Arya and the Mystery of the Dark Staff Ch. 1

आर्य और काली छड़ी का रहस्य - Chapter 1

Posted by Aman Aj • Jan 06, 2025 06:57 AM

आर्य और काली छड़ी का रहस्य

अंधेरे के शैतानी प्रतिनिधि बड़ी शिद्दत से अपने अंतिम काम को निपटाने में लगे हुए थे। इस अंतिम काम को निपटाते ही भविष्यवाणी की सभी मुसीबतें समाप्त हो जाएँगी।

वे लगातार एक बूढ़े आदमी का पीछा कर रहे थे, जो 4 साल के बच्चे को बचाकर भाग रहा था। वह 4 साल का बच्चा उनकी और भविष्यवाणी की अंतिम मुसीबत था।

अंधेरे के प्रतिनिधि, जिनका आकार देखने में काफी डरावना था, उनका चेहरा भी नहीं था। वे काले कपड़ों में लिप्त थे और दौड़ते वक्त उछल रहे थे। उनकी संख्या लगभग बीस के आसपास थी। सभी काफी उत्साहित दिखाई दे रहे थे।

अंधेरे से भरे जंगल में उनकी यह खुशी उनके शोरगुल और किसी शिकारी को घेरने वाली रणनीति से ही स्पष्ट झलक रही थी।

बूढ़ा आदमी, जो जंगल में बच्चे की जान बचाता हुआ दौड़ रहा था, उसका नाम विष्णुवर था। हड्डियों के पिंजर जैसा शरीर, बूढ़ी आँखें, लंबी सफ़ेद दाढ़ी; जान ना होने के बावजूद, सब कुछ लगाकर तेज़ भागना उसकी मजबूरी थी।

उसके हाथों में जो 4 साल का बच्चा था, उसकी कहानी काफी लंबी थी; इतनी लंबी कहानी, जिसे पूरा होने के लिए अध्याय नहीं, बल्कि महाग्रंथ की आवश्यकता थी। वह बच्चा पैदा होते ही सबके आकर्षण का केंद्र बन गया था, खासकर शैतानी शक्तियों के आकर्षण का केंद्र।

भविष्यवाणी में कहा गया था कि यह बच्चा इक्कीस साल का होने के बाद अंधेरे के शहंशाह को समाप्त कर सकता है। इसीलिए सभी अंधेरे के प्रतिनिधि हाथ धोकर उसके पीछे पड़े हुए थे। अंधेरे का शहंशाह अभी धरती पर आया ही नहीं था और उसकी मृत्यु की तैयारियाँ पहले से ही हो गई थीं। कोई अपने आका को इस तरह से मरने नहीं दे सकता था। इसलिए अंधेरे के 6 सेनापतियों, जिनमें शैतान तक शामिल था, ने बच्चे को समाप्त करने के लिए अपनी सेना को यह काम सौंप दिया था। बच्चे के पैदा होते ही सेना की तलाश शुरू हो गई थी।

अंधेरे से लड़ने वाला एक समूह बच्चे की जान की हिफ़ाज़त करने के लिए पूरी तरह से जुटा हुआ था, लेकिन उनकी संख्या कम थी और अंधेरे की अधिक। इसलिए बच्चे की हिफ़ाज़त के लिए उसे दुनिया के दूर कोने में भेज दिया गया था। वहाँ दूर कोने में बच्चा 4 साल तक तो हिफ़ाज़त में रहा, मगर इसके बाद अंधेरे के प्रतिनिधियों ने उसे ढूँढ लिया। उसे ढूँढने के बाद वे बच्चे पर हमला करने के लिए टूट पड़े, और यहाँ यह 60 साल का बूढ़ा विष्णुवर उसे बचाने के लिए आगे आ गया।

यह कहानी का हल्का-फुल्का सारांश था, जो 4 साल के बच्चे की कहानी को शुरू करने के लिए काफी था, लेकिन इसे एक आंशिक शुरुआत के तौर पर ही देखा जा सकता है, ना कि पूरी कहानी।

जल्द ही बूढ़ा दौड़ते-दौड़ते एक ऐसी जगह पर आ रुका, जहाँ आगे किसी भी तरह का रास्ता नहीं था। वह एक खाई वाले हिस्से के पास था। पीछे आ रहे अंधेरे के प्रतिनिधियों की खुशी और अधिक बढ़ गई।

वे आकर उसके आसपास जमा हो गए। उनमें से कोई एक अंधेरे का प्रतिनिधि अपनी कर्कश आवाज़ में बोला, "आर्य… को हमारे हाथों में सौंप दो। हम तुम्हारी जान बख्श देंगे।"

विष्णुवर ने तुरंत खाई की ओर देखते हुए जवाब दिया, "मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा। ना आज, ना कल। इसकी बजाय मुझे मरना मंज़ूर है। यह 4 साल का बच्चा सिर्फ़ तुम लोगों का अंत नहीं, बल्कि तुम लोगों की पूरी दुनिया का अंत है। वह अंत, जिसके लिए हम सैकड़ों सालों से लड़ाई लड़ते आ रहे हैं। ना जाने इस लड़ाई में हमने अपने कितने साथियों को खोया। इस दुनिया में कितनी मुसीबतों का सामना किया। अब यह बच्चा इसका अंत है… और यह होकर रहेगा…"

"पागल मत बनो, ना समझ…" सामने से कहा गया, "अगर तुम खाई से कूदोगे तो बच्चे के साथ-साथ तुम्हारी मौत भी होगी। इसमें हमारा अंत नहीं, बल्कि तुम्हारा अंत है।"

विष्णुवर को यह सुनकर बिल्कुल भी डर नहीं लगा। उल्टा उसने एक मीठी मुस्कराहट दिखाई। मुस्कराते-मुस्कराते वह पीछे की ओर जाने लगा। सभी अंधेरे के प्रतिनिधि धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे। वे इस बात से खौफ़ खा रहे थे कि कहीं सामने वाला बूढ़ा बच्चे को लेकर खाई में ना कूद जाए। लेकिन इसमें डरने वाली बात नहीं थी। खाई में कूदने से एक तरह से उनका ही फायदा होगा। उनकी आखिरी मुसीबत भी समाप्त हो जाएगी।

अचानक अंधेरे के प्रतिनिधियों ने बूढ़े पर झपट्टा मारने की कोशिश की, मगर बूढ़ा तेजी से खाई में कूद गया। झपट्टा मार रहे अंधेरे के प्रतिनिधियों के हाथ खाली रह गए। सभी खाई के किनारे आकर अंदर की ओर देखने लगे। रात के अंधेरे में दूर-दूर तक कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। खाई के अंदर भी कुछ नहीं। इस बात का आकलन करना मुश्किल था कि खाई कितनी गहरी है, लेकिन यह भी सच था कि खाई में कूदने वाला कभी ज़िंदा नहीं बचता।

अंधेरे के प्रतिनिधियों में से कोई एक बोला, "मुझे नहीं लगता कि वे दोनों बचे होंगे। भविष्यवाणी में जिस शैतान की मृत्यु कही गई थी, वह खुद मर गया। इसी के साथ हमारी आखिरी मुसीबत और भविष्यवाणी का यही अंत होता है। अब हमें बाकी के बचे हुए काम करने चाहिए। शहंशाह के आने का स्वागत की तैयारियाँ करनी चाहिए। जाकर आश्रम से दो छड़ियाँ हासिल करते हैं और शहंशाह की दुनिया का रास्ता खोलते हैं।"

इतना कहकर सभी अंधेरे के प्रतिनिधि धीरे-धीरे वहाँ से विलीन होने लगे। हर कोई यह सोच चुका था कि अब यही अंत है, लेकिन इतिहास गवाह है… जिसे अंत कहा जाता है, वह एक नई शुरुआत होता है।

सभी विलीन हुए अंधेरे के प्रतिनिधि बर्फीली जगह पर एक-एक करके प्रकट हुए, लेकिन प्रकट होते ही उनके सामने जो नज़ारा था, उन्हें उस पर यकीन नहीं हो रहा था। उनके ठीक सामने पूरे आश्रम के इर्द-गिर्द रोशनी का एक गोल चक्र बन रहा था; एक ऐसा गोल चक्र, जिसके संपर्क में आते ही अंधेरे के प्रतिनिधियों की सेना समाप्त हो रही थी।

एक अंधेरे का प्रतिनिधि भागता हुआ प्रकट होने वाले अंधेरे के प्रतिनिधियों के पास आया और बोला, "गड़बड़ हो गई। काफी बड़ी गड़बड़। किसी ने शैतानों की छड़ी का इस्तेमाल किया है। उसके बेशुमार बल का वह अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल कर रहा है। उसकी वजह से सभी अंधेरे के प्रतिनिधि उनके किले में कैद होते जा रहे हैं। हम हार चुके हैं।"

यह सुनते ही सभी को मानो सदमा सा लगा। "मगर यह नहीं हो सकता। हम अपनी जीत के इतने करीब आकर हार नहीं सकते। हमें अंधेरे के शहंशाह को इस दुनिया में लेकर आना है।"

"लेकिन अब यह संभव नहीं। कभी भी संभव नहीं। अंधेरे के शहंशाह को दुनिया में लाने के लिए हमें दोनों ही छड़ियों की आवश्यकता है, मगर वे आश्रम की चारदीवारी के अंदर बिल्कुल सुरक्षित हैं। हम उन्हें ना तो हासिल कर सकते हैं, ना ही शहंशाह को कभी वापस बुला सकते हैं।"

यह सुनकर यहाँ के छोटे से समूह के मुखिया ने कहा, "अगर ऐसा है तो हमारा बस आज से एक ही मकसद होगा… उन दोनों ही छड़ियों को हासिल करना। साम, दाम, दंड, भेद… हम कैसे भी करके उन्हें हासिल करेंगे। कैसे भी करके, लेकिन इसके लिए हमें इंतज़ार करना होगा। एक सही मौके… और सही वक्त का।"

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