Cruel hearted lover' Ch. 2

Cruel hearted lover\' - Chapter 2

Posted by Shayna choudhary • Jan 01, 2025 10:43 AM

जैसे ही वह पुलिस वाला उस लड़के-लड़की की ओर गरम लोहे की रॉड लेकर मारने बढ़ा, अचानक वहाँ की पृथ्वी में कंपन होने लगी।

उस कंपन को महसूस कर लड़का और लड़की मुस्कुराने लगे और पुलिस वालों की ओर देखते हुए बोले,

"बहुत शौक था ना तुम्हें राणा से मिलने का? देखो, आ गया राणा! अब बच सकते हो तो बच लो!"

लड़के-लड़की ने बड़े ही दीवानगी भरे स्वर में कहा और फिर एक-दूसरे की ओर देखकर हँसने लगे।

उन दोनों को इस तरह हँसता देखकर, और यह सुनकर कि राणा आ गया है, पुलिस वालों को अजीब सा लगने लगा। वे एक-दूसरे की ओर देखने लगे।

उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि वे लोग सच कह रहे हैं या झूठ। राणा की तलाश उन्हें पिछले दस साल से थी। दस सालों में उन्हें राणा का कोई सुराग नहीं मिला था।

वास्तव में, किसी को यह भी नहीं पता था कि राणा कैसा दिखता था। जितने लोगों ने राणा को देखा था,

या तो वे उसके जानने वाले खास आदमी थे,

या फिर वे आदमी थे जिनकी राणा ने जान ले ली थी और वे अब राणा की पहचान बताने के लिए ज़िंदा नहीं थे।

तभी पुलिस वालों में से एक ने बोला,

"यह फालतू की बकवास बंद करो! तुम्हें क्या लगा? तुम्हारी बात सुनकर हम डर जाएँगे और तुम्हें इन गरम लोहे की रॉड से नहीं मारेंगे?

यह तुम्हारी गलतफहमी है! अब देखो हम तुम्हारा क्या हाल करते हैं! वैसे भी, तुम लोग राणा के आदमी हो और तुम्हारी मौत के बाद राणा तुम्हारी लाश लेने ज़रूर आएगा।

और हमने सुना है राणा अपने लोगों को ना तो ज़िंदा छोड़ता है और ना ही मुर्दा, तो हमें पूरा यकीन है

वह राणा तुम्हारी लाश लेने ज़रूर आएगा।"

यह कहकर दोनों पुलिस वाले गरम लोहे की रॉड लेकर लड़के-लड़की की ओर बढ़ने लगे।

लेकिन इससे पहले कि वे रॉड से लड़के-लड़की को नुकसान पहुँचाते, ठीक उसी वक्त उनके पीछे से उनका एक आदमी उड़ता हुआ आ गिरा।

और उसके मुँह से खून निकल रहा था। ऐसा लग रहा था कि किसी ने उसके पेट में जोरों से वार किया था, जिससे उसके मुँह से खून निकलना शुरू हो गया था।

अपने आदमी की ऐसी हालत देखकर दोनों पुलिस वाले बुरी तरह डर गए और पूछने लगे,

"क्या हुआ? किसने मारा तुझे? और यह कैसे? यह हालात कैसे हुई तुम्हारी?"

लेकिन उस आदमी को घूँसा शायद इतनी तेज़ी से पड़ा था कि वह कुछ भी नहीं बोल पा रहा था।

थोड़ी ही देर बाद उसका दूसरा आदमी भी उसी के बराबर में जाकर लेटा हुआ था। वे लोग पाँच-छह लोग थे; पाँच-छह पुलिस वाले उस वक्त वहाँ मौजूद थे। उनमें से दो पहले ही ज़मीन पर गिरे हुए थे, ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे।

क्योंकि राणा के घूँसों ने ही उन लोगों की हालत बद से भी ज़्यादा बदतर कर दी थी। वे लोग ना तो ढंग से साँस ले पा रहे थे और ना ही बोल पा रहे थे। तभी दोनों पुलिस वाले, जिनके हाथ में गरम लोहे की रॉड थीं,

घबराकर उनके हाथ से वह रॉड छूट गईं। तभी दरवाज़े पर उन्हें एक बड़ी सी परछाई नज़र आने लगी और जैसे ही उनकी नज़र उस परछाई के साथ वाले इंसान पर पड़ी, तो उनकी आँखें हैरत से फटी की फटी रह गईं।

क्योंकि सामने से एक बहुत ही लंबा-चौड़ा शख्स, जो दिखने में किसी राजा-महाराजा से कम नहीं लग रहा था, वह बड़े ही स्टाइल से चलता हुआ, अपनी मूँछों पर दाँव देता हुआ, अंदर की ओर आ रहा था।

उसे देखकर अच्छे-अच्छों की पैंट गीली हो जाया करती थी। एक पुलिस वाला उस आदमी की पर्सनालिटी को देखकर ही इतना डर गया कि उसकी हालत खराब होने लगी और उसे अपने नीचे कुछ गीला-गीला सा महसूस होने लगा। जैसे ही उसने देखा, तो उसे पता चल गया था कि उसकी पैंट खराब हो चुकी थी।

राणा को देखकर उसने अपनी पैंट में ही पेशाब कर दिया था।

जैसे ही राणा वहाँ अपनी मूँछों पर दाँव देता हुआ आया, वह लड़का-लड़की खुशी से चिल्लाते हुए खड़े हो गए।

"राणा! राणा! राणा!" चारों ओर केवल एक ही आवाज़ सुनाई दे रही थी: "राणा! राणा! राणा!" और जितने भी पुलिस वाले थे,

वे बेबसी से नीचे की ओर पड़े हुए थे। उन्हें कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि वे उस वक्त क्या करें। उस वक्त वे लोग अपनी जान बचाकर भी नहीं भाग सकते थे,

क्योंकि दरवाज़े पर राणा खड़ा हुआ था और कोई रास्ता उस बंद जगह में नहीं था जहाँ से वे बचकर अपनी जान बचा सकें।

तभी राणा धीरे-धीरे आगे बढ़ा और जो गरम लोहे की रॉड दोनों पुलिस वालों के हाथ से छूट गई थीं, उसने उन्हें उठा लिया और सीधा दोनों पुलिस वालों की आँखों पर वार कर दिया।

गरम लोहे की रॉड लगते ही दोनों पुलिस वालों की आँखें बुरी तरह खराब हो गईं और तड़प-तड़प कर उन्होंने अपनी जान दे दी।

एक पल को उसके आदमी भी उनकी इतनी खतरनाक मौत को देखकर काँप गए, लेकिन वे अच्छी तरह जानते थे कि पुलिस वालों के लिए राणा के मन में कितना गुस्सा भरा हुआ था।

जल्दी ही राणा ने जितने भी छह-सात पुलिस वाले वहाँ मौजूद थे, उन सबको बड़े ही बेरहमी से अपने लोहे जैसे हथौड़े से मार-मारकर, अधमरा करके, बड़ी ही बेदर्दी से तड़पा-तड़पाकर मार डाला।

और फिर अपने आदमियों की ओर देखते हुए बोला,

"ठीक हो? तुम लोग? कुछ हुआ तो नहीं है ना तुम्हें?" तब दोनों, वह लड़का और लड़की, दोनों ही उसके सामने सिर झुकाकर खड़े हो गए,

और बोले,

"नहीं राणा! हमें कुछ नहीं हुआ है। हम दोनों ठीक हैं और हमें गर्व है कि हम दोनों आपके साथ काम करते हैं।" उनकी बात सुनकर राणा ने एक बार फिर अपनी मूँछों पर ताव दिया और जिस खतरनाक स्टाइल से वह आया था, उसी स्टाइल से चलता हुआ वह वापस चला गया। उसके पीछे-पीछे उसके आदमी भी चले गए।

वहीं दूसरी ओर, वह खूबसूरत लड़की, जो उस ख्वाब के बाद से रात को सो नहीं पाती थी, वह एक बार फिर उठी और अपने स्टडी रूम में जाकर कुछ लिखने लगी। तब उसकी माँ अपनी बेटी की ओर देखते हुए उसके पिता से बोली,

इन बातों को दस साल हो चुके हैं, लेकिन आज तक हमारी बेटी उस हादसे को नहीं भूल पाई है। पता नहीं हमारी बच्ची ने क्या-क्या सहन किया होगा। ऐसा कहकर वह रोने लगी और फिर अपनी बेटी के लिए हर रोज़ की तरह कॉफ़ी बनाने के लिए किचन में चली गई।

वहीं उनकी बेटी के पिता कितनी देर तक खामोशी से खड़े हुए अपनी बेटी को देखते रहे, क्योंकि उनकी बेटी अब पूरी तरह से कुछ लिखने में डूब चुकी थी। पिछले दस सालों से यह होता हुआ आया था। हर रात को जब भी वह डरती थी और डर के मारे बीच नींद से उठ जाया करती थी, उसके बाद वह सो ही नहीं पाती थी,

और जब वह सो नहीं पाती थी, तो अपने स्टडी रूम में आकर कुछ ना कुछ लिखना शुरू कर दिया करती थी। असल में, वह एक डायरी लिखा करती थी जहाँ पर वह अपने दिल की बात को शेयर किया करती थी,

लेकिन हर रात को उसे सिर्फ़ एक ही सपना आता था, जो सपना नहीं, असल में उसकी ज़िंदगी के साथ घटी हुई एक दुर्घटना थी, जिसे वह भूल नहीं पा रही थी।

कुछ देर में उस लड़की की माँ अपनी बेटी के लिए कॉफ़ी बनाकर ले आई,

और उसके सिर पर हाथ फेरते हुए बोली,

"मेरी बच्ची! एक बार कोशिश तो करो! हो सकता है तुम्हें नींद आ जाए और तुम सो सको।" तब उसकी बेटी उसकी माँ की ओर देखते हुए बोली,

"नहीं मॉम! आपको क्या लगता है? मैंने कोशिश नहीं की होगी? मैं बहुत कोशिश करती हूँ, लेकिन अगर एक बार मेरी नींद टूट जाए, तो वह टूट ही जाती है। उसके बाद मुझे नींद नहीं आती है।"

अपनी बेटी का दर्द सुनकर उसकी माँ की आँखें एक बार फिर भर आईं, लेकिन वह कुछ नहीं कर सकती थी, क्योंकि उसकी बेटी का ऐसा दुःख था जिसे उसे अकेले ही

सामना करना था।

तब उस लड़की की माँ अपने पति के गले लगकर कितनी देर रोती रही और बोली,

"आखिर कब तक हमारी बेटी इस तरह इस दर्द में रहेगी? आखिर कोई तो ऐसा होगा जो हमारी बेटी को इस दर्द से बाहर निकालेगा! कोई तो होगा इस दुनिया में!" ऐसा कहकर वह फूट-फूटकर रो दी।

वहीं उनकी खूबसूरत सी बेटी, जो कुछ भी उस रात को सपने में दिखाई दिया करता था, उसे वह अपनी डायरी में उतार लिया करती थी और पिछले दस सालों से उसे एक ही चीज, लगातार एक ही दुर्घटना, लगातार दिखाई दे रही थी और उसे ही वह हर रोज अपनी डायरी में उतार लिया करती थी।

उसे आज भी अच्छी तरह से याद है जब बारह साल की वह अपने माता-पिता से गुस्सा होकर घर से बाहर, अपना स्कूल का बैग टांगकर, अपनी बुआ के घर जाने के लिए निकल पड़ी थी और गलती से वह एक ऐसी बस में बैठ गई जो बस दूर के गाँव में जाया करती थी।

बस में बैठने के बाद उसे नींद आ गई थी, जिससे वह सही समय पर नहीं जाग पाई थी। करीब छह-सात घंटे वह उस बस में सोती रही थी और किसी ने भी उस मासूम सी बच्ची पर ध्यान नहीं दिया था। सबको यही लग रहा था कि यह बच्ची शायद पढ़ने के लिए जा रही है, क्योंकि वह उस वक्त स्कूल यूनिफॉर्म में थी। रिमझिम इस बात को याद नहीं करना चाहती थी और एक बार फिर उसको अपनी सोच को झटका देकर आगे लिखने लगी।

जी हाँ! जिस खूबसूरत लड़की की यहाँ बात हो रही है, उसका नाम रिमझिम था। रिमझिम अपने माता-पिता की इकलौती औलाद थी। जब वह बारह साल की थी, तब वह गुस्से में अपने माँ-बाप से नाराज़ होकर गलती से एक अँधेरे गाँव में पहुँच गई थी।

वहाँ से आजाद होने के बाद भी, आज पूरे दस साल बाद भी, उसका पीछा नहीं छोड़ा था।

कल का दिन रिमझिम के लिए काफी बड़ा था, तो वह जल्दी से ही अपनी डायरी लिखकर तैयार होने के लिए चली गई,

क्योंकि सुबह होने में ज्यादा देर नहीं थी। वहीं दूसरी ओर, वह लड़का-लड़की, जिसे राणा बचाकर लाया था, अपने कमरे में जाते ही एक बार फिर एक-दूसरे को किस करने लगे।

उन्हें इतनी इंजर्ड हालत में रोमांस करते हुए देखकर देव और बाकी के टीम मेंबर बोले,

"ये लैला-मजनू एक बार फिर से शुरू हो गए! इन्हें अपनी चोटों का भी ख्याल नहीं है!" और हँसने लगे।

राणा के गैंग में केवल कुछ ही खास मेंबर थे। उसकी कोई ज्यादा से ज्यादा दो सौ लोगों की फ़ौज नहीं थी। उसके पास केवल दस से बारह लोग ही आदमी थे, लेकिन दस से बारह आदमी ऐसे थे जिनकी पकड़ इतनी मज़बूत थी कि अगर उन्हें कोई भी काम सौंपा जाए, तो उसे काम को किये बगैर वे पीछे नहीं हटते थे।

और वह लड़का-लड़की, जो उस होटल में पकड़े गए थे, वे भी राणा के खास आदमी थे। वे राणा के कहने पर किसी की जान ले भी सकते थे और अपनी जान हँसते-हँसते दे भी सकते थे, क्योंकि राणा की ताकत का उन्हें अच्छी तरह से अंदाजा था, क्योंकि वह दोनों लड़का-लड़की बचपन से ही एक साथ रहे थे।

तो वे दोनों आपस में एक-दूसरे को मोहब्बत करने लगे थे। हालाँकि, उनकी अभी तक शादी नहीं हुई थी। बिना शादी के ही वे दोनों एक साथ रहा करते थे। इसीलिए राणा की टीम में सभी उन्हें लैला-मजनू कहकर बुलाया करते थे।

राणा की टीम में जितने भी टीम मेंबर थे, उनमें से हर किसी के साथ कुछ ना कुछ दुर्घटना हुई थी, जिसके बाद से वे सभी इतने ज़्यादा बेरहम बन गए थे कि कोई उनकी ताकत का अंदाजा नहीं लगा सकता था।

क्योंकि उस वक्त होटल में पुलिस वालों ने उनके रोमांस में खलल डाला था, तो अब वे लोग वापस अपने अड्डे पर जाकर शुरू हो गए थे।

तब राणा ने अपने खास आदमी देव को ऑर्डर दिया कि जल्दी ही टीम के डॉक्टर को बुलाया जाए और उनका ट्रीटमेंट कराया जाए, क्योंकि पुलिस वालों ने उन दोनों लड़के और लड़की, यानी लैला-मजनू को बहुत ही ज्यादा बुरी तरह से मारा था।

लेकिन अपने-अपने ज़ख्म भूलकर वे दोनों एक बार फिर एक-दूसरे को प्यार करने में बिजी हो गए थे।

वहीं राणा अपने कमरे में जाकर अपनी कुर्सी पर आँखें बंद करके बैठ गया था और उसे कुछ ऐसा याद आने लगा था, जिसकी वजह से वह ज्यादा देर अपनी आँखें बंद नहीं कर पाया था और उसने घबराकर अपनी आँखें खोल ली थीं। राणा की आँखें एकदम से लाल-सुर्ख हो गई थीं।

तभी उसके पास फ़ोन पर एक नोटिफ़िकेशन आता है। उसे नोटिफ़िकेशन को देखने के बाद राणा के चेहरे पर एक डेविल मुस्कान आ जाती है, क्योंकि उस नोटिफ़िकेशन में यह बताया गया था कि डीजीपी गौरव की लाश को पुलिस वालों ने बरामद कर लिया है।

और जल्दी ही एक और पुलिस वाले की लाश से पूरे शहर में अफ़रा-तफ़री मचाने वाली थी, क्योंकि छह महीने के अंदर-अंदर किसी बड़े अफ़सर की यह आठवीं लाश थी जिसे बहुत ही ज्यादा बेरहमी और बेरहम तरीके से मारा गया था।

वहीं दूसरी ओर,

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