Drive Me Crazy Ch. 1

Drive Me Crazy - Chapter 1

Posted by The Dark Quill • Sep 18, 2026 02:39 PM

अध्याय 1: द एपेक्स रूल (The Apex Rule)

सेंट जूड यूनिवर्सिटी (St. Jude University) महज़ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं था; यह दिल्ली-एनसीआर के अरबपतियों, राजनेताओं और बिजनेस टायकून्स के बिगड़ैल वारिसों का एक शानदार प्लेग्राउंड था। यहाँ की हवा में किताबों की खुशबू से ज़्यादा 'टॉम फोर्ड' और 'चैनल' के महंगे परफ्यूम की महक तैरती थी। यहाँ स्टूडेंट आईडी कार्ड से ज़्यादा अहमियत इस बात की थी कि आपके बाप के गैरेज में कितनी इंपोर्टेड कारें खड़ी हैं।

और इसी चमचमाती, खोखली दुनिया के बीच खड़ी थी तारा देसाई।

तारा ने अपनी पुरानी, घिसी हुई स्नीकर्स की तरफ देखा और फिर अपने आस-पास गुज़रते उन स्टूडेंट्स को निहारा जिनके जूतों की कीमत शायद उसके पूरे साल की हॉस्टल फीस के बराबर थी। उसने अपनी बाहों में दबाए पुराने, सेकंड-हैंड इंजीनियरिंग के मोटे जर्नल्स को और कसकर पकड़ लिया। वह यहाँ 'मेरिट' पर आई थी। वह उन चंद बदनसीब स्कॉलरशिप स्टूडेंट्स में से एक थी जिन्हें इस एलीट कॉलेज में 'चैरिटी केस' या 'ट्रैश' (कचरा) कहा जाता था।

सेंट जूड में नियम बहुत सीधे थे—अगर तुम्हारे पास पैसा नहीं है, तो अपनी नज़रें झुका कर रखो, दीवारों से सटकर चलो, और कभी भी, किसी भी हाल में 'द एपेक्स क्लब' के रास्ते में मत आओ।

द एपेक्स क्लब। यूनिवर्सिटी की सबसे एलीट, सबसे ताकतवर और सबसे खतरनाक अंडरग्राउंड मोटरस्पोर्ट्स रेसिंग टीम। लेकिन असल में, वे सिर्फ एक टीम नहीं थे। वे इस कॉलेज के देवता थे। चार लड़के, जिनके इशारों पर पूरा मैनेजमेंट नाचता था।

सुबह के 9 बज रहे थे। कैंपस के मेन कोर्टयार्ड में हमेशा की तरह अमीर स्टूडेंट्स का मेला लगा था। कोई अपने वीकेंड पेरिस ट्रिप की डींगे हांक रहा था, तो कोई डिज़ाइनर बैग्स फ्लॉन्ट कर रहा था। तारा अपनी दोस्त, रिया (जो खुद एक स्कॉलरशिप स्टूडेंट थी) के साथ लाइब्रेरी की तरफ बढ़ रही थी।

तभी... पूरी यूनिवर्सिटी की हवा बदल गई।

दूर से आती हुई, कान फाड़ देने वाली इंजनों की दहाड़ (roar) ने पूरे कोर्टयार्ड में सन्नाटा खींच दिया। वो किसी आम कार की आवाज़ नहीं थी। वो कस्टमाइज़्ड V8 और V12 इंजनों की वो खूंखार गुर्राहट थी जो सीने में कंपन पैदा कर देती थी।

"वो आ गए," रिया ने कांपती हुई आवाज़ में कहा और तारा का हाथ पकड़कर उसे रास्ते से किनारे खींचने लगी।

तारा ने अपनी भौहें सिकोड़ीं। कोर्टयार्ड के बीचों-बीच बने वीआईपी पार्किंग ज़ोन (जो अनौपचारिक रूप से सिर्फ उनके लिए रिज़र्व था) की तरफ हर किसी की नज़रें घूम गईं। भीड़ ऐसे छंट गई जैसे किसी ने बीच में से रास्ता चीर दिया हो। कोई भी उनकी कारों के 10 फीट के दायरे में भी खड़ा नहीं होना चाहता था।

पहला खुलासा - द चार्मर (The Charmer)

सबसे पहले एक ब्राइट येलो पोर्श 911 (Porsche 911) आकर रुकी। उसके दरवाज़े खुले और उसमें से नील आहूजा बाहर निकला। नील के चेहरे पर वो सिग्नेचर प्लेबॉय स्माइल थी जो कैंपस की आधी लड़कियों का दिल धड़काने के लिए काफी थी। उसने अपनी महंगी गुच्ची एविएटर्स उतारीं और भीड़ की तरफ देखकर एक आँख मारी। वो दिखने में जितना स्वीट लगता था, अंदर से उतना ही शातिर था।

दूसरा खुलासा - द आइस किंग (The Ice King)

नील की कार के ठीक बगल में एक स्लीक, मैट-ब्लैक एस्टन मार्टिन (Aston Martin) रुकी। इंजन बंद हुआ और आर्यन खन्ना बाहर आया। आर्यन के चेहरे पर कोई भाव नहीं था। वो हमेशा शांत रहता था, एक खतरनाक खामोशी की तरह। उसकी आँखें इतनी ठंडी और कैलकुलेटिव थीं कि अगर वो किसी को घूर ले, तो सामने वाले के पसीने छूट जाएं। वो टीम का दिमाग था, जिसे कोई नहीं पढ़ सकता था।

तीसरा खुलासा - द हॉटहेड (The Hothead)

तभी एक भारी-भरकम, कस्टमाइज़्ड फोर्ड मस्टैंग (Ford Mustang) ने ज़ोरदार ड्रिफ्ट मारते हुए पार्किंग में एंट्री ली। टायरों के घिसने की तेज़ आवाज़ और उड़ते हुए धुएं के बीच से देव सिंह बाहर निकला। देव किसी ग्रीक गॉड की तरह मस्कुलर और रफ था। उसकी बांहों पर बने टैटू और उसके चेहरे का हमेशा चढ़ा हुआ गुस्सा उसे एक गुंडे जैसी वाइब देते थे। वो टीम का मसल था, जो बिना सोचे किसी का भी जबड़ा तोड़ने के लिए तैयार रहता था।

तीनों लड़के अपनी कारों से टेक लगाकर खड़े हो गए, जैसे किसी का इंतज़ार कर रहे हों। पूरी भीड़ की सांसें अटकी हुई थीं।

और फिर... वो आवाज़ आई।

एक ऐसी गहरी, खूंखार दहाड़ जिसने बाकी तीनों कारों की आवाज़ को बौना साबित कर दिया। एक ब्लड-रेड फेरारी SF90 (Ferrari SF90) मेन गेट से अंदर दाखिल हुई। कार नहीं, वो सड़क पर दौड़ता हुआ एक दानव लग रही थी। उसकी स्पीड इतनी तेज़ थी कि आस-पास खड़े स्टूडेंट्स डर कर और पीछे हट गए।

कार ठीक बीचों-बीच, सबसे बड़े पार्किंग स्पॉट पर आकर एक झटके में रुकी। टायरों से हल्का सा धुआं उठा।

चौथा खुलासा - द किंग (The King)

कुछ सेकंड तक कोई बाहर नहीं आया। टेंशन इतनी थी कि हवा को चाकू से काटा जा सके। फिर ड्राइवर साइड का दरवाज़ा खुला।

लंबे, काले मिलिट्री-स्टाइल बूट्स ज़मीन पर पड़े। फिर ब्लैक डेनिम और एक महंगी कस्टम लेदर जैकेट। अंत में, कबीर सिंघानिया बाहर निकला।

तारा की सांसें एक पल के लिए रुक गईं। कबीर का औरा (aura) इतना इंटेंस, इतना डार्क और पावरफुल था कि वो आस-पास की हर चीज़ को निगलता हुआ महसूस हो रहा था। उसके बिखरे हुए जेट-ब्लैक बाल, तीखी जॉलाइन (jawline), और वो आँखें... भगवान, उसकी आँखें किसी तूफान से कम नहीं थीं। उनमें ऐसा घमंड और ऐसी बेरुखी थी, जो सिर्फ उस इंसान में हो सकती है जिसने अपनी पूरी ज़िंदगी में कभी 'ना' शब्द नहीं सुना हो।

कबीर सिंघानिया। एपेक्स क्लब का कप्तान, लीड रेसर, और सेंट जूड यूनिवर्सिटी का बेताज बादशाह।

कबीर ने अपनी कार का दरवाज़ा ज़ोर से बंद किया। चारों लड़के एक साथ कैंपस की सीढ़ियों की तरफ बढ़ने लगे। उनके चलने का अंदाज़ ही बता रहा था कि वे इस दुनिया के मालिक हैं।

तारा की दोस्त रिया इतनी घबराई हुई थी कि उसके हाथ से उसका प्रोजेक्ट मॉडल और कॉफी का कप छूट गया। कॉफी सीधे जाकर आर्यन के जूतों के पास गिरी और कुछ छींटें कबीर के ब्लैक बूट्स पर जा पड़े।

पूरे कोर्टयार्ड में सन्नाटा छा गया। हवा जैसे जम गई।

कबीर के कदम रुक गए। उसने अपनी नज़रें झुकाकर अपने जूतों पर पड़े उन भूरे छींटों को देखा, और फिर धीरे से अपना सिर उठाकर रिया की तरफ देखा।

रिया का चेहरा खौफ से सफेद पड़ चुका था। वो कांपने लगी। "स... सॉरी। आई एम सो सॉरी... मुझसे गलती से हो गया।"

नील ने हल्की सी हंसी दबाई। देव ने अपनी गर्दन चटकाते हुए एक कदम आगे बढ़ाया, लेकिन कबीर ने हाथ उठाकर उसे रोक दिया।

कबीर धीमी, लेकिन बेहद खतरनाक आवाज़ में बोला, "तुम कौन हो?"

"र... रिया शर्मा। सेकंड ईयर।"

कबीर ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा, उसकी सस्ती कपड़ों की तरफ नफरत भरी नज़र डाली। "स्कॉलरशिप ट्रैश (Scholarship Trash)।" उसने ऐसे कहा जैसे वो कोई गाली दे रहा हो। "तुम्हें क्या लगता है, तुम्हारे ये दो कौड़ी के आंसू मेरे बूट्स साफ कर देंगे? इनकी कीमत तुम्हारे बाप की पूरी ज़िंदगी की कमाई से ज्यादा है।"

भीड़ में से कुछ अमीर स्टूडेंट्स हंसने लगे। रिया की आँखों में आंसू आ गए। वो ज़मीन पर बैठकर अपने प्रोजेक्ट के टूटे हुए टुकड़े समेटने लगी।

तारा के अंदर का लावा फट पड़ा। वो हमेशा चुप रहती थी, लेकिन यह बदतमीज़ी उसकी बर्दाश्त के बाहर थी। इससे पहले कि वो खुद को रोक पाती, वो भीड़ से बाहर निकली और सीधे कबीर के सामने जाकर खड़ी हो गई।

"ये महज़ एक एक्सिडेंट था," तारा की आवाज़ साफ और बुलंद थी, जिसमें रत्ती भर भी खौफ नहीं था।

कबीर, जो अब तक रिया को घूर रहा था, उसकी नज़रें तारा पर आकर टिक गईं। उसने अपनी एक भौंह ऊपर उठाई। एक और 'चैरिटी केस' उसके सामने खड़े होने की हिम्मत कर रही थी?

तारा कबीर से लंबाई में काफी छोटी थी, लेकिन उसकी रीढ़ की हड्डी एकदम सीधी थी। उसने कबीर की उन तूफानी आँखों में सीधा देखा।

"ये साफ करने की तुम्हारी कोई ज़रूरत नहीं है, रिया। उठो यहाँ से," तारा ने रिया का हाथ पकड़कर उसे उठाया।

देव आगे बढ़ा, "ऐ लड़की, ज़बान संभाल कर बात कर। जानती है तू किससे..."

"शांत, देव," कबीर ने बिना तारा से नज़रें हटाए कहा। कबीर धीरे-धीरे तारा के करीब आया। वह इतना करीब आ गया कि तारा को उसकी लेदर जैकेट से आती मोटर ऑयल और किसी बेहद महंगे मिंट कोलोन (cologne) की खुशबू साफ महसूस होने लगी।

कबीर ने अपनी गर्दन थोड़ी झुकाई, अपने चेहरे को तारा के चेहरे के खतरनाक हद तक करीब लाते हुए कहा, "तुम्हें क्या लगता है तुम यहाँ क्या कर रही हो, स्वीटहार्ट? हीरो बन रही हो?" उसकी आवाज़ में एक अजीब सा खुरदरापन था, जो कानों में चुभता भी था और एक अजीब सी सिहरन भी पैदा करता था।

"मैं बस तुम्हें यह बता रही हूँ कि तुम्हारी महंगी कारें और महंगे जूते तुम्हें बदतमीज़ होने का लाइसेंस नहीं देते, मिस्टर सिंघानिया," तारा ने एक इंच भी पीछे हटे बिना जवाब दिया। उसकी आवाज़ में उतना ही घमंड था जितना कबीर की आँखों में।

आर्यन और नील ने एक-दूसरे को हैरानी से देखा। आज तक सेंट जूड में किसी ने कबीर की आँखों में आँखें डालकर बात करने की हिम्मत नहीं की थी, वो भी एक लड़की ने।

कबीर की आँखों में एक डार्क, खतरनाक चमक आ गई। उसने तारा के चेहरे को बहुत गौर से देखा। बिना मेकअप का साफ़ चेहरा, गुस्से से लाल होती नाक, और वो बड़ी, निडर आँखें।

"लाइसेंस?" कबीर के होठों पर एक क्रूर मुस्कान तैर गई। "मुझे इस कॉलेज में सांस लेने के लिए भी किसी लाइसेंस की ज़रूरत नहीं है। लेकिन तुम... तुम जैसी लड़कियों को यहाँ रहने के लिए मेरी खैरात की ज़रूरत पड़ती है। अगर मैंने एक चुटकी बजाई, तो तुम्हारी वो स्कॉलरशिप, तुम्हारा वो करियर, और तुम्हारी ये फालतू की हिम्मत... सब राख हो जाएगा।"

"तो बजाओ चुटकी," तारा ने भी उसी के अंदाज़ में तीखा जवाब दिया। "क्योंकि तुम्हारी उस फेरारी का इंजन जिस अलाइनमेंट पर चल रहा है, अगले ट्रैक पर वो वैसे भी राख होने वाली है। लेफ्ट टायर का सस्पेंशन रो रहा है, आवाज़ यहाँ तक आ रही थी। तुम्हारे पास पैसा बहुत है, लेकिन शायद अक्ल बाज़ार में नहीं मिलती।"

सन्नाटा।

एकदम जानलेवा सन्नाटा।

कबीर की वो क्रूर मुस्कान अचानक गायब हो गई। उसके चेहरे की नसें तन गईं। उसकी फेरारी के सस्पेंशन में सच में पिछले दो दिन से प्रॉब्लम थी जिसे उसके मेकेनिक्स भी ठीक से नहीं पकड़ पा रहे थे। इस लड़की को सिर्फ आवाज़ सुनकर कैसे पता चला?

कबीर ने एक कदम और आगे बढ़ाया, अब उनके बीच हवा की भी जगह नहीं बची थी। तारा का दिल पसलियां तोड़कर बाहर आने को हो रहा था, लेकिन उसने अपना चेहरा ऊपर ही रखा।

"तुम्हारा नाम क्या है?" कबीर की आवाज़ अब गुस्से से फुफकारते हुए सांप जैसी थी।

"तारा देसाई," उसने गर्व से कहा।

"वेल, तारा देसाई," कबीर ने उसके चेहरे के पास फुसफुसाते हुए कहा, उसकी गर्म सांसें तारा के गालों से टकराईं, "तुमने अभी-अभी अपनी ज़िंदगी की सबसे बड़ी गलती की है।"

कबीर पीछे हटा, उसने रिया की तरफ गिरे हुए उस कॉफी के कप को अपने बूट से ज़ोर से ठोकर मारी और बिना पीछे मुड़े बिल्डिंग के अंदर चला गया। उसके तीनों दोस्त भी तारा को एक गहरी, अजीब सी नज़र से देखते हुए उसके पीछे चले गए।

तारा की सांस जो अटकी हुई थी, अब जाकर बाहर निकली। उसके हाथ हल्के-हल्के कांप रहे थे। उसने अभी-अभी कॉलेज के सबसे खतरनाक इंसान से पंगा ले लिया था।

"तारा! तू पागल हो गई है?" रिया रोते हुए बोली। "वो कबीर सिंघानिया है! वो हमारी ज़िंदगी बर्बाद कर देगा!"

तारा ने गहरी सांस ली और अपने जर्नल्स को कसकर पकड़ा। "वो कुछ नहीं कर सकता। हम यहाँ पढ़ने आए हैं, इन अमीरज़ादों की गुलामी करने नहीं।"

तारा खुद को तसल्ली दे रही थी, लेकिन उसे नहीं पता था कि कबीर सिंघानिया की दुनिया में 'ना' सुनने का अंजाम क्या होता है।

दो घंटे बाद - डीन का ऑफिस (Dean's Office)

तारा को जब डीन के ऑफिस से बुलावा आया, तो उसे लगा कि शायद कबीर ने अपनी धमकी सच कर दी है और उसकी स्कॉलरशिप कैंसल होने वाली है। वह भारी कदमों से ऑफिस के दरवाज़े तक पहुँची।

उसने गहरी सांस ली और दरवाज़ा खोला।

लेकिन अंदर का नज़ारा देखकर उसके कदम वहीं जम गए।

ऑफिस के महंगे लेदर सोफे पर, अपनी लंबी टांगें टेबल पर फैलाए, बेहद रिलैक्स्ड अंदाज़ में कबीर सिंघानिया बैठा था। उसके हाथ में एक टैबलेट था और वो डीन को घूर रहा था। कमरे में वही तीनों लड़के—आर्यन, देव और नील—भी मौजूद थे।

"आह, मिस देसाई! आइए, आइए," डीन माथुर ने अपने पसीने पोछते हुए कहा। डीन भी इन लड़कों के सामने नर्वस लग रहे थे।

कबीर ने अपनी नज़रें टैबलेट से हटाकर तारा पर डालीं। उसकी आँखों में वही खतरनाक चमक वापस आ गई थी।

"सर, आपने मुझे बुलाया?" तारा ने कबीर को इग्नोर करते हुए पूछा।

"हाँ, तारा। दरअसल, यूनिवर्सिटी का मैनेजमेंट एक बहुत ज़रूरी फैसला ले रहा है," डीन ने लड़खड़ाती आवाज़ में कहा। "जैसा कि तुम जानती हो, 'द एपेक्स क्लब' इस साल नेशनल फार्मूला भारत चैंपियनशिप में यूनिवर्सिटी को रिप्रेजेंट कर रहा है। लेकिन इनकी कारों के डेटा एनालिटिक्स और इंजन स्ट्रेटेजी में काफी टेक्निकल दिक्कतें आ रही हैं।"

तारा ने अपनी भौहें सिकोड़ीं। "तो?"

"तो..." डीन ने थूक निगला, "तुम्हारे प्रोफेसर्स ने बताया है कि तुम पूरे डिपार्टमेंट में मैकेनिकल एयरोडायनेमिक्स और डेटा स्ट्रेटेजी की सबसे ब्रिलियंट स्टूडेंट हो। इसलिए, मैनेजमेंट ने फैसला किया है कि आज से तुम 'द एपेक्स क्लब' की नई लीड डेटा स्ट्रैटेजिस्ट हो।"

क्या?!

तारा को लगा जैसे किसी ने उसके कानों के पास बम फोड़ दिया हो।

कबीर झटके से सोफे से खड़ा हो गया, उसकी आँखें गुस्से से जल रही थीं। "एक्सक्यूज़ मी? मैंने कहा था मुझे एक स्ट्रेटेजिस्ट चाहिए, कोई चैरिटी केस नहीं! मैं इस लड़की को अपनी टीम के आस-पास भी फटकने नहीं दूंगा!"

"सर, मैं भी इन बिगड़ैल, घमंडी लड़कों के साथ काम करने में बिल्कुल इंट्रेस्टेड नहीं हूँ!" तारा ने भी पलटवार किया।

डीन ने हाथ जोड़ते हुए कहा, "कबीर, तुम लगातार दो रेस हार चुके हो। अगर तुम चैंपियनशिप नहीं जीते, तो स्पॉन्सरशिप हाथ से चली जाएगी। और तारा... अगर तुम इस टीम को जीत दिलाती हो, तो तुम्हें 'प्रीमियर ग्रांट' मिलेगी, जो तुम्हारी मास्टर डिग्री की पूरी फीस और लंदन जाने का खर्चा उठाएगी। यह मैनेजमेंट का फाइनल डिसीजन है।"

लंदन की पूरी फीस। तारा का सबसे बड़ा सपना।

तारा और कबीर ने एक-दूसरे की तरफ देखा। कमरे का तापमान अचानक जैसे सौ डिग्री बढ़ गया था। उन दोनों के बीच की नफरत और टेंशन इतनी ज़्यादा थी कि बाकी लोग वहाँ घुटन महसूस कर रहे थे।

कबीर ने धीरे-धीरे चलते हुए तारा के पास आकर कदम रोके। वह उसके कानों के पास झुका, उसकी आवाज़ में एक सर्द, डार्क प्रॉमिस था।

"तुम मेरी टीम में आना चाहती हो, स्कॉलरशिप ट्रैश? फाइन। लेकिन याद रखना... मैं तुम्हारी ज़िंदगी इतनी नर्क बना दूंगा कि तुम खुद घुटने टेककर यहाँ से भागने की भीख मांगोगी।"

तारा ने अपनी मुट्ठियां भींची, अपनी गर्दन उठाई और कबीर की आँखों में झांकते हुए मुस्कुरा दी।

"ट्राय मी, सिंघानिया। (Try me, Singhania)। देखते हैं पहले किसका غرूर (घमंड) टूटता है।"

खेल शुरू हो चुका था। और दोनों में से कोई भी हार मानने वाला नहीं था।

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