बंधन ( एक मर्यादा ) Ch. 1

बंधन ( एक मर्यादा ) - Chapter 1

Posted by Shalini Chaudhary • Jan 16, 2025 11:21 AM

बिहार, एक ऐसा राज्य जिसने सदियों से अपने अंदर इतिहास और संस्कृति का खजाना समेट रखा था। यही वह भूमि थी जिसने दुनिया को पहला गणराज्य दिया, शून्य जैसी अद्भुत खोज देने वाले आर्यभट्ट को जन्म दिया, और अपनी अद्भुत भाषा शैली से पूरे देश को एकता के सूत्र में बाँधा था। यह एक ऐसा राज्य था, जहाँ सबसे अधिक आईएएस अधिकारी और आईटी प्रोफेशनल्स निकलते थे, और वहीं लिट्टी-चोखा खाते हुए एक अनपढ़ मजदूर भी दिखाई देता था।

यही वह जगह थी, जहाँ के लोग भले ही अंग्रेजी को कम समझते थे, लेकिन गणित उनके खून में दौड़ता था। इसी बिहार का एक जिला था मधुबनी, जो अपनी मधुबनी चित्रकला के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध था। मधुबनी में एक कॉलेज था, जे.एन. कॉलेज। इसके पिछली गली में एक घर था, जिसका नाम था 'चौधरी निवास'।

सुबह का समय था। गली में इक्का-दुक्का लोग ही नज़र आ रहे थे। चौधरी निवास में हॉल के सोफे पर नारायण चौधरी बैठे हुए थे। उनके हाथ में टीवी का रिमोट था, और दीवार पर लगे टीवी पर 'आज तक' चैनल चल रहा था। एंकर अंजना ओम कश्यप मध्य प्रदेश और राजस्थान के आगामी चुनावों पर चर्चा कर रही थीं। हॉल के एक कोने में स्थित मंदिर में सुधीरा चौधरी पूजा कर रही थीं।

वहीं, एक लड़की बंधन चौधरी झाड़ू लगा रही थी। नारायण चौधरी ने उसे देखा और बोले,

"बंधन, ओ निकम्मा! उठली की नई?"

बंधन ने जवाब दिया, "हाँ उठ गई हूँ।"

जल्दी-जल्दी झाड़ू खत्म करके बंधन अपने भाई के कमरे की ओर गई। जैसे ही उसने दरवाजा खोला, उसका पैर एक बैट से टकरा गया। हल्की चीख निकलते ही उसने नीचे देखा और बैट को एक ओर सरकाते हुए कमरे की खिड़की खोलने लगी।

बंधन बड़बड़ाते हुए बोली, "इतनी गर्मी में भी खिड़की बंद करके सोता है। नींद कैसे आती है?"

फिर वह अपने भाई केशव के पास गई और उसे जगाते हुए बोली, "केशव, उठ जा। जल्दी से! पिताजी गुस्सा कर रहे हैं।"

केशव ने कुनमुनाते हुए कहा, "दीदी, उठ रहा हूँ ना। तुम जाओ। पाँच मिनट में आता हूँ।"

बंधन ने हिलाते हुए कहा, "ना रे बाबा ना। जब तक तू उठेगा नहीं, मैं कहीं नहीं जाने वाली। वरना फिर पिछली बार की तरह पिताजी से बोलेगा कि मैंने उठाया ही नहीं। अब चल, जल्दी से उठ वरना..."

केशव ने नींद में ही कहा, "वरना क्या?"

बंधन ने थोड़ी तेज आवाज में कहा, "पिताजी! केशव नहीं उठ रहा है!"

यह सुनकर केशव फौरन उठ गया और बड़बड़ाते हुए बोला, "उठ गया! पापा को क्यों बुला रही है? पापा की चमची!"

बंधन मुस्कुराते हुए कमरे से बाहर चली गई।

यह चौधरी परिवार था, जो मधुबनी में रहता था। परिवार के चार सदस्य थे—नारायण चौधरी, उनकी पत्नी सुधीरा चौधरी, उनकी बेटी बंधन और बेटा केशव। यह एक मध्यमवर्गीय परिवार था, जिसकी सीमित आय थी, लेकिन उनके बच्चों के सपने बड़े थे।

थोड़ी देर बाद, केशव फ्रेश होकर हॉल में आया। वहाँ नारायण चौधरी और सुधीरा बैठी थीं। बंधन चाय लेकर आई और सबको चाय देते हुए हल्के झिझक के साथ बोली,

"पिताजी, मेरा ग्रेजुएशन अब खत्म हो चुका है, और मैं आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली जाना चाहती हूँ।"

बंधन की बात सुनकर नारायण चौधरी खामोश हो गए। सुधीरा ने बंधन को बैठने का इशारा किया। केशव ने कहा,

"हाँ पापा, दीदी को जाने दीजिए। वैसे भी यहाँ आगे पढ़ाई की कोई सुविधा नहीं है। और दीदी पीआर (पब्लिक रिलेशन) की पढ़ाई करना चाहती हैं, जो दिल्ली में ही संभव है।"

नारायण चौधरी ने केशव को डाँटते हुए कहा, "तू पहले अपना दसवाँ पास कर। इसी बार तेरा बोर्ड है, और तेरे पढ़ने के रूटीन से तो अगले चार साल में भी पास नहीं हो पाएगा!"

सुधीरा गुस्से से बोलीं, "ये कोई तरीका है बोलने का? कौन जानता है कि कब बच्चे की जुबान पर सरस्वती जी बैठ जाएँ? हमेशा अच्छा बोलना चाहिए। और आप तो बस केशव की पढ़ाई पर ज्ञान मत दीजिए। कभी देखा है कि ये पढ़ाई में क्या कर रहा है?"

नारायण चौधरी ने जवाब दिया, "अरे भाग्यवान! पढ़ने वाला बच्चा होना चाहिए। बंधन को देख लो। इसे भी तो मैंने नहीं पढ़ाया। इसके टाइम पर तो पैसे के अभाव में कोई सुविधा भी नहीं थी। लेकिन फिर भी हर बार डिस्टिंक्शन लाती रही। और इसे तो ट्यूशन भी लगवाया है।"

सुधीरा चिढ़कर बोलीं, "यौ भाग्यवान! हमार कहब नई किए कि अहाँ सने जहिया हमर बियाह भेल, तखने हमर भाग्य फुटि गेल।"

उनकी बात सुनकर बंधन और केशव हँसने लगे।

बंधन ने गंभीर होकर कहा, "पिताजी, आप क्या कहते हैं?"

नारायण थोड़ी देर चुप रहे, फिर बोले, "देखो बेटिया, बाहर जाना थोड़ा रिस्की हो जाता है। पहली बात तो आर्थिक स्थिति की है। तुम ही बताओ, क्या हम सक्षम हैं? बाहर जाने का मतलब है 20-30 हजार महीने का खर्चा। अगर थोड़ी भी सुविधा चाहिए तो ये खर्च 50-60 हजार तक पहुँच जाएगा। देखो, अगर कोई ऑनलाइन कोर्स है तो उसे ट्राई करो।"

बंधन निराश हो गई। क्या वह दिल्ली जाकर पढ़ाई कर पाएगी?

आगे क्या होगा इस कहानी में? जानने के लिए जुड़े रहें बंधन (एक मर्यादा) के साथ।

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