राहुल सांकृत्यायन का सामाजिक-ऐतिहासिक उपन्यास। गाँव की गरीबी से निकलकर युद्ध, प्रवास, श्रमिक जीवन, किसान आन्दोलन, प्रेम और बलिदान तक फैली देवराज की जीवन-यात्रा अपने समय के भारत और विश्व की उथल-पुथल को मानवीय दृष्टि से देखती है। यह मूल हिन्दी कृति भारत में सार्वजनिक डोमेन में है; पाठ 1948 के द्वितीय संस्करण को 1940 के स्वतंत्र स्रोत-साक्ष्य से मिलाकर तैयार किया गया है।
Hindi
Romance
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Chapter 1
बाल्यस्मृति -
Chapter 2
माँ-बाप -
Chapter 3
अनाथ लड़का -
Chapter 4
गाँवका त्याग -
Chapter 5
कलकत्तामें -
Chapter 6
सेठका नौकर -
Chapter 7
पुस्तकालयका चपरासी -
Chapter 8
सत्संग और शिक्षा -
Chapter 9
आतंकवादसे असहमत -
Chapter 10
मित्रका अन्त -
Chapter 11
फिर गाँवमें -
Chapter 12
पल्टनमें भरती -
Chapter 13
शिकार और उपकार -
Chapter 14
रेलयात्रा -
Chapter 15
हिमालय -
Chapter 16
महायुद्ध -
Chapter 17
युद्धक्षेत्रको -
Chapter 18
युद्धमें घायल -
Chapter 19
अस्पतालमें -
Chapter 20
दुबारा घायल -
Chapter 21
परिचय -
Chapter 22
प्रेम -
Chapter 23
वृद्धाका वात्सल्य -
Chapter 24
मित्र-गोष्ठी -
Chapter 25
मोटर-ड्राइवर -
Chapter 26
कोयलेकी फेरी -
Chapter 27
प्रेम और आदर्श -
Chapter 28
उत्तराधिकार -
Chapter 29
स्वदेशमें -
Chapter 30
एक बार फिर गाँवमें -
Chapter 31
स्वयंसेवकको सजा -
Chapter 32
शिक्षित-अशिक्षित -
Chapter 33
षड्यन्त्र -
Chapter 34
जेल-यातना -
Chapter 35
सत्याग्रही -
Chapter 36
कोयलेकी खान -
Chapter 37
अज्ञातवास समाप्त -
Chapter 38
पुनर्मिलन -
Chapter 39
देश-विदेश -
Chapter 40
अवसान