ध्रुव द घोस्ट एजेंट Ch. 1

ध्रुव द घोस्ट एजेंट - Chapter 1

Posted by Aman Aj • Dec 02, 2024 05:03 PM

रात के 2:00 बज रहे थे। तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश हो रही थी। मौसम बेहद भयानक था। इस भयानक मौसम के बीच एक कार सड़क पर फिसलते हुए तेजी से मुड़ी। कार का ड्राइवर घबराया हुआ था और बार-बार पलटकर पीछे की तरफ देख रहा था। पीछे 1 साल का छोटा बच्चा था जो किलकारियां भरते हुए खेल रहा था।

“बस थोड़ी देर और।” कार ड्राइवर ने कहा। उसने बेक मेरर में देखा और अपनी रफ्तार को और बढ़ा दिया।

तकरीबन 15 मिनट के बाद कार शहरी गली में एक मकान के सामने आकर रुकी। कार ड्राइवर जल्दी से बाहर निकला और पीछे की सीट का दरवाजा खोला। उसने बच्चे के चेहरे की तरफ देखा और एक पल के लिए उसमें खो गया। “तुम, मैं तुम्हें ऐसा बिल्कुल नहीं छोड़ने वाला था।” उसने कहा।

कार ड्राइवर ने बच्चे की तरफ हाथ बढ़ाएं और उसे उठा लिया। बारिश में भीगता हुआ वह मकान के सामने आया और उसे दरवाजे पर लेटा दिया। बच्चे को बारिश का पानी नुकसान ना पहुंचाए इसलिए उसने अपना ग्रे कलर का ओवरकोट उतारा और उसे बच्चे के ऊपर ओढ़ा दिया।

“ध्रुव ...” कार ड्राइवर घुटनों के बल बैठ कर उसके चेहरे की तरफ देखते हुए बोला “याद रखना.... तुम मेरे बेटे हो... एक घोस्ट एजेंट के बेटे.. और तुम... तुम भी एक घोस्ट एजेंट हो... ध्रुव  द घोस्ट एजेंट... मुझे अफसोस है जो मैं तुम्हें यह जिंदगी देने जा रहा हूं, तुम्हारे पैदा होने से पहले मैंने और मेरी मां ने तुम्हारे लिए कई सपने देखे थे, मगर अब उनमें से कोई भी पूरा नहीं हो पाएगा, हम तुम्हारे भविष्य का कोई फैसला नहीं ले पाएंगे।” इसके बाद उसने अपना चेहरा ऊपर की तरफ किया और कहा “तुम्हारे भविष्य का फैसला किस्मत ने पहले से ही निर्धारित कर रखा है।” उसने कहकर बच्चे के माथे पर हाथ फेरा। फिर खड़ा हुआ और दरवाजे की डोर बेल बजा कर जल्दी से अपनी कार की तरफ भाग गया। उसने कार स्टार्ट की और दरवाजे के खुलने से पहले वहां से चला गया।

दरवाजा खुला और वहां एक मोटी औरत ने दस्तक दी। “कौन है जिसने इतनी आधी रात को... अरे... यहां तो एक बच्चा है.... अजी सुनते हो... जल्दी बाहर आइए...”

“क्या हुआ... क्यों इतनी आधी रात को चिल्ला रही हो...” अंदर से एक मोटा आदमी बाहर आया।

“यह देखिए... यहां एक बच्चा है...”

“क्या बच्चा...!! इसे यहां कौन छोड़ गया..?”

“पता नहीं...”

“ऐसे किसी बच्चे को कौन छोड़ सकता है....!! इसके मां-बाप को अक्ल नहीं थी क्या...”

औरत आगे बढ़ी और बच्चे को अपनी गोद में उठा लिया। “इसके गले में... यह एक लॉकेट है... इस पर नाम लिखा हुआ है...”

“क्या नाम... लाओ मुझे देखने दो... आ...”

“ध्रुव ...” औरत ने नाम को पढ़ा।

“चलो अंदर चलो... बहुत बारिश हो रही है कहीं यह बीमार ना हो जाए...”

“हां चलिए...”

दोनों दरवाजा बंद कर के अंदर चले गए। वह अंदर आपस में बातें करते रहे जिसकी आवाज धीरे धीरे धीमी होती गई।

औरत कह रही थी “हम इस बच्चे को पाल ले... वैसे भी हमारा कोई बच्चा नहीं... हम इसका नाम ध्रुव  ही रख लेंगे.. कितना प्यारा नाम है...”

“बस करो... कल को कोई इसे लेने आ गया तो हम क्या करेंगे...”

“तो.. तो क्या... यह जब तक यहां रहेगा तब तक हमारा होकर रहेगा... और जब जाना होगा तो यह चला जाएगा...”

_____

बच्चे को छोड़ने वाला कार ड्राइवर अभी भी घबराया हुआ था और कार को काफी हाई स्पीड में चला रहा था। उसकी आंखों में आंसू थे जो अपने बच्चे को अकेले छोड़ देने के कारण थे। कार को चलाते-चलाते उसने बगल की सीट पर पड़े एक अजीब से यंत्र को उठाया और उसे देखा। “तुम मेरे लिए एक अभिशाप हो...” उसने यंत्र को देखते हुए कहा। “ना तुम होते... ना मैं अपनी पत्नी और अपने बच्चे को खोता... ” यह कहकर उसने कार के शीशे को नीचे किया और कुछ बुदबुदाकर उस यंत्र को बाहर फेंक कर मारा। एक छोटे त्रिशूल के ऊपर लगे सुदर्शन चक्र वाला यह यंत्र सड़क के किनारे गिरा और वहां बहने वाले पानी के साथ बहने लगा। बहते बहते अचानक यंत्र धुएं में बदलता हुआ गायब हो गया। कार ड्राइवर ने आसुंओं को साफ किया और तेजी से कार चलाता रहा।

अगले 30 मिनट में उसने कार को अपने घर के सामने लाकर रोक दिया। वह कार से उतरा और पीछे डिक्की को खोल कर पेट्रोल की दो कैन को बाहर निकाल लिया। वह घर में गया और उन्हें खोल कर हर जगह पेट्रोल छिड़कने लगा। इस दौरान वह रो रहा था। उसके घर में कई सारे अजीब से यंत्र, ढेर सारी किताबें जो काफी पुरानी थी, तस्वीरें जिनमें ऐसे लग रहा था उसने यह किसी के साथ खड़े होकर खिंचाई है मगर किसके साथ वह उस तस्वीर में दिखाई नहीं दे रहा था, थे। सब पर पेट्रोल छिड़कने के बाद वो घर के बाहर आ गया। “मैं हर चीज का नामोनिशान मिटा दूंगा...वो कभी तुम तक नहीं पहुंच पाएंगे...” उसमें जैब से लाइटर निकाला और उसे जला लिया। “ऐसा कुछ भी नहीं छोडूंगा जो मेरे बच्चे के लिए खतरा बने... वो... उसे कुछ नहीं होगा... मैंने अपनी पत्नी को खो दिया मगर मेरे बच्चे को कुछ नहीं होने दूंगा...” उसने लाइटर को फेंक कर घर की तरफ मारा।

लाइटर घर के दरवाजे तक पहुंचा था तभी अचानक काला धुआं प्रकट हुआ और एक हाथ ने धुंए के बीच से निकलकर लाइटर को पकड़ लिया। देखते ही देखते उस धुए ने एक इंसान की शक्ल ले ली जिसका आधा शरीर गला हुआ था। “तुम्हें कुछ ज्यादा ही जल्दी नहीं दिवाकर शर्मा....”

उसे देख कर दिवाकर शर्मा की आंखें बड़ी हो गईं। वह अपने कपड़ों में हाथ मारने लगा, उसे किसी चीज की तलाश थी।

“क्या तुम इसे ढूंढ रहे हो...” सामने के आधे गले इंसान ने उसे उसे एक यंत्र दिखाया। यह एक आधे हाथ के जितने डंडे पर वी आकर के अक्षर को बांधे हुए था। “इसे.... जिसके साथ तुम कुछ मंत्र पढ़ते हो... और हमें लाचार बेसहारा कर देते हो.... हमारी किस्मत का फैसला करते हो... तुम भुतनाशको ने... तुम भूतनाशको ने इसके साथ हमारा जीना हराम कर रखा है...” उसने उस यंत्र को गुस्से से देखा।

“तुम्हें तुम्हारे कर्मों की सजा मिलती है... तुम्हारे बुरे इरादों की सजा मिलती है... उन बुरे इरादों की जिसमें तुम लोग कभी कामयाब नहीं हो पाओगे....”

यह सुनकर सामने का आदमी हंसा और बड़े ही स्टाइल में कहां “अब इसकी टेंशन किसको है....” वह थोड़ा सा और हंसा और फिर हंसना बंद करके बोला “चलो, ज्यादा बहस बाजी नहीं और अच्छे बच्चों की तरह मुझे बताओ..... वो नर्क आयाम यंत्र कहां है.....? ”

“तुम्हें लगता है तुम ऐसे पूछोगे और मैं तुम्हें उस यंत्र का पता बता दूंगा, उस यंत्र का जिससे तुम लोग क्यामत लेकर आने वाले हो, तुम उसे आजाद करके यहां लाने वाले हो,“

“क्यामत तो आकर रहेगी...”

“मगर मेरे होते हुए नहीं, मैं मर जाऊंगा मगर तुम्हें कभी उस यंत्र का पता नहीं दूंगा...”

“जब तक तुम यंत्र का पता नहीं बता देते हैं तब तक तुम्हारी सांसे चलती रहेगी... ”

“तुम मुझे नहीं रोक सकते... बिल्कुल नहीं...” दिवाकर शर्मा ने कहा और अपनी आंखों में आत्मविश्वास दिखाता हुआ उसकी ओर दौड़ने लगा। वह उसके पास पहुंचा, नीचे झुका और उसे पकड़कर घर के अंदर कूद गया। उस आदमी के पास जो लाइटर मौजूद था वो अभी भी जल रहा था। घर के अंदर कुदते ही लाइटर फर्श पर गिरा, पेट्रोल ने आग पकड़ी और अगले ही पल पूरा घर आग से धधक गया। वह आदमी और दिवाकर शर्मा दोनों ही उस आग में जलने लगे।

घर आग से जल रहा था तभी आदमी खांसता हुआ उठ खड़ा हुआ। उसका शरीर अभी भी आग से जल रहा था मगर उसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। उसने लंबा लबादा पहन रखा था। उसने अपने लबादे को उठाया और अपने ऊपर औढ लिया। ऐसा करते ही वह पारदर्शी हो गया। उसने लबादा नीचे किया और अपने इस पारदर्शी रूप में घुटनों के बल बैठ कर दिवाकर शर्मा को गिरेबान से पकड़ कर ऊपर की तरफ खींचा। दिवाकर शर्मा के शरीर से उसकी आत्मा बाहर आ गई। “ यंत्र का पता तो तुम्हें बताना होगा...” वह बोला।

“मैं... मैं...” दिवाकर शर्मा बोला। “मैं उसका पता कभी नहीं बताने वाला।”

“तो... तब तो.. तुम्हारे लिए खुशखबरी है... मुबारक हो... अब तुम्हारी आत्मा को तब तक तड़पाया जाएगा जब तक सदियों की सदिया खत्म नहीं हो जाती, अरसों का अरसा बीत नहीं जाता।” वह खड़ा हुआ और हंसते हुए दिवाकर शर्मा की आत्मा को घर से बाहर ले आया। वहां आदमी ने कहा “यह अंत नहीं शुरुआत है.. शुरुआत क्यामत की.... और क़यामत को...  क़यामत को आने से कोई नहीं रोक सकता.... कोई नहीं”

वह आदमी धुएं में बदला और धुएं के साथ दिवाकर शर्मा की आत्मा को लेकर गायब हो गया।

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