"छाया महल – जहाँ आत्माएँ सोती नहीं..." उत्तर प्रदेश के बरहपुर गाँव के बाहर एक वीरान खंडहर खड़ा है — छाया महल। कहते हैं, वहाँ हर अमावस्या की रात कुछ ऐसा होता है जो इंसानी समझ से परे है। 300 साल पहले की एक रानी की आत्मा, जो जिंदा जलाई गई थी, आज भी उस महल में भटक रही है। आरुषि मिश्रा, एक युवा रिसर्चर, लोककथाओं और अंधविश्वासों की खोज में इस महल तक पहुँचती है। लेकिन जैसे ही वो महल के पहले दरवाज़े तक पहुँचती है, कुछ ऐसा महसूस करती है जो विज्ञान भी नहीं समझा सकता। हर दीवार पर छिपा है एक रहस्य, हर कोना फुसफुसाता है एक कहानी — और हर साया बताता है कि वह अकेली नहीं है। राजवीर सिंह, एक रहस्यमयी गाइड, जो खुद कई सवालों से घिरा है... एक सपना, जो उसे सदियों पुरानी रानी में बदल देता है... और सात आत्माएँ, जो अब जाग रही हैं... यह सिर्फ एक महल की कहानी नहीं है। यह कहानी है उस अतीत की, जो कभी मिटा नहीं। यह कहानी है प्यार, धोखे, तंत्र, और एक अनसुलझे श्राप की...
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Chapter 1
छाया महल - Chapter 1