ध्रुव द घोस्ट एजेंट - Chapter 3
पहली क्लास खत्म होने के बाद इंटरवल हुआ और स्टूडेंट बाहर जाने लगे। कुछ शरारती स्टूडेंट बाहर जाने की बजाय ध्रुव के पास आए और उसके इर्द-गिर्द घेरा बनाकर खड़े हो गए। इसमें एक मोटा लड़का था, और बाकी उसके दोस्त थे। वह मोटा लड़का ऐनी के सामने अपना इंप्रेशन बनाना चाहता था।
“क्यों बे, तुझे कोई दूसरा कॉलेज नहीं मिला? यहां पर होशियार और अमीर लड़के पढ़ते आते हैं।” मोटे लड़के ने कहा, “तुम तो मुझे गरीब भी लग रहे हो।”
उसका दूसरा साथी बोला, “यह हमारे कॉलेज के लिए जोकर है।”
मोटे लड़के ने अपना चेहरा ध्रुव के चेहरे के पास किया और बोला, “मैं तुम्हारे लिए यह कॉलेज नर्क बना दूंगा।।”
ध्रुव को गुस्सा आ गया। उसने अपना चेहरा ऊपर किया, और मोटे लड़के की आंखों में आंखें डालते हुए बोला, “मुझसे दूर रहो।”
“नहीं रहेंगे, क्या कर लेगा..?” मोटा पीछे हुआ और हंसने लगा। “अपने मम्मी-पापा से हमारी शिकायत लगाएगा, क्या बोलेगा उन्हें,” वह तुतलाती हुई आवाज निकालते हुए बोला, “ये बोलेगा...ममा ममा... अर्लुन ने मेको छेड़ा... उसने मेको ये बोला ....ऊ...ततत...लुलुलु ”
ध्रुव को यह सुनकर और ज्यादा गुस्सा आ गया। उसने अपना बैग उठाया और जोर से पटक कर मोटे लड़के के मुंह पर मारा। उसका नाम अर्जुन था। ऐनी अभी तक अपने काम में लगी हुई थी, मगर जैसे ही यह हुआ उसका ध्यान इस तरफ चला गया। अर्जुन के बाकी के दोस्त चिल्लाए और एक साथ ध्रुव के ऊपर टूट पड़े। वो ध्रुव को मारने-पीटने लगे थे। ध्रुव भी जवाब में उन्हें मारने-पीटने लगा था, मगर इतने जनों को संभालना उसके बस की बात नहीं थी। इसमें वह सामने वालों की कम पिटाई कर रहा था जबकि उसकी ज्यादा पिटाई हो रही थी।
ऐनी अपनी जगह से खड़ी हुई। वो अर्जुन के पास गई और उसे पीछे से पड़कर खींच लिया। दूसरे लड़के ने यह देखा तो एक जोरदार थप्पड़ उसके मुंह पर आकर पड़ा। एक लड़का कुछ समझ पाता तभी एक लात उसके सीने पर पड़ी और वह उछलते हुए बेंच के ऊपर गिर गया।
धुव्र की आंखें यह देखकर हेरत के मारे खली की खुली रह गई। ऐनी एक दुबली पतली लड़की होने के बावजूद अपने से ताकतवर लड़कों को ऐसे धो रही थी जैसे वह कोई सीक्रेट एजेंट हो।
ऐनी चिल्लाते हुए बोली, “ नाऊ स्टॉप इट गायस, यह क्या जानवरों की तरह कर रहे हो,” सब के सब अपनी जगह पर रुक गए और उसकी तरफ देखने लगे। “जाओ और जाकर अपनी जगह पर बैठो।” उसने ऑर्डर देने वाले अंदाज में कहा। अर्जुन और उसके पास उसके दोस्त के चेहरे अजीब से हो गए। वह सब चुपचाप अपनी सीटों की तरफ गए और वहां जाकर बैठ गए। अर्जुन के लिए यह एक इंसल्ट वाला मूमेंट था। फिर ऐनी ने पलक झपकते ही उनकी धुलाई भी कर दी थी। ऐनी उनके जाने के बाद ध्रुव को घूर कर देखने लगी। “क्या...” ऐनी ध्रुव पर चिल्लाते हुए बोली, “क्या चाहिए तुम्हें... चुपचाप बैठो अपनी सीट पर।”
ध्रुव एक ही झटके में अपनी सीट पर बैठ गया। ऐनी ने पूरी क्लास की तरफ देखा जहां सबके चेहरे पर सन्नाटा पसरा हुआ था, फिर वह भी बैठी और अपना काम करने लगी। क्लास में दूसरे टीचर के आने तक किसी तरह का शोर नहीं हुआ। फिर क्लास में टीचर आया और सारे स्टूडेंट आगे की पढ़ाई में लग गए। ऐनी ने जो भी किया था उसका असर सभी क्लासों के खत्म होने तक रहा। किसी ने शरारत करना तो दूर की बात खड़े होकर बोलने तक का नहीं सोचा। क्लास खत्म हुई, और सारे स्टूडेंट अपने अपने घर की ओर चल दिए।
ध्रुव स्टेंड में अपनी साइकिल निकाल रहा था। अर्जुन और उसके दोस्त अपनी बाइक लेकर उसके पास से गुजरने लगे। अर्जुन ने अपनी बाइक उसके पास रोक दी। उसके सारे दोस्त भी एक-एक कर उसके पास रुक गए। “तुमने आज जो भी किया तुम्हें इसकी सजा मिलेगी, देखना तुम हमसे बचोगे नहीं, तुम्हारी वजह से मेरी जो बेज्जती हुई है मैं उसका बदला लेकर रहूंगा।”
ध्रुव सामने से बोला, “क्या कर लोगे तुम लोग...”
“अकेले मिल फिर बताते हैं।” अर्जुन ने धमकी दी। “तुम्हारा ऐसा हाल होगा...” वह आगे के शब्द बोलने वाला था, तभी उसे ऐनी दिख गई जो स्कूटी पर उनकी ओर आ रही थी। यह देखते ही अर्जुन ने आनन-फानन में अपनी बाइक को स्टार्ट किया और उसे वहां से निकाल लिया। उसके दोस्त भी दुम दबा कर बाइक स्टार्ट करके भाग गए।
ध्रुव पहले तो देखता रहा, यह क्या हो रहा है, फिर उसने जब ऐनी को देखा तो पूरा मामला समझ गया। ऐनी ने अपनी स्कूटी उसके पास आकर रुकी। ध्रुव ने अपना चेहरा छुपा लिया और उससे नजर बचाकर बैग ठिक करने का नाटक करने लगा।
ऐनी बोली, “आगे से कोई तुम्हें तुम्हारे साथ ऐसा करें तो,” उसने अपने शब्दों को भारी और मोटिवेशनल अंदाज में कहा, “उसके मुंह पर एक जोरदार थप्पड़ कर देना, जो होगा बाद में देखा जाएगा।” इतना कहकर वह निकल गई। ध्रुव ने उसके रुकने तक एक बार भी अपना चेहरा ऊपर उठाकर उसकी आंखों में नहीं देखा था। मगर उसके जाने के बाद उसने उसे जाते हुए जरूर देखा। उसने अपना सिर हिलाया और मुस्कुराया।
वह अपने में बोला ,"एक खूबसूरत लड़की ने मेरे साथ बात की, उसे अर्जुन के बच्चे को तो मुझे थैंक्स कहना चाहिए, उसकी वजह से ऐनी मुझसे बात करने के लिए आई। ओह, आज का दिन मेरे लिए कितना लकी है।"
ध्रुव का आज का दिन अच्छा नहीं था। सड़क पर साइकिल को चलाते हुए वह इसी के बारे में सोच रहा था। मगर फिर भी वो खुश था। ऐनी ने आखिर में जो भी शब्द कहे, उसने उसके आज के पूरे दिन को अच्छा कर दिया था।
ध्रुव घर पहुंचा। नाना-नानी को अपने घर आने के बारे में बताया और फिर सोने के लिए चला गया। रात के तकरीबन 8:00 बज रहे थे, और सब बैठ कर खाना खा रहे थे।
खाना खाते हुए नानी ने ध्रुव से पूछा, “तुम्हारा आज कॉलेज में पहला दिन था ना? कैसा गया? मैं तो इसके बारे में बात करना ही भूल गई?”
“ठीक-ठाक था।” ध्रुव खाना खाते हुए बोला, “ना ज्यादा अच्छा, ना ज्यादा बुरा। लड़के मुझसे मेरे बारे में पूछ रहे थे, जिसे मैं जवाब नहीं देना चाहता था। अच्छा मुझे कॉलेज के फॉर्म में पेरेंट्स का नाम लिखना था, आप लिखना भूल गए, मैं वहां पर क्या लिख कर आऊं?”
उसकी नानी यह सुनकर उसके नाने की तरफ देखने लगी। “वो...” नानी बताने के लिए शब्द ढूंढने लगी।
“वो वो छोड़ीए नेनस...” ध्रुव नॉर्मल वे मे बोला, “ नानस खुद जाकर भर देंगे कल...”
उसके नाना ने जवाब दिया ,"हां मैं भर दूंगा।"
रात के तकरीबन 9:30 बज रहे थे। ध्रुव ऊपर अपने कमरे में स्टोरी नोवल पढ़ रहा था, तभी उसके नाना ने दरवाजा खटखटाया।
“मैं दुकान पर अपने हिसाब का रजिस्टर भूल आया हूं, तुम मेरे साथ चलोगे, हम रजिस्टर लेकर आते हैं।”
ध्रुव अंदर से बोला, “नानस सुबह ले आना ना, इतनी रात को आप उनका क्या करेंगे।”
“नहीं बेटा, मुझे सुबह कर्मचारियों को हिसाब करके सैलरी देनी है, पहले ही 3 दिन लेट हूं, मैं उन्हें और लेट नहीं कर सकता।”
“क्या नानस आप भी...” ध्रुव खड़ा हुआ और बाहर आ गया, “चलिए।” उसने अपने नाना को जाने के लिए कहा
दोनों पुराने जमाने की मर्सिडीज कार से पहाड़ी क्षेत्र में नीचे की तरफ जा रहे थे। ध्रुव के नाना का यहां लोकल दुकानों के लिए सामान सप्लाई करने का बिजनेस था, जिसके लिए उन्होंने काफी सारे कर्मचारी रख रखे थे। 20 मिनट के बाद उनकी कार ने यहां की सबसे भीड़ भाड़ वाली बस्ती में एंट्री ली। शहर की ज्यादातर आबादी यही रहती थी। पूरा माहौल खुशनुमा था, और लाइटों के बीच लोग स्ट्रीट फूड्स को एंजॉय कर रहे थे। बस्ती के आखिर में एक सुनसान जगह पर एक वेयरहाउस बना हुआ था, जिसके सामने उसके नाना ने कार को पार्क कर दिया।
“तुम यहीं रहना, मैं अभी रजिस्टर लेकर आता हूँ।” उसके नाना बोले
“ठीक है। जैसी आपकी मर्जी।” ध्रुव ने बोर होने वाले अंदाज में कहा।
उसके नाना कार से उतरकर रजिस्टर लेने के लिए चले गए। ध्रुव कार में बैठ कर गाने सुनने लगा। वह बोर हो रहा था, तो उसने मन बहलाने के लिए गाने चला लिए। वह गाने सुन रहा था, तभी उसकी कार के थोड़ा पीछे एक फुटबॉल दिखी जो टपे खाते हुए कार की ओर आ रही थी। वह फुटबॉल अकेले ही उसके कार की ओर आ रही थी। फुटबॉल कार के पास पहुंची। फुटबॉल ने जोर से कार के बोनट पर ठप्पा खाया, आवाज हुई, और ध्रुव बुरी तरह से चौंक गया। वहीं म्यूजिक प्लेयर भी करकर की आवाज करते हुए बंद हो गया।