Fanaa tere junoon me Ch. 2

पहली मुलाकात और भीगे बदन

Posted by Queen Sona • Sep 17, 2026 11:39 AM

अविनाश राठौर के पत्नी का नाम था शानू राठौर ।। इनके दो बच्चे थे एक बेटा और एक बेटी बेटा का नाम गुरु राठौर और वही बेटी का नाम संवि राठौर।।

गुरु खूंखार राक्षस से काम नहीं और वहीं दूसरी तरफ उसकी बहन संवि राठौर बिल्कुल एक बहती गंगा की शीतल की तरह थी ।।बहुत मासूम भोली और राठौर खानदान घर की इकलौती बेटी..!! इसलिए सब उसे बहुत नाजों से पाल थे।।

अम्मा जी के दूसरे बेटे का नाम पुष्कर राठौर उसकी पत्नी का नाम मानवी राठौर।। पुष्कर और मानवी के बस एक बैठे थे... रंजीत राठौर और उसकी पत्नी रोशनी राठौर।।

गुरु जैसे ही हवेली के अंदर कदम रखा तभी एक तेज आवाज वहां गूंजी "रुक जा गुरु..."!!

यह आवाज किसी और कि नहीं गुरु के पिता अविनाश राठौर की थी।। अपने पिता की आवाज सुनकर गुरु रुक गया और अविनाश जी के सामने आकर खड़ा हो गया।।।

वहीं अविनाश जी गुरु को ऊपर से नीचे देखते हुए कहें "तुमने उस लड़के के साथ ऐसा  बेदर्दी क्यों की"!!

गुरु बिना इधर-उधर की बातें किया सीधा जवाब दिया "उसने हमारे साथ गद्दारी की गुरु राठौर के साथ ऐसे  कैसे माफ कर देते हैं और हमारे कानून में माफी नहीं मौत हुआ मौत ...""!!कहकर गुरु बिना किसी के तरफ देखे हुए अपने कमरे की तरफ बढ़ गया।

वही अम्मा जी अपने झूला पर से उठ छड़ी पटकते हुए कहीं "हमने पहले ही कहा था हमारा  गुरु कौनो गलती कर ही नहीं सकता है ।।।यू छोड़ा ने हमारे गुरु के साथ धोखेबाजी की गुरु ने उसे सजा दिया ।।खामखां  तुम लोग हमारे बबुआ के पीछे पड़े रहते हो ....जाओ सब अपने अपने काम करो"।।

अविनाश जी भी अपनी अम्मा से कोई बहस नहीं कर सकते थे .....इसलिए वह बाहर निकल गए ।।

अगला दिन ,

रेवा  ट्रेन से उतरकर बाहर की तरफ देखते हुए कहीं "शुक्र है फाइनली हम बनारस आ गए"।।

तभी रेवा के पापा राजेश जी रेवा को बुलाते हुए कहें "रेवा बेटा इधर आओ "!!

रेवा अपने पापा के पास जाते हुए बोलि"जी पापा "।।

रेवा  के पापा सरकारी ऑफिस में काम करते थे ।।उनका नौकरी पोस्ट ऑफिस में था ।।जिसका ट्रांसफर होने की वजह से उन्हें बनारस आना पड़ा ।।इसलिए उन्हें अपने  पूरे परिवार के साथ बनारस में शिफ्ट होना परा।।

रेवा  के पापा उसे कैब बुक करने के लिए बोले ।।रेवा तुरंत कैब बुक कर देती है ।।कुछ देर में उनका कैब  भी आ जाता है ।।वह तीनों कैब में बैठकर सरकार के दिए हुए घर की तरफ बढ़ गए।।

रेवा कैब में बैठे हुए बाहर का नजारा इंजॉय कर रही थी।। क्योंकि हल्की-हल्की बारिश होने की वजह से बाहर  खिड़कियों से  आ रही ठंडी हवा उसे सुकून पहुंच रही थी ।। तभी अचानक कैब रुक गया ।।

रेवा अपने पापा की तरफ देखते हुए कहीं "क्या हुआ पापा"।।

राजेश जी बाहर की तरफ देखते हुए कहे "पता नहीं बेटा तुम लोग यहीं रुको ,मैं देख कर आता हूं ....आखिर बातक्या है.. ?"बोल कल राजेश जी कैब से उतरकर बाहर चलेगा।।

दूसरी तरफ ,

गुरु अपनी जीत सड़क के बीचो-बीच लगाया हुआ था और खड़े होकर एक लड़की को बहुत बेदर्दी से पीटे जा रहा था ...! उसे लड़की की हालत  बहुत ज्यादा बत्तर थी ।।उसके अगल-बगल बंटी और राघव दोनों खड़े थे।।

तभी राजेश जी गुरु पर चिल्लाते हुए कहें "तुम जैसों की वजह से शरीफ इंसान का चलना या बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है ।।ऐसे खुलेआम सड़क पर गुंडागर्दी कर रहे हो.... शर्म नहीं आ रही है तुम्हें"।।

राजेश जी की आवाज सुनकर गुरु अपनी तिरछी नजरों से उसे देखने लगा।।

तभी बंटी आगे आते हुए कहा "वो अंकल जी सब यहां चुपचाप से खड़े हैं ना तो तुम भी यहां चुपचाप खड़े होकर तमाशा देखो .....ज्यादा ज्ञान पर देने की कोशिश ना करो और अगर ज्यादा देखकर तकलीफ हो रही है ना तो यहां से चलते बनो ...वरना...

राजेश जी वैसे ही अकड़ते हुए कहें "वरना क्या "?

राजेश जी के बकवास सुनकर गुरु अपनी दो उंगलियों से सर सहलाते हुए उसे आदमी को छोड़कर खड़ा हुआ और अपनी पैंट के पॉकेट से गण निकालकर राजेश जी के ऊपर तानते हुए कहा "वरना बिना डीजे के तमंचे पे नचवा  देंगे तो  वे का समझे ...?!!

अपने सर पर बंदूक तना देख राजेश जी के माथे पर पसीने के बंदे चमकने लगी ।।वही कैब में बैठे रेवा और उसकी मां जब यह सब देखते हैं तो बहुत डर जाते हैं ।।। रेवा  जल्दी से कब का डोर खोल बाहर निकाल कर राजेश जी के पास आ गए।।

रेवा  एक नजर अपने डरे हुए पापा को देखते हैं और फिर सामने तना हुआ बंदूक ।।वैसे रेवा को झुकना पसंद नहीं था ।।लेकिन यह बात उसके पापा की थी इसलिए वह गुरु के सामने हाथ जोड़ते हुए कहीं "प्लीज मेरे पापा को छोड़ दीजिए मैं इनके तरफ से माफी मांगती हूं"।।

गुरु जब रेवा को देखा है तो बस रेवा में देखते ही रह गया ।।। आज से पहले उसे लड़कियों में कुछ खास दिलचस्पी नहीं दिखाई  थी और नहीं  किसी लड़की की तरफ देखा था ।।।

लेकिन रेवा की तरफ पता नहीं क्यों बार-बार अट्रैक्ट हो रहा था ।।एक तो बार बारिश हो रही थी जिस वजह से रेवा का पिंक कलर का पहना हुआ कुर्ती पूरा जिला  होकर उसके बॉडी से चिपक गया था।। जिस वजह से उसका बॉडी काफी हद तक रिवील हो रहा था।।

गुरु का तो ध्यान रेवा की किसी बातों पर गया भी नहीं ।।। वह बस रेवा  का बॉडी निहारते   रह गया ...क्योंकि रेवा का फिगर ही ऐसा था कोई भी लड़का एक नजर देख ले तो उसे भा जाए वह।।

गुरु की नजर बार-बार रेवा के ठंड से कांपते या फिर डर से काटते होठों पर .....उसकी आंखों की पलकें ....भीगे हुए बाल जो उसके गालों से चिपके हुए थे ... गुरु जैसे इनमें  खो सा गया था।।

आसपास बहुत सारे लोग जमा हो गए थे।। इसलिए मामला को समझते हुए राघव आगे आते हुए कहा  "आप लोग जाइए यह से ।।।

रेवा जल्दी से अपने पापा का हाथ पकड़ कर कैब  की तरफ बढ़ गई ।।

वही गुरु जाती हुई रेवा को देखते रह गया जब तक वह उसकी आंखों से ओझल न  हो गई।।

Hope aapko story pasand aai ho 🧿

Comment me jarur bataiye next chapter ke liye ,💋

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