My QUEEN इश्क की वजह तुम हो - Chapter 3
मोक्ष बेबी अभी बहुत छोटी है थोडी़ बड़ी हो जाएगी तब तुम ले लेना"
इतना बोलकर सुमन जी ने मोक्ष के गोद से बच्ची को संभाल लेती है...
वही मोक्ष देना तो नहीं चाहता था लेकिन वो अपनी mom के बात नहीं टाला सकता था जिस वजह से उसने वापस दे दिया
कुछ देर बाद
हास्पिटल के वीआईपी Room के वार्ड में
तीस साल की उम्र की एक लड़की बेड पर बैठी हुई थी वह अभी गोलू मोलू लग रही थी उसका रंग काफी गोरा था अभी मोटे होने की वजह से उसका चेहरा और भी glow कर रहा था जिसे वजह से वो देखने में क्यूट और प्यारी लग रही थी... ।
ये नीतू खुराना थी राणावीजय की Wife उसकी जान
नीतू अपनी बच्ची को अपनी गोद में लिए बस उसे एकटक देख रही थी...।
तभी अचानक से वीआईपी वार्ड में नर्स आती है जिससे सबका ध्यान उस पर चला जाता है इस वक्त वार्ड में आदित्य सुमन और मोक्ष था.
वही राणावीजय अपने गोद में दस साल का बेटा यश को लिए नीतू के साथ बेड पर बैठ हुआ था.... ।
नर्स मुस्कुरा कर नीतू की तरफ देखकर बोलती है
"मैडम बच्चें की फीडिंग का टाइम हो गया मुझे आपकी हेल्प करनी पड़ेगी
जिसे सुनकर सुमन नीतू को देखते हुए बोली
"ठीक है हम कल आएंगे तुम रेस्ट करो
इतना बोलकर सुमन आदित्य के साथ मोक्ष को लेकर त्रिवेद्वी मैंशन के लिए निकलने लगी..।
वही मोक्ष की नजरें नीतू के गोद में उस बच्ची पर ही थी उसने एक नजर उस बच्ची को देख अपने mom के साथ ना चाहते हुए भी उसे वहां से जाना पडता है.
वहीं नर्स अभी भी राणावीजय को देख रही थी जो नीतू की तरफ से हटने के लिए तैयार ही नही था जिसे देख नीतू उसे घूर कर देखने लगी...।
राणावीजय जी नीतू की नजरो को इग्नोर कर नर्स को अपने वही रौबदार आवाज में कहा
"यह मेरी Wife है तुम्हें जो करना है करो
जिसे सुन नर्स डर जाती है वो अपनी मुंडी हां मैं हिला देती है कुछ देर में नर्स अपना काम करके वार्ड से बाहर जा चुकी थी.... ।
वही दूसरी तरफ रात के दस बजे
त्रिवेद्वी मैंशन
मोक्ष का रूम इस वक्त उसके रूम की लाइट बहुत ही डीम थी मोक्ष अपने किंग साइज सोफे पर बैठ हुआ था
उसका रूम बिल्कुल मोक्ष की तरह नीट एंड क्लीन था वह देखने से लगा ही नहीं रहा था कि वह दस साल के बच्चे का रूम ना हो किसी **** का रूम हो सब समान एलिगेंट तरीके से एक जगह रखें हुए थे...।
उसके रूम का Color ब्लैक था Room के सारे पर्दे इस वक्त बंद थे Room की सारी लाइट ऑफ थी हल्की येलो लाइट जल रही थी...।
मोक्ष इस वक्त अपने बेड पर लेटे हुए अपने इमोशनलेस चेहरे के साथ एक टक अपने उस हाथ को देख रहा था जिस हाथों से उसने आज अपनी लिटिल बेबी डॉल को गोद में लिया था...।
मोक्ष ने अपने उन हाथों को देख आज जो उसने अपनी बेबी डाॅल को अपनी गोद में लिया था उसे याद कर वो अपने लेफ्ड हैंड को अपने नाक के पास ले जाकर sniff कर अपनी बेबी डॉल की मौजूदगी को महसूस करते हुए कहा
"फाइनली You come my Little baby doll
वही हास्पिटल में
वीआईपी वार्ड के Room से इस वक्त किसी की चीखने की आवाज आ रही थी....।
इस वक्त Room का माहौल बहुत ही अलग था नीतू अपनी एक उंगली को अपने होंठों पर रखकर एक हाथ से राणावीजय के बाल खींचते हुए बोला रही थी...।
"तुम्हारे मुंह से एक भी आवाज नही निकलनी चाहिए अगर मेरे दोनों बच्चे में से कोई एक भी उठा ना तो तुम्हारी खैर नहीं
वही राणावीजय अपने बालों को नीतू के हाथ से छुड़वाते हुए कहा
"जान इतना जोर मत दो तुम्हारी अभी डिलीवरी हुई है तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा
नीतू गुस्से में अपने दांत पीसते हुए बोली
"हां तुम्हारे केयर तब कहां गई थी जब मेरी डिलीवरी हो रही थी और तुम दरवाजा तोडने पर तुले हुए थे तुम्हें पता है उस वक्त मुझे कितनी गुस्सा आ रहा था एक तो मुझे इतना पेन हो रहा था और तुम उस वक्त मेर साथ नहीं थे
इस वक्त नीतू हास्पिटल बेड पर बैठी हुई थी उसके एक हाथ में ड्रिप लगा हुआ था उसने दूसरे हाथ से राणावीजय के बालों को अपनी मुट्ठी में भरा हुआ था
वही राणावीजय उसके बाजू में बैठा हुआ था उसका sir नीचे की और झुका हुआ था क्योंकि नीतू ने उसके बालों को कस के पकड़ रख था...।
राणावीजय चाहता तो नीतू के हाथ एक झटके से अपने बालों से छुड़ा सकता था लेकिन आज नीतू का डिलीवरी हुई थी जिस वजह से नीतू को ज्यादा हिलना डुलना नहीं था वरना उसे प्राॅब्लम हो सकती थी...।
इसलिए राणावीजय अपने दर्द को इग्नोर कर नीतू को शांत कराने और उसे संभालते हुए कहा
"प्लीज शांत हो जाओ जान अगली बार ऐसा नहीं करूंगा
जिससे सुनकर नीतू को और गुस्सा आ जाता है और उसे वो अपना लेबर पेन याद आ जाता है जिसे याद कर और गुस्से से उसके बालों को अपनी मुट्ठी में भर कर खींचते हुए कहा
"क्या कहा अगली बार तुम चाहते हो मैं तिसरी बार उस दर्द से गुजरूं तुम चाहतें हो मैं तिसरी बार बच्चा प्लान करे
नीतू की बात सुन कर राणावीजय को भी नीतू का दर्द याद आ गया जिसे सुन वो नीतू के लिए कितना डर गया था वही जानता था....।
तभी राणवीजय नीतू को देखते हुए कहा
"नहीं जान मेरा यह कहने का मतलब नहीं था मैं यह कहना चाहता हूं कि बहुत जरूरी Meeting थी मुझे अगर पता होता कि तुम्हारा लेबर पेन आज होने वाला है तो पक्का नही जाता
राणावीजय की बात सुनकर नीतू गुस्से में बोली
"लेकिन तुम्हें सुमन ने तो पहले ही फोन करके बता दिया था तो तुम लेट कैसे हुए मैंने कहा था डिलीवरी के वक्त तुम्हें मेरे पास होना था तो तुम्हें आज अपनी Meeting अटेंड करने जानी थी
"नहीं जान मैं मुंबई की ट्रैफिक जाम में फंस गया था तुम तो जानती ही हो ना मुंबई का ट्रैफिक जाम
तभी उस वार्ड में बच्ची की रोने की आवाज गूंज उठती है जिसे सुन राणवीजय को बड़ी ही खुशी होती है आखिर उसकी बच्ची ने उसे बचा लिया था...।
जिसे सुन नीतू का ध्यान भी भटक जाता है जिसका फायदा उठाकर राणावीजय उससे दूर हो अपनी बेटी के और दौड़ते हैं जो बच्चों के cradle मैं कुछ वक्त पहले सो रही थी...।