ध्रुव द घोस्ट एजेंट - Chapter 2
“ध्रुव ....”
“ध्रुव ......”
“ध्रुव ...”
मोटी औरत ध्रुव को जोर-जोर से आवाज लगा रही थी। सुबह का माहौल था। नाश्ता तैयार हो चुका था। नाश्ता शुरू करने से पहले ध्रुव का इंतजार था जो अभी भी अपने कमरे में था।
“आ रहा हूँ नेनस, बस थोड़ा सा और रुको।” ध्रुव अपने कमरे से चिल्लाते हुए बोला। वह पूरे 18 साल का हो चुका था। एक दुबला पतला सा लड़का। जो तकरीबन 5.6 इंच की हाइट का था। दिखने में मासुम। वह अपने बालों को ठीक करने की कोशिश कर रहा था। आज उसका कॉलेज में पहला दिन था। उसने कुछ किताबों को बैग में डाला, खुद को आईने में देखा।
उसके चेहरे पर एक हल्की सी मायुसी थी। जैसे वह किसी वजह से परेशान हो। उसने धीरे से खुद को कहा ,"क्या मुझे नेनस को इस बारे में बता देना चाहिए? कुछ दिनों से मुझे अजीब सपने आ रहे हैं। डरावने सपने, मुझे यह नॉर्मल नहीं लगता।"
फिर वो सीढ़ियां उतरते हुए नीचे आ गया और अपने नाना नानी को बोला“गुड मॉर्निंग नेनस, गुड मॉर्निंग नानस”
“यह नेनस नानस क्या करते रहते हो तुम...” मोटी औरत बोली “कायदे से हमें नाना नानी कहां करो।”
ध्रुव ने कुर्सी संभाली और उस पर बैठ गया।“नाना नानी बहुत ओल्ड फैशन लगता है, जमाना बदल चुका है, आप लोग भी जमाने के साथ बदलना सीखिए, आजकल किसी को भी नहीं पसंद यह सब।”
उसकी नानी ने उसकी तरफ हाथ किया “बस करो, किसी की पसंद-नापसंद से हमें क्या लेना, तुम वही बोला करो जो हमें अच्छा लगता है।”
ध्रुव मुस्कुराने लगा “जी बिल्कुल नहीं, मैं तो वही बोलूंगा जो मुझे अच्छा लगता है।”
“तुम बस हमेशा अपनी जिद करते रहना..”
“और क्या नहीं नेनस, मैं बस हमेशा अपनी जिद करता रहूंगा।”
उसके नाना उसकी नानी से बोले, “तुम चुप भी करो ना, क्या हमेशा बच्चे को डांटती रहती हो, आजकल के बच्चों को नहीं इसकी आदत है तो क्यों जिद कर रही हो।”
“आप बस हमेशा इसकी साइड लेना...हुंह...”
दोनों यह सुनकर हंस पड़े। ध्रुव ने जल्दी-जल्दी खाना खत्म किया, और फिर खड़े होते हुए बोला, “अच्छा मैं चलता हूँ, आज मेरा कॉलेज का पहला दिन है और मैं नहीं चाहता मैं अपने पहले दिन ही कॉलेज में लेट पहुंचू।” यह कहकर वह जाने लगा।
“अरे खाना तो पूरा खा लेते...” पीछे से उसकी नानी ने कहा।
“मैंने खा लिया जितना खाना था।” ध्रुव बोला और बाहर आ गया। बाहर उसने अपने साइकल पकड़ी, और फिर उसे चलाते हुए कॉलेज की ओर निकल गया।
उसके जाने के बाद उसकी नानी बोली, “पता ही नहीं चला यह कब बड़ा हो गया, ऐसे लग रहा है जैसे कुछ दिन पहले यह छोटा सा था, और अब अचानक सीधे इतना बड़ा हो गया।”
“टाइम का पता नहीं चलता मेरी जान”
“हां बिल्कुल, 18 साल का यह वक्त 18 दिनों के जैसा लगा, वैसे मुझे आपको शुक्रिया कहना चाहिए”
“वो क्यों?”
“मैं इसकी मां बनना चाहती थी, मगर आपने मुझे समझाया, हमारी उम्र ज्यादा हो चुकी है तो हम इसके मां-बाप के रूप में अच्छे नहीं लगेंगे, हमें इसके नाना-नानी के रूप में रहना चाहिए, हम इसके नाना-नानी है तो इसने भी हमें लेकर कभी कुछ नहीं सोचा।”
“इसमें शुक्रिया वाली कौन सी बात है, मैंने बस वही किया जो मुझे सही लगा।”
“हमममम, मगर...” औरत यह कहते हुए उदास हो गई।
“मगर क्या?”
“मैं हमेशा यह सोच कर उदास हो जाती हूँ, कभी इसने अपने मां-बाप के बारे में पूछा तो मैं इसे क्या जवाब दूंगी? मुझे नहीं पता जब यह दिन आएगा तब मैं इसका सामना कर भी पाऊंगी या नहीं।”
“अब तक इसने अपने मां-बाप के बारे में नहीं पूछा तो उम्मीद रखो, यह आगे भी नहीं पूछेगा, हम इसे प्यार दिखाने में किसी तरह की कमी नहीं रखेंगे,”
वह खड़े हुए और औरत के पास आकर उसके दोनों कंधों पर हाथ रखकर उसे दिलासा दिया। “जो भी होगा वह अच्छा होगा।”
_____
यह पूरा इलाका पहाड़ियों से घिरा हुआ था। पहाड़ियों के बीच साइकिलिंग करता ध्रुव अपने कॉलेज की ओर जा रहा था। सीटी बजाता हुआ और मदमस्त अपनी चाल में। एक तरफ की पहाड़ी जंगल से भरी हुई थी, और एक तरफ की पहाड़ी ढलान वाली और आगे जाकर एक खाई पर खत्म होने वाली थी। यह इलाका खूबसूरत था, और साथ में थोड़ा सा खतरनाक भी। यहां रहने वाले लोगों को इसकी आदत थी।
कुछ देर तक ध्रुव का ध्यान साइकलिंग पर रहा मगर फिर वह दोबारा से अपने सपनों के बारे में सोचने लगा। उसने खुद से कहा ,"क्या ऐसे सपने आना आम है? वह जगह कौन सी है जो मुझे बार-बार सपने में दिखाई देती हैं? वो एक बड़ा दरवाजा... उसके आगे खड़े वह दो डिमेन... उनके हाथों में मौजूद वह हथियार... जैसे वह उसे दरवाजे की हिफाजत कर रहे हो..."
तकरीबन 20 मिनट के बाद ध्रुव अपने कॉलेज पहुंच गया।
“मुझे ऐसा क्यों लग रहा है जैसे मैं लेट पहुंचा हूँ...” अपनी साइकिल को खड़े करते हुए वह बोला। उसने एक नजर घड़ी की तरफ देखा। “ओह नहीं, मुझे सही ही लग रहा है, मैं पूरे 10 मिनट लेट हूँ।” ध्रुव ने तेजी से अपना बैग निकाला और फौरन क्लास की ओर दौड़ा।
क्लास ऑलरेडी शुरू हो चुकी थी। अभी के लिए नए आए स्टूडेंट का इंट्रोडक्शन लिया जा रहा था। इसमें जूही नाम की एक स्टूडेंट अपना इंट्रोडक्शन दे रही थी।
“मेरा नाम जूही है... मैं 19 साल की हूँ और शहर में ढलान के नीचे बनी बस्ती में रहती हूँ। मैंने वहीं के एक लोकल स्कूल में टॉप किया है।”
“ग्रेट जूही..” टीचर ने कहा, और उसे उसे बैठने के लिए कहा। “नेक्स्ट।”
अगली स्टूडेंट खड़ी हुई। वो अपना इंट्रोडक्शन देने के लिए बोलने वाली थी, तभी ध्रुव क्लास के दरवाजे तक आ गया। “मे आई कम इन सर.. ”
“बिल्कुल.... बोलिए आपको क्या चाहिए.. अगर आप डस्टबिन लेने आए हैं तो वह उस तरफ पड़ा है...” टीचर ने अपने चेहरे पर एटीट्यूड दिखाते हुए कहा।
ध्रुव घबरा गया। वह लेट था, और टीचर के चेहरे से साफ पता चल रहा था कि वह गुस्सा है।
“वो.. सर.. वो मैं एक स्टूडेंट हूँ।”
“स्टूडेंट हो... पर स्टूडेंट कभी क्लास का टाइम होने के बाद नहीं आते... इस कॉलेज में क्लास का टाइम होने के बाद सिर्फ चपरासी आते हैं..”
सारे स्टूडेंट यह सुनकर हंसने लगे। ध्रुव ने अपना चेहरा नीचे कर लिया और चुपचाप खड़ा हो गया।
“चलो आ जाओ, मगर आगे से टाइम का ध्यान रखना।” टीचर ने उसे आने के लिए कहा। ध्रुव ने हां में सिर हिलाया और क्लास के अंदर आकर बैठ गया। टीचर ने खड़ी लड़की की तरफ इशारा किया और उसे इंट्रोडक्शन देने के लिए कहा। जो भी लड़की अपना इंट्रोडक्शन देने के लिए खड़ी थी क्लास में बैठे सारे लड़के उसे बड़ी ही दिलचस्प नजरों से देख रहे थे। लाइट ब्राउन बालों वाली यह लड़की पूरी क्लास में अलग ही दिख रही थी। उसकी हाइट अच्छी थी, और फिगर में वह जीरो साइज़ थी।
आशु ने बैठने के बाद उसे देखा तो वह भी उसे देखा ही रह गया। इतनी खूबसूरत लड़की उसने आज से पहले कभी नहीं देखी थी। दुबली पतली सी लड़की जिसने फिट कपड़े पहन रखे थे। चेहरे पर एटीट्यूड था, जैसे उसे पता हो क्लास के सारे लड़के उसे ही देख रहे हैं।
“मेरा नाम ऐनी है।” उस लड़की ने कहा। “मैं शहर में नई हूँ, मेरी मॉम-डैड मुंबई से है, मैं यहां अपने गार्डीयंस के साथ रहती हूँ, मेरे मॉम-डैड भी जल्दी यहां आ जाएंगे, मैंने मुंबई के सेंट हेरीन से अपनी स्टडी में टॉप किया है।”
“वेरी नाइस, लगता है हमारा कॉलेज कुछ ज्यादा ही पॉपुलर हो रहा है जो लोग बाहर से आ रहे हैं। वैसे मुझे एक बात समझ में नहीं आ रही, हम यहां पर एक छोटे से टाउन में रहते हैं, फिर तुम मुंबई छोड़कर यहां पर पढ़ने के लिए क्यों आई हो?”
यह सच में अजीब था। मुंबई के मुकाबला टाउन की हैसियत जीरो के बराबर थी। फिर भी एक लड़की मुंबई को छोड़कर यहां पर पढ़ाई करने के लिए आई।
ऐनी ने तुरंत जवाब दिया ,"कुछ पर्सनल कारण है सर, मैं उन्हें पब्लिक नहीं कर सकती हूं, बस आप यह समझ लीजिए ग्रेजुएशन पूरा होने तक मैं और मेरी फैमिली यहीं पर रहेंगे।"
ध्रुव ने अपने मन में कहा ,"इस टीचर को आखिर क्या चाहिए? अगर कोई खूबसूरत लड़की हमारे कॉलेज में पढ़ने के लिए आई है तो पढ़ने दे ना!"
टिचर ने लड़की को बैठने के लिए कह दिया। वह आगे के स्टूडेंट का इंट्रोडक्शन लेने लगे। कुछ स्टूडेंट के इंट्रोडक्शन के बाद ध्रुव की बारी आई।
ध्रुव अचानक से घबरा गया। वह खड़ा हुआ तो उसके दिल की धड़कन जोरो से धड़क रही थी। ध्रुव खड़ा हुआ, और बोला, “मेरा नाम ध्रुव है...” उसने इतना ही कहा था कि कुछ बच्चे हंसने लगे। वह बच्चे स्कूल के टाइम से उसे जानते थे।
पढ़ाई के मामले में ध्रुव का डब्बा गोल था। हमेशा उसे पासिंग मार्क्स ही मिले थे।
“हां, आगे बताओ बेटा।” टीचर ने कहा।
ध्रुव आसपास के स्टूडेंट की तरफ देखने लगा। सब उसे देख कर हंस रहे थे। ध्रुव ने एक नजर ऐनी की तरफ देखा। क्लास के सारे स्टूडेंट का ध्यान ध्रुव की तरफ था मगर ऐनी ध्रुव की तरफ नहीं देख रही थी। ध्रुव नहीं चाहता था पहले दिन ही उसका इंप्रेशन खराब पड़े मगर उसके पास बताने के लिए कुछ अच्छा था भी नहीं। उसने टीचर की तरफ देखा और कहा, “मैं अपने नाना नानी के साथ रहता हूं, बस इतना ही।”
“क्या सच में!!” टीचर ने अजीब सा रिस्पांस दिया। “अभी आगे और बताओ।”
“बता चुका हूं, मेरा नाम ध्रुव है। मैं पहाड़ी के ऊपर मौजूद बस्ती में रहता हूँ। मैंने वही एक छोटे स्कूल से...वहां स्टडी की है।”
“क्या तुमने वहां टॉप नहीं किया...”
ध्रुव ने ना में सिर हिला दिया।
“वो स्टूडेंट अपना हाथ ऊपर करें जिसने अपने स्कूल में टॉप नहीं किया..” टीचर बोला, और क्लास के बच्चों की तरफ देखने लगा। क्लास में किसी भी बच्चे ने अपना हाथ ऊपर नहीं किया। टीचर मुस्कुराए और बोले, “मुबारक हो, तुम इस क्लास के सबसे कम मार्क्स वाले लड़के हो, कैसा लग रहा है तुम्हें अपने आप में इकलौता हो कर?” सारे स्टूडेंट फिर से हंस पड़े।
पीछे कोई स्टूडेंट उसका मजाक उड़ाते हुए बोला, “यह क्लास का सबसे बड़ा नमूना बनेगा”
कोई दूसरा स्टूडेंट बोला, “नमुना नहीं, अब्बल दर्जे का नमूना बनेगा, हर एक क्लास में ऐसा एक लड़का होता है।”
ऐनी ने एक नजर ध्रुव की तरफ देखा। ध्रुव ने फौरन अपना चेहरा घूम लिया और अपनी आंखें कसकर बंद कर ली।
वह अपने मन में बोला ,"क्या यार, पहली बार ना पढ़ने का अफसोस हो रहा है।"
कोई एक बोला, “इसने यहां एडमिशन ही क्यों लिया है, इसे पता नहीं यहां टॉपर एडमिशन लेते हैं”
कोई और बोला, “इसे किसी और कॉलेज में जाना चाहिए था”
क्लास के ज्यादातर स्टूडेंट्स उसकी इंसल्ट कर रहे थे। टीचर को भी इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ रहा था। ध्रुव अपना सर झुका कर खड़ा रहा।