(Complete)Chaand baavdi ki Pyaas Ch. 2

Chaand baavdi ki Pyaas - Chapter 2

Posted by A.R writer • Sep 19, 2026 03:29 PM

उसकी आँखें बड़ी और डार्क ब्राउन, बहुत एक्सप्रेसिव थीं। वह ज़्यादा बोलती नहीं थी, पर उसकी आँखें सब कह देती थीं। मुस्कान बहुत प्यारी — सिंपल, लेकिन दिल छू लेने वाली।

उसने आज ग्रीन कलर का फ्लोई अनारकली पहना था, साथ में दुपट्टा और बड़े झुमके। उसके हाथ में एक छोटा-सा टैटू भी है, जो उसकी पर्सनैलिटी को थोड़ा मॉडर्न टच देता है।

नेचर से वह सॉफ्ट-हार्टेड है, अपने लोगों के लिए कुछ भी कर सकती है। अजमेर की मिट्टी की सादगी और राजस्थानी शान — दोनों उसकी पर्सनैलिटी में साफ़ दिखते हैं। ग्रुप में अगर कोई सच बोल सकता था, तो वह वीरा थी। उसे झूठ, बहाने और आधा-अधूरा काम बिल्कुल पसंद नहीं था।

आकाश: ये है हमारी स्टोरी का सबसे फनी कैरेक्टर — आकाश राजस्थान के माउंट आबू से है, जहाँ की ठंडी वादियों जैसा उसका नेचर भी कूल और फ्रेश है। हाइट लगभग पाँच फुट दस इंच और नॉर्मल एथलेटिक बॉडी, उम्र बाईस साल। न बहुत भारी-भरकम, न बहुत पतला, बस एकदम स्मार्ट और हैंडसम टाइप।

उसका स्किन टोन ओलिव था, क्लियर स्किन के साथ। हेयर डार्क ब्लैक, थोड़े से पफी और ऊपर की तरफ सेट, जैसे बिना ज़्यादा मेहनत के ही स्टाइलिश लग जाए।

उसकी आँखें लाइट ब्राउन टच वाली, हमेशा शरारत से भरी हुई लगती थीं। ऐसा लगता था जैसे हर वक्त कोई न कोई मज़ाक दिमाग में चल रहा हो। हल्की ट्रिम्ड बियर्ड और शार्प जॉलाइन उसे सीरियस लुक देती थी। लेकिन वह खुद सीरियस कभी रहता ही नहीं।

ड्रेसिंग स्टाइल: जींस, टी-शर्ट, ऊपर से जैकेट। कैज़ुअल लेकिन क्लासी।

अब नेचर की बात करें तो। यह बंदा पूरा एंटरटेनमेंट पैकेज है। टेंशन वाली सिचुएशन में भी ऐसा वन-लाइनर मारेगा कि सब हँस पड़ें। अपने दोस्तों के लिए जान भी दे दे, लेकिन पहले उनका मज़ाक ज़रूर उड़ाएगा।

आकाश वो है जो ग्रुप की जान है। जहाँ वह है, वहाँ साइलेंस नाम की चीज़ नहीं होती।

लक्ष्य: बैंगलोर का रहने वाला। हाइट करीब पाँच फुट दस इंच, बॉडी, उम्र इक्कीस साल। बहुत ज़्यादा मस्क्युलर नहीं, पर एकदम टोन्ड और नीट पर्सनैलिटी।

उसका स्किन टोन हल्का ब्राउन, सॉफ्ट सा साउथ इंडियन ग्लो। जैसे बैंगलोर की धूप और मौसम दोनों का मिक्स। स्किन क्लियर और नैचुरल।

बाल ब्लैक, थोड़े थिक और ऊपर से हल्के मैसी स्टाइल में सेट। आँखें कंजी और काफ़ी डीप हैं। अक्सर सीरियस एक्सप्रेशन रहता है, जैसे हर चीज़ को चुपचाप ऑब्ज़र्व कर रहा हो।

ड्रेसिंग स्टाइल: सिंपल और अर्बन — जींस, शर्ट या टी-शर्ट, कभी-कभी लाइट जैकेट।

नेचर से थोड़ा रिज़र्व और कम बोलने वाला। पहली नज़र में लोग उसे सीरियस समझते हैं। लेकिन जैसे ही अपने दोस्तों के बीच आता है, शैतान हो जाता है, सडन वन-लाइनर मार देगा, सरकाज़्म में जवाब देगा, और फिर खुद ही हल्की सी स्माइल दे देगा। वह ऐसा इंसान है जो बाहर से शांत, लेकिन अंदर से पूरा मस्तीखोर है।

समीरा – यह है हमारी स्टोरी की इक्कीस साल की मुंबई गर्ल। तेज़-तर्रार, स्मार्ट और बेहद ऑर्गनाइज़्ड। हाइट लगभग पाँच फुट पाँच इंच, स्लिम, ग्रेसफुल और बहुत एलीगेंट। उसकी बॉडी लैंग्वेज में एक अलग ही कॉन्फिडेंस है — न ज़्यादा ओवर, न बिल्कुल शर्मीला।

स्किन टोन हल्का व्हीटिश-ब्राउन, सॉफ्ट सा नैचुरल ग्लो। जैसे मुंबई के कूल वेदर ने उसे और फ्रेश बना दिया हो।

बाल छोटे, कंधे तक आते थे, वेवी, ब्लैक और उसने रेड हाईलाइट्स कराए हुए थे। ज़्यादातर ओपन रखती है, जिससे उसका लुक और भी क्लासी लगता है।

उसकी आँखें बड़ी और ग्रे-ब्राउन टच वाली, बहुत इंटेंस। जब वह किसी को देखती है ना, तो सामने वाला कुछ सेकंड के लिए रुक जाता है।

ड्रेसिंग स्टाइल: मॉडर्न और एलीगेंट — कभी वेस्टर्न आउटफिट, कभी सिंपल इंडियन। उसे ओवरड्रेस करना पसंद नहीं, लेकिन जो भी पहनती है उसमें रॉयल फील आता है।

नेचर से स्मार्ट, इंडिपेंडेंट और थोड़ा एटीट्यूड वाला कॉन्फिडेंस। जल्दी किसी पर ट्रस्ट नहीं करती, लेकिन जिनको अपना मान ले, उनके लिए बहुत लॉयल है।

**अगले दिन**

दिनभर प्लानिंग, टिकट चेक करना, घर पर फोन, सब हो चुका था। अब बारी थी असली काम की — पैकिंग।

गर्ल्स हॉस्टल के कमरा नंबर तीन सौ सात में अफरा-तफरी मची हुई थी।

वीरा ने पूरा कमरा फैला रखा था। बेड पर कपड़ों का ढेर, कुर्सी पर जैकेट, फर्श पर जूते, ड्रेसिंग टेबल पर खुले कॉस्मेटिक पाउच। बैग खुला पड़ा था, लेकिन उसमें अभी तक कुछ गया नहीं था। समीरा दरवाज़े पर खड़ी सब देख रही थी।

उसने गहरी साँस ली। "हे भगवान।"

"समीरा यार, तू खड़ी क्यों है? आ ना!" वीरा ने हाथ में तीन टी-शर्ट पकड़े हुए कहा। समीरा अंदर आई, चारों तरफ देखा और माथा पकड़ लिया। "वीरा! मैंने तुझे कितनी बार कहा है, अपनी चीज़ें ठीक से रखा कर। हर बार यही हाल होता है।"

वीरा ने मासूम चेहरा बनाया। "अरे, मैं बस ऑप्शन्स देख रही थी। समीरा, प्लीज़, हेल्प कर दे ना। मुझसे ये पैकिंग नहीं होती।"

समीरा ने घूरा, फिर बोली, "चल, उठ। पहले कपड़े अलग कर। कितने दिन की ट्रिप है?"

"बीस दिन।"

"तो सात जोड़ी कपड़े और एक एक्स्ट्रा। बस।"

"बस?"

"हाँ, बस! तू फैशन शो करने नहीं जा रही। याद है लास्ट ईयर की वो ट्रिप?" समीरा ने पूछा। फिर खुद ही बोली, "जहाँ तू आधी अलमारी ले गई थी और फिर भी बोली कि पहनने को कुछ नहीं है?"

दोनों ठहाका लगाकर हँसीं। "थैंक यू," वीरा ने धीरे से कहा। पर वीरा अभी कुछ खुराफात करने वाली थीं, जिसका पता सुबह चलेगा।

उधर बॉयज़ हॉस्टल, कमरा नंबर दो सौ चौदह।

तीनों आराम से लेटे थे। फर्श पर चिप्स का पैकेट, टेबल पर मोबाइल, और पीछे धीमी आवाज़ में गाना।

लक्ष्य बोला, "भाई, पैकिंग भी करनी है।"

आकाश ने करवट बदली। "हो चुकी।"

"कब?"

युवराज ने बैग दिखाया। अंदर दो टी-शर्ट, एक जीन्स, टूथब्रश।

"बस?"

"हम घूमने जा रहे हैं, शिफ्ट नहीं हो रहे," आकाश बोला। लक्ष्य ने सिर हिलाया और खुद पैकिंग शुरू की। उसका बैग सबसे व्यवस्थित था — नोटबुक, पेन, चार्जर, कैमरा, फाइल।

"कम से कम तुम तो सीरियस रहो," उसने कहा।

आकाश बोला, "भाई, तू है ना हमारा दिमाग।"

युवराज ने जोड़ा, "और हम हैं दिल।" तीनों हँस पड़े।

आगे क्या होगा? वे पाँचों किन रहस्यों से टकराएँगे, और राजस्थान की रेत में छुपी कौन-सी अनकही दास्तान उनके सामने आएगी? आगे जानने के लिए पढ़ते रहिए। मैंने पूरी कोशिश की है कि हर किरदार आपको वास्तविक और जीवंत लगे, उनकी दोस्ती सच्ची महसूस हो, और जब डर दस्तक दे तो उसकी आहट आप तक भी पहुँचे। अगर कहीं आपको कहानी की रफ्तार धीमी लगे, किसी किरदार में और गहराई चाहिए हो, या कोई दृश्य और अधिक रोमांचक बनाया जा सकता हो, तो ज़रूर बताइए।

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