बेबाक सिमरन का दीवानापन Ch. 3

बेबाक सिमरन का दीवानापन - Chapter 3

Posted by Shukla Gyan Sagar • Sep 13, 2026 03:17 PM

धीरे- धीरे आगे बढे और डाइनिंग टेबल पर सिमरन के सामने वाली कुर्सी पर बैठ गए. उनकी नजरें बार- बार सिमरन के कोमल अंगों पर टिक जाती थीं, लेकिन सिमरन के चेहरे पर वही चिर- परिचित, चुलबुली और नटखट मुस्कान खिली हुई थी

दोनों ने एक- दूसरे की आँखों में देखकर हल्की सी मुस्कराहट साझा की और नाश्ते का लुत्फ उठाने लगे. चाय की चुस्कियों और नाश्ते के बीच हल्की- फुल्की बातचीत का सिलसिला भी चलता रहा, और सुबह की यह शुरुआत बेहद रंगीन और दिलचस्प अंदाज में आगे बढने लगी.

नाश्ता खत्म होने के बाद डाइनिंग टेबल पर रखी खाली प्लेट्स और चाय के कप हल्के से शोर के साथ अपनी जगह पर टिके रहे. सिमरन ने अपनी कुर्सी पर थोडा पीछे की ओर झुकते हुए एक लंबी और आरामदायक अंगडाई ली, जिससे उसके सुडौल **** और अधिक उभर कर सामने आ गए.

मिश्रा जी ने अपनी चाय का आखिरी घूंट भरा और मेज पर कप रखते हुए एक हल्की सी सांस छोडी. सिमरन की इस खुली बेपरवाह शैली और सुबह- सुबह के इस आत्मीय माहौल ने उन्हें पूरी तरह से मंत्रमुग्ध कर दिया था.

सिमरन ने अपनी नीली आँखों को मटकाते हुए एक नटखट मुस्कान के साथ कहा, तो मिश्रा जी, नाश्ता तो बहुत शानदार रहा. अब लगता है मुझे भी Collage के लिए तैयार होने की तैयारी शुरू करनी चाहिए, वरना मेरा वो' बचपन का पति' अर्जुन इंतजार करते- करते थक जाएगा.

उसकी इस बात पर मिश्रा जी मुस्कुराए और कुर्सी से उठते हुए बोले, हाँ बेटा, बिल्कुल. तुम्हारी इस मस्तीभरी ऊर्जा के आगे तो दिन का हर पल खास लगने लगता है. अब मैं भी चलता हूँ, Collage के लिए तुम्हें भी देर हो रही होगी.

सिमरन ने खिलखिलाकर सिर हिलाया और मिश्रा जी को विदा करने के लिए मुख्य दरवाजे तक साथ गई. उनके जाने के बाद, सिमरन ने दरवाजा बंद किया और एक बार फिर अपने बेडरूम की तरफ कदम बढा दिए, क्योंकि आज Collage के दूसरे दिन अर्जुन से आमना- सामना होने वाला था, और उसका रोमांच अभी बाकी था.

Collage का विशाल और चहल- पहल से भरा मुख्य गेट पार करते ही सिमरन ने एक बार फिर अपनी काया को संभाल लिया था. इस बार उसने अपने बदन पर एक बारीक ब्रा और एक **** थ्रोंग पहन रखा था, जो उसके गोरे और आकर्षक **** की हर एक रेखा को बखूबी बयां कर रहा था. उसकी हर एक चाल के साथ उसके मांसल नितंब जिस अदा से मटक रहे थे, आने- जाने वाले हर छात्र की नजरें अनायास ही उस पर टिक जाती थीं.

वह अपनी ही धुन में मुस्कुराती हुई कैंपस के लोन से गुजर रही थी कि तभी Collage का जाना- माना और बेपरवाह अय्याश लडका, विक्की, अपनी बुलेट के पास खडा दोस्तों के साथ हुडदंग कर रहा था. जैसे ही उसकी नजर सिमरन के इस मादक और मटकते हुए रूप पर पडी, उसकी आँखें चमक उठीं.

विक्की तुरंत अपनी जगह से फुर्ती से आगे बढा और बिना एक पल गंवाए, सिमरन के पास पहुँचते ही उसे अचानक अपनी मजबूत बाहों में उठा लिया. सिमरन इस अचानक हुए हमले से जरा भी चौंकी नहीं; बल्कि उसके चेहरे पर वही पुरानी, चुलबुली और नटखट हंसी बिखर गई.

विक्की ने उसे हवा में हवा में ही थामे हुए सीधे उसके लाल और रसीले होठों पर अपने होंठ रख दिए और गहराई से उसके होठों का रस चूसने लगा. कैंपस के बीचों- बीच चल रहे इस खुले और शोख रोमांस को देखकर आसपास खडे छात्रों की सांसे थम गईं. सिमरन ने भी इस आक्रामकता का कोई विरोध नहीं किया, बल्कि अपनी मस्ती में चूर होकर अपने कोमल हाथ विक्की के बालों में फिराने लगी और उसके बालों को प्यार से सहलाते हुए इस चुंबन का पूरा लुत्फ उठाने लगी.

कैंपस की तीखी धूप और चारों तरफ फैली छात्रों की भीड के बीच, विक्की और सिमरन के बीच चल रहा यह गर्मा- गरम सिलसिला किसी का भी ध्यान अपनी ओर खींच रहा था. विक्की की मजबूत पकड में हवा में झूली हुई सिमरन पूरी तरह से बेफिक्र थी.

विक्की ने अपनी इच्छाओं को और गहरा करते हुए अपनी सांसों को सिमरन की सांसों में मिला दिया. उसने धीरे- धीरे, बेहद सिद्दत और गहराई से सिमरन के रसीले होठों का सारा रस **** शुरू किया. हर एक सेकंड के साथ उनका यह चुंबन और अधिक मादक और तीव्र होता जा रहा था. सिमरन के होंठों की नरमी और विक्की की बेबाक दीवानगी ने उस माहौल को पूरी तरह से गरमा दिया था.

सिमरन के चेहरे पर जरा सी भी घबराहट या हडबडाहट नहीं थी; उसकी आँखें हल्की सी बंद थीं और वह इस खुलेआम चल रहे पैशन का पूरा आनंद ले रही थी. उसके हाथ अभी भी विक्की के बालों में प्यार से उलझे हुए थे और वह हल्के- हल्के से उसके बालों को सहलाते हुए विक्की को और अधिक उकसा रही थी. जब आखिरकार विक्की ने अपने होंठों को सिमरन के होंठों से अलग किया, तो दोनों की सांसें तेज थीं और सिमरन के होंठ लाल और और भी अधिक मादक लग रहे थे.

कैंपस के उस कोने में जहाँ छात्रों की आवाजाही थोडी कम थी, विक्की का जुनून और सिमरन की बेपरवाही अपनी सारी हदें पार कर रही थी. उसने सिमरन को अभी भी अपनी बाहों में हवा में ही थामा हुआ था.

विक्की के गर्म और कांपते हुए हाथ सिमरन की पीठ पर पहुँचे. उसने बिना एक पल की भी देरी किए, पलक झपकते ही सिमरन की बारीक ब्रा का हुक खोल दिया. ब्रा का बंधन खुलते ही सिमरन के दोनों भारी और सुडौल **** अचानक से आजाद होकर उछल पडे और ठंडी हवा के झोंके में कांपने लगे. विक्की ने तुरंत अपनी नजरें उन पर टिका दीं और बिना किसी संकोच के अपनी **** भरी निगाहों से उन्हें निहारते हुए सीधे उनके पास झुक गया.

उसने अपने गर्म होंठों से सिमरन के एक नाजुक और उभरे हुए **** को अपने मुंह में भींच लिया और जोर- जोर से उसे चूसने लगा. उसके दांतों और जीभ के इस आक्रामक स्पर्श से सिमरन के पूरे **** में एक तेज और मादक सिहरन दौड गई.

इस खुलेआम और बेहद शोख हरकत के बीच भी सिमरन के चेहरे से वह चुलबुली और नटखट मुस्कान गायब नहीं हुई. उसने जरा भी विरोध करने के बजाय अपनी मस्ती को और बढाते हुए अपने कोमल हाथ विक्की के बिखरे हुए बालों में फिराए और बेहद प्यार से उसके बालों को सहलाते हुए उसे इस खेल का और आनंद लेने के लिए उकसाती रही.

कैंपस की खुली हवा और विक्की की बाहों में झूलती हुई सिमरन का यह बेबाक अंदाज अब अपनी चरम सीमा पर पहुँच रहा था. विक्की के गर्म होंठ जब उसके एक **** को छोडकर दूसरे पर मचलने लगे, तो उसकी हरकतें और अधिक आक्रामक हो गईं.

****ों को चूसते- चूसते विक्की के हाथ नीचे की ओर फिसले. उसने सिमरन के नाजुक कूल्हों पर अपनी पकड मजबूत की और पलक झपकते ही उसके **** थ्रोंग की बारीक डोरी को अपनी उंगलियों से खींच दिया. डोरी के खुलते ही वह छोटा सा थ्रोंग भी सिमरन के बदन से अलग होकर Collage के फर्श पर आ गिरा.

अब सिमरन पूरी तरह से **** अवस्था में, विक्की की गोद में हवा में झूली हुई थी. उसके गोरे और कोमल अंगों की हर एक बनावट उस खुली धूप में साफ नजर आ रही थी. उसके मांसल नितंब और उसकी नाजुक पंखुडी अब पूरी तरह से बेपरवाह और खुली हुई थीं, जिस पर आसपास के माहौल का थोडा बहुत असर भी नहीं पड रहा था.

इस सबके बीच भी सिमरन के चेहरे पर वही चिर- परिचित, चुलबुली और नटखट हंसी खिली हुई थी. उसने अपनी आंखों को हल्का सा मटकाया और अपने कोमल हाथों से विक्की के बालों को वैसे ही प्यार और मस्ती के साथ सहलाती रही, मानो यह सब उसके लिए किसी आम खेल से बढकर कुछ न हो. विक्की इस हद तक दीवानों की तरह उसके **** पर अपनी पकड मजबूत किए हुए था, और सिमरन उसकी इस दीवानगी का पूरा मजा ले रही थी.

विक्की का दिल अभी भी इस मादक और बेबाक खेल से पूरी तरह भरा नहीं था. उसने सिमरन के दोनों सुडौल ****ों को बारी- बारी से इतनी शिद्दत और गहराई से चूसा कि उनके **** और अधिक लाल और संवेदनशील हो गए. सिमरन की सांसें हल्की सी तेज थीं, लेकिन उसके चेहरे पर वही नटखट और चुलबुली मुस्कान अभी भी वैसे की वैसे ही टिकी हुई थी.

अपनी **** अवस्था और बेपरवाह अंदाज की जरा भी परवाह किए बिना, सिमरन ने विक्की की बाहों में ही अपनी कमर को थोडा सा मटकाया. विक्की ने उसे जमीन पर उतारा, लेकिन उसके **** पर कपडे का एक धागा तक नहीं था—वह पूरी तरह से ****, अपनी अनूठी खूबसूरती के साथ कैंपस के बीच में खडी थी.

विक्की ने उसका हाथ पकडा और उसे खींचते हुए Collage के लोन के उस कोने में ले गया जहाँ उसके कुछ खास दोस्त पहले से ही हुडदंग मचा रहे थे. अपने दोस्तों के बीच पहुँचते ही विक्की ने बडे गर्व और अय्याश अंदाज में सिमरन को उनके सामने पेश किया.

वहाँ खडे लडकों की आँखें फटी की फटी रह गईं. सिमरन के इस पूरी तरह से खुले, गोरे और मादक बदन को देखकर किसी के भी होश उड सकते थे. लेकिन सिमरन जरा भी नहीं झेंपी; उसने अपनी नीली आँखों को मटकाया, अपने बालों को एक अदा से पीछे किया और एक बेहद शरारती और चुलबुली हंसी के साथ उन सबका स्वागत किया, जिससे वहाँ का माहौल और भी अधिक गर्म और उत्तेजित हो उठा.

कैंपस के उस खुले कोने में, जहाँ विक्की के दोस्तों की निगाहें उसकी हर एक सांस पर टिकी थीं, सिमरन ने अपनी जगह पर खडे होकर एक गहरी और मादक अंगडाई ली. उसके पूरी तरह से ****, गोरे और सुडौल बदन की हर एक रेखा धूप में चमक रही थी.

बिना किसी झिझक के, सिमरन ने अपनी कमर को एक तीखा और **** झटका दिया और वहीं खडे- खडे एक बेहद बोल्ड और उत्तेजक डांस करना शुरू कर दिया. उसके कदमों की ताल के साथ उसके भारी **** हवा में लयबद्ध तरीके से उछलने लगे, और उसके मांसल नितंब आगे- पीछे मटकते हुए उस पूरी महफिल का तापमान बढा रहे थे.

वह कभी अपनी बाहों को हवा में लहराती, तो कभी अपनी कमर को इस अदा से घुमाती कि वहां खडे लडकों की सांसे रुकने लगतीं. उसके चेहरे पर वही जानी- पहचानी, चुलबुली और नटखट मुस्कान खिली हुई थी, जो उसके इस बेबाक और खुले रूप को और भी ज्यादा खतरनाक बना रही थी. विक्की और उसके दोस्त इस **** सौंदर्य के तांडव को अपनी पलकें झपकाए बिना देख रहे थे, और सिमरन अपनी इस बेपरवाह मस्ती का पूरा आनंद ले रही थी.

Collage के उस खुली हवा और मस्ती से भरे माहौल के बीच अचानक ही तेज और गूंजती हुई क्लास की घंटी बज उठी. उस घंटी की आवाज सुनते ही कैंपस की भीड अपनी- अपनी कक्षाओं की तरफ बढने लगी.

सिमरन ने अपनी नटखट हंसी के साथ अपने बदन पर बिखरे उस रोमांच को समेटा. विक्की और उसके दोस्तों की मदहोश नजरों के बीच उसने फुर्ती से जमीन पर पडे अपने थ्रोंग को उठाया और अपने गोरे, कोमल कूल्हों पर चढाकर उसकी डोरी बांध ली. इसके बाद उसने अपनी ब्रा को उठाया और अपने सुडौल ****ों को उसमें समेटते हुए उसका हुक आसानी से लगा लिया.

कपडे पहनने के बाद भी उसकी चाल में वही कातिलाना और मटकती हुई अदा बरकरार थी. वह अपनी नीली आँखों को मटकाती हुई, पूरी तरह से तरोताजा और मस्ती से भरी चाल में सीधे अपने क्लासरूम की तरफ बढ गई.

क्लास में पहुँचकर उसने अपनी बेंच संभाली और बिना किसी हडबडाहट के, अपनी जानी- पहचानी चुलबुली मुस्कान के साथ अपनी किताबों पर ध्यान केंद्रित करते हुए शांति से स्टडी करने लगी, मानो अभी कुछ देर पहले कैंपस में हुआ वह बवाल आम बात हो.

क्लासरूम के भीतर का माहौल बाहर की उस खुली मस्ती और शोर- शराबे से बिल्कुल अलग था. चारों ओर पिनपड्रॉप साइलेंस था, और लेक्चरर ब्लैकबोर्ड पर कुछ लिख रहे थे.

सिमरन अपनी सीट पर पूरी तल्लीनता के साथ बैठी हुई थी. हालांकि उसने अपनी ब्रा और थ्रोंग दोबारा पहन लिए थे, लेकिन उसके बदन पर अभी भी उस खुली धूप और विक्की की बाहों की गर्माहट महसूस हो रही थी. उसके गालों पर एक हल्की सी गुलाबी चमक और होठों पर वही नटखट, चुलबुली मुस्कान तैर रही थी.

वह अपनी नोटबुक के पन्नों पर पेन से नोट्स लिख रही थी, लेकिन उसका ध्यान बीच- बीच में थोडा भटक भी रहा था. क्लास के कुछ लडके जब चोरी- छिपे मुडकर उसकी तरफ देख रहे थे, तो सिमरन अपनी पलकें झुकाकर और अपनी नीली आँखों को मटकाकर उन्हें और अधिक बेचैन कर देती थी. लेक्चरर की आवाज के बीच भी उसका यह बेपरवाह और आत्मविश्वासी अंदाज पूरी क्लास में चर्चा का विषय बना हुआ था, लेकिन वह इन सब से बेपरवाह होकर अपनी पढाई में मग्न हो गई.

क्लासरूम की तीखी घंटी के साथ ही लेक्चर खत्म होने की घोषणा हुई और छात्र अपनी किताबों को समेटकर बाहर की तरफ निकलने लगे. लंच ब्रेक का समय हो चुका था और पूरा Collage कैंपस एक बार फिर से गुलजार हो गया था.

सिमरन ने भी अपनी नोटबुक बंद की और अपनी सीट से उठी. उसकी चाल में वही जानी- पहचानी, कातिलाना और मटकती हुई अदा थी, जो किसी का भी ध्यान खींचने के लिए काफी थी. वह अपनी नीली आँखों को मटकाती हुई क्लासरूम से बाहर निकलकर Collage के कॉमन कॉरिडोर की तरफ बढी.

थोडी दूर आगे बढने पर उसने देखा कि कुछ लडके गोल घेरा बनाकर एक बेंच के पास बैठे हुए थे और किसी के मोबाइल की स्क्रीन पर बहुत ध्यान से कुछ देख रहे थे. उनके चेहरे के हाव- भाव और दबी हुई हंसी से साफ पता चल रहा था कि वे किसी बहुत ही दिलचस्प या मसालेदार वीडियो का आनंद ले रहे हैं.

सिमरन के चेहरे पर एक शैतानी और चुलबुली मुस्कान तैर गई. बिना एक पल की भी झिझक के, वह अपनी मटकती हुई चाल से चलती हुई सीधे उन लडकों के उस ग्रुप के बीच जा पहुँची. उसने किसी की परवाह किए बिना सीधे उन्हीं लडकों के बीच खाली जगह पर अपने सुडौल और मांसल नितंबों को टिकाते हुए आराम से बैठ गई, जिससे अचानक उनके बीच एक हलचल सी मच गई.

लडकों के बीच इस तरह अचानक आकर बैठ जाने से वे पहले से ही हैरान थे, लेकिन सिमरन की इस बेबाक और बोल्ड हरकत ने उन्हें पूरी तरह से अचंभित कर दिया.

अभी वे संभल भी नहीं पाए थे कि तभी सिमरन के पीछे बेंच पर बैठे एक लडके ने बिना किसी झिझक के आगे हाथ बढाया. उसने चुस्ती से सिमरन की बारीक ब्रा का हुक खोल दिया और उसे उसके बदन से अलग करके अपने बगल में रख लिया. ब्रा के निकलते ही सिमरन के दोनों भारी और सुडौल **** अचानक आजाद होकर हवा में झूल गए.

उसी पल, उस लडके ने अपने दोनों गर्म हाथ आगे बढाकर सिमरन के उन कोमल और नंगे ****ों को कसकर थाम लिया. उसके हाथों की पकड और उंगलियों का दबाव पाकर सिमरन के **** और अधिक कडे और संवेदनशील हो गए.

इतनी खुली और अंतरंग हरकत के बावजूद, सिमरन के चेहरे पर जरा सी भी शिकन या घबराहट नहीं आई. उसने अपनी गर्दन हल्की सी तिरछी की, अपनी नीली आँखों को मटकाया और खिलखिलाकर हंसते हुए बडे चुलबुले अंदाज में उन लडकों से बोली, अरे यार! तुम लोग तो ऐसे वीडियो देखने में बिजी हो गए कि मुझे भूल ही गए. जरा मुझे भी तो दिखाओ मोबाइल में क्या देख रहे हो!

उसकी इस बेपरवाह हंसी और मादक लापरवाही ने आसपास बैठे सभी लडकों के होश उडा दिए और उस लंच ब्रेक का माहौल और अधिक गरमा गया.

लडकों के बीच का माहौल पूरी तरह से गर्मा चुका था. पीछे बैठे लडके ने सिमरन के दोनों भारी और नंगे ****ों को अपनी हथेलियों में कस लिया और उन्हें धीरे- धीरे और गहराई से मसलने लगा. उसके हाथों के इस जोरदार स्पर्श से सिमरन का **** सिहर उठा, लेकिन उसके चेहरे पर वही नटखट और चुलबुली मुस्कान टिकी रही.

अभी वह लडका ****ों को मसल ही रहा था कि तभी पास में बैठे एक दूसरे लडके की नजर सिमरन के कूल्हों पर पडी. उसने बिना एक पल गंवाए फुर्ती से हाथ बढाया और सिमरन के **** थ्रोंग की बारीक डोरी को एक झटके में खींच दिया. डोरी खुलते ही वह छोटा सा थ्रोंग भी सिमरन के बदन से उतरकर उस लडके के बगल में जा गिरा.

अब सिमरन पूरी तरह से **** अवस्था में, लडकों के उस ग्रुप के बीच बेपरवाह बैठी हुई थी. उसके गोरे और कोमल अंग पूरी तरह से खुले हुए थे, लेकिन उसे इस बात की जरा भी परवाह नहीं थी.

अपनी मस्ती और उसी चुलबुले अंदाज में हंसते हुए सिमरन ने अपनी बांह आगे बढाई और उस लडके के हाथ से मोबाइल छीन लिया. उसने फोन को अपनी आँखों के सामने किया और बडे मजे से स्क्रीन पर चल रहे वीडियो को देखने लगी, मानो आसपास हो रही इन तमाम हरकतों से उसे कोई फर्क ही नहीं पडता हो.

लंच ब्रेक के उस शोरगुल और भीड- भाड के बीच, सिमरन का यह बेबाक और लापरवाह अंदाज Collage के माहौल में एक अलग ही सनसनी पैदा कर रहा था. वह उन लडकों के बीच आराम से पालथी मारकर बैठी हुई थी, और उसके **** पर कपडे का एक नामोनिशान तक नहीं था.

उसके हाथ में पकडा हुआ मोबाइल उसकी आँखों के सामने था, जिसमें चल रहे वीडियो पर वह पूरी तरह से ध्यान लगाए हुए थी. उसकी इस स्थिति ने आगे बैठे लडकों को एक बेहद खुला और मादक नजारा दे रखा था—सिमरन के दोनों पाँव मुडे होने के कारण उसकी कोमल और संवेदनशील पंखुडी पूरी तरह से खुली हुई थी, और सामने बैठे लडकों की टकटकी निगाहें बिना पलक झपकाए लगातार उसी हिस्से पर टिकी थीं.

उधर, उसके ठीक पीछे बैठा लडका अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा था. वह सिमरन के दोनों भारी और मखमली ****ों को अपनी हथेलियों में लेकर लगातार जोर- जोर से मसल रहा था. लगातार हो रही इस मालिश और दबाब के कारण सिमरन के वे सुडौल **** अब काफी हद तक ढीले और और भी अधिक लचीले हो चुके थे, जो उसकी हर हल्की सी हरकत के साथ थिरक रहे थे.

इन सब तीव्र शारीरिक उत्तेजनाओं के बीच भी सिमरन के चेहरे पर जरा सा भी तनाव या झिझक नहीं थी. वह मोबाइल की स्क्रीन पर टकटकी लगाए, बडे मजे से वीडियो का आनंद ले रही थी और अपनी इस पूरी तरह से खुली और बेपरवाह जिंदगी का भरपूर लुत्फ उठा रही थी.

लडकों के ग्रुप के बीच का वह कोना पूरी तरह से मादक और उत्तेजक ऊर्जा से भर चुका था. पीछे बैठे लडके ने सिमरन के दोनों भारी और सुडौल ****ों को अपनी हथेलियों से लगातार मसल- मसल कर उन्हें और अधिक ढीला और लचीला बना दिया था. उसके हर एक दबाव से वे अंग और भी ज्यादा संवेदनशील हो गए थे.

****ों को पूरी तरह से ढीला और लाल करने के बाद, उस लडके का उत्साह और बढ गया. उसने अपने गर्म होंठ सिमरन के कंधों पर टिका दिए और धीरे- धीरे चूमते हुए नीचे की ओर बढने लगा. उसने उसके चिकने कंधों से लेकर उसकी कोमल गर्दन और फिर उन ढीले पड चुके ****ों के आसपास अपनी नम और थिरकती हुई जीभ का स्पर्श देना शुरू किया. उसके इस आक्रामक और अंतरंग दुलार से सिमरन के पूरे बदन में हल्की सी सिहरन दौड गई.

लेकिन सिमरन की बेपरवाही का यह आलम था कि इन शारीरिक सरगोशियों और चूमने- चाटने के बीच भी उसके चेहरे की वह चुलबुली और नटखट मुस्कान जरा भी फीकी नहीं पडी. उसने अपनी नीली आँखों को हल्का सा मटकाया और अपने हाथ में पकडे मोबाइल फोन की स्क्रीन पर टकटकी लगाए बडे मजे से वीडियो देखने में व्यस्त रही, मानो उसके **** पर हो रहा यह सब कुछ उसके लिए किसी आम और सुहाने मनोरंजन से बढकर कुछ न हो.

Collage के कॉरिडोर में माहौल अब अपनी चरम सीमा पर था. पीछे बैठा लडका जहाँ सिमरन के कंधों और ढीले पड चुके ****ों पर अपने गर्म होंठों का जादू चला रहा था, वहीं आगे बैठे लडकों में से एक से अब और रहा नहीं गया.

वह लडका फुर्ती से थोडा और आगे झुका और बिना किसी झिझक के अपनी गर्म और थिरकती हुई जीभ सिमरन की खुली हुई और बेहद संवेदनशील पंखुडी पर फेरने लगा. उसने अपनी जीभ से उस नाजुक अंग को चाटना शुरू कर दिया, जिससे एक तीव्र और मादक सिहरन सीधे सिमरन की रीढ की हड्डी में दौड गई.

इस दोहरी और बेहद अंतरंग हरकत के बीच—जहाँ आगे से उसकी पंखुडी चाटी जा रही थी और पीछे से उसके ****ों को सहलाया जा रहा था—सिमरन की बेपरवाही देखने लायक थी. उसके चेहरे पर वही चिर- परिचित, चुलबुली और नटखट हंसी खिली हुई थी. वह खिलखिलाकर हँसी और अपनी नीली आँखों को मटकाते हुए बडे आराम से अपने हाथ में पकडा मोबाइल फोन थामे वीडियो देखने में मग्न रही, मानो उसके **** पर हो रहा यह खुला खेल कोई आम बात हो.

उस दोहरी और गहरे अंतरंग स्पर्श के बीच सिमरन के **** की गर्मी और उत्तेजना अपनी पराकाष्ठा पर पहुँच चुकी थी. आगे बैठे लडके की जीभ के लगातार और गहरे वार से सिमरन की **** छलक उठी, और उसकी संवेदनशील पंखुडी से गाढा, चिपचिपा रस बाहर टपकने लगा.

लडके ने बिना एक पल गंवाए, अपनी जीभ से उस बहते हुए रस को चाटना शुरू कर दिया. वह उस मादक तरल पदार्थ को बडे चाव और दीवानगी के साथ पीने लगा, जिससे वह लडका और उसके आसपास बैठे बाकी छात्र पूरी तरह से होश खो बैठे.

इस बेहद प्रखर और खुले शारीरिक मिलन के बीच भी सिमरन की मस्तमौला अदा में कोई कमी नहीं आई. उसके चेहरे पर वही नटखट और चुलबुली मुस्कान खिली रही. वह खिलखिलाकर हँसी, अपनी नीली आँखों को मटकाया और बडे आराम से मोबाइल की स्क्रीन पर चल रहे वीडियो को देखती रही, मानो वह किसी पार्क में बैठकर आइसक्रीम का मजा ले रही हो.

आगे बैठे लडके ने अपनी जीभ और होंठों का पूरा कौशल दिखाते हुए सिमरन की संवेदनशील पंखुडी से रिसने वाले उस गाढे और चिपचिपे रस की एक- एक बूंद को चाटकर पूरी तरह से साफ कर दिया. वह उस मादक तरल को दीवानों की तरह पी गया, जिससे उसकी सांसें और अधिक भारी हो गईं.

उसके आसपास बैठे बाकी लडके इस खुले और मादक नजारे को सांस रोके हुए देख रहे थे. लेकिन इस पूरी तीव्र हलचल के बीच भी सिमरन का अंदाज हमेशा की तरह बेपरवाह और मस्तमौला बना रहा.

उसके चेहरे पर वही चुलबुली और नटखट हंसी तैर रही थी. उसने अपनी नीली आँखों को हल्का सा मटकाया, अपने फोन की स्क्रीन पर उंगली चलाई और बडे मजे से वीडियो देखते हुए अपनी इस असीम आजादी और मस्ती का पूरा लुत्फ उठाती रही.

Collage के उस कोने में मानो समय थम सा गया था. विक्की के दोस्तों का वह ग्रुप अब एक- एक करके सिमरन की इस पूरी तरह से खुली और **** अवस्था का हिस्सा बन चुका था. आगे और पीछे बैठे उन लडकों ने बारी- बारी से सिमरन के हर एक नाजुक अंग पर अपनी **** और दीवानगी की पूरी छाप छोडी. किसी ने उसके ढीले पड चुके ****ों को अपनी गिरफ्त में लिया, तो किसी ने उसकी पंखुडी की हर एक सिहरन को अपनी सांसों और स्पर्श से जीवंत कर दिया.

लडकों की इस लंबी फेहरिस्त ने अपनी सारी इच्छाएं और लालसाएं सिमरन के इस कोमल बदन पर पूरी कर लीं, और चारों तरफ एक भारी, मादक और गर्म हवा तैरने लगी.

लेकिन इन सबके बीच अगर कुछ नहीं बदला था, तो वह था सिमरन का वह बेपरवाह, चुलबुला और मस्तमौला अंदाज. उसके बदन पर पसीने की हल्की बूंदें चमक रही थीं, लेकिन उसके चेहरे पर वही प्यारी और नटखट हंसी खिली हुई थी. उसने अपनी नीली आँखों को हल्का सा मटकाया और अपने हाथ में थामे मोबाइल फोन पर वीडियो देखती रही, मानो आसपास कुछ हुआ ही न हो और वह बस अपने दोस्तों के साथ किसी पार्टी में बैठी हो.

मोबाइल की स्क्रीन पर चल रहा वह वीडियो आखिरकार खत्म हो गया. सिमरन ने एक हल्की सी अंगडाई ली और अपनी नीली आँखों को मटकाते हुए फोन को वापस उस लडके के हाथ में थमा दिया, जिसने अभी- अभी उसके बदन पर अपनी दीवानगी की छाप छोडी थी.

वहाँ बैठे सभी लडकों की सांसें अभी भी तेज थीं और वे इस अनूठे अनुभव के नशे में डूबे हुए थे, लेकिन सिमरन पूरी तरह से सामान्य और चुलबुली बनी हुई थी. उसने फर्श पर पडे अपने थ्रोंग को उठाया और अपने गोरे, कोमल कूल्हों पर चढाकर उसकी डोरी बांध ली. इसके बाद उसने अपनी ब्रा को उठाया और अपने सुडौल ****ों को उसमें समेटकर उसका हुक लगा लिया.

कपडे पहनने के बाद भी उसकी चाल में वही कातिलाना और मटकती हुई अदा बरकरार थी. वह अपनी नटखट हंसी बिखेरती हुई लडकों के उस ग्रुप से उठी और Collage के कॉरिडोर से होते हुए सीधे कैंटीन की ओर बढ गई, ताकि इस सब के बाद कुछ ठंडा- ठंडा खाकर अपनी भूख और प्याس मिटा सके.

Collage के कॉरिडोर से गुजरती हुई सिमरन की हर एक चाल में एक अलग ही मस्ती और आकर्षण था. उसके गोरे और कोमल नितंब हवा में लयबद्ध तरीके से मटक रहे थे, और उसके चेहरे पर वही चिर- परिचित, नटखट और चुलबुली मुस्कान तैर रही थी. थोडी देर पहले लडकों के बीच हुए उस गरमा- गरम और खुले खेल का उसके मन पर जरा भी असर नहीं था; वह पूरी तरह से बेफिक्र और अपनी धुन में मस्त थी.

चलते- चलते आखिरकार वह Collage की कैंटीन में जा पहुँची. दोपहर के इस वक्त कैंटीन में छात्रों की अच्छी खासी भीड थी—कुछ लोग अपनी प्लेट्स में स्नैक्स लिए हँसी- मजाक कर रहे थे, तो कुछ अपने दोस्तों के साथ गप्पें लडा रहे थे. जैसे ही सिमरन ने अपनी मटकती हुई चाल के साथ कैंटीन के दरवाजे से अंदर कदम रखा, वहाँ मौजूद कई लडकों की नजरें तुरंत उसकी तरफ खिंच गईं.

उसकी कातिलाना अदा और चेहरे की उस मासूम हंसी ने एक बार फिर से पूरे कैंटीन का माहौल गरमा दिया. सिमरन ने बिना किसी झिझक के

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