🌙 Episode 1 — अनजान मुलाकात
शहर की सबसे ऊँची इमारत की छत पर उस रात हजारों रोशनियाँ जगमगा रही थीं। आसमान में चाँद बादलों के पीछे छिपा हुआ था और नीचे पूरा शहर किसी चमकते हुए सितारे की तरह दिखाई दे रहा था। शहर के सबसे बड़े बिज़नेस ग्रुप के मालिक आर्यन राजवर्धन की भव्य पार्टी चल रही थी।
आर्यन सिर्फ 29 साल की उम्र में करोड़ों का साम्राज्य खड़ा करने वाला नाम। लोग उसे दुनिया के सबसे सफल युवा बिज़नेसमैन में गिनते थे। लेकिन आर्यन की सबसे बड़ी खासियत उसका पैसा नहीं था। उसकी असली पहचान कोई नहीं जानता था। लोगों को लगता था कि वह एक साधारण बिज़नेस परिवार से आया है। लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा बड़ी थी।
आर्यन की आँखों में हमेशा एक ऐसा रहस्य रहता था, जिसे पढ़ना किसी के लिए आसान नहीं था। उस रात भी वह पार्टी में मौजूद था, लेकिन उसका ध्यान मेहमानों पर नहीं था।
वह बार-बार घड़ी देख रहा था।
“तुम आज कुछ ज्यादा ही बेचैन लग रहे हो"। पीछे से उसके दोस्त कबीर की आवाज़ आई। आर्यन ने बिना पलटे कहा,
मैं बेचैन नहीं हूँ। कबीर हँस पड़ा।
तुम्हें मैं दस साल से जानता हूँ। जब तुम कहते हो कि तुम ठीक हो, तभी समझ आता है कि कुछ बहुत बड़ा गड़बड़ है। आर्यन ने उसकी तरफ देखा।
“आज रात कोई आने वाला है”। कबीर का चेहरा गंभीर हो गया।
“कौन?”
आर्यन ने जवाब नहीं दिया।
उसी समय पार्टी के मुख्य दरवाज़े खुले। सभी की निगाहें प्रवेश द्वार की तरफ चली गईं। एक लड़की अंदर आई। सफेद रंग का खूबसूरत गाउन। बालों में हल्की-सी चमक। चेहरे पर सादगी। लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब आत्मविश्वास था। उसका नाम था अनाया शर्मा। कम से कम दुनिया उसे इसी नाम से जानती थी। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ी। लोग उसे देखकर फुसफुसाने लगे।
“ये कौन है”?
“पहले कभी नहीं देखा"।
“लगता है किसी बड़े परिवार से है।”
अनाया ने किसी की तरफ ध्यान नहीं दिया। उसकी नजर सीधे आर्यन पर जाकर रुक गई। कुछ सेकंड तक दोनों एक-दूसरे को देखते रहे। आर्यन के चेहरे पर पहली बार हैरानी दिखाई दी। अनाया की आँखों में भी वही सवाल था।
“क्या तुम मुझे पहचानते हो?”
दोनों ने कुछ नहीं कहा।
लेकिन उस एक नजर में जैसे वर्षों पुराना कोई रहस्य छिपा था। कबीर ने आर्यन के कंधे पर हाथ रखा।
“तुम उसे जानते हो?”
आर्यन ने धीमी आवाज़ में कहा,
“नहीं।”
कबीर ने उसकी आँखों की तरफ देखा।
“झूठ।”
आर्यन ने नजरें हटा लीं।
“मैंने कहा ना… नहीं जानता।”
दूसरी तरफ अनाया के साथ आई उसकी सहेली मीरा ने पूछा,
“तुम इतनी देर से उस आदमी को क्यों देख रही हो?”
अनाया मुस्कुराई।
“क्योंकि शायद वही मेरी मंजिल है।”
मीरा चौंक गई।
“क्या?”
अनाया ने तुरंत बात बदल दी।
“कुछ नहीं।”
लेकिन उसके दिल में एक तूफान उठ चुका था।
कुछ घंटे पहले…
शहर से बहुत दूर एक आलीशान महल में तैयारियाँ चल रही थीं। महल के चारों तरफ सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम थे।
बाहर किसी को भी पता नहीं था कि अंदर क्या हो रहा है।
महल के विशाल कमरे में एक बुज़ुर्ग व्यक्ति खिड़की के पास खड़ा था। उसके सामने अनाया खड़ी थी। लेकिन अब वह अनाया नहीं थी। उसने अपने सिर से दुपट्टा हटाया।
उसके सामने रखे आईने में एक बिल्कुल अलग व्यक्तित्व दिखाई दे रहा था। उसके गले में शाही हार था। कमरे में मौजूद सभी लोग झुककर उसे सलाम कर रहे थे।
“महारानी साहिबा, समय हो गया है।”
अनाया ने गंभीर आवाज़ में कहा,
“आज से मेरा नाम अनाया शर्मा है।”
बुज़ुर्ग ने पूछा,
“और अगर किसी ने आपकी असली पहचान जान ली तो?”
अनाया कुछ पल चुप रही।
फिर बोली,
“तो सिर्फ मेरी जिंदगी नहीं बदलेगी… पूरा साम्राज्य खतरे में पड़ जाएगा।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
अनाया वास्तव में एक राजकुमारी थी। एक ऐसे शाही परिवार की उत्तराधिकारी, जिसका नाम दुनिया के सामने वर्षों से छिपाकर रखा गया था। उसकी पहचान किसी आम इंसान को नहीं पता थी।
लेकिन आज उसे एक ऐसे आदमी से मिलना था…
जिसके बारे में कहा जाता था कि वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली बिज़नेस साम्राज्यों में से एक का मालिक है। और उसे भी एक रहस्य छिपाना था।
वापस पार्टी में
अनाया अकेली खड़ी थी। आर्यन उसकी तरफ बढ़ा।
“आप यहाँ पहली बार आई हैं?”
अनाया ने उसकी तरफ देखा।
“शायद।”
आर्यन हल्का मुस्कुराया।
“शायद?”
“कभी-कभी पहली मुलाकात भी पुरानी याद जैसी लगती है।”
आर्यन कुछ पल उसे देखता रहा।
“आपकी बातें थोड़ी रहस्यमयी हैं।”
अनाया ने कहा,
“और आपकी आँखें बहुत सारे सवाल पूछती हैं।”
आर्यन पहली बार थोड़ा असहज हुआ।
“आप मुझे जानती हैं?”
अनाया ने मुस्कुराकर कहा,
“शायद जितना आप सोचते हैं, उससे ज्यादा।”
आर्यन की आँखें सिकुड़ गईं।
“आपका नाम?”
“अनाया।”
“पूरा नाम?”
अनाया ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा,
“आज के लिए सिर्फ अनाया।”
आर्यन हल्का मुस्कुराया।
“दिलचस्प।”
“आपका नाम बताने की जरूरत नहीं।”
आर्यन ने भौंहें उठाईं।
“क्यों?”
“क्योंकि पूरा शहर आपको जानता है।”
आर्यन कुछ कह पाता, उससे पहले ही उसकी नजर अनाया के हाथ पर पड़ी।
उसकी उंगली में एक छोटी-सी अंगूठी थी।
आर्यन का चेहरा अचानक बदल गया।
वह अंगूठी…
वह बिल्कुल वैसी ही थी जैसी उसके पिता के पुराने दस्तावेज़ में बनी हुई थी।
आर्यन ने उसका हाथ देखने की कोशिश की।
अनाया ने तुरंत हाथ पीछे कर लिया।
“क्या हुआ?”
आर्यन ने पूछा,
“यह अंगूठी आपको कहाँ से मिली?”
अनाया कुछ पल चुप रही।
फिर बोली,
“यह मेरे परिवार की निशानी है।”
आर्यन ने धीमी आवाज़ में पूछा,
“आपके परिवार का नाम?”
अनाया मुस्कुराई।
“हर परिवार का नाम दुनिया को बताना जरूरी नहीं होता।”
और वह वहाँ से चली गई।
आर्यन उसे जाते हुए देखता रहा।
कबीर उसके पास आया।
“अब तो मानोगे कि तुम उसे जानते हो?”
आर्यन ने सिर हिलाया।
“मैं उसे नहीं जानता।”
“फिर उसकी अंगूठी देखकर तुम्हारा चेहरा क्यों बदल गया?”
आर्यन ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसने सिर्फ इतना कहा,
“उस लड़की के बारे में पता लगाओ।”
उसी रात…
अनाया अपने कमरे में वापस पहुँची। उसने दरवाजा बंद किया।
मीरा उसके पीछे आई। “तुमने उससे बात क्यों की?”
अनाया ने पूछा,
“किससे?”
“आर्यन राजवर्धन से।”
अनाया ने आईने में खुद को देखा।
“क्योंकि मुझे उससे मिलना ही था।”
मीरा ने धीरे से कहा,
“लेकिन तुम्हें पता है कि वह कौन है?”
अनाया ने सिर हिलाया।
“हाँ।”
“और अगर उसे पता चल गया कि तुम कौन हो?”
अनाया की आँखों में चिंता दिखाई दी।
“उसे पता नहीं चलना चाहिए।”
मीरा ने पूछा,
“क्यों?”
अनाया ने धीरे से कहा,
“क्योंकि मेरे पिता की मौत के पीछे जिस व्यक्ति का हाथ है… उसका संबंध आर्यन के परिवार से है।” कमरे में अचानक सन्नाटा छा गया। मीरा कुछ बोल नहीं पाई। अनाया ने अपनी मुट्ठी बंद कर ली।
“मैं यहाँ प्यार करने नहीं आई हूँ।”
“तो?”
अनाया ने खिड़की से बाहर देखा।
“मैं सच जानने आई हूँ।”
दूसरी तरफ…
आर्यन अपने ऑफिस की गुप्त लाइब्रेरी में बैठा था।
उसने एक पुरानी फाइल खोली।
फाइल के पहले पन्ने पर एक तस्वीर लगी थी।
एक शाही परिवार की तस्वीर।
आर्यन ने तस्वीर में एक छोटी लड़की को देखा।
उसके चेहरे पर हैरानी छा गई।
वह छोटी लड़की…
अनाया जैसी दिखती थी।
आर्यन ने फाइल बंद कर दी।
“नहीं…”
उसने खुद से कहा।
“ये संभव नहीं है।”
तभी उसके फोन पर एक अनजान नंबर से संदेश आया।
“जिस लड़की से तुम आज मिले हो, उससे दूर रहो।”
आर्यन ने संदेश पढ़ा।
कुछ सेकंड बाद दूसरा संदेश आया।
“वह तुम्हें बर्बाद कर देगी।”
आर्यन ने तुरंत नंबर पर कॉल किया।
फोन बंद था।
वह कुर्सी से उठा।
तभी कमरे की लाइट बंद हो गई।
अंधेरे में किसी की आवाज़ आई—
“अगर तुमने उसके करीब जाने की कोशिश की…”
आर्यन ने तुरंत अपनी टॉर्च जलाई।
कमरा खाली था।
लेकिन टेबल पर एक लाल लिफाफा रखा था।
आर्यन ने लिफाफा खोला।
अंदर सिर्फ एक तस्वीर थी।
तस्वीर में…
आर्यन और अनाया बचपन में एक साथ खड़े थे।
आर्यन के हाथ काँपने लगे।
“ये तस्वीर…”
उसकी आँखों में अविश्वास था।
उसे अनाया से आज पहली बार मिलना चाहिए था।
फिर यह तस्वीर कैसे?
पीछे एक लाइन लिखी थी—
“तुम दोनों की कहानी आज से नहीं, बहुत पहले शुरू हो चुकी है।”
आर्यन ने तस्वीर को कसकर पकड़ लिया।
और उसी समय उसके फोन पर एक और संदेश आया।
“शादी होने तक सच मत जानना।”
आर्यन की साँस रुक गई।
“शादी?”
वह खिड़की की तरफ गया।
दूर शहर की रोशनियों के बीच एक काली कार खड़ी थी।
कार के अंदर बैठा व्यक्ति आर्यन की बिल्डिंग की तरफ देख रहा था।
उसके हाथ में भी अनाया की तस्वीर थी।
वह मुस्कुराया।
“खेल शुरू हो चुका है।”
अगली सुबह
अनाया को एक संदेश मिला।
“आज शाम तुम्हारी शादी तय होगी।”
उसने फोन को देखा।
उसका चेहरा गंभीर हो गया।
मीरा ने पूछा,
“किसका संदेश है?”
अनाया ने जवाब दिया,
“महल से।”
“किससे शादी?”
अनाया कुछ पल चुप रही।
फिर उसने फोन मीरा की तरफ बढ़ा दिया।
मीरा ने संदेश पढ़ा और हैरान रह गई।
उसमें सिर्फ एक नाम था—
आर्यन राजवर्धन।
अनाया की आँखें बंद हो गईं।
उसके मन में पिछली रात की मुलाकात घूमने लगी।
आर्यन की आँखें…
उसका सवाल…
वह अंगूठी…
और अब शादी।
लेकिन अनाया को नहीं पता था कि उसी समय आर्यन के पास भी बिल्कुल वैसा ही संदेश पहुँच चुका था।
उसने संदेश पढ़ा।
कुछ पल तक चुप रहा।
फिर उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।
“तो आखिरकार…”
कबीर ने पूछा,
“क्या हुआ?”
आर्यन ने फोन उसकी तरफ बढ़ाया।
कबीर ने पढ़ा और चौंक गया।
“तुम्हारी शादी अनाया से?”
आर्यन ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा—
“शायद यही शादी उस राज़ तक पहुँचने की चाबी है।”
उसे नहीं पता था…
कि अनाया भी यही सोच रही थी।
दोनों एक-दूसरे से शादी करने वाले थे।
दोनों एक-दूसरे की असली पहचान से अनजान थे।
और सबसे बड़ा रहस्य यह था—
दोनों पहले से एक-दूसरे की जिंदगी से जुड़े हुए थे।
लेकिन किस तरह?
यह राज़ अभी बाकी था…
जारी रहेगा…
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आज का चैप्टर कैसे था comment करे।