Chapter 3 (Kidnap)
दोपहर का समय,
यश, मिसेज माथुर और मिस्टर सिन्हा, तीनों ने मिलकर पूरा शहर छान मारा था। सनी, काव्या, मोक्षा और लक्ष्मी को भी सिड के गायब होने की खबर मिल चुकी थी और वे सब भी यहां आ चुके थे। सभी लोगों ने हर मुमकिन कोशिश कर ली थी सिड को ढूंढने की, लेकिन उसका कहीं अता-पता नहीं था।
वहीं दूसरी तरफ,
एक प्राइवेट जेट अपनी गति से आसमान में उड़ रहा था। उस जेट में एक लड़की और एक बूढ़ा आदमी बैठे हुए थे। लड़की की उम्र कोई 24 साल रही होगी, तो वहीं आदमी की उम्र 75 साल के आसपास; लेकिन उसने खुद को इतना फिट रखा हुआ था कि उसे देखकर उसकी उम्र का अंदाजा लगा पाना मुश्किल था।
उन दोनों के अलावा, सिड भी उस जेट में बैठा हुआ था। जहाँ बूढ़े आदमी ने बढ़िया सा सूट पहना हुआ था, तो वहीं सिड और उस लड़की ने काले रंग की जींस के साथ सफेद रंग की टी-शर्ट पहनी हुई थी, जिसकी बाजू उनके पूरे हाथ को ढक रही थी।
सिड चुपचाप बैठा हुआ था और सामने की ओर देखे जा रहा था। उसके मुंह पर मास्क लगा हुआ था और बाल बिखरे हुए थे। बूढ़े आदमी के चेहरे पर अकड़, तो वहीं उस लड़की के चेहरे पर दुनिया-जहाँ की खुशी नजर आ रही थी। उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे कि उसे कोई गड़ा हुआ खजाना मिल गया हो।
उसने अपने बगल में बैठे हुए सिड का हाथ अपने हाथ में पकड़ लिया, तो सिड की पुतलियां उसकी ओर घूम गईं, जिनमें नफरत साफ नजर आ रही थी; लेकिन अजीब बात यह थी कि पुतलियों के अलावा, उसके शरीर का कोई और हिस्सा नहीं हिल रहा था, यहाँ तक कि उसकी गर्दन भी नहीं।
शायद उसे कोई ड्रग दिया गया था। उस लड़की ने उसकी आँखों में देखकर मुस्कुराते हुए उसके चेहरे पर अपना हाथ फिरा दिया, जिससे सिड और चिढ़ रहा था, लेकिन वह चाहकर भी उसे खुद से दूर नहीं कर पा रहा था।
यह देखकर उस लड़की ने कहा, "बस थोड़ी देर और, सिड। फिर हम दोनों इस देश से बाहर होंगे। एक ऐसी जगह पर, जहाँ हमारे अलावा और कोई भी नहीं होगा।" फिर उसने अपने दाँत पीसते हुए कहा, "और वह यश तो बिल्कुल भी नहीं।"
शाम का समय,
सभी लोग हॉल में बैठे हुए थे। सबके चेहरे पर परेशानी साफ झलक रही थी। इतने में, मिस्टर सिन्हा ने अपना फोन देखकर मिसेज माथुर से कहा, "भाभी जी, एक बुरी खबर है।"
मिसेज माथुर ने डर के साथ कहा, "क्या हुआ?"
मिस्टर सिन्हा ने हिचकते हुए कहा, "निशा भी आज सुबह से ही गायब है।"
सबके मुँह से एक साथ निकला, "क्या?"
मिस्टर सिन्हा ने कहा, "हाँ, अनिरुद्ध ने अभी-अभी हमें यह बात बताई है।"
सनी ने कुछ सोचते हुए कहा, "इसका मतलब कि...?"
उसकी बात पूरी होने से पहले ही, मिस्टर सिन्हा ने कहा, "हाँ, हो सकता है कि वे दोनों साथ हों।"
यश ने पूरे विश्वास के साथ कहा, "हो सकता है, लेकिन यह कभी नहीं हो सकता कि सिड अपनी मर्जी से उसके साथ चला जाए।"
लक्ष्मी ने अपना सिर पकड़ कर कहा, "अब क्या करें!"
यश ने गुस्से में कहा, "हमें तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा है कि क्या करें। उसका बाप कोई नॉर्मल इंसान होता, तो डरा-धमका कर सब कुछ उगलवा भी लेते; लेकिन वह ठहरा MLA, कुछ पूछ भी नहीं सकते हैं उससे।"
मिसेज माथुर ने चिंता के साथ कहा, "कुछ भी हो, पर हम ऐसे हाथ पर हाथ रख कर तो नहीं बैठ सकते न!"
मिस्टर सिन्हा ने उन्हें भरोसा दिलाते हुए कहा, "बिल्कुल नहीं, भाभी जी। हम कुछ भी करके सिड को ढूंढ कर ही रहेंगे।"
दो दिन बाद,
सभी लोग निराशा के साथ हॉल में बैठे हुए थे। मिसेज माथुर को तो जैसे सदमा सा लगा हुआ था, क्योंकि दो दिनों से सिड की कोई खबर नहीं मिली थी। वह चुपचाप बैठी हुई थीं, कि तभी उनका फोन बज उठा। उन्होंने फोन उठाकर देखा, तो उन्हें एक अनजान नंबर से वीडियो कॉल आ रही थी।
उन्होंने मिस्टर सिन्हा की ओर देखकर कहा, "वीडियो कॉल, वो भी अननोन नंबर से!"
मिस्टर सिन्हा ने उम्मीद के साथ कहा, "रिसीव करके देखिए। शायद सिड के बारे में कुछ पता चल जाए।"
मिसेज माथुर ने कहा, "हम्म!"
और फिर कॉल आंसर किया, तो सामने एक लड़की नजर आने लगी। यह वही लड़की थी जो दो दिन पहले उस जेट में थी। उसने मिसेज माथुर को देखकर अपने हाथ जोड़कर कहा, "प्रणाम, सासू माँ!"
मिसेज माथुर उसे देखकर हैरान हो गईं। उनके मुँह से अपने आप ही निकल गया, "निशा!"
निशा ने उत्साहित होकर मुस्कुराते हुए कहा, "अरे वाह, सासू माँ! आपकी याददाश्त तो बहुत तेज है।"
मिसेज माथुर ने चिढ़ कर कहा, "बकवास बंद करो अपनी, और यह बताओ कि कॉल क्यों किया है।"
निशा ने बेशर्मी से कहा, "अरे, अरे, कूल डाउन, सासू माँ, कूल डाउन! मैं जानती हूँ कि आप सिड को लेकर परेशान हैं। होता है, होता है। जिससे आप प्यार करते हो, वह आपसे दूर चला जाए, तो दुख होता है।"
मिसेज माथुर ने फिर से कुछ कहना चाहा ही था, कि तभी उनके दिमाग में कुछ खटका। उन्होंने तुरंत निशा को घूरते हुए कहा, "तुम्हें कैसे पता कि हम सिड को लेकर परेशान हैं? क्या वह तुम्हारे साथ है?"
निशा ने अपनी मुस्कान को और बड़ा करके कहा, "बिल्कुल, मेरे साथ ही तो है।" फिर उसने फोन को अपने बगल में लेटे हुए सिड की ओर घुमा कर कहा, "यह देखिए।"
वहाँ एक बेड पर सिड लेटा हुआ था, जिसने पेशेंट के कपड़े पहने हुए थे। उसका चेहरा पीला पड़ा हुआ था, और उसके मुँह पर अभी भी मास्क था। उसके बाल माथे पर बिखरे हुए थे।
उसका पूरा चेहरा नजर नहीं आ रहा था, लेकिन फिर भी सबने उसे पहचान लिया कि वह सिड ही है। वह बेहोश था, लेकिन इस हालत में भी उसके माथे पर सुकून नजर नहीं आ रहा था।
मिसेज माथुर ने उसे देखकर बेचैनी के साथ कहा, "सिड! सिड!" लेकिन उसने कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया।
निशा ने फोन को फिर से अपनी ओर घुमा कर कहा, "वो नहीं उठेगा, सासू माँ!"
जारी है...