली मुलाकात में ही आपकी छुट्टी!”
शिवांश ने उसे घूरा।
“
देवांश ने धीरे से शिवांश के कान में कहा—
“मुझे ये लड़की पसंद आ रही है।”
शिवांश ने उसे कोहनी मारी।
दानिश कुछ पल एशाना को देखता रहा।
फिर बोला—
“तुम्हें लगता है तुम मुझे जानती हो?”
“नहीं।”
“फिर मेरे सामने इतना confidence?”
एशाना ने शांत होकर कहा—
“Confidence और बदतमीजी में फर्क होता है। मैं सिर्फ अपना point रख रही हूं।”
दानिश की आंखों में एक पल के लिए हैरानी आई।
फिर वह पीछे हट गया।
“Fine.”
वह मुड़ा और बाहर चला गया।
एशाना ने उसे जाते हुए देखा।
उसके मन में फिर वही सवाल उठा—
“आखिर मेरे पापा से इसकी दुश्मनी क्या है?”
लेकिन उससे भी बड़ा सवाल था—
दानिश उसे बार-बार इतनी गौर से क्यों देख रहा था?
शाम होते-होते घर में मेहमानों का आना शुरू हो गया।
एशाना अपनी दादी के कमरे में बैठी थी।
दादी ने कमजोर हाथ से उसका चेहरा छुआ।
“मेरी बच्ची…”
एशाना की आंखों में आंसू आ गए।
“दादी, मैं आ गई।”
“अब मुझे कोई डर नहीं।”
एशाना ने उनका हाथ पकड़ लिया।
“आप ठीक हो जाओगी।”
दादी ने मुस्कुराने की कोशिश की।
“तू बिल्कुल अपनी मां जैसी है।”
एशाना हंसते हुए बोली—
“मां तो कहती हैं मैं उनसे ज्यादा शैतान हूं।”
दादी हंस पड़ीं।
कमरे के बाहर तीनों भाई खड़े थे।
देवांश धीरे से बोला—
“ये तो बिल्कुल सीधी-सादी नहीं लगती।”
शिवांश ने कहा—
“शहर में पली है। जाहिर है।”
दानिश चुप था।
उसकी नजर सिर्फ एशाना पर थी।
कुछ देर बाद वह वहां से चला गया।
लेकिन उसके दिमाग में सिर्फ एक बात घूम रही थी—
“समर प्रताप की बेटी…”
उसका गुस्सा अभी खत्म नहीं हुआ था।।।