LoveBite Ch. 1

LoveBite - Chapter 1 वो पहली टक्कर

Posted by Meenakshi mansi • Sep 04, 2026 11:49 AM

रात के करीब ग्यारह बज रहे थे। शहर की सड़कों पर हल्की बारिश हो रही थी और होटल की चमकती रोशनी सड़क पर बिखर रही थी।

नैना, 25 साल की, शांत लेकिन अपनी बात पर अड़ जाने वाली लड़की, होटल की लॉबी से बाहर निकली ही थी कि अचानक किसी से टकरा गई।

उसके हाथ की कॉफी सामने खड़े आदमी की सफेद शर्ट पर गिर गई।

“ओह! I'm so sorry…”

उसने ऊपर देखा।

सामने करीब 29 साल का लंबा, आकर्षक और बेहद कॉन्फिडेंट आदमी खड़ा था।

रुद्र।

उसने अपनी शर्ट की तरफ देखा, फिर नैना की तरफ।

“माफी इतनी जल्दी?”

नैना ने भौंहें सिकोड़ लीं।

“तो क्या करूँ?”

रुद्र हल्का-सा मुस्कुराया।

“शायद कुछ ऐसा… जिससे मुझे लगे कि नुकसान की भरपाई हो गई।”

“आप चाहते क्या हैं?”

वह एक कदम उसके करीब आया।

“अभी तो सिर्फ तुम्हारा नाम।”

नैना ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा,

“नैना।”

“Nice to meet you, नैना।”

“अब मेरी कॉफी और आपकी शर्ट का हिसाब बराबर?”

रुद्र ने धीमे से कहा,

“शर्ट तो धुल जाएगी… लेकिन तुमसे दोबारा मिलने का बहाना शायद आसानी से नहीं मिलेगा।”

नैना के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।

“बहाने बनाने में आप काफी अच्छे लगते हैं।”

रुद्र थोड़ा झुका।

“और तुमसे बात करने में मुझे उससे भी ज्यादा मज़ा आ रहा है।”

नैना कुछ कहती, उससे पहले रुद्र की नजर उसके होंठों पर ठहर गई।

एक पल के लिए दोनों चुप हो गए।

नैना ने तुरंत नजरें हटा लीं।

“Good night, Mr. Stranger.”

वह मुड़कर जाने लगी।

रुद्र की आवाज पीछे से आई—

“नैना…”

वह रुकी।

“अगली बार कॉफी मुझ पर मत गिराना।”

नैना पलटकर मुस्कुराई।

“क्यों?”

रुद्र ने शरारती अंदाज़ में कहा—

“क्योंकि अगली बार शायद मैं तुम्हें इतनी आसानी से जाने नहीं दूँगा।”

नैना के दिल की धड़कन अचानक तेज हो गई।

और उसे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था…

कि यह मुलाकात उसके लिए सिर्फ एक शुरुआत थी। ❤️

फिर मुलाकात

अगली सुबह नैना ने खुद को समझाया था कि पिछली रात की मुलाकात को बस एक छोटी-सी घटना समझकर भूल जाना चाहिए।

आखिर रुद्र उसके लिए था ही क्या?

एक अजनबी।

लेकिन समस्या ये थी कि उसका चेहरा बार-बार नैना की आंखों के सामने आ रहा था।

खासकर वो मुस्कान…

और वो आखिरी बात—

"अगली बार शायद मैं तुम्हें इतनी आसानी से जाने नहीं दूँगा।"

नैना ने झुंझलाकर अपना तकिया चेहरे पर रख लिया।

“उफ्फ… कितना attitude है उस आदमी में!”

उसी वक्त फोन बजा।

एक अनजान नंबर से मैसेज था।

“कॉफी इस बार मेरी तरफ से।”

नैना कुछ सेकंड फोन को देखती रही।

फिर दूसरा मैसेज आया—

“और हाँ… इस बार कपड़े बचा लेना।”

नैना के होंठों पर अनचाही मुस्कान आ गई।

उसने जवाब लिखा—

“आपको लगता है मैं जानबूझकर कॉफी गिराती हूँ?”

तुरंत reply आया—

“नहीं… लेकिन अगर वजह मुझे बनाना चाहती हो, तो शिकायत नहीं करूँगा।”

नैना की आंखें थोड़ी बड़ी हो गईं।

“बेशर्म!”

फिर भी उसने चैट बंद नहीं की।

“आप हमेशा ऐसी बातें करते हैं?”

कुछ सेकंड बाद जवाब आया—

“सिर्फ उन लड़कियों से जो मुझे interesting लगती हैं।”

नैना का दिल हल्का-सा धड़क उठा।

उसने फोन रख दिया।

लेकिन मुस्कान नहीं गई।

---

शाम को नैना उसी होटल के कैफे में पहुंची।

उसने सोचा था शायद रुद्र मजाक कर रहा होगा।

लेकिन जैसे ही उसने अंदर कदम रखा—

वो सामने बैठा था।

ब्लैक शर्ट, हाथ में कॉफी का कप और चेहरे पर वही शरारती मुस्कान।

रुद्र ने उसे देखते ही कहा—

“मुझे पता था तुम आओगी।”

नैना सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई।

“इतना confidence?”

“तुम्हारी आंखों ने कल ही बता दिया था।”

“मेरी आंखें?”

“हाँ।”

रुद्र थोड़ा आगे झुका।

“तुम जितना छुपाने की कोशिश करती हो, उतना ही ज्यादा बोलती हैं।”

नैना ने उसकी तरफ देखते हुए कहा—

“और आपकी आंखें?”

“मेरी?”

“वो क्या बोलती हैं?”

रुद्र कुछ पल उसे देखता रहा।

फिर धीमे से बोला—

“ये बताना थोड़ा खतरनाक है।”

“क्यों?”

“कहीं तुम सच में समझ गईं तो?”

नैना ने नजरें झुका लीं।

“शायद मैं समझना चाहती हूँ।”

पहली बार रुद्र की मुस्कान थोड़ी धीमी हुई।

दोनों के बीच कुछ पल खामोशी रही।

वेटर कॉफी रखकर चला गया।

रुद्र ने कप उसकी तरफ बढ़ाया।

“इस बार सावधानी से।”

नैना ने कप उठाया।

“डरिए मत। आज आपकी शर्ट सुरक्षित रहेगी।”

रुद्र मुस्कुराया।

“शर्ट की मुझे इतनी चिंता नहीं है।”

“तो किसकी है?”

उसकी नजरें नैना पर टिक गईं।

“तुम्हारी।”

नैना कुछ कह नहीं पाई।

रुद्र ने धीरे से पूछा—

“तुम हमेशा इतनी शांत रहती हो?”

“नहीं।”

“तो फिर मेरे सामने क्यों?”

नैना ने उसकी आंखों में देखा।

“क्योंकि आप मुझे confuse कर देते हैं।”

रुद्र की मुस्कान वापस आ गई।

“अच्छा है।”

“क्यों?”

“क्योंकि तुम भी मुझे थोड़ा-सा परेशान कर रही हो।”

“मैं?”

“हाँ।”

“कैसे?”

रुद्र ने कॉफी का कप टेबल पर रखा और उसकी तरफ झुककर बहुत धीमे स्वर में कहा—

“तुम्हारे करीब आने का मन करता है… और तुम्हारी ये मासूम शक्ल मुझे रोक देती है।”

नैना के गाल गर्म हो गए।

“आप बहुत बातें बनाते हैं।”

“और तुम बहुत खूबसूरत लगती हो जब शर्माती हो।”

नैना ने तुरंत नजरें फेर लीं।

रुद्र हंस पड़ा।

“देखा?”

“चुप रहिए।”

“ठीक है।”

दो सेकंड की खामोशी।

फिर रुद्र बोला—

“लेकिन एक बात पूछ सकता हूँ?”

“क्या?”

“कल जब मैं तुम्हारे करीब आया था… तुम पीछे क्यों नहीं हटीं?”

नैना ने उसकी तरफ देखा।

इस बार उसके पास कोई जवाब नहीं था।

रुद्र भी चुप हो गया।

दोनों की नजरें मिलीं।

और उस छोटी-सी खामोशी में पहली बार दोनों को एहसास हुआ—

ये सिर्फ आकर्षण नहीं था।

कुछ शुरू हो चुका था।

कुछ ऐसा…

जिससे वापस लौटना शायद आसान नहीं होने वाला था।

इतनी करीब…

कैफे की हल्की रोशनी में दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे।

नैना ने आखिरकार नजरें हटा लीं।

“मुझे लगता है मुझे अब चलना चाहिए।”

रुद्र ने मुस्कुराकर पूछा,

“इतनी जल्दी?”

“देर हो रही है।”

“मैं छोड़ देता हूँ।”

“ज़रूरत नहीं है।”

“मुझे है।”

नैना ने हैरानी से उसे देखा।

“आपको?”

रुद्र कुर्सी से उठते हुए बोला,

“हाँ। क्योंकि तुम्हें अकेले जाने देने का मन नहीं कर रहा।”

बाहर बारिश फिर शुरू हो चुकी थी।

होटल के दरवाजे पर पहुंचते ही नैना रुक गई।

“बारिश…”

रुद्र उसके पास आकर खड़ा हो गया।

“तो?”

“मेरी कार थोड़ी दूर खड़ी है।”

रुद्र ने अपना हाथ आगे बढ़ाया।

“चलो।”

नैना ने उसके हाथ को देखा।

कुछ पल झिझकी…

फिर अपनी उंगलियां उसके हाथ में रख दीं।

रुद्र ने उसकी उंगलियों को हल्के से थाम लिया।

बस एक छोटा-सा स्पर्श था।

लेकिन नैना के दिल की धड़कन जैसे अचानक तेज हो गई।

दोनों बारिश में आगे बढ़े।

कुछ कदम बाद रुद्र रुक गया।

“क्या हुआ?” नैना ने पूछा।

“तुम्हारे बाल।”

“क्या?”

रुद्र ने उसके चेहरे के पास आए भीगे बालों की एक लट धीरे से हटाई।

उसकी उंगलियां उसके गाल को हल्का-सा छूकर गुजर गईं।

नैना बिल्कुल स्थिर हो गई।

रुद्र की नजरें उसकी आंखों से होती हुई उसके होंठों तक गईं।

नैना ने सांस रोक ली।

“रुद्र…”

“हम्म?”

“आप ऐसे क्यों देख रहे हैं?”

वह थोड़ा और करीब आया।

“क्योंकि तुम मुझे देखना मुश्किल बना रही हो।”

“क्या?”

“तुम्हारे करीब आकर खुद को रोकना।”

नैना की आंखों में घबराहट और आकर्षण दोनों थे।

रुद्र ने उसके चेहरे के पास आकर धीमे से पूछा—

“अगर मैं अभी तुम्हें किस करना चाहूँ… तो?”

नैना ने जवाब नहीं दिया।

बस उसकी आंखों में देखती रही।

रुद्र कुछ पल रुका।

फिर और करीब आने से पहले उसने धीरे से पूछा—

“पीछे हटोगी?”

नैना ने बहुत हल्के से सिर हिला दिया।

नहीं।

रुद्र के चेहरे पर एक बेहद हल्की मुस्कान आई।

उसने उसके माथे को अपने माथे से छुआ।

दोनों की सांसें एक-दूसरे में घुलने लगीं।

नैना ने आंखें बंद कर लीं।

और अगले ही पल रुद्र के होंठ उसके होंठों को बहुत हल्के से छू गए।

बस एक पल।

फिर वह पीछे हट गया।

नैना ने धीरे-धीरे आंखें खोलीं।

“बस?”

रुद्र ने शरारती अंदाज में कहा—

“अभी से शिकायत?”

नैना ने उसे घूरा।

“मैंने कोई शिकायत नहीं की।”

“तुम्हारी आंखें कर रही हैं।”

नैना ने उसका हाथ छोड़ दिया।

“आप बहुत बदमाश हैं।”

रुद्र हंस पड़ा।

“और तुम…”

“मैं?”

“तुम मेरी उम्मीद से कहीं ज्यादा दिलचस्प हो।”

नैना मुस्कुराई।

लेकिन तभी उसकी नजर रुद्र की गर्दन पर गई।

“ये क्या है?”

रुद्र ने पूछा, “क्या?”

“वो निशान…”

उसकी मुस्कान अचानक गायब हो गई।

रुद्र ने कॉलर ठीक किया।

“कुछ नहीं।”

नैना ने गौर से देखा।

“रुद्र, वो किसी पुराने जख्म जैसा है।”

रुद्र कुछ नहीं बोला।

पहली बार उसकी आंखों में वो शरारत नहीं थी।

उनमें एक अजीब-सी गंभीरता थी।

“नैना…”

“हम्म?”

“मेरी जिंदगी में कुछ ऐसे हिस्से हैं… जिनके बारे में तुम्हें अभी कुछ नहीं पता।”

“तो बताइए।”

रुद्र ने उसकी आंखों में देखा।

“एक दिन सब बताऊंगा।”

“कब?”

वह हल्का-सा मुस्कुराया।

“जब तुम इतनी करीब आ जाओगी कि मेरे अतीत से डरकर दूर जाने का रास्ता तुम्हें दिखाई ही न दे।”

नैना के चेहरे की मुस्कान धीरे-धीरे गायब हो गई।

उसे पहली बार महसूस हुआ—

रुद्र सिर्फ एक आकर्षक और शरारती आदमी नहीं था।

उसके पीछे कोई ऐसा राज था…

जो उनकी इस नई शुरुआत को पूरी तरह बदल सकता था।

100%