वो राज करने के लिए पैदा हुआ था… और वो भी किसी के सामने झुकना नहीं जानती थी। जिस आदमी के एक इशारे पर पूरा गांव सिर झुका देता था, उसी के सामने एक लड़की ने आंखों में आंखें डालकर कह दिया—“मैं तुम्हारी गुलाम नहीं हूं।” वीर सिंह राजावत… राजावत घराने का वारिस, जिसके लिए गांव में उसकी मर्जी ही आखिरी फैसला थी। लोग उससे डरते थे, उसके सामने झुकते थे और उसकी हां में हां मिलाते थे। लेकिन फिर सितारा लौट आई—एक गरीब किसान की बेटी, जिसके पास न कोई ताकत थी, न कोई रसूख… बस अपने पिता के अपमान की आग और अपने स्वाभिमान की ताकत। सालों पहले राजावत परिवार ने उसके परिवार से जो छीना था, सितारा उसे भूलने नहीं आई थी। मगर उसे क्या पता था कि अपना हिसाब चुकता करने की कोशिश में उसे उस आदमी से टकराना पड़ेगा, जो किसी को अपने बराबर खड़ा देखना तक पसंद नहीं करता। वीर ने सितारा को झुकाने की ठानी और सितारा ने वीर का घमंड तोड़ने की। दोनों की हर मुलाकात जंग बनती गई, हर बात चुनौती और हर टकराव के पीछे छिपने लगा एक अनकहा आकर्षण। लेकिन असली खेल तब शुरू होता है जब सितारा को राजावत परिवार के अतीत से जुड़े ऐसे राज़ मिलते हैं, जो उसके पिता के साथ हुई घटना की पूरी कहानी बदल सकते हैं। अब ये सिर्फ एक लड़की के बदले की कहानी नहीं रही—ये सत्ता, परिवार, धोखे, पुराने राज़ और दो ऐसे दिलों की कहानी बन चुकी है जो एक-दूसरे को हराने निकले थे… लेकिन शायद खुद से ही हारने वाले थे। कौन झुकेगा? कौन टूटेगा? और जब प्यार और बदले के बीच सिर्फ एक कदम का फासला रह जाएगा, तब सितारा किसे चुनेगी—अपना स्वाभिमान या वो आदमी जिसे वो कभी अपना सबसे बड़ा दुश्मन समझती थी?
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Chapter 1
Their First Encounter