यह कहानी है काशी और विश्वनाथ की.. विश्वनाथ रघुवंशी जिसका एक ही मकसद है। अपने दुश्मन किशोरा अवस्थी की बर्बादी। पर किशोर अवस्थी सालों से विदेश में छुपा हुआ है। एक दिन विश्व को पता चलता है कि किशोर की बेटी टिया के बारे में। और विश्व प्लानिंग करता है, टिया को किडनैप करने की। पर गलती से टिया की जगह किडनैप हो जाती है टीया की केयरटेकर और उसकी दोस्त काशी को । अपने नफरत के चलते विश्व बिना सच जाने कर लेता है काशी से शादी। ताकि वह किशोर अवस्थी से बदला ले सके, पर क्या होगा अंजाम जब विश्व को पता चलेगा। कि उसने गलत लड़की से शादी कर ली है। और सबसे बड़ा झटका तो उसे तब लगेगा जब उसे यह पता चलेगा कि काशी एक ऐसी लड़की है, जिस के पास उसकी अपनी आवाज तक नहीं है। जानने के लिए पढ़िए "Kashi Vishwanath"
Romance Young Adult
Hindi
Romance
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Chapter 1
Meet Vishwanath Raghuvanshi ( devil) -
Chapter 2
Banaras -
Chapter 3
काशी की किडनैपिंग - Chapter 3 -
Chapter 4
काशी विश्वनाथ की शादी - Chapter 4 -
Chapter 5
एक ऐसी दुल्हन जिसे शादी के मंडप पर छोड़ दिया है - Chapter 5 -
Chapter 6
ये वो लड़की नहीं है - Chapter 6 -
Chapter 7
सर्वगुण संपन्न काशी - Chapter 7 -
Chapter 8
साथ नहीं था, ना नीति न नियति. - Chapter 8 -
Chapter 9
रात गई बात गई। वो शादी एक धोखा थी, - Chapter 9 -
Chapter 11
ये वाला कलर जो भाई की फिंगर पर लगा हुआ है..!" - Chapter 11 -
Chapter 12
मुसीबत में काशी - Chapter 12 -
Chapter 13
शिकार शेर का होता है,कुत्तों का नहीं - Chapter 13 -
Chapter 14
तुम्हारे पास घर नहीं है! - Chapter 14 -
Chapter 15
ग्रह प्रवेश - Chapter 15 -
Chapter 16
विश्व की बेचैनी - Chapter 16 -
Chapter 17
गुड़िया और उसका पांडा - Chapter 17 -
Chapter 18
काशी यहा नहीं रह सकती - Chapter 18 -
Chapter 19
साइलेंट डॉल - Chapter 19 -
Chapter 20
मेरे सर पर रख दो।" - Chapter 20 -
Chapter 21
वो हमारे साथ नहीं रह सकती। ये उसका घर नहीं है।" - Chapter 21 -
Chapter 22
पीरियड / केयरटेकर - Chapter 22 -
Chapter 23
अब क्या? तुम्हें न्यौता दे कर बोलना पड़ेगा कि बाहर जाओ! - Chapter 23 -
Chapter 24
उसका पति सिर्फ मेरा है - Chapter 24 -
Chapter 25
चंद्रिका समीर की बेहन - Chapter 25 -
Chapter 26
जो डर गया. वो घर गया .. - Chapter 26 -
Chapter 27
सत्यानाश - Chapter 27 -
Chapter 28
इस घर में मेरी मर्जी के बिना एक गाड़ी नहीं चलती, भाई की तो मैं साइकिल भी न चलने दूं! - Chapter 28 -
Chapter 29
जो भी बोलना है मुंह से बोलो. मुझे नहीं आती ये नैनों की भाषा ।" - Chapter 29 -
Chapter 30
अर्थ गोयनका - Chapter 30 -
Chapter 31
विश्वनाथ की बनेगी काशी - Chapter 31 -
Chapter 32
मैं इतनी सुंदर हूं, मैं क्या करू - Chapter 32 -
Chapter 33
कपकेक चोर - Chapter 33 -
Chapter 34
doll - Chapter 34 -
Chapter 35
तूने जो ना कहा, मैं वो सुनता रहा, खामखा बेवजह ख्वाब बुनता रहा. - Chapter 35 -
Chapter 36
भंडारा करना चाहती हो - Chapter 36 -
Chapter 37
गुड़िया ने अर्थ को अंकल बोल 😁 - Chapter 37 -
Chapter 38
छिपे राज़ और नई चालें" - Chapter 38 -
Chapter 39
गुलाबो चश्मे वाली - Chapter 39 -
Chapter 40
निरहुआ रिक्शावाला - Chapter 40 -
Chapter 41
काशी का सीक्रेट - Chapter 41