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Completed Non-fiction

ज्ञानवर्धन कहानी ( Complete )

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Priyanka Amit Bagani PA
Priyanka Amit Bagani Author
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81 Chapters
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१) कछुआ और खरगोश एक समय की बात है, एक जंगल में एक कछुआ और एक खरगोश रहते थे। दोनों अच्छे दोस्त थे, लेकिन खरगोश को अपनी तेजी पर बहुत गर्व था। वह हमेशा कछुए को अपनी धीमी गति के लिए चिढ़ाता था। एक दिन, खरगोश ने कछुए को चुनौती दी, "चलो, देखते हैं कौन जंगल की परिक्रमा सबसे पहले पूरी करता है!" कछुआ ने सोचा कि यह एक अच्छा मौका है अपनी धीमी गति का फायदा उठाने का, और उसने हां कह दिया। दोनों ने अपनी यात्रा शुरू की। खरगोश तेजी से भागा, जबकि कछुआ धीमी गति से चलता रहा। खरगोश ने सोचा कि वह आसानी से जीत जाएगा, इसलिए वह रास्ते में एक पेड़ के नीचे सो गया। इस बीच, कछुआ धीमी गति से चलता रहा और खरगोश को पीछे छोड़ दिया। जब खरगोश जागा, तो उसने देखा कि कछुआ पहले ही जंगल की परिक्रमा पूरी कर चुका था। खरगोश को अपनी हार स्वीकार करनी पड़ी और उसने कछुए को बधाई दी। कछुआ ने कहा, "धीमी गति से चलने में कोई बुराई नहीं है, अगर आप अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखते हैं और हार नहीं मानते।" इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि धैर्य और दृढ़ता सफलता की कुंजी है, न कि सिर्फ तेजी या गति।

Self-Help & Personal Development Hindi Romance
  • Chapter 1

    कछुआ और खरगोश - Chapter 1
  • Chapter 2

    नमक का कर्ज - Chapter 2
  • Chapter 3

    मूर्ख कौन? - Chapter 3
  • Chapter 4

    लड्डू गोपाल- Chapter 4
  • Chapter 5

    लक्ष्मी जी और शनि देव - Chapter 5
  • Chapter 6

    भगवान की नजर - Chapter 6
  • Chapter 7

    परख - Chapter 7
  • Chapter 8

    पिता का आशीर्वाद- Chapter 8
  • Chapter 9

    जो दोगे बही पाओगे - Chapter 9
  • Chapter 10

    सम्यक दृष्टि - Chapter 10
  • Chapter 11

    भाग्य की दौलत - Chapter 11
  • Chapter 12

    हरि मैं जैसो तैसो बस तेरो- Chapter 12
  • Chapter 13

    हंस ओर काग- Chapter 13
  • Chapter 14

    सत्संग - Chapter 14
  • Chapter 15

    ईश्वर की सच्ची भक्ति - Chapter 15
  • Chapter 16

    गुरु ही सचा रक्षक है - Chapter 16
  • Chapter 17

    एक बुजुर्ग आदमी Chapter 17
  • Chapter 18

    चार आने का हिसाब - Chapter 18
  • Chapter 19

    गुरु की महिमा - Chapter 19
  • Chapter 20

    सच्चा न्याय - Chapter 20
  • Chapter 21

    कलयुग का दरोगा - Chapter 21
  • Chapter 22

    डाकू रत्नाकर और देव ऋषि नारद Chapter 22
  • Chapter 23

    सदा व्यवहार का जादू - Chapter 23
  • Chapter 24

    भगवान की डायरी- Chapter 24
  • Chapter 25

    कलयुग का लक्ष्मण- Chapter 25
  • Chapter 26

    ठाकुर जी से रिश्ता- Chapter 26
  • Chapter 27

    भक्ति और प्रेम - Chapter 27
  • Chapter 28

    बुजुर्ग व्यक्ति का आशीर्वाद - Chapter 28
  • Chapter 29

    भगवान - Chapter 29
  • Chapter 30

    अपनी अपनी सोच - Chapter 30
  • Chapter 31

    सेठ जी का लालच - Chapter 31
  • Chapter 32

    जिस का मन पवित्र - Chapter 32
  • Chapter 33

    वृंदावन की माटी - Chapter 33
  • Chapter 34

    ईमानदारी का फल - Chapter 34
  • Chapter 35

    सदव्यवहार का फल - Chapter 35
  • Chapter 36

    सत्संग असर - Chapter 36
  • Chapter 37

    राजा अज - Chapter 37
  • Chapter 38

    माँ का दायित्व - Chapter 38
  • Chapter 39

    संतान के लिया विरासत Chapter 39
  • Chapter 40

    दान की महिमा - Chapter 40