Kalyug ka amar sadhak Ch. 1

Kalyug ka amar sadhak - Chapter 1

Posted by Shivansh Pandey • Oct 04, 2026 06:07 PM

अंधेरा.

चारों तरफ सिर्फ अंधेरा था.

इतना गहरा अंधेरा कि अपनी सांसों की आवाज भी किसी अनजान इंसान की तरह लग रही थी.

फिर अचानक—

धडाम!

अर्जुन की आंखें खुल गईं.

उसने तेजी से सांस ली और अपनी छाती पर हाथ रख दिया.

कुछ पल तक वह बस अंधेरे में देखता रहा.

फिर उसके होंठ हिले.

तो. मैं वापस आ गया.

उसकी आवाज में राहत नहीं थी.

बल्कि एक अजीब- सी थकान थी.

उसने अपनी मुट्ठी बांधी.

आंखें बंद कीं.

अपने शरीर के अंदर मौजूद ऊर्जा को महसूस करने की कोशिश की.

कुछ सेकंड.

फिर कुछ नहीं.

अर्जुन के चेहरे पर निराशा उतर आई.

उसने दोबारा कोशिश की.

फिर तीसरी बार.

लेकिन उसके शरीर के अंदर वह विशाल शक्ति नहीं थी, जिसे उसने ब्रह्म लोक में हजारों साल तक अपने साथ महसूस किया था.

उसने धीमी आवाज में कहा,

मेरी ताकत. वापस नहीं आई.

अर्जुन कुछ देर चुप बैठा रहा.

तभी अचानक बाहर से कुछ आवाजें सुनाई दीं.

सुन, दो दिन पूरे होने वाले हैं.

हां. उसके बाद इसे बाहर भेज देंगे.

अर्जुन की आंखें सिकुड गईं.

उसने आसपास देखा.

धीरे- धीरे उसकी यादें वापस आने लगीं.

एक बंद कमरा.

लोहे का दरवाजा.

जेल.

और दो दिन से इसी अंधेरे कमरे में बंद होना.

अर्जुन ने उठने की कोशिश की.

लेकिन—

धप्प!

उसका शरीर वापस जमीन पर गिर गया.

उसने जमीन पर हाथ रखा.

शरीर कमजोर था.

इतना कमजोर कि खडा होना भी मुश्किल लग रहा था.

लेकिन अर्जुन ने हार नहीं मानी.

नहीं.

उसने दांत भींचे.

मुझे खडा होना ही होगा.

उसके दिमाग में अचानक दो चेहरे उभरे.

उसकी मां.

उसके पिता.

अर्जुन की आंखों में पहली बार बेचैनी दिखाई दी.

मुझे अपने मां- पापा को ढूंढना है.

वह फिर उठा.

इस बार थोडा संभलकर.

कांपते हुए कदमों से वह कमरे के एक कोने तक गया.

वहां पडे छह छोटे पत्थर उठाए.

एक- एक करके उन्हें कमरे की अलग- अलग दिशाओं में रख दिया.

फिर वह उन छह पत्थरों के बीच बैठ गया.

अपनी आंखें बंद कीं.

और धीमी आवाज में एक मंत्र का उच्चारण शुरू किया.

कमरे में हल्की गूंज फैलने लगी और धीरे- धीरे बढती गई.

कुछ ही क्षणों में कमरे की हवा बदलने लगी.

अर्जुन के आसपास रखे पत्थरों से बेहद हल्की कंपन की आवाज आने लगी.

उसके चेहरे पर पहली बार हल्की मुस्कान आई.

आखिर. मेरा अमर सम्राट बनना बेकार नहीं गया.

और फिर—

अचानक चारों तरफ की ऊर्जा अर्जुन के शरीर की ओर खिंचने लगी.

तेज.

और तेज.

और फिर इतनी प्रचंड मात्रा में कि पूरा कमरा जैसे कांप उठा.

अर्जुन बिल्कुल स्थिर बैठा रहा.

उसकी साधना शुरू हो चुकी थी.

ब्रह्म लोक में साधना के कई स्तर थे.

ऊर्जा स्तर.

तेजस स्तर.

तारा स्तर.

ब्रह्मांड स्तर.

इसके बाद आते थे—

अमर साधक.

और इन सबसे ऊपर.

अमर सम्राट.

वह स्तर जिसे हासिल करना लगभग असंभव माना जाता था.

लेकिन अर्जुन कभी उस शिखर तक पहुंच चुका था.

और अब.

वह फिर से शून्य से शुरुआत कर रहा था.

समय बीतता गया.

एक घंटा.

दस घंटे.

बीस घंटे.

और आखिरकार—

पैंतीस घंटे.

अर्जुन ने धीरे- धीरे अपनी आंखें खोलीं.

उसकी आंखों में पहले जैसी कमजोरी नहीं थी.

वह शांत था.

उसने अपनी हथेली खोली.

उसकी उंगलियों के बीच हल्की ऊर्जा घूमी.

अर्जुन मुस्कुराया.

तेजस स्तर.

उसने अपनी हथेली बंद कर ली.

शुरुआत बुरी नहीं है.

अर्जुन जानता था कि अभी वह अपने पुराने स्तर से बहुत दूर था.

लेकिन उसके पास एक चीज थी—

यादें.

उसे अपनी पुरानी साधना याद थी.

उसे मंत्र याद थे.

उसे औषधियां और जडी- बूटियां याद थीं.

उसे ऐसी तकनीकें याद थीं, जिनका नाम भी इस दुनिया के लोगों ने शायद कभी नहीं सुना था.

और सबसे खास—

वह मंत्रों से कवच बना सकता था.

उसके पास ब्रह्म लोक के वेदों का ज्ञान भी था.

अर्जुन ने अगले कुछ घंटे अपनी पुरानी तकनीकों और औषधियों को याद करने में लगाए.

तभी—

खडाआआक!

भारी लोहे का दरवाजा खुला.

टॉर्च की तेज रोशनी सीधे अर्जुन के चेहरे पर पडी.

दरवाजे पर एक जेलर खडा था.

तेरे जाने का वक्त आ गया. निकल यहां से.

अर्जुन धीरे- धीरे उसकी तरफ मुडा.

सिर्फ एक नजर.

बस एक नजर.

जेलर का कदम वहीं रुक गया.

उसे ऐसा लगा जैसे अचानक कमरे की हवा भारी हो गई हो.

वह अनजाने में दो कदम पीछे हट गया.

उसके माथे पर पसीने की बूंदें आ गईं.

लेकिन अर्जुन ने कुछ नहीं कहा.

वह उठा.

अपने पुराने कपडे उठाए.

वही कपडे.

जो उसने तीन साल पहले जेल में आते वक्त पहने थे.

और बिना पीछे देखे बाहर निकल गया.

जेल से बाहर निकलते ही अर्जुन ने लंबी सांस ली.

तीन साल बाद खुली हवा.

लेकिन वह जेल के रास्ते से सीधे शहर की तरफ नहीं गया.

वह जंगल की तरफ बढ गया.

तेज कदमों से.

कुछ ही देर बाद वह एक शांत तालाब के किनारे पहुंचा.

उसने अपने पुराने कपडे उतारे और एक तरफ फेंक दिए.

उसकी पीठ पर पुराने घावों के गहरे निशान थे.

अर्जुन तालाब में उतर गया.

ठंडा पानी उसके शरीर से टकराया.

काफी देर बाद जब वह बाहर आया.

तो वह पहले जैसा नहीं लग रहा था.

चेहरे पर जमी थकान गायब थी.

आंखों में एक अजीब- सी स्थिरता थी.

उसने कपडे पहने.

बाल पीछे किए.

और बिना समय गंवाए शहर की तरफ चल पडा.

उसका अगला ठिकाना था—

Star Group।

Star Group की शानदार बिल्डिंग के अंदर अर्जुन रिसेप्शन के पास पहुंचा.

मुझे विजय कालरा से मिलना था.

रिसेप्शन पर बैठी लडकी ने उसकी तरफ देखा.

सर, Mister विजय अभी यहां नहीं हैं. और बिना अपॉइंटमेंट के आप उनसे नहीं मिल सकते.

अर्जुन ने कुछ कहने के लिए मुंह खोला ही था कि—

डिंग!

लिफ्ट खुली.

अंदर से तीन लोग बाहर आए.

एक करीब पैंतीस साल का आदमी.

एक लगभग साठ साल का बुजुर्ग.

और उनके पीछे करीब तैंतीस साल की एक महिला.

अर्जुन की नजर पैंतीस साल के उस आदमी पर पडी.

उसकी आंखें तुरंत बदल गईं.

विजय कालरा.

वह आदमी आगे बढने लगा.

तभी एक सिक्योरिटी गार्ड ने अर्जुन को रोकने के लिए कदम बढाया.

लेकिन—

अगले ही पल अर्जुन वहां नहीं था.

तेज हवा चलने लगी.

गार्ड कुछ समझ पाता, उससे पहले अर्जुन विजय कालरा के सामने खडा था.

इतनी तेजी से कि आसपास खडे लोगों को सिर्फ हवा का झोंका महसूस हुआ.

विजय रुक गया.

अर्जुन ने उसकी आंखों में सीधे देखते हुए कहा,

मुझे आपसे कुछ सवाल पूछने थे.

विजय के चेहरे का रंग बदल गया.

क्योंकि अर्जुन का पहला सवाल सुनते ही.

उसे तीन साल पुरानी एक ऐसी घटना याद आने वाली थी.

जिसे उसने सोचा था कि कोई कभी नहीं जान पाएगा.

मुझे आपसे कुछ सवाल पूछने थे.

अर्जुन की आवाज शांत थी, लेकिन उसके शब्दों में ऐसी ठंडक थी कि विजय कालरा कुछ पल के लिए उसे देखता रह गया.

विजय के साथ खडे बुजुर्ग ने भी अर्जुन को ध्यान से देखा.

लेकिन तभी उनके पीछे खडी लगभग तैंतीस साल की महिला अचानक बोल पडी.

तुम. इनके क्या लगते हो?

अर्जुन ने धीरे से अपनी नजर उस महिला की तरफ घुमाई.

उसने कुछ पल उसे देखा.

पहले मेरे सवाल का जवाब दो.

महिला थोडी असहज हो गई.

अर्जुन ने बिना अपनी आवाज ऊंची किए पूछा,

रितिका शेखावत और वरुण शेखावत कहां हैं?

विजय का चेहरा अचानक गंभीर हो गया.

लेकिन उससे पहले वही महिला बोल पडी.

तुम उन्हें जानते हो?

अर्जुन ने उसकी तरफ देखा.

तुम उन्हें जानती हो?

महिला ने हल्की सांस ली.

हां. रितिका मैडम ने मेरी बहुत मदद की थी.

अर्जुन की आंखों में हल्का बदलाव आया.

तो तुम्हें पता होगा कि वो कहां हैं.

महिला ने तुरंत सिर हिला दिया.

नहीं. मुझे नहीं पता.

वह कुछ पल रुकी और फिर बोली,

उन्होंने अचानक कंपनी से resign कर दिया था. उसके बाद. अचानक कहीं गायब हो गईं. हमने बहुत कोशिश की, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला.

अर्जुन कुछ देर चुप रहा.

उसने धीरे से एक लंबी सांस ली.

फिर उसकी नजर विजय पर गई.

विजय उस नजर से बचने की कोशिश करने लगा.

अर्जुन की आंखें अचानक सिकुड गईं.

उसने विजय को ऊपर से नीचे तक देखा.

फिर बेहद सामान्य आवाज में बोला,

तुम दो मिनट के अंदर मरने वाले हो.

विजय ने उसे कुछ सेकंड देखा.

फिर उसके चेहरे पर एक अजीब- सी मुस्कान आ गई.

शायद उसे लगा अर्जुन मजाक कर रहा है.

क्या?

अर्जुन ने कोई जवाब नहीं दिया.

वह मुडा और वहां से बाहर निकल गया.

विजय ने सिर झटका.

अजीब आदमी है.

वह भी बाकी लोगों के साथ बिल्डिंग से बाहर निकलने लगा.

रिसेप्शन से निकलकर वह पार्किंग की तरफ बढा.

उसके कदम अभी कार से कुछ ही दूर थे कि—

ऊपर से अचानक एक भारी लोहे की चीज तेजी से नीचे गिरती दिखाई दी.

सब कुछ इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला.

पीछे से महिला की चीख निकली.

विजय! संभलकर!

विजय ने आवाज सुनते ही ऊपर देखा.

उसकी आंखें फैल गईं.

अगले ही पल वह अपनी पूरी ताकत से एक तरफ कूद गया.

धडाम!

भारी लोहे की चीज जमीन पर जा गिरी.

विजय कुछ दूरी पर गिरा पडा था.

कुछ पल तक उसे समझ ही नहीं आया कि हुआ क्या है.

फिर उसने धीरे- धीरे अपना सिर उठाया.

उसकी सांसें तेज थीं.

उसने पीछे मुडकर देखा.

जहां कुछ सेकंड पहले वह खडा था, वहां अब लोहे का भारी टुकडा पडा था.

अगर वह एक पल भी देर करता.

तो शायद वह वहीं खत्म हो जाता.

विजय की नजर धीरे- धीरे ऊपर उठी.

उसकी आंखों के सामने अचानक कुछ सेकंड पहले की बात घूम गई.

तुम दो मिनट के अंदर मरने वाले हो.

उसके शरीर में सिहरन दौड गई.

विजय ने तुरंत बिल्डिंग की तरफ देखा.

कांच के दरवाजे के पास अर्जुन खडा था.

उसकी नजर विजय पर थी.

चेहरे पर कोई घबराहट नहीं.

कोई हैरानी नहीं.

मानो उसे पहले से पता था कि ऐसा होने वाला है.

विजय की आंखों में डर उतर आया.

वह तुरंत उठकर अर्जुन की तरफ भागा.

लेकिन तब तक अर्जुन भी बिल्डिंग से बाहर निकल चुका था.

विजय उसके पीछे पहुंचा.

उसकी सांसें अभी भी तेज थीं.

स. सर.

अर्जुन रुका नहीं.

विजय ने खुद को संभालते हुए पूछा,

आपको कैसे पता था कि मैं मरने वाला हूं?

अर्जुन ने बस एक नजर उसकी तरफ देखा.

फिर उसकी नजर उस महिला पर गई जो उनके पीछे आ रही थी.

तुम्हारे पास Z नेकलेस है?

महिला के कदम अचानक रुक गए.

उसके चेहरे का रंग बदल गया.

उसने अर्जुन को हैरानी से देखा.

तुम्हें. ये कैसे पता?

अर्जुन की आंखें थोडी ठंडी हो गईं.

मैंने जो पूछा, वो बताओ.

महिला कुछ पल चुप रही.

फिर उसने जल्दी से सिर हिलाया.

हां. मेरे पास है.

उसने अपना बैग खोला और उसके अंदर से एक छोटा- सा नेकलेस निकाला.

नेकलेस देखने में सामान्य था.

लेकिन अर्जुन की नजर पडते ही उसकी आंखों में पहचान की चमक आई.

उसने नेकलेस को ध्यान से देखा.

ये Z नेकलेस है.

वह कुछ पल रुका.

ये बुरी ताकतों और मौत के प्रभाव को कुछ समय तक रोक सकता है. लेकिन हमेशा नहीं.

महिला ने घबराकर नेकलेस को देखा.

अर्जुन ने उसकी तरफ देखा.

तुम इसकी वजह से मरते- मरते बची हो.

महिला की सांस अटक गई.

वह कुछ कह पाती, उससे पहले अर्जुन मुड गया.

विजय घबरा गया.

सर. आप जा कहां रहे हैं?

अर्जुन ने पीछे मुडकर नहीं देखा.

इससे मेरा क्या फायदा?

विजय कुछ पल बिल्कुल शांत खडा रहा.

उसने अर्जुन को रोकने के लिए मुंह खोला, लेकिन शब्द नहीं निकले.

फिर अचानक उसे कुछ याद आया.

मैं आपके बहुत काम आ सकता हूं.

अर्जुन के कदम रुक गए.

उसने कुछ नहीं कहा.

विजय ने राहत की सांस ली.

मेरे पास पैसा है. लोग हैं. कंपनी है. इस शहर में मेरे काफी संपर्क हैं. अगर आपको किसी चीज की जरूरत है, तो मैं मदद कर सकता हूं.

अर्जुन धीरे- धीरे उसकी तरफ मुडा.

उसके दिमाग में एक विचार आया.

ऐसे लोगों की जरूरत पड सकती है.

उसे अपने माता- पिता को ढूंढना था.

और इस दुनिया में वापस लौटने के बाद उसके पास न पैसा था, न पहचान और न ही कोई भरोसेमंद आदमी.

विजय जैसा व्यक्ति काम आ सकता था.

अर्जुन ने कुछ पल सोचा.

फिर बोला,

ठीक है.

विजय की आंखों में उम्मीद आई.

मैं आपकी मदद के लिए तैयार हूं.

अर्जुन ने उसकी तरफ देखा.

चलो.

विजय ने पूछा,

कहां?

ऊपर.

कुछ ही मिनट बाद चारों लोग बिल्डिंग की छत पर पहुंच गए.

छत पर पहुंचते ही अर्जुन रुक गया.

उसका चेहरा अचानक बदल गया.

हवा सामान्य थी.

लेकिन अर्जुन को कुछ और महसूस हो रहा था.

उसने चारों तरफ देखा.

फिर उसकी नजर छत के एक कोने पर जाकर रुक गई.

वहां कुछ दिखाई नहीं दे रहा था.

लेकिन अर्जुन की आंखों में हल्की चमक आ गई.

यहां. कुछ समय पहले कोई मरा था?

विजय और सुनिता ने एक- दूसरे की तरफ देखा.

दोनों के चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था.

कुछ पल तक कोई नहीं बोला.

फिर दोनों ने धीरे से सिर हिला दिया.

हां.

अर्जुन की नजर विजय पर टिक गई.

क्या हुआ था?

विजय चुप रहा.

अर्जुन कुछ सेकंड उसका चेहरा देखता रहा.

फिर उसकी आवाज पहले से ज्यादा ठंडी हो गई.

तो मरो.

विजय का चेहरा सफेद पड गया.

अर्जुन ने कहा,

अगर तुम मुझे सच नहीं बताना चाहते, तो मेरी मदद की उम्मीद भी मत रखना.

विजय के होंठ हिले, लेकिन आवाज नहीं निकली.

तभी सुनिता ने हिचकिचाते हुए कहा,

मैं बताती हूं.

अर्जुन ने उसकी तरफ देखा.

सुनिता ने गहरी सांस ली.

कुछ समय पहले हमारी कंपनी को बहुत बडा फायदा हुआ था. कंपनी को अरबों का profit हुआ था. इसलिए सभी employees के लिए Royal Hotel में पार्टी रखी गई थी.

अर्जुन चुपचाप सुनता रहा.

उस पार्टी में कंपनी के कई बडे लोग मौजूद थे. वहीं हमारे मैनेजमेंट में काम करने वाले लोढी की नजर काव्या शर्मा पर पडी.

सुनिता की आवाज धीमी हो गई.

लोढी ने उसके drink में नशीली दवा मिला दी.

विजय ने नजरें झुका लीं.

सुनिता ने आगे कहा,

उसके बाद उसने काव्या का फायदा उठाया. कुछ समय बाद काव्या के पति को इस बारे में पता चल गया.

अर्जुन की मुट्ठी धीरे- धीरे बंद होने लगी.

उसके पति ने उसे divorce दे दिया.

कुछ पल के लिए छत पर खामोशी छा गई.

काव्या पूरी तरह टूट गई थी.

सुनिता ने नीचे देखा.

फिर एक दिन लोढी ने उसे blackmail करने की कोशिश की.

अर्जुन की आंखों में गुस्सा उतरने लगा.

और उसके बाद.

सुनिता की आवाज कांप गई.

काव्या ने इसी बिल्डिंग की छत से छलांग लगा दी.

हवा कुछ पल के लिए बिल्कुल शांत लगने लगी.

अर्जुन ने आंखें बंद कीं.

उसके सामने ब्रह्म लोक के कई दृश्य घूम गए.

वहां उसने हजारों सालों में अनगिनत युद्ध देखे थे.

लोगों को सत्ता के लिए लडते देखा था.

लेकिन उसके लिए सबसे घृणित चीज हमेशा एक ही रही थी—

कमजोर इंसान का फायदा उठाना.

अर्जुन ने धीरे से आंखें खोलीं.

ऐसे आदमी को तो मर ही जाना चाहिए.

सुनिता ने अर्जुन की तरफ देखा.

उसकी आवाज में गुस्सा था.

लेकिन अर्जुन के मन में एक सवाल अब भी था.

अगर काव्या की मौत हुई थी, तो विजय का इसमें क्या संबंध था?

उसने विजय की तरफ देखा.

लेकिन इसमें तुम्हारा क्या हाथ था?

विजय ने कोई जवाब नहीं दिया.

अर्जुन की नजर और ठंडी हो गई.

तभी सुनिता ने हिचकिचाते हुए कहा,

विजय sir ने.

विजय ने तुरंत उसकी तरफ देखा.

लेकिन सुनिता अब रुक नहीं पाई.

कंपनी के बदनाम होने के डर से इस मामले को दबा दिया गया था.

अर्जुन बिल्कुल शांत खडा रहा.

सुनिता ने आगे कहा,

और काव्या के परिवार को भी यहां से हटवा दिया गया. कुछ लोगों को भेजकर उन्हें दूसरे राज्य में भेज दिया गया था.

अर्जुन की आंखें धीरे- धीरे सिकुड गईं.

उसने विजय की तरफ देखा.

इस बार उसकी नजर में सिर्फ गुस्सा नहीं था.

कुछ और था.

ऐसा भाव जिसे देखकर विजय के पैर कांपने लगे.

तो मैं तुम्हें क्यों बचाऊं?

विजय तुरंत घुटनों के बल बैठ गया.

सर. मुझसे गलती हो गई.

अर्जुन ने कुछ नहीं कहा.

विजय ने जल्दी से कहा,

मुझे अपना business भी देखना था. मैं डर गया था कि अगर ये बात बाहर आ गई तो पूरी कंपनी बर्बाद हो जाएगी.

अर्जुन कुछ पल उसे देखता रहा.

फिर उसकी नजर उस काली ऊर्जा की तरफ गई जो छत के एक कोने में जमा हो रही थी.

अब उसे सब समझ आ चुका था.

काव्या की मौत के बाद उसके भीतर का गुस्सा और अन्याय इस जगह से जुड गया था.

लेकिन आज.

वह ऊर्जा पहले से कहीं ज्यादा सक्रिय थी.

अर्जुन ने विजय की कॉलर पकडी.

विजय कुछ समझ पाता, उससे पहले अर्जुन उसे घसीटते हुए उस काली ऊर्जा के सामने ले आया.

यहीं रहो.

विजय डरकर पीछे हटने लगा.

स. सर.

अर्जुन ने उसकी तरफ देखा.

अगर जिंदा रहना चाहते हो, तो चुपचाप बैठे रहो.

विजय वहीं बैठ गया.

सुनिता कुछ बोलना चाहती थी, लेकिन डर के कारण उसकी आवाज नहीं निकल रही थी.

अर्जुन ने अपनी आंखें बंद कीं.

दोनों हाथों को सामने लाया.

फिर एक प्राचीन मंत्र का उच्चारण शुरू किया.

शुरुआत में उसकी आवाज बेहद धीमी थी.

लेकिन कुछ ही क्षणों बाद हवा में कंपन होने लगा.

छत पर जमा काली ऊर्जा अचानक हिलने लगी.

उसमें से अस्पष्ट आवाजें आने लगीं.

विजय का चेहरा डर से भर गया.

वह उठकर भागने लगा.

लेकिन—

अर्जुन की एक तेज लात उसके रास्ते में आ गई.

विजय जमीन पर जा गिरा.

अर्जुन ने उसकी तरफ देखे बिना कहा,

बैठे रहो.

विजय डर के मारे वहीं रुक गया.

अर्जुन ने फिर मंत्र का उच्चारण शुरू किया.

काली ऊर्जा धीरे- धीरे सिकुडने लगी.

हवा में मौजूद ठंडक बढती जा रही थी.

अर्जुन के माथे पर पसीने की बूंदें आने लगीं.

उसका शरीर भी इस प्रक्रिया से थक रहा था.

लेकिन उसने मंत्र नहीं रोका.

काली ऊर्जा और सिकुडी.

फिर.

धीरे- धीरे गायब होने लगी.

अर्जुन ने आखिरी शब्द के साथ अपना हाथ नीचे कर लिया.

छत पर अचानक सब कुछ शांत हो गया.

विजय कुछ पल तक अर्जुन को देखता रहा.

फिर उसने कांपते हाथों से अपनी जेब से एक बैंक कार्ड निकाला.

वह धीरे- धीरे अर्जुन के पास आया और कार्ड उसकी तरफ बढा दिया.

सर. ये मेरी तरफ से.

अर्जुन ने कार्ड की तरफ देखा तक नहीं.

उसने कार्ड लिया और अपनी जेब में रख लिया.

विजय ने हिम्मत करके कहा,

इसमें बीस करोड रुपये हैं.

अर्जुन कुछ नहीं बोला.

लेकिन विजय अब समझ चुका था.

जिस आदमी ने कुछ ही मिनटों में उस काली ऊर्जा को खत्म कर दिया था.

वह कोई आम इंसान नहीं था.

अर्जुन मुडा और छत से नीचे जाने लगा.

विजय और सुनिता कुछ पल वहीं खडे रहे.

फिर दोनों भी उसके पीछे चल पडे.

बिल्डिंग से बाहर निकलकर अर्जुन सडक पर आ गया.

उसे अब एक और चीज की जरूरत थी.

ऐसी चीज.

जिसके बारे में उसे अपने पुराने जीवन से कुछ याद था.

वह सीधे Antique Market की तरफ निकल पडा.

शहर के पुराने हिस्से में पहुंचते ही उसे कई छोटी- बडी antique shops दिखाई देने लगीं.

कहीं पुरानी तलवारें रखी थीं.

कहीं मूर्तियां.

कहीं पुराने सिक्के.

कहीं ऐसे सामान जिन्हें देखकर सामान्य इंसान को कोई खास बात समझ नहीं आती थी.

अर्जुन धीरे- धीरे आगे बढता रहा.

उसकी नजर हर दुकान पर पड रही थी.

लेकिन वह किसी खास चीज को ढूंढ रहा था.

फिर अचानक—

उसके कदम रुक गए.

सडक के दूसरी तरफ एक बेहद पुरानी दुकान थी.

दुकान का बोर्ड आधा टूट चुका था.

शीशों पर धूल जमी हुई थी.

अंदर भी बाकी दुकानों की तरह चमक- दमक नहीं थी.

लेकिन अर्जुन की नजर उसी दुकान पर टिक गई.

उसकी आंखें हल्की- सी सिकुडीं.

फिर उसके होंठों पर एक बेहद हल्की मुस्कान आई.

यही है.

वह सडक पार करके उस पुरानी antique shop की तरफ बढ गया.

दरवाजे के सामने पहुंचकर उसने कुछ पल दुकान को देखा.

उसे पता था.

इस दुकान के अंदर सिर्फ पुरानी चीजें नहीं थीं.

बल्कि ऐसी चीज भी थी.

जो उसकी आगे की यात्रा बदल सकती थी.

अर्जुन ने दरवाजा खोलने के लिए हाथ बढाया.

और जैसे ही उसने दरवाजा खोला—

अंदर से एक धीमी आवाज आई.

इतने साल बाद. आखिर तुम आ ही गए.

अर्जुन के कदम वहीं रुक गए.

उसकी आंखों में पहली बार हैरानी दिखाई दी.

क्योंकि.

उस आवाज को वह पहचानता था.

लेकिन यह कैसे संभव था?

जिस इंसान की आवाज उसने हजारों साल पहले ब्रह्म लोक में सुनी थी.

वह यहां, पृथ्वी पर कैसे मौजूद थी?

मुझे पता है आपको ये स्टोरी स्टार्टिंग में पसंद नहीं आ रही होगी लेकिन यकीन मानिए आप जैसे जैसे आगे बढ़ेंगे तीसरे एपिसोड के बाद थोड़ा इंटरेस्ट आ जाएगा और 15 एप के बाद तो आपको इस कहानी से लगाव होजाएगा

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