वारिस (एक श्राप) Ch. 3

वारिस (एक श्राप) - Chapter 3

Posted by Mamta Meena • Sep 11, 2026 02:48 PM

तब लड़के का पिता बोला अरे इसमें एहसान की क्या बात है आपकी बेटी हमारी बेटी हमारा बेटा आपका बेटा बात तो बराबर है ना,,,,,,

और फिर हमारे दो बेटे हैं बड़ा बेटा हमारे पास रहेगा और छोटा बेटा आपके पास रहेगा तो हमें भी कोई चिंता नहीं रहेगी आखिर यह परिवार भी तो इसका अपना ही रहेगा,,,,,,

और हमारा बेटा भी इन सब के लिए तैयार है, चाहे तो आप लड़के से पूछ लीजिए लड़के का पिता मुस्कुराते हुए बोला,,,,,, लड़के वाले बड़ा दिखावा करने के लिए बढ़ा चढ़ा कर बाते रहे थे,,,,,,

तब गायत्री बोली हमारी अंतरा भी लाखों में एक है,,,,,

तभी अंतरा हाथ जोड़कर बोली माफ करना लेकिन मैं इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं हूं,,,,,

यह सुनना था कि चारों तरफ सन्नाटा छा गया कोई कुछ कहता उससे पहले ही अंतरा बोली लेकिन हां आप लोग इस खानदान से रिश्ता जोड़ना चाहते हैं,,,,,,

आपके लिए इस खानदान से पुराना रिश्ता बनाए रखना जरूरी है तो मेरी बड़ी बहन है ना मेरी दीदी देवांशी बह आपके बेटे से रिश्ता करने के लिए तैयार है,,,, लेकिन माफ करना मैं नहीं,,,,,,

यह सुनकर गायत्री बोली बेटा यह तुम क्या कह रही हो,,,,,,

तब अंतरा बोली हां नानी मां अरे अब मुझसे बड़ी मेरी दीदी है नियम के हिसाब से तो पहले दीदी का विवाह होना चाहिए ना,,,,,,

और फिर दीदी भी इसी घर की बेटी है ऐसे में अगर यह रिश्ता दीदी से जुड़ जाए तो अच्छा होगा ना,,,,,

और इन लोगों के लिए हमारे खानदान से रिश्ता जोड़ना ज्यादा जरूरी है तो ऐसे में रिश्ता मुझसे जुड़े या दीदी से क्या फर्क पड़ता है,,,,,

दीदी भी मेरी तरह पढ़ी लिखी है समझदार है सुंदर है तो मुझे लगता है कि इन सब को इनसे कोई एतराज नहीं है और वैसे भी मैं विवाह के लिए मैं मन से तैयार नहीं हूं,,,,,,

ऐसे में अगर मेरी दीदी से रिश्ता जुड़ जाए तो मेरे लिए भी खुशी की बात होगी और दीदी को भी इन सब से कोई एतराज नहीं होगा,,,,,,

अंतरा देवांशी की तरफ इशारा करते हुए बोली तब देवांशी चाहते हुए भी कुछ नहीं बोल सकी,,,,,

अंतरा की बात सुनकर उसके पिता तेज सिंह बोले अंतरा बेटी यह क्या हरकत है बेटा बड़े जो फैसले लेते हैं वह छोटो की भलाई के लिए लेते हैं और फिर हमने बहुत सोच समझकर यह रिश्ता तुम्हारे लिए तय किया है,,,,,,

यह सुनकर अंतरा बोली माफ करना बाबोसा लेकिन क्या फर्क पड़ता है कि रिश्ता मेरा हो या दीदी का दीदी भी इसी घर की ही बेटी है,,,,,

और वैसे भी विवाह किसी भी बेटी का हो आपके दामाद को विदा होकर आना तो इसी घर में है, और मेरा विवाह हो या दीदी का दोनों खानदान का रिश्ता तो फिर भी जुड़ा रहेगा,,,,,,

और मैंने पहले भी कहा था कि मैं विवाह के लिए तैयार नहीं हूं, इसलिए भगवान के लिए आप कोई भी मुझे इन सब के लिए मजबूर ना करें,,,,,,,

अंतरा की बात सुनकर किसी के कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,,,सभी घर वाले बहुत परेशान थे,,,,,,

अंतरा ने अब किसी को भी जबरदस्ती अपने ऊपर दबाव बनाने के लिए मना कर दिया था उसने इस रिश्ते को करने से साफ इंकार कर दिया था,,,,,,

तब कुछ सोचकर गायत्री हाथ जोड़कर आए मेहमानों से बोली माफ करना हमने सोचा तो था कि हमारी अंतरा का रिश्ता आपके बेटे से करेंगे,,,,,,

लेकिन जब हमारी बेटी ही मन से तैयार नहीं है तो क्या कर सकते हैं ऐसे में हमारी दूसरी बेटी है देवांशी वह भी इसी ही घर की है अंतरा की ही बड़ी बहन है दोनों बहनों में 1 साल का ही अंतर है,,,,,,

अगर आप लोगों को ऐतराज ना हो तो हमारी देवांशी से अपने बेटे का रिश्ता कर दीजिए गायत्री हाथ जोड़कर बोली,,,,, यह सुनकर चारों तरफ सन्नाटा छा गया,,,,,,

अंतरा ने रिश्ता करने से साफ इंकार कर दिया तब अंतरा की नानी सा गायत्री ने देवांशी का रिश्ता तय करने के लिए कहा,,,,,

लड़के वालों ने जब यह सुना तो एक दूसरे की तरफ देखा तब लड़के के पिता बोले माफ करना लेकिन हम ऐसे कैसे रिश्ता तय कर सकते हैं,,,,,,

आप लोगों ने अपनी बेटी अंतरा का रिश्ता हमारे बेटे से तय करने के लिए कहा है तो फिर हम अचानक आपकी बेटी के मना करने पर आप की दूसरी बेटी देवांशी से रिश्ता कैसे कर सकते हैं,,,,,,

तब अंतरा बोली माफ करना लेकिन इसमें क्या परेशानी है आखिर देवांशी दीदी भी मेरी ही बहन है इसी खानदान की है और फिर देवांशी दीदी और आपके बेटे का विवाह होने पर भी आप के खानदान का इस खानदान से रिश्ता भी जुड़ा रहेगा,,,,,

यह सुनकर लड़के के पिता वाले बोले माफ करना लेकिन हम यह रिश्ता नहीं कर सकते,,,,

तब गायत्री बोली हम क्षमा मांगते हैं कि हमने पहले अपनी छोटी बेटी के लिए कहा था लेकिन उसके लिए हमें क्षमा करके हमारी दूसरी बेटी का रिश्ता अपने बेटे के लिए स्वीकार कीजिए,,,,,,

यह सुनकर लड़के की मां उठ खड़ी हुई और गुस्से में बोली ऐसे कैसे रिश्ता कर ले हमने आपकी बेटी अंतरा के लिए अपने बेटे का रिश्ता इसलिए स्वीकार किया था क्योंकि हीर महल की होने वाली मालकिन आपकी बेटी अंतरा है ना कि देवांशी,,,,,

अगर अंतरा से हमारे बेटे का विवाह होता है तो वह भी इस हीर महल का मालिक होगा,,,,

यह सोचकर हमने अपने बेटे का रिश्ता इस खानदान से करना चाहा और अपने बेटे को यहां इसलिए भेजना चाहा कि बह यहां का मालिक बन कर रहे,,,,,,

तब लड़के की बहन बोली अरे हीर महल का मालिक बनने के साथ ही आपकी बेटी अंतरा हमें पसंद थी क्योंकि यह काफी खूबसूरत है,,,,,,,

ऐसे में अगर इस अंतरा ने हमारे भैया से रिश्ता करने के लिए मना कर दिया तो क्यों करे हम अपने भैया का रिश्ता इस देवांशी से क्योंकि यह इतने सांवले रंग की है ऐसी लड़की से विवाह करवा कर हम अपने भाई की जिंदगी बर्बाद थोड़ी ना करना चाहते हैं,,,,,,

तब लड़के की मां बोली और आपकी बेटी देवांशी से रिश्ता करके हम अपने बेटे को नौकर नहीं बनाना चाहते क्योंकि उसके बाद हमारा बेटा यहां पर आएगा और उसकी हैसियत एक नौकर की तरह रहेंगी,,,,,,,

इसे हीर महल के मालिक अंतरा होगी और उसके साथ जिसका विवाह अंतरा से होगा वह भी इसका मालिक होगा यह सब कुछ जान कर भी हमें कोई शौक नहीं है कि हमारे बेटे को तुम्हारे यहां नौकर बनाने का,,,,,,

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