Chapter 2 (Kahan hai Sid!)
कुछ देर बाद,
वो लड़का एक जिम के सामने था। उसने अंदर जाते ही चिल्ला कर कहा, "सिड! सिड! वेयर आर यू?"
उसकी आवाज सुन कर उस जिम का मालिक अपने केबिन से बाहर आया। उस लड़के को देख कर जिम के मालिक, जिसका नाम राहुल था, ने कहा, "क्या हुआ यश, इतने परेशान क्यों लग रहे हो?"
यश ने उसे देखते ही सवाल करते हुए कहा, "भाई, सिड कहां है?"
राहुल ने कन्फ्यूजन के साथ कहा, "सिड? उसे निकले हुए तो लगभग 1 घंटा हो गया है।"
यश ने अपनी आँखें बड़ी करके कहा, "क्या?"
राहुल ने नासमझी से कहा, "हां!" फिर उसने यश से ही सवाल करते हुए कहा, "क्यों, वो घर नहीं पहुंचा क्या अभी तक?"
यश ने बाहर जाते हुए कहा, "हम आपसे बाद में बात करते हैं।"
राहुल ने उसे रोकते हुए कहा, "पर यश...!" लेकिन यश उसे अनसुना करके चला गया।
यश ने वापस घर आकर सिड को ढूंढना शुरू कर दिया। उसने सिड को हर जगह ढूंढ लिया था, पर उसका कहीं कोई अता-पता नहीं था। उसे परेशान देख कर एक महिला, जो पौधों को पानी दे रही थी, उसने यश से कहा, "क्या हुआ, बेटा?" उनकी उम्र कोई पचास साल के आस-पास रही होगी।
यश ने उनकी ओर देख कर कहा, "मां, वो... वो...!" वो पैनिक करने लगा था। उसे ऐसे देख कर सिड की मां (मिसेज माथुर) ने घबरा कर कहा, "वो क्या, यश?"
यश ने एक ही सांस में कहा, "सिड कहीं मिल नहीं रहा है, मां!"
मिसेज माथुर ने तुरंत कहा, "क्या?"
यश ने फिर से कहा, "हां, मां! उसने हमसे कहा था कि वो जिम जा रहा है।"
मिसेज माथुर ने घबरा कर कहा, "तो वहां जाकर देखा?"
यश ने टेंशन के साथ कहा, "हां मां, वहां भी देख लिये। राहुल भाई ने बताया कि सिड वहां गया था, पर उसे निकले हुए लगभग एक घंटा हो गया है।"
मिसेज माथुर ने बौखला कर कहा, "ऐसा कैसे हो सकता है? अगर उसे निकले हुए इतना समय हो गया है, तो अब तक तो उसे यहां आ जाना चाहिए था।"
यश ने टेंशन के साथ कहा, "वही तो समझ नहीं आ रहा है न!"
मिसेज माथुर ने अपना सिर पकड़ कर कहा, "कहां चला गया ये लड़का?"
यश ने मिसेज माथुर की ओर देख कर कहा, "मां, आप टेंशन मत लीजिए। हम... हम कुछ करते हैं। हम ढूंढते हैं उसे।"
मिसेज माथुर ने भी बाहर की ओर जाते हुए कहा, "हां, हम भी देखते हैं। कहीं कॉलेज में तो नहीं है न?"
यश ने उन्हें रोकते हुए कहा, "नहीं मां, हमने वहां भी पता किया है। वो वहां भी नहीं है। एक काम करिए, आप पहले सनी भाई को इनफॉर्म कर दीजिए और हम लक्ष्मी दीदी और काव्या दीदी से पूछते हैं।"
मिसेज माथुर ने अपना फोन निकालते हुए कहा, "हां, ये ठीक रहेगा।"
यश ने कहा, "हम्म!" और फिर वो दोनों अपने-अपने फोन से कॉल करने लगे।
उधर मिसेज माथुर सनी से बात कर रही थीं, तो वहीं यश ने फोन पर काव्या से कहा, "प्रणाम दीदी, सिड आपके यहां आया है क्या?"
सामने से काव्या ने कहा, "नहीं तो! क्यों, क्या हुआ?"
यश ने तुरंत कहा, "कुछ नहीं, हम आपसे बाद में बात करते हैं।"
काव्या ने कहा, "पर...!" लेकिन यश ने तुरंत कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया।
मिसेज माथुर ने उसके कंधे पर हाथ रख कर कहा, "क्या हुआ, सिड है वहां?"
यश ने निराशा के साथ अपना सिर ना में हिला कर कहा, "नहीं।"
मिसेज माथुर ने उसकी ओर देख कर कहा, "लक्ष्मी को कॉल करो।"
यश ने भी कहा, "हां, हां, करते हैं।"
यश ने लक्ष्मी से बात कर ली, तो मिसेज माथुर ने बेचैनी के साथ कहा, "क्या हुआ, कुछ पता चला?"
यश ने फिर निराशा में सिर हिला कर कहा, "नहीं मां, सिड वहां भी नहीं है।"
वो दोनों बातें कर ही रहे थे, कि इतने में एक आदमी अंदर आया। उसे देख कर यश ने कहा, "पापा!"
उस आदमी (मिस्टर सिन्हा) ने उसकी ओर देख कर कहा, "हां, बेटा!"
यश ने उनसे सवाल करते हुए कहा, "आपने सिड को कोई काम दिया है क्या?"
मिस्टर सिन्हा ने अपना सिर ना में हिला कर कहा, "नहीं तो!"
यश ने फिर से सवाल किया, "आपने उसे किसी मिशन पर नहीं भेजा है?"
मिस्टर सिन्हा ने कहा, "बिल्कुल नहीं, बल्कि हम तो उसे खुद ही मना करने वाले थे।"
मिसेज माथुर ने अपना सिर पकड़ कर कहा, "अब क्या किया जाए?"
मिस्टर सिन्हा ने सवाल करते हुए कहा, "हुआ क्या है?"
यश ने उनकी ओर देख कर कहा, "पापा, सिड का कहीं कुछ पता नहीं चल रहा है।"
मिस्टर सिन्हा ने नासमझी से थोड़ी तेज आवाज में कहा, "क्या मतलब, पता नहीं चल रहा है?"
यश ने उन्हीं भावों के साथ कहा, "वो कुछ देर पहले जिम गया था, और वहीं से गायब है।"
मिस्टर सिन्हा ने थोड़े गुस्से से कहा, "क्या मतलब गायब है! वो कोई बच्चा थोड़ी है।"
यश ने अपना सिर पकड़ कर कहा, "इसीलिए तो और टेंशन हो रही है, कि वो ऐसे कैसे गायब हो सकता है।"
मिस्टर सिन्हा ने अब चिंता के साथ कहा, "तुमने हर जगह देख लिया?"
यश ने फ्रस्ट्रेट होकर कहा, "हां, यहां तक कि वो लक्ष्मी दी या काव्या दी के यहां भी नहीं है।"
मिसेज माथुर ने भी तुरंत कहा, "और सनी के साथ या मोक्षा के पास भी नहीं है।"
मिस्टर सिन्हा ने फिर से पूछा, "उसके दोस्तों से बात की?"
यश ने फिर से अपना फोन निकालते हुए कहा, "नहीं, हम अभी करते हैं।"
मिस्टर सिन्हा ने भी फोन निकालते हुए कहा, "हां, हम भी देखते हैं।"
फिर वो तीनों अलग होकर सिड के दोस्तों से बात करने लगे। लगभग बीस मिनट बाद, तीनों वापस हॉल में इकट्ठा हो गए।
मिसेज माथुर ने मिस्टर सिन्हा की ओर देख कर कहा, "कुछ पता चला?"
मिस्टर सिन्हा ने निराशा के साथ कहा, "नहीं, भाभी जी!" फिर उन्होंने मिसेज माथुर की ओर देख कर कहा, "आपको?"
मिसेज माथुर ने भी ना में सिर हिला कर कहा, "नहीं, वो अपने किसी भी दोस्त के साथ नहीं है।" उनकी आंखों में आंसू आ गए थे।
यश ने भी कहा, "हमने भी देख लिया, वो कहीं नहीं है।"
मिस्टर सिन्हा ने टेंशन के साथ कहा, "अब तो एक ही रास्ता है, पुलिस कंप्लेंट!" फिर उन्होंने मिसेज माथुर की ओर देख कर कहा, "आप टेंशन मत लीजिए, भाभी जी! सिड को कुछ नहीं होगा। वो आपका बेटा बना है, पर हमने खुद उसे अपना बेटा माना है। उसे बचाने के लिए जो भी करना पड़े, हम करेंगे।"
मिसेज माथुर ने हां में सिर हिला दिया, तो मिस्टर सिन्हा अपने फोन से बात करते हुए बाहर चले गए।
जारी है...