Our Arranged Love Ch. 1

Our Arranged Love - Chapter 1

Posted by Desire World • Jan 17, 2025 12:34 PM

राजस्थान, उदयपुर शहर।

सुबह का समय था और उदयपुर का सबसे बड़ा पुश्तैनी राजमहल, जिसे उदयपुर का हर व्यक्ति अच्छी तरह जानता था, क्योंकि इस महल में राजवंशी परिवार रहता था।

यह राजमहल दिखने में अत्यंत खूबसूरत था। महल के बाहर एक बड़ा बगीचा था, जहाँ खूबसूरत फूलों के साथ प्यारी चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई देती थी। महल के ठीक सामने एक बड़ा तलाब था, जिसमें कई छोटी-छोटी मछलियाँ थीं।

महल जितना बड़ा और सुंदर था, उसकी बाहरी दीवारों पर उतनी ही अच्छी नक्काशी की गई थी। कुल मिलाकर, वह महल काफी पुराना लग रहा था।

महल के अंदर आते ही, सारी चीजें बाहरी दुनिया से काफी अलग लग रही थीं। जितना महल बाहर से पुराना लग रहा था, अंदर से उतना ही शाही लुक दे रहा था।

राजमहल की सारी चीजें एक से बढ़कर एक थीं। पूरा महल साफ-सुथरा था। डाइनिंग एरिया का इंटीरियर काफी शाही अंदाज़ का लग रहा था, मानो वह राजा-महाराजाओं के समय से बना हो। लिविंग एरिया में लगा बड़ा झूमर महल को परफेक्ट शाही लुक दे रहा था। लिविंग एरिया के सामने बड़ी घुमावदार सीढ़ियाँ थीं जो ऊपर बने कमरों तक जाती थीं। सब कुछ अत्यंत सुंदर लग रहा था।

आज उस महल में उत्सव जैसा माहौल था क्योंकि वहाँ के सभी लोग बहुत खुश थे। उनके कुंवर साहब ने शादी के लिए हाँ कह दिया था। ना जाने कब से मोहिनी देवी उनके पीछे पड़ी हुई थीं, क्योंकि उनके पति राजा साहब की अचानक मृत्यु के बाद किसी को तो उनकी जगह लेनी थी। शादी न होने तक यह नहीं हो सकता था; यह राजवंश परिवार का एक बहुत पुराना नियम था।

लिविंग एरिया में एक अधेड़ उम्र की महिला ऑफ व्हाइट रंग की बनारसी साड़ी, गले में पर्ल नेकलेस, बालों का जूड़ा, चेहरे पर हल्का मेकअप और माथे पर छोटी सी काली बिंदी लगाकर पूरे रौब के साथ बैठी थी। वह महिला बहुत खुश लग रही थी, लेकिन अपनी खुशी को उसने चेहरे पर जाहिर नहीं किया।

उसके आस-पास खड़े लोग हाथ बांधे खड़े थे। वह महिला महल की महारानी लग रही थी।

उस महिला ने टेबल पर रखी कई लड़कियों की तस्वीरें बड़े गौर से देखीं।

उसने उनमें से एक लड़की की तस्वीर उठाई और सामने खड़े एक आदमी, जिसने शॉर्ट कुर्ता-पजामा और मोटा चश्मा पहन रखा था (वह महल में काम करने वाला कोई आदमी लग रहा था), की ओर बढ़ाते हुए कहा,

"मुनीम जी! इन सारी तस्वीरों में से हमें सिर्फ यह एक लड़की पसंद आई है। हमें इनके बारे में सारी जानकारी बताइए। यह हमारे बेटे के लिए बिल्कुल परफेक्ट लग रही हैं।"

उस आदमी ने तस्वीर लेते हुए कहा,

"रानी साहबा, यह सूर्यवंशी परिवार की इकलौती बेटी है, बहुत ही खानदानी और खूबसूरत। और वह परिवार भी हमारी तरह राजघराने का वंशज है।"

सामने बैठी महिला ने एक पैर दूसरे पैर पर चढ़ाया, हाथ घुटनों पर रखे और धीमी आवाज़ में कहा,

"यह तो बहुत अच्छी बात है। फिर तो हमने तय कर लिया है कि हमारे अभिमन्यु की दुल्हन यही होगी।"

सामने खड़े मुनीम जी ने टेबल पर रखी बाकी तस्वीरें उठाकर अपने बैग में रखते हुए कहा,

"ठीक है रानी साहबा, मैं आपकी बात समझ गया। मैं जल्द से जल्द मिस्टर सूर्यवंशी से इस बारे में बात करके आपकी मीटिंग उनके साथ तय करवाता हूँ।"

मुनीम जी जाने वाले ही थे कि रानी साहबा ने उन्हें रोकते हुए कहा,

"एक मिनट मुनीम जी, रुकिए और हमें हमारी होने वाली बहू की तस्वीर देकर जाइए!"

मुनीम जी ने मुस्कुराते हुए उस लड़की की तस्वीर रानी साहबा के हाथ में दे दी और वहाँ से बाहर निकल गए। तभी सामने की सीढ़ियों से छह फुट का एक नौजवान लड़का, जिसने थ्री पीस सूट पहन रखा था, उतर रहा था। वह बहुत ही हैंडसम था; उसके एक हाथ में फ़ोन और दूसरा हाथ पैंट की जेब में था।

वह काफी सीरियस लग रहा था; तीखी नाक, चेहरे पर हल्की-सी सेट की हुई दाढ़ी और गहरे काले रंग की आँखें बड़ी ही आकर्षक लग रही थीं। वह दूर से जितना हैंडसम लग रहा था, पास से देखने में और भी आकर्षक लग रहा था।

उसका गठीला बदन, गेरुआ रंग का सूट और चेहरे पर सीरियस भाव उसे एक गुस्सैल जवान आदमी जैसा बना रहे थे। जैसे ही वह लड़का सीढ़ियों से उतरकर लिविंग हॉल में आया,

उसने सामने की शाही आराम कुर्सी पर रानी साहबा को बैठा देखा। वह उनके करीब आते हुए बोला,

"गुड मॉर्निंग मां साहबा..!"

रानी साहबा ने उसे देखकर मुस्कुराते हुए कहा,

"आज ऑफिस जाने के लिए आप इतनी जल्दी तैयार हो गए? कोई महत्वपूर्ण मीटिंग है क्या आपकी, अभिमन्यु?"

सामने खड़े लड़के ने सिर हिलाते हुए कहा,

"जी मां साहबा, काफी महत्वपूर्ण काम है, इसलिए हम जल्दी निकल रहे हैं।"

रानी साहबा उठकर खड़ी हुईं और अभिमन्यु के पास आकर बोलीं,

"अभिमन्यु, हम बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि आपके बाबा साहब के जाने के बाद आप काफी परिपक्व और जिम्मेदार हो गए हैं। और आपके छब्बीसवें जन्मदिन से पहले हमें आपकी शादी करवानी होगी। आप बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि यह हमारे राजवंशी परिवार के लिए कितना महत्वपूर्ण है। इसीलिए हमने आपके जीवन का सबसे बड़ा फैसला ले लिया है। हमने आपके लिए एक लड़की चुन ली है। आप उसकी तस्वीर देखना चाहेंगे?"

अभिमन्यु ने सिर हिलाते हुए कहा,

"मां साहबा, अब हमारे पास और कोई विकल्प नहीं है, और हमें आपके किसी फैसले से कोई एतराज नहीं है। और वैसे भी, अगर आपने उन्हें हमारे जीवनसाथी के रूप में चुना है, तो वह अच्छी ही होंगी। हमें आपके फैसले पर पूरा विश्वास है और हमें किसी की तस्वीर नहीं देखनी है। हमें अभी ऑफिस के लिए निकलना है। बाकी बातें हम आपसे बाद में करेंगे। अभी हम चलते हैं।"

रानी साहबा ने अभिमन्यु को नहीं रोका और वह सीधे राजमहल से बाहर निकल गया।

तीन दिन बाद,

सूर्यवंशी परिवार की बड़ी-सी हवेली, जो बाहर से काफी पुरानी लग रही थी, अंदर से काफी आधुनिक थी। लिविंग एरिया में आधुनिक सोफा सेट, डाइनिंग टेबल; पूरा इंटीरियर स्काई ब्लू रंग के शेड में बना हुआ था। सब कुछ दिखने में बहुत खूबसूरत था।

रात के समय, डाइनिंग टेबल पर हेड चेयर पर एक 45 वर्षीय पुरुष और उनकी बगल वाली चेयर पर 42 वर्षीय महिला बैठी थी। उस अधेड़ उम्र के पुरुष ने कुर्ता-पजामा पहना हुआ था। उनके बगल में बैठी महिला ने शिफॉन की खुले पल्लू वाली साड़ी पहनी हुई थी। उन दोनों के सामने एक 25 वर्षीय नौजवान लड़का बैठा था, जिसने टी-शर्ट और जींस पहनी हुई थी।

सामने के कमरे से एक बहुत खूबसूरत लड़की निकली। उसके सीधे बाल घने थे और कमर तक आ रहे थे। उसकी आँखें हल्के भूरे रंग की थीं। उस लड़की ने गुलाबी रंग का प्यारा किटी प्रिंट वाला नाइट ड्रेस पहन रखा था।

वह मुस्कुराते हुए अपने कमरे से बाहर निकली और डाइनिंग टेबल पर रखे व्यंजनों को देखकर बोली,

"अरे वाह मम्मी! आज आपने सब कुछ मेरी पसंद का बनवाया है क्या?"

हेड चेयर पर बैठे अधेड़ उम्र के पुरुष ने मुस्कुराते हुए कहा,

"हाँ बेटा, आपकी माँ आपके इतने दिनों बाद घर आने से बहुत खुश हो गई है। आज का पूरा डिनर आपकी पसंद का ही है।"

उस लड़की ने अपनी माँ की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए कहा,

"थैंक यू सो मच मम्मी! आपको पता है हमने हॉस्टल में घर का खाना बहुत मिस किया।"

सामने बैठे लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा,

"इप्शिता! आपने सिर्फ घर के खाने को मिस किया, हमें नहीं?"

इस पर इप्शिता ने सिर हिलाते हुए कहा,

"नहीं उदय भाई! कैसी बात कर रहे हैं आप? हम तो आप सबको डेली मिस करते थे। इसीलिए तो मिड सेमेस्टर एग्जाम खत्म होते ही हम सीधे आपके पास आ गए हैं।"

हेड चेयर पर बैठे पुरुष ने सीरियस होते हुए कहा,

"चलिए, अच्छी बातें बाद में होती रहेंगी। पहले खाना शुरू करिए।"

पास में खड़े नौकरों ने सबकी प्लेट में खाना परोसना शुरू कर दिया।

इप्शिता खाना खा ही रही थी कि उसकी नज़र अपने माता-पिता पर गई और उसने उन दोनों की तरफ देखते हुए कहा,

"मम्मी-पापा, क्या बात है? आप लोग हमसे कुछ कहना चाहते हैं क्या?"

इप्शिता की माँ अपने पिता की तरफ देखने लगी और फिर इप्शिता के पिता ने कहा,

"हाँ बेटा, हमें आपसे बहुत महत्वपूर्ण बात करनी थी।"

इप्शिता ने सामान्य रूप से खाना खाते हुए कहा,

"हाँ पापा, बोलिए ना क्या बात है?"

क्रमशः

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