Kalyug ka amar sadhak Ch. 3

Kalyug ka amar sadhak - Chapter 3

Posted by Shivansh Pandey • Oct 04, 2026 06:08 PM

अर्जुन शेखावत बिल्कुल शांत खडा था.

उसके चेहरे पर न गुस्सा था, न घबराहट और न ही इस बात की कोई चिंता कि कुछ ही देर पहले उसने नीलामी में बीस करोड की बोली लगाकर पूरे हॉल का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया था.

लेकिन उसके चेहरे पर मौजूद वह हल्की- सी ठंडी मुस्कान.

उस मुस्कान ने जैसे पूरे कमरे का तापमान कम कर दिया था.

उसके दिमाग में सिर्फ एक बात चल रही थी.

उसे एक और एहसान लेना होगा.

विजय कलरा का एहसान.

कुछ ही समय पहले उसने विजय से मदद ली थी और अब एक बार फिर उसे विजय की जरूरत पडने वाली थी.

अर्जुन ने धीरे से अपनी नजरें शोनाली वर्मा की तरफ उठाईं.

क्या मैं एक फोन कर सकता हूँ?

शोनाली ने कुछ पल उसे देखा.

फिर उसने सिर हिला दिया.

हाँ. बिल्कुल.

लेकिन उसके मन में कुछ और ही चल रहा था.

उसे लगा, शायद यह लडका अब अपने किसी आदमी को बुलाने वाला है.

शोनाली ने मन ही मन सोचा—

शायद अपने किसी गुंडे को बुलाएगा. आने दो. जितने ज्यादा लोग होंगे, उतना ही अच्छा रहेगा.

उसने हल्की मुस्कान के साथ पूछा,

आपका फोन मिल सकता है?

अर्जुन ने कोई जवाब नहीं दिया.

वह बस एक कदम आगे बढा.

फिर उसने शोनाली की तरफ अपना हाथ बढा दिया.

शोनाली की आंखें अचानक फैल गईं.

वह कुछ सेकंड तक अर्जुन के हाथ को देखती रही.

फिर अपने दोनों हाथ पीछे कर लिए.

कमरे में अचानक ऐसा सन्नाटा छा गया कि किसी के सांस लेने की आवाज तक साफ सुनाई देने लगी.

शोनाली को समझ ही नहीं आया कि वह क्या करे.

और तभी.

हॉल ठहाकों से गूंज उठा.

कोई अपनी कुर्सी पर पीछे झुककर हंस रहा था.

कोई मेज पर हाथ मार रहा था.

किसी ने तो हंसते- हंसते अपना पेट ही पकड लिया.

भीड में से एक आदमी जोर से बोला,

भाई, तू इतना गरीब है कि तेरे पास फोन भी नहीं है?

एक और आवाज आई,

बीस करोड की बोली लगाने आया है और फोन तक नहीं है!

पूरा हॉल फिर हंसी से गूंज उठा.

अर्जुन बिल्कुल शांत खडा रहा.

उसके चेहरे पर कोई बदलाव नहीं आया.

शोनाली ने जल्दी से अपनी साडी का पल्लू ठीक किया और खुद को संभाला.

फिर उसने अर्जुन को सिर से पैर तक देखा.

नंबर बता दीजिए. मैं डायल कर देती हूँ.

अर्जुन ने शांत स्वर में कहा,

नंबर तो मुझे पता नहीं.

शोनाली की भौंहें सिकुड गईं.

अर्जुन ने अपनी बात पूरी की.

लेकिन मुझे यकीन है कि आपके पास होगा.

इस बार हंसी अचानक रुक गई.

हॉल में बैठे लोगों ने एक- दूसरे की तरफ देखा.

शोनाली की उंगलियां हल्की- सी कांप गईं.

उसने धीरे से पूछा,

किसका नंबर?

विजय कलरा का.

अर्जुन का जवाब बिल्कुल सीधा था.

शोनाली के चेहरे की मुस्कान गायब हो गई.

विजय कलरा?

उसकी आवाज पहले से काफी ऊंची थी.

एपेक्स कॉरपोरेशन के चेयरमैन विजय कलरा?

अर्जुन ने बस सिर हिला दिया.

हाँ.

शोनाली कुछ सेकंड तक उसे घूरती रही.

वह विजय कलरा को सिर्फ एक बडे बिजनेसमैन के रूप में नहीं जानती थी.

संगमपुर में विजय कलरा का नाम अपने आप में एक अलग पहचान था.

बिजनेस की दुनिया में उनकी पकड मजबूत थी और शहर के कई ताकतवर लोगों के साथ उनके संबंध थे.

शोनाली ने सालों में बडी मुश्किल से अपना नेटवर्क बनाया था.

लेकिन अगर विजय कलरा उससे नाराज हो जाते.

तो उसके बनाए हुए उस पूरे नेटवर्क की कीमत कुछ भी नहीं रह जाती.

उसने धीरे से पूछा,

तुम सच में उन्हें जानते हो?

अर्जुन ने कुछ पल सोचा.

फिर बोला,

मिला हूँ.

बस दो शब्द.

मिला हूँ.

शोनाली को लगा जैसे उसके सिर में अचानक दर्द होने लगा हो.

इतने बडे आदमी को यह लडका बस.

मिला हूँ” कहकर टाल रहा था.

भीड में फुसफुसाहट फिर शुरू हो गई.

ये लडका सच में अजीब है.

कहीं सच में पागल तो नहीं?

बीस करोड की बोली और फोन तक नहीं.

उधर बॉस जैन की हालत और खराब होती जा रही थी.

उसने अभी- अभी बीस करोड की बोली लगाई थी.

और अब उसे लग रहा था कि कहीं यह पूरा मामला उसके खिलाफ ही न चला जाए.

उसने गुस्से में कहा,

बच्चे, मुझे इस बात से कोई मतलब नहीं कि तू कौन है.

अर्जुन की नजर उसकी तरफ गई.

जैन ने अपनी आवाज को थोडा और सख्त करते हुए कहा,

लेकिन तेरे इस तमाशे की वजह से मेरी बीस करोड की बोली अटक गई है.

अर्जुन चुप रहा.

जैन आगे बोला,

उम्मीद है कि तू इस नुकसान की भरपाई कर सकेगा.

शोनाली ने भी अर्जुन को घूरकर देखा.

आज तक उसके नीलामी घर में किसी ने इस तरह का तमाशा नहीं किया था.

लेकिन अर्जुन को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे उसे किसी की परवाह ही नहीं.

वह अभी भी शांत था.

फिर उसने कहा,

बस एक फोन Call है.

उसकी नजर सीधे शोनाली पर थी.

अगर वो सच में आ गए तो?

शोनाली के कदम वहीं रुक गए.

यह बात उसके दिमाग में पहली बार आई.

अगर सच में विजय कलरा आ गए तो?

और अगर वह नहीं आए?

तो?

दोनों तरफ खतरा था.

तभी एक अधेड उम्र का आदमी अपनी कुर्सी से खडा हुआ.

उसके कपडे महंगे थे और उसके व्यवहार में ऐसा रुतबा था जैसे वह खुद को बाकी लोगों से ऊपर समझता हो.

Miss वर्मा, आप परेशान मत होइए.

शोनाली ने उसकी तरफ देखा.

मेरा भी चेयरमैन कलरा से थोडा- बहुत संपर्क है. मैं बात कर लेता हूँ.

उसने अर्जुन की तरफ देखा.

अगर यह लडका सच बोल रहा है, तो अभी पता चल जाएगा.

शोनाली ने राहत की सांस ली.

शुक्रिया, चेयरमैन राठी.

ललित राठी मुस्कुराया.

अरे Miss वर्मा, इसमें शुक्रिया कैसा?

उसके चेहरे पर एक चालाक मुस्कान थी.

मन ही मन वह सोच रहा था—

आज तो अच्छा मौका मिल गया.

अगर उसकी वजह से शोनाली और विजय कलरा के बीच कोई बात सुलझती है, तो शोनाली पर उसका प्रभाव बढ सकता था.

उसने फोन निकाला.

नंबर मिलाया.

कुछ सेकंड बाद Call जुड गई.

Hello चेयरमैन कलरा, ललित राठी बोल रहा हूँ.

दूसरी तरफ से भारी आवाज आई,

चेयरमैन राठी, कहिए.

ललित ने आसपास देखा.

अब सभी लोग उसकी तरफ देख रहे थे.

उसने जानबूझकर अपनी आवाज ऊंची रखी.

मैं अभी निधि मंडप में हूँ. यहां एक थोडी दिलचस्प स्थिति बन गई है. सोचा आपसे एक बार पुष्टि कर लूँ.

विजय ने पूछा,

मुझसे जुडी है?

जी.

ललित ने अर्जुन की तरफ देखा.

यहां एक नौजवान है. यह कह रहा है कि यह आपको जानता है और चाहता है कि आप यहां आएं.

दूसरी तरफ कुछ सेकंड के लिए खामोशी छा गई.

फिर विजय ने पूछा,

नाम क्या है उसका?

ललित मुस्कुराया.

उसे पूरा विश्वास था कि अब सबके सामने इस लडके का झूठ पकडा जाएगा.

नाम है. अर्जुन शेखावत.

अगले ही पल.

दूसरी तरफ से जोर की आवाज आई.

जैसे कोई चीज जमीन पर गिर गई हो.

ललित की मुस्कान गायब हो गई.

फोन से कोई आवाज नहीं आ रही थी.

चेयरमैन कलरा?

कोई जवाब नहीं.

हैलो?

Call cut चुकी थी.

ललित कुछ सेकंड तक फोन को देखता रहा.

उसे समझ नहीं आया कि अभी हुआ क्या.

उधर विजय कलरा की हालत पूरी तरह बदल चुकी थी.

जैसे ही उन्होंने फोन पर नाम सुना था—

अर्जुन शेखावत.

उनके चेहरे का रंग उड गया था.

वह अपनी कुर्सी से तुरंत खडे हुए.

फोन उनके हाथ से छूटकर नीचे गिर गया.

लेकिन विजय ने उसे उठाने की कोशिश तक नहीं की.

उनके दिमाग में सिर्फ एक नाम घूम रहा था.

अर्जुन शेखावत.

उन्होंने बिना समय गंवाए दरवाजा खोला.

गाडी निकालो!

ऑफिस के कर्मचारी उनकी आवाज सुनकर घबरा गए.

विजय ने फिर चिल्लाकर कहा,

अभी!

उनके कदमों में ऐसी जल्दबाजी थी जिसे उनके कर्मचारियों ने पहले कभी नहीं देखा था.

उधर निधि मंडप में.

ललित राठी अभी भी फोन को देख रहा था.

किसी ने पूछा,

चेयरमैन कलरा ने क्या कहा?

ललित ने कोई जवाब नहीं दिया.

एक आदमी हंस पडा.

देखा? फोन काट दिया. साफ है कि वो इसे जानते तक नहीं.

दूसरा बोला,

हम सबको बेवकूफ बनाया इस लडके ने.

लेकिन ललित के चेहरे पर अब हंसी नहीं थी.

उसे कुछ अजीब लग रहा था.

विजय कलरा ने नाम सुनते ही फोन क्यों काट दिया?

वह भी इतनी जल्दी?

उसने दोबारा नंबर मिलाया.

इस बार Call सीधे वॉइसमेल पर चली गई.

ललित ने धीरे से फोन नीचे किया.

फिर उसने अर्जुन की तरफ देखा.

तुम सच में चेयरमैन कलरा को जानते हो?

अर्जुन की आंखें आधी बंद थीं.

वह बिल्कुल शांत खडा था.

हाँ.

कैसे?

अर्जुन ने कोई जवाब नहीं दिया.

ललित को पहली बार उसके सामने खडे होने में अजीब- सा दबाव महसूस हुआ.

तभी भीड में से एक आदमी चिल्लाया,

Miss वर्मा, इसे बाहर क्यों नहीं निकलवा देतीं?

बॉस जैन भी अपनी कुर्सी से उठ गया.

उसका गुस्सा अब नियंत्रण से बाहर हो चुका था.

Miss वर्मा को परेशान करने की जरूरत नहीं.

उसने अपना फोन निकाला.

इसे बाहर निकालने का काम मैं करता हूँ.

उसने किसी को Call किया.

कुछ ही मिनट बाद.

मुख्य दरवाजा खुला.

दो भारी- भरकम सुरक्षा कर्मी अंदर आए.

वे सीधे जैन के पास पहुंचे.

बॉस?

जैन ने अर्जुन की तरफ इशारा किया.

इसे बाहर ले जाओ.

दोनों आगे बढे.

अर्जुन ने उन्हें आते हुए देखा.

उसने एक लंबी सांस ली.

फिर भी वह अपनी जगह से नहीं हिला.

एक आदमी ने उसका हाथ पकडने के लिए हाथ बढाया.

और उसी पल.

अर्जुन की आंखें पूरी तरह खुल गईं.

उसकी आंखों में एक ठंडी चमक दिखाई दी.

उसने अपना हाथ इतनी तेजी से घुमाया कि सामने खडा आदमी संभल भी नहीं पाया.

एक पल में उसकी पकड छूट गई.

दूसरे आदमी ने आगे बढने की कोशिश की.

अर्जुन ने उसके हाथ को मोडकर उसे जमीन पर गिरा दिया.

पहला आदमी भी दो कदम पीछे जाकर लडखडाया और जमीन पर गिर पडा.

पूरे हॉल में सन्नाटा छा गया.

किसी को समझ ही नहीं आया कि हुआ क्या.

दोनों सुरक्षा कर्मी उठने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अर्जुन उनके सामने बिल्कुल शांत खडा था.

उसने अपने कपडे ठीक किए.

फिर बॉस जैन की तरफ देखा.

परेशान करते हो?

उसकी आवाज में गुस्सा नहीं था.

यही बात सबसे ज्यादा डरावनी थी.

जैन का चेहरा सफेद पड गया.

अर्जुन ने नीलामी की तरफ देखा.

फिर बेहद सामान्य अंदाज में कहा,

इक्कीस करोड.

हॉल में बैठे सभी लोग एक- दूसरे को देखने लगे.

जैन को जैसे झटका लगा.

क्या?

अर्जुन ने दोबारा कहा,

मेरी बोली. इक्कीस करोड.

जैन के होंठ सूख गए.

वह कुछ बोलना चाहता था.

लेकिन तभी.

धडाम!

मुख्य दरवाजा जोर से खुला.

सभी की नजरें दरवाजे की तरफ घूम गईं.

वहां विजय कलरा खडा था.

उसकी सांस तेज चल रही थी.

चेहरे पर पसीना था.

लग रहा था जैसे वह बिना रुके यहां तक पहुंचा हो.

लेकिन विजय ने किसी की तरफ ध्यान नहीं दिया.

उसकी नजरें पूरे हॉल में सिर्फ एक इंसान को ढूंढ रही थीं.

और फिर.

उसकी नजर अर्जुन पर जाकर रुक गई.

विजय के चेहरे पर जैसे राहत उतर आई.

वह तुरंत आगे बढा.

सीधे अर्जुन के पास पहुंचा.

फिर उसने अपना सिर झुका दिया.

सर. माफ कीजिए. मुझे पहुंचने में देर हो गई.

पूरा हॉल जैसे जम गया.

किसी को विश्वास नहीं हुआ.

विजय कलरा.

जिसका नाम सुनकर शहर के बडे- बडे कारोबारी सावधान हो जाते थे.

वह इस साधारण कपडों में खडे युवक को.

sir कह रहा था.

कुछ सेकंड पहले जिस लडके का मजाक उडाया जा रहा था.

अब वही लडका पूरे हॉल की सबसे बडी ताकत के सामने खडा था.

अर्जुन ने विजय को देखा.

फिर उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आई.

आने के लिए शुक्रिया.

विजय ने सिर झुकाए रखा.

आपने बुलाया था सर. मैं कैसे नहीं आता?

अर्जुन ने उसके चेहरे पर मौजूद पसीने को देखा.

उसे समझ आ गया कि विजय सच में जल्दबाजी में यहां पहुंचा था.

मैंने आपको सिर्फ इसलिए बुलाया क्योंकि मुझे एक चीज पसंद आ गई थी.

विजय ने तुरंत पूछा,

क्या चीज?

अर्जुन ने नीलामी में रखी तलवार की तरफ इशारा किया.

वो.

विजय की नजर तलवार पर गई.

फिर उसने वापस अर्जुन को देखा.

बस इतनी- सी बात?

हाँ.

अर्जुन ने कंधे उचकाए.

मेरे पास थोडे पैसे कम पड गए.

विजय की नजर धीरे- धीरे घूमकर बॉस जैन पर जा रुकी.

जैन की हालत खराब हो गई.

विजय की आंखों में अब कोई गर्मजोशी नहीं थी.

सिर्फ ठंडापन था.

जैन ने कांपती आवाज में कहा,

चेयरमैन कलरा. शायद थोडी गलतफहमी हो गई थी.

विजय ने उसकी तरफ देखा.

गलतफहमी?

जैन ने जल्दी से कहा,

जी. मैं. मैं इस नौजवान से माफी मांगने के लिए तैयार हूँ.

विजय की भौंह तन गई.

नौजवान?

उसने धीरे से अर्जुन की तरफ देखा.

फिर वापस जैन की तरफ.

तुम्हें पता भी है तुम किसके बारे में बात कर रहे हो?

जैन के होंठ कांपने लगे.

विजय एक कदम आगे बढा.

मैं उन्हें sir कहता हूँ.

हॉल में बैठे लोगों की सांसें थम गईं.

विजय ने अर्जुन की तरफ पलटकर सिर झुकाया.

सर, आप चिंता मत कीजिए. यहां जो भी समस्या है, मैं संभाल लूंगा.

अर्जुन ने कुछ नहीं कहा.

वह बस तलवार को देखता रहा.

उसे तलवार में कुछ ऐसा महसूस हो रहा था जो बाकी किसी को महसूस नहीं हो रहा था.

उसके भीतर की ऊर्जा जैसे किसी पुराने परिचित की तरह उसे अपनी तरफ खींच रही थी.

लेकिन अभी.

उसे सिर्फ तलवार चाहिए थी.

विजय ने उसकी नजर समझ ली.

सर. क्या इसे अभी खरीदना है?

अर्जुन ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,

नहीं.

वह कुछ पल रुका.

इसे हासिल करना है.

विजय चुप हो गया.

फिर उसने पूरे हॉल की तरफ देखा.

उसकी आवाज भारी थी.

अब से कोई भी बोली लगा सकता है.

कुछ लोग हैरान होकर उसकी तरफ देखने लगे.

विजय ने आगे कहा,

लेकिन तुम लोग जितनी भी बोली लगाओगे.

उसने एक पल रुककर कहा,

मैं उससे बीस प्रतिशत ज्यादा बोली लगाऊंगा.

कमरे में फिर सन्नाटा छा गया.

बॉस जैन की आंखें तलवार पर टिक गईं.

फिर अर्जुन पर.

अब उसे समझ आ चुका था कि उसने किससे पंगा लिया था.

शोनाली भी बिल्कुल चुप थी.

कुछ देर पहले तक वह इस लडके को सिर्फ एक अजीब ग्राहक समझ रही थी.

अब उसके सामने वही लडका खडा था जिसके लिए विजय कलरा खुद दौडता हुआ आया था.

लेकिन इस पूरे तमाशे के बीच.

एक बात अभी भी किसी को नहीं पता थी.

अर्जुन शेखावत आखिर था कौन?

क्योंकि यह सिर्फ एक नाम नहीं था.

एक पहचान थी.

एक चेहरा था.

लेकिन उसकी असली कहानी.

अभी शुरू भी नहीं हुई थी.

उसे अपनी खोई हुई शक्ति वापस पानी थी.

उसे अपने माता- पिता का पता लगाना था.

और अब.

उसके हाथ एक ऐसी तलवार लगने वाली थी, जिसका संबंध उसके पुराने जीवन से हो सकता था.

अर्जुन ने धीरे से तलवार की तरफ देखा.

उसकी आंखों में पहली बार एक अलग तरह की चमक दिखाई दी.

विजय ने भी उस तलवार को देखा.

सर. इस तलवार में ऐसा क्या है?

अर्जुन ने कुछ पल उसे देखा.

फिर कहा,

अभी नहीं.

विजय चुप हो गया.

अर्जुन आगे बढा.

उसकी नजर तलवार से हट ही नहीं रही थी.

उसे महसूस हो रहा था.

जैसे उस तलवार के भीतर कोई पुरानी ऊर्जा अब भी मौजूद हो.

जैसे वह किसी ऐसे इंसान का इंतजार कर रही हो.

जिसे वह बहुत पहले से जानती हो.

और तभी.

तलवार की धार पर एक बेहद हल्की चमक उभरी.

अर्जुन की आंखें सिकुड गईं.

उसके चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान आई.

क्योंकि वह उस ऊर्जा को पहचान चुका था.

लेकिन सवाल यह था—

क्या तलवार भी उसे पहचान चुकी थी?

क्या यह वही तलवार थी जिसका संबंध उसके पिछले जीवन से था?

और अगर ऐसा था.

तो अर्जुन शेखावत के सामने उसके अतीत का कौन- सा दरवाजा खुलने वाला था?

संगमपुर में आज की रात सिर्फ एक नीलामी नहीं होने वाली थी.

आज की रात.

अर्जुन शेखावत के जीवन में एक नया अध्याय शुरू होने वाला था.

क्या अर्जुन उस रहस्यमयी तलवार को हासिल कर पाएगा?

बॉस जैन ने अर्जुन से दुश्मनी लेकर कितनी बडी गलती कर दी है?

और सबसे बडा सवाल. अर्जुन शेखावत की असली ताकत आखिर कब दुनिया के सामने आएगी?

जानने के लिए सुनते रहिए—

कलयुग का अमर साधक.

अगर आपको यह एपिसोड पसंद आया हो, तो इसे पाँच स्टार रेटिंग जरूर दीजिए.

क्योंकि अर्जुन शेखावत की असली कहानी.

अब शुरू हो चुकी है.

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