Obbsession of Kaynaat - Chapter 2
कायनात के पास और कोई रास्ता नहीं था, और मना करने का कोई कारण भी नहीं था। इसलिए उसने राज से, मेवाड़ी परिवार के बड़े बेटे से, शादी करने के लिए हाँ कह दी। कायनात के हाँ कहते ही दोनों घरों में शादी की तैयारियाँ जोरों-शोरों से होने लगीं।
जल्दी ही कायनात और राज की हल्दी का दिन आ गया। कायनात पहली बार राज से अपनी हल्दी के फंक्शन में मिली। पहली ही मुलाक़ात में राज कायनात को काफ़ी अच्छा लगा।
राज ने बड़े ही विनम्र तरीके से कायनात से बातें कीं, और उसे पूरी तरह से सहज महसूस कराने की कोशिश की। राज का इतनी तमीज़ से बात करना कहीं न कहीं कायनात के दिल को छू गया।
इसलिए उसने भी दिल से राज को कबूल कर लिया। राज के परिवार में उसके दादाजी जय प्रकाश, पिता राघव, माँ वंदना, एक छोटी बहन माही, चाचा-चाची और राज का एक छोटा भाई भी था।
कायनात को सिर्फ़ इतना पता था कि राज का एक छोटा भाई है जिसका नाम करण है, लेकिन वह अपनी पढ़ाई के चलते उनकी हल्दी, मेहँदी और संगीत में नहीं आने वाला था। वह शादी वाले दिन ही आने वाला था।
राज और कायनात ने अपना हल्दी का फंक्शन बड़े ही मज़े से एन्जॉय किया। धीरे-धीरे हल्दी के साथ मेहँदी और संगीत, सभी फंक्शन लगभग हो चुके थे।
आज कायनात और राज की शादी का दिन था। एक बहुत ही भव्य शादी आयोजित की गई थी। यह शहर के सबसे अमीर लोगों की बड़ी शादी थी, जिसमें बड़े-बड़े देशी-विदेशी लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
जल्दी ही कायनात और राज की शादी की रस्में शुरू हो गईं। ठीक उसी वक्त मुखिया जी अपनी बेटियों के साथ शादी में मौजूद थे।
रियानशी और मुखिया जी ध्यान से, बड़ी ही नफ़रत से, कायनात को देख रहे थे। कायनात की खूबसूरती ऐसी थी कि उसे कोई एक बार देख ले, बस देखता ही रह जाए। रियानशी की आँखों में कायनात की खूबसूरती बुरी तरह चुभने लगी।
वह मन ही मन उससे बहुत जलने लगी। वह कायनात से बहुत गुस्सा हो चुकी थी और उसने सोच लिया था कि जिस कायनात ने उसकी ज़िन्दगी की सारी खुशियाँ, बचपन से देखे हुए उसके सपनों को, अपने पैरों के नीचे रौंद दिया, वह उसे कभी खुश नहीं रहने देगी।
लेकिन फ़िलहाल वह शादी में मेहमान के तौर पर आई हुई थी, इसलिए वह किसी को कुछ नहीं कह सकती थी और न ही कोई जोखिम ले सकती थी।
तभी राज और कायनात फेरों के लिए खड़े हो गए। जल्दी ही उनके फेरे कराए जाने लगे। लगभग सातों फेरे पूरे हो चुके थे और अब बारी थी गले में मंगलसूत्र पहनाने और मांग में सिंदूर भरने की।
लेकिन सिंदूर भरने और मंगलसूत्र पहनाने की रस्म शुरू होते ही अचानक हॉल में एक अजीब शोर हुआ। लगातार कम से कम २०-२५ बाइकें अचानक धूम-धूम करती हुई वहाँ आ गईं।
जितने भी लोग शादी हॉल में मौजूद थे, सबका ध्यान उन बाइकों की ओर चला गया। सब पूरी तरह हैरान हो गए।
तभी राज की छोटी बहन जोरों से चिल्लाई, "वाओ! क्या एंट्री है भाई!"
क्योंकि कोई और नहीं, राज का छोटा भाई करण वहाँ आया था। करण ने अपने भाई को सरप्राइज़ देने के लिए कम से कम १०० बाइकें, अपने दोस्तों के साथ लाकर, पूरी पार्टी में धूम मचा दी थी।
कुछ लोगों ने करण के इस तरह के मूव पर उसकी हौसला अफ़ज़ाई की और उसके लिए तालियाँ बजाईं। वहीं कायनात इस बाइक के शोर से थोड़ी परेशान हो गई, क्योंकि यह बाइक का शोर कुछ वैसा ही था जैसा उसे एक बार विदेश में सुनने को मिला था।
राज की छोटी बहन माही ने जोरों से चिल्लाया, "वाओ! ब्रदर करण!" सभी लोग जोरों से "करण! करण!" चिल्लाने लगे।
वहीं राज के दादाजी, कायनात के ससुर दादाजी जय प्रकाश, अपनी मूँछों पर ताव देने लगे। उन्हें अपने छोटे पोते की इस हरकत पर बहुत नाज़ था। उनका मानना था कि इतना अमीर लड़का है, अगर पैसे नहीं उड़ाएगा, मौज-मस्ती नहीं करेगा या धूम नहीं मचाएगा तो फिर क्या करेगा? और वैसे भी बड़े घर के लड़कों का यह सब आम होता है। सभी करण की इस एंट्री से ख़ुश थे, लेकिन कायनात को अंदर ही अंदर कुछ अजीब सा लगा।
तभी अचानक, उन सभी लड़कों ने हेलमेट पहन रखे थे, उनके बीच में से एक बड़ी ही स्टाइलिश, सबसे महँगी बाइक पर बैठे हुए, एक बड़े ही शानदार पर्सनैलिटी वाले करण वहाँ आया।
जैसे ही करण वहाँ आया और उसने अपनी हेलमेट उठाई, कायनात ने अपने देवर को देखने के लिए जैसे ही अपना घूँघट हल्का सा ऊपर किया, कायनात के चेहरे का रंग उड़ गया। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके सामने आया हुआ लड़का उसका देवर होगा, और वह वही लड़का होगा जिसने उसे विदेश में प्रपोज़ किया था।
अभी तक करण की नज़र कायनात पर नहीं पड़ी थी क्योंकि कायनात और राज की शादी हो चुकी थी, इसलिए कायनात के चेहरे पर एक बड़ा सा पर्दा डाला गया था, जो मुँह-दिखाई की रस्म के बाद ही उठाया जाना था।
करण ने जल्दी ही आगे बढ़कर अपने भाई को ढेर सारी शुभकामनाएँ दीं। सभी ने बड़े-बुज़ुर्गों के पाँव छुए और अपनी बहन माही को उसने हाई-फ़ाइव दिया।
वह कहने लगा, "कैसी है मोटी? तू ठीक तो है ना? मुझे पूरी उम्मीद है कि तूने अपने भाई को ज़्यादा याद नहीं किया होगा।" ऐसा कहकर वह अपनी बहन से सामान्य बातें करने लगा।
वहीं कायनात के दिल में कुछ अजीब सी उलझनें पैदा हो गईं। उसे समझ नहीं आ रहा था कि यह लड़का अचानक यहाँ कैसे आ सकता है, जो उसे विदेश में दिखाई दिया था।
तब कायनात ने अपनी सोच को तुरंत नकार दिया कि उसे उस लड़के के बारे में ज़्यादा नहीं सोचना चाहिए। और वैसे भी उसकी अब शादी हो चुकी है और हो सकता है कि उस वक़्त अपने किसी दोस्त की किसी शर्त के चलते उसने उससे बातें कर दी हों, और उसे प्रपोज़ कर दिया हो। और वैसे भी पूरे दो-ढाई साल हो चुके हैं इस बात को, अब तक तो वह भूल भी चुका होगा।
लेकिन अब जैसे ही उसे यह पता चलेगा कि मैं इसकी भाभी बन चुकी हूँ, तो हो सकता है कि यह मेरे साथ अच्छी तरह से बातें करेगा, और उस दिन जो इसने बदतमीज़ी की थी उसकी माफ़ी भी मांग लेगा। कहीं न कहीं कायनात ने अपने मन में करण को लेकर एक अलग ही तरह का विचार बना लिया था।
जल्दी ही बड़े ही धूमधाम और रीति-रिवाजों के साथ कायनात और राज की शादी पूरी हो गई।