तुम मेरी मोहब्बत हो (बेपनाह प्यार है का सीजन 2) - Chapter 3
वही फिर अब कुछ दिन सेजल अपनी बुआ मां के पास रही और फिर जब उसके कॉलेज जाने का टाइम आ गया,,,,
तब सेजल बोली बुआ मा कल मुझे वापस शहर जाना है, क्योंकि मेरी सारी छुट्टियां खत्म हो गई है,,,,
तब यह सुनकर इंद्रावती उदास होते हुए बोली बेटा जाना तो पड़ेगा वैसे तुम्हें भेजने का मन तो नहीं कर रहा,,,,, यह कहते हुए उसकी आंखों में आंसू आ गए,,,,,,
तब यह सुनकर सेजल उसके गले लग कर बोली आप भी ना बुआ मां छोटी-छोटी बातों पर रोने लग जाती हो,,,,,
अरे कुछ ही दिनों की बात है उसके बाद में पढ़ाई कर हमेशा के लिए आपके पास आ जाऊंगी,,,,,
फिर आपको छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी और हमेशा हमेशा आपके साथ ही रहूंगी,,,,,, सेजल प्यार से इंद्रावती की तरफ देखते हुए बोली,,,,
तब यह सुनकर इंद्रावती मुस्कुराते हुए बोली अरे पगली बेटियां हमेशा अपने माता-पिता के पास थोड़ी ना रहती है उन्हें कभी ना कभी तो अपने ससुराल जाना ही पड़ता है,,,,,
तब यह सुनकर सेजल बोली बस बुआ मा मुझे नहीं करनी कोई शादी-वादी और ना ही मुझे ससुराल जाना है,,,,,
मुझे हमेशा आपके पास रहना है मैं आपको छोड़कर कहीं नहीं जाना चाहती बुआ मां,,,,,, यह कहते हुए उसकी आंखों में आंसू आ गए और बह अपनी बुआ के गले लग गई,,,,,,
तब यह देखकर इंद्रावती बोली अरे पगली तू तो मेरे जिगर का टुकड़ा है मुझसे दूर कैसे जाएगी मैं तुम्हारा विवाह करूंगी ना तो ऐसे परिवार में करूंगी जहां तुम्हे में कभी किसी चीज की कमी महसूस ना हो,,,,,,
और कभी तुम्हें किसी की याद ना आए जहां तुम हमेशा खुश रहो, सारी दुनिया की खुशियां तुम्हें मिल जाए तो मैं अपने जान से ज्यादा प्यार करने वाला पति और परिवार मिले,,,,,
तब यह सुनकर सेजल बोली लेकिन बुआ मां जैसा आप सोचती है ऐसा विवाह मुझे नहीं करना मैं तो अपनी मर्जी से विवाह करूंगी और वह भी ऐसे लड़के से जो मेरी सारी बात माने,,,,,
यह सुनकर इंद्रावती हैरानी से उसकी तरफ देखते हूए बोली मतलब,,,,,,
तब सेजल बोली बुआ मां देखना मैं ऐसी लड़के से विवाह करूंगी जो हमेशा मेरे साथ आपके साथ यहीं पर रहे घर जमाई बनकर,,,,,,
तब यह सुनकर इंद्रावती मुस्कुराते हुए बोली बिल्कुल पागल हो तुम भी अब भी जरा भी दिमाग नहीं है तुम में,,,,,,
अरे लड़कियां बिदा होकर ससुराल जाती है यहीं परंपरा चलती आई है बरसों से बेटा लड़के नहीं आते विदा होकर अपने ससुराल,,,,,,
तब यह सुनकर सेजल बोली लेकिन बुआ मां मैं नहीं जानती ऐसी किसी परंपरा को और ना मानती हूं मेरा तो दूल्हा ही विदा होकर अपने ससुराल यानी यहां आएगा,,,,,,
और मैं आपको छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी हमेशा यही रहूंगी अगर किसी को अपने मां-बाप छोड़ कर आना होगा तो वह मेरा दूल्हा होगा देख लेना बुआ मां आप,,,,,
तब यह सुनकर इंद्रावती को हंसी आ गई और वह बोली पता नहीं तुम्हारे लिए ऐसा लड़का इस दुनिया में बना भी होगा या नहीं,,,,,
तब सेजल मुस्कुराते हुए बोली बुआ मां जब देवी मां ने मुझे बना दिया है तो ऐसा लड़का भी मेरे लिए जरूर बनाया होगा देखना आप एक दिन ऐसा ही लड़का मिलेगा मुझे,,,,
तब यह सुनकर इंद्रावती बोली और अगर ऐसा लड़का तुम्हें नहीं मिला तो,,,,,
तब यह सुनकर सेजल बोली तो फिर मैं विवाह नहीं करूंगी जब तक देवी मां मेरे लिए ऐसा लड़का नहीं बनाएगी तब तक,,,,,
तब यह सुनकर इंद्रावती को हंसी आ गई फिर दोनों एक साथ हंसने लगी,,,,,
तभी वर्षा वहां आई और इंद्रावती की तरफ देखते हुए बोली बुआ मां प्रणाम,,,,,,
तब यह सुनकर इंद्रावती बोली खुश रहो बेटा,,,,, अच्छा बेटा तुम दोनों बैठो मैं तुम्हारे लिए चाय नाश्ता भिजवा दी हूं या कहकर इंद्रावती वहां से चली गई,,,,,
फिर वर्षा सेजल की तरफ देखते हुए बोली अरे ओ मैडम कल हॉस्टल चलने की तैयारी की है या नहीं,,,,
तब यह सुनकर सेजल मुस्कुराते हुए बोले हां क्यों नहीं वैसे तुम तैयार तो हो ना कि कहीं तुम्हारा मन जाने का ही नहीं हो,,,,
तब यह सुनकर बरसा बोली मैं तुम्हारी तरह नहीं हूं समझी ना मुझे अपनी पढ़ाई की पूरी फिक्र है तुम्हारी तरह नहीं हूं जो हमेशा हॉस्टल जाने के लिए नाटक करती हो,,,,,,
तब यह सुनकर सेजल बोली हां तुम्हारी बात तो सही है वैसे मैं तो मेरी बुआ मां को छोड़कर कहीं जाना नहीं चाहती,,,,,,
लेकिन तुम तो अपने घर वालों को छोड़कर जाना चाहती हो तुम्हारा बस चले ना तो इन छुट्टियों में भी तुम गांव वापस ना आओ,,,,,
क्योंकि तुम तो यही चाहती हो कि जितना जल्दी हो तुम्हारे घर वालों से तुम्हारा छुटकारा मिल जाए,,,,सेजल बरसा की तरफ देखते हुए बोली,,,,,,
तब यह सुनकर बरसा को हंसी आ गई फिर दोनों सहेलियां एक साथ दोनों हंसने लगी,,,,,
तब तक चाय नाश्ता आ गया दोनों सहेलियों ने फिर एक साथ बैठकर चाय नाश्ता किया और कल जाने की आपस में बातें करते हुए अपनी तैयारी करने लगी,,,,,,,
फिर वर्षा तो अपने घर चली गई और सेजल सारी तैयारी करने के बाद अपनी बुआ सा से बातें करने लग गई,,,,,
उस दिन उसकी बुआ मां ने कहकर उसके लिए उसकी पसंद का खाना बनवाया,,,,,
फिर खाना खाकर दोनों बातें करते हुए देर रात गहरी नींद में सो गई,,,,,
फिर दूसरे दिन बरसा और सेजल सुबह जल्दी ही हॉस्टल जाने के लिए तैयार हो गई,,,,,
वही अपनी बुआ मां को छोड़कर जाते हुए सेजल को बहुत तकलीफ हो रही थी लेकिन उसका जाना भी जरूरी था,,,,,,
वही इंद्रावती उसे इस तरह जाते देख कर उदास थी लेकिन सेजल की पढ़ाई भी जरूरी थी,,,,,
तब सेजल अपनी बुआ मां के गले लग गई और उससे उसका आशीर्वाद लेकर अपनी सहेली बरसा के साथ गाड़ी में बैठ कर अपनी पढ़ाई के लिए दोनों साथ शहर वापस अपने हॉस्टल आ गई और इंद्रावती अकेली गांव में रह गई,,,,,
वही इंद्रावती को सेजल की चिंता थी बह भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि सेजल हमेशा ठीक रहे, किसी की बुरी नजर उसकी खुशियों को ना लगे,,,,,,
एक सेजल ही तो है जो उसके जीने की वजह है उसके भाई भाभी के प्रेम की निशानी है,,,,,,
अगर सेजल ना होती ना तो इंद्रावती जी नहीं पाती सेजल तो उसकी आंखों का तारा है जिसे देखकर वह सकून महसूस करती है,,,,,
वही सेजल के रूप में उसे उसमें अपना भाई पूरब और राधिका की परछाई दिखाई देती है,,,,
वही इंद्रावती दिन रात देवी मां से प्रार्थना करते हुए कहती हे देवी मां हमेशा उसकी रक्षा करना यह कहते हुए इंद्रावती हाथ जोड़कर देवी मां का स्मरण करने लग जाती,,,