Obbsession of Kaynaat Ch. 3

Obbsession of Kaynaat - Chapter 3

Posted by Shayna choudhary • Jan 03, 2025 11:20 AM

और वहीं, करण के आने पर पूरा मेवाड़ी परिवार बहुत ही ज्यादा खुश था। क्योंकि करण सबसे छोटा था, ऊपर से सबका लाड़ला भी। वह सभी की आँखों का तारा बना रहता था।

वेल, शादी के बाद अब बारी थी कायनात की मुँह-दिखाई की रस्म की। इसलिए कायनात को मुँह-दिखाई की रस्म के लिए हाल में बिठाया गया था। और जितने भी मेवाड़ी परिवार के सदस्य थे—राज के माता-पिता, चाचा-चाची, इतना ही नहीं, सभी के सबसे बड़े, उनके दादाजी जय प्रकाश, जिनका हुकुम ही उस घर में चलता था—सभी लाइन में लग चुके थे। क्योंकि सभी परिवार की मौजूदगी में नई बहु को कई सारे उपहार दिए जाने थे।

धीरे-धीरे करके सभी की बारी आ रही थी। सबसे पहले दादाजी ने शुरुआत की और उन्होंने कायनात को एक बड़ा ही खूबसूरत, बहुत ही महँगा डायमंड नेकलेस गिफ्ट के रूप में दिया।

और इसी तरह से कायनात की सास, वंदना जी ने बड़े ही खूबसूरत डायमंड ईयरिंग्स गिफ्ट किए।

इसी तरह सबने एक से बढ़कर एक, अपने-अपने अलग तरह के उपहार कायनात को दिए।

कायनात काफी खुश थी; उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी। उसके मन में अगर किसी को लेकर कोई हल्का सा बोझ था, तो वह सिर्फ़ अपने देवर करण को लेकर था।

लेकिन उसने सोच लिया था कि हो सकता है करण ने उस वक़्त मज़ाक किया हो, और वह उस बात को लेकर गंभीर ना हो, और वह तो कब का भूल भी चुका होगा। इसलिए कायनात ने भी अब उस बात को छोड़ दिया था।

धीरे-धीरे सभी बड़ों ने मुँह-दिखाई कर दी थी, लेकिन अब बारी किसी और की नहीं, बल्कि माही और करण की थी।

तो सबसे पहले करण थोड़ा सा आगे बढ़ा। करण के हाथ में भी एक बड़ा सा बॉक्स था। उसने वह बॉक्स कायनात को देने से पहले कायनात का हाथ पकड़ते हुए कहा,

"भाभी, अब आप मुझे क़ुबूल करें या न करें, लेकिन मैं आपका एक बदमाश देवर हूँ, तो आपको मुझे क़ुबूल करना ही होगा। और मैं वादा करता हूँ, मैं आपका बेस्ट से बेस्ट देवर बनकर दिखाऊँगा। और हमेशा आपका ख्याल रखूँगा। और हमेशा आपको खुश रखूँगा।"

करण की बातें सुनकर, जितने भी घर और परिवार वाले थे, सभी दोनों हाथों से तालियाँ बजाने लगे।

"वाह प्यारे वाह बेटा! आज भैया की शादी होते ही बड़ी समझदारी वाली बातें कर रहा है अपनी भाभी से। चल चल, अब आगे भी बढ़ ले और आगे बढ़कर अपनी भाभी का मुँह तो देख ले! और हाँ, पहले तेरा गिफ्ट हम सबके सामने खोलेंगे। देखेंगे तो इसमें क्या लेकर आया है।"

ऐसा कहकर सभी करण को छेड़ने लगे। लेकिन करण तुरंत अपना गिफ्ट पीछे छिपाते हुए बोला,

"नहीं-नहीं, मैं अपना गिफ्ट किसी को नहीं दूँगा। और भाभी, आपको अपने प्यारे से देवर की कसम है, आप यह गिफ्ट यहाँ सभी के सामने नहीं खोलेंगे। आप यह गिफ्ट अकेले में खोलेंगे। आपके लिए स्पेशल गिफ्ट है। आपके लिए स्पेशल गिफ्ट लेकर आया हूँ, और मुझे पूरी उम्मीद है कि आप अपने देवर का गिफ्ट सबसे ज्यादा पसंद करेंगी।"

ऐसा कहकर करण थोड़ा सा आगे बढ़ा। और कायनात भी करण की इस तरह की बातें सुनकर मुस्कुरा दी।

तभी करण थोड़ा सा अपने घुटनों के बल बैठकर कायनात का गिफ्ट उसके गोद में रखते हुए, जैसे ही उसने उसका घूंघट उठाया... और उसने अपने सामने दुल्हन बनी हुई, अपने सपनों की राजकुमारी को देखा... तो करण के पैरों तले से जमीन खिसक गई।

क्या करण कायनात को भाभी के तौर पर स्वीकार करेगा? जानने के लिए बने रहिए दोस्तों!

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