Our Arranged Love Ch. 2

Our Arranged Love - Chapter 2

Posted by Desire World • Jan 18, 2025 02:55 PM

उदय अपने माता-पिता की ओर हैरानी से देख रहा था। उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे मानो उसके माता-पिता जो बात बोलने वाले हैं, शायद वह बात उसे पता है, लेकिन उसने उन दोनों के बीच बोलना सही नहीं समझा और वह चुपचाप अपना खाना खा रहा था। तभी इप्शिता के पिता ने अपनी पत्नी की ओर देखते हुए कहा, "सुहासिनी जी! बताइए इप्शिता को?"

"बेटा," इप्शिता की माँ ने कहा, "हम आपसे यह बोल रहे थे कि अब आपकी पढ़ाई खत्म हो चुकी है और आप बहुत अच्छे समय पर घर भी वापस आए हैं। वास्तव में, आपके लिए बहुत अच्छा और खानदानी रिश्ता आया है। राजस्थान के सबसे बड़े राजवंशी परिवार के बेटे के लिए। राजवंशी परिवार की रानी साहबा ने आपको अपने महल की बहू बनाने के लिए चुना है।"

इप्शिता खाना खाते-खाते रुक गई। अपनी माँ के मुँह से शादी की बात सुनकर उसे इस वक्त ऐसी कोई खबर मिलने की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी।

इप्शिता के पिता ने अपनी पत्नी की ओर देखते हुए कहा, "सुहासिनी जी! बताइए इप्शिता को?"

"बेटा," इप्शिता की माँ ने कहा, "हम आपसे यह बोल रहे थे कि अब आपकी पढ़ाई खत्म हो चुकी है और आप बहुत अच्छे समय पर घर भी वापस आए हैं। वास्तव में, आपके लिए बहुत अच्छा और खानदानी रिश्ता आया है। राजस्थान के सबसे बड़े राजवंशी परिवार के बेटे के लिए। राजवंशी परिवार की रानी साहबा ने आपको अपनी बहू बनाने के लिए चुना है।"

इप्शिता खाना खाते-खाते रुक गई। अपनी माँ के मुँह से शादी की बात सुनकर उसे इस वक्त ऐसी कोई खबर मिलने की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी।

इप्शिता काफी सदमे में थी, इसलिए वह कुछ बोल ही नहीं पाई। लेकिन उसकी माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, "आपको पता है, जब आप पैदा हुई थीं, तब से ही हमें यह बात बहुत अच्छी तरह से पता थी कि आप बहुत किस्मत वाली हैं। और देखिए, आज यह बात साबित भी हो गई! हमने आपकी शादी उदयपुर के सबसे बड़े राजपरिवार में तय कर दी है। आप वहाँ बहुत खुश रहेंगी।"

"हाँ बेटा," इप्शिता के पिता ने हामी भरते हुए कहा, "आपकी माँ बिल्कुल ठीक कह रही हैं। हमने हमेशा आपकी खुशी चाही है और आप वहाँ जाकर बहुत खुश रहेंगी।"

इप्शिता ने अपने माता-पिता की ओर देखा। वह दोनों ही काफी ज्यादा खुश लग रहे थे। इप्शिता ने थोड़ा कन्फ़्यूज़ होते हुए कहा, "लेकिन मम्मी, शादी की इतनी भी जल्दी क्या है और...!"

इप्शिता बोल ही रही थी कि उसकी माँ ने उसकी बात बीच में ही काटते हुए कहा, "कोई जल्दी नहीं है, हम सारी चीज़ें बहुत आराम से करेंगे बेटा। आप बिल्कुल परेशान मत होइए। आपको पता है, कुंवर अभिमन्यु राजवंशी बहुत अच्छे इंसान हैं। सोचो, तुम्हें उनकी पत्नी बनने का सुख मिलने वाला है। हमें तो अभी से ही सारी बातें सोचकर बहुत खुशी हो रही है।"

"लेकिन मम्मी," इप्शिता ने थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा, "कौन हैं ये कुंवर अभिमन्यु राजवंशी? हम तो इन्हें जानते भी नहीं, तो फिर...!"

इप्शिता की माँ ने उसकी बात पूरी होने ही नहीं दी और मुस्कुराते हुए कहा, "जानती नहीं हो तो जान लेना। वैसे भी, कल शाम को आपकी कुंवर साहब के साथ मुलाकात है। शायद वे भी आपसे मिलना चाहते हैं, इसलिए आराम से मिलकर जान लीजिएगा आप दोनों एक-दूसरे को।"

"कल?" इप्शिता ने बिल्कुल शॉक्ड होते हुए कहा।

"हाँ," इप्शिता के पिता ने हाँ में अपना सिर हिलाते हुए कहा, "कल आपको कुंवर साहब से मिलना है। इसी बहाने आप दोनों एक-दूसरे को थोड़ा जान लेंगे।"

इप्शिता अपनी माँ और पिता को इतना खुश देखकर कुछ भी नहीं बोल पाई और उसने बस हाँ में अपना सिर हिला दिया। अब उसके गले से एक निवाला भी नीचे नहीं उतर रहा था।

उदय ने इप्शिता के चेहरे के भाव को नोटिस किया और उसने धीरे से हाँ में अपना सिर हिला दिया।

इप्शिता के माता-पिता वहीं डाइनिंग टेबल पर बैठकर इस बारे में ही काफी बातें कर रहे थे और इप्शिता चुपचाप उनकी बातें सुनती जा रही थी।

थोड़ी देर में इप्शिता डाइनिंग टेबल से उठकर जाने लगी। तभी उसकी माँ ने उसे रोकते हुए कहा, "कहाँ जा रही हैं आप? आपने मीठा तो खाया ही नहीं।"

"नहीं मम्मी," इप्शिता ने ना में अपना सिर हिलाते हुए कहा, "हमारा पेट भर गया है। हमें मीठा खाने का कोई मन नहीं है, इसलिए हम अपने कमरे में जा रहे हैं।"

इतना बोलकर इप्शिता सीधे अपने कमरे में चली गई। उदय ने जल्दी से अपना खाना खत्म किया और उसने अपने मन में कहा, "मैं समझ रहा हूँ, इशि को अपनी शादी की बात सुनकर जरा भी खुशी नहीं हो रही है। वह शादी का नाम सुनते ही कितनी अपसेट हो गई! क्या माँ-बाप को यह नहीं दिख रहा? मुझे इशि से बात करनी ही होगी।"

इतना बोलकर वह सीधे इप्शिता के कमरे में गया।

इप्शिता अपने कमरे की खिड़की के पास गुमसुम बैठी थी। उसने बाहर आसमान में निकले चाँद को देखा और एकटक उसे ही देखती रही।

उदय इप्शिता के कमरे में आया और इप्शिता के सामने खड़े होते हुए बोला, "इशि! आप इतनी आसानी से शादी के लिए कैसे मान गईं? क्या आप सच में इस शादी को लेकर खुश हैं?"

"उदय भाई," इप्शिता ने बेमन से मुस्कुराते हुए कहा, "क्या आपको ऐसा लगता है कि हमारे पास इस शादी को न करने का कोई विकल्प है? क्या आपको लगता है हम इस शादी के लिए मना कर सकते हैं?"

"इशि," उदय ने उसे समझाते हुए कहा, "मेरी बात ध्यान से सुनो। यह तुम्हारी शादी की बात हो रही है, एक-दो दिन नहीं, तुम्हारी पूरी ज़िंदगी का सवाल है। तुम ऐसे कैसे शादी के लिए हाँ कर सकती हो?"

"उदय भाई," इप्शिता ने उदय का हाथ पकड़ते हुए कहा, "मैं चाहकर भी शादी के लिए मना नहीं कर पाऊँगी, क्योंकि आपने नहीं देखा माँ-बाप शादी को लेकर कितने खुश हैं। उन्होंने बचपन से हमें एक आलीशान जीवन दिया है। हम कुछ भी सोचते थे, अगले दिन वह हमारे सामने आ जाता था। जब उन्होंने हमारी खुशियों के लिए इतने बड़े-बड़े त्याग किए हैं, तो क्या हम उनकी खुशी के लिए एक चीज़ नहीं कर सकते?"

"इशि," उदय ने ना में अपना सिर हिलाते हुए कहा, "आपके चेहरे के भाव हमें बता रहे हैं कि आप कुंवर साहब से शादी नहीं करना चाहतीं। हम आपको यही सलाह देंगे कि आपको जबरदस्ती माँ-बाप के किसी भी फैसले को अपने ऊपर थोपने नहीं देना है।"

"नहीं भाई," इप्शिता ने ना में अपना सिर हिलाते हुए कहा, "ऐसा मत बोलिए। माँ-बाप जो भी करेंगे, हमारी भलाई के लिए ही करेंगे।"

उदय ने एक गहरी साँस ली और ना में अपना सिर हिलाते हुए कहा, "हम कैसे समझाएँ इशि आपको।"

इप्शिता अब उदय से इस बारे में और कोई बात नहीं करना चाहती थी। वह पहले ही काफी ज्यादा परेशान हो गई थी। वह चुपचाप अपने बिस्तर पर गई और उसने कंबल से अपना मुँह ढक लिया।

उदय ने जब इप्शिता को इस तरह बिस्तर पर लेटे देखा, वह चुपचाप उसके कमरे से बाहर निकल गया।

इप्शिता के मन में काफी बातें चल रही थीं, लेकिन उसने अपने भाई से इस समय कोई भी बात शेयर करना ठीक नहीं समझा।

"यह तो बिल्कुल भी नहीं सोचा था हमने। अगर माँ-बाप इतनी जल्दी हमारी शादी कर देंगे, तो हमारे अपने सपनों का क्या होगा? राजघराने में तो और जाने कितने प्रतिबंध होते होंगे, हमारे घर से भी ज़्यादा! वहाँ की बहू बन गई, एक बार तो शायद घर से बाहर निकलने को भी ना मिले।" - इप्शिता अपने भविष्य के बारे में सोचते-सोचते सो गई।

अगले दिन सुबह इप्शिता का फ़ोन बजा और फ़ोन की रिंगटोन सुनकर ही उसकी नींद खुली। इप्शिता ने कॉल रिसीव करते हुए कहा, "हेलो नंदिनी, इतनी सुबह-सुबह हमें फ़ोन क्यों किया?"

"सुबह-सुबह तुम्हें सुबह की हुई है!" नंदिनी ने कहा, "और मैं तो कल रात से तुमसे बात करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन तुमने मेरे किसी भी मैसेज का जवाब नहीं दिया। आपने माँ-बाप के घर पहुँचते ही अपनी बेस्ट फ्रेंड को भूल गईं। हाउ सेल्फिश यू आर!"

इप्शिता आँख मलते हुए उठकर बैठी और उसने बिस्तर का सहारा लेते हुए कहा, "कैसी बात कर रही हो? हम भला तुम्हें कैसे भूल सकते हैं?"

नंदिनी ने इप्शिता की आवाज़ सुनकर कहा, "क्या बात है? तुम बहुत अजीब लग रही हो। सब ठीक तो है ना?"

"क्या बताएँ तुम्हें नंदिनी?" इप्शिता ने धीमी आवाज़ में कहा, "यहाँ पहुँचते ही माँ-बाप ने तो हमारे लिए एक अलग ही सरप्राइज़ गिफ्ट रेडी करके रखा था। हमें किसी भयानक झटके की तरह लगा है।"

"क्या मतलब है? तुम्हारी कोई समस्या हुई है क्या?" नंदिनी शॉक्ड होते हुए बोली।

"अब पता नहीं इसे समस्या कहेंगे या नहीं," इप्शिता ने अपना सिर हिलाते हुए कहा, "लेकिन माँ-बाप ने कल रात डिनर के समय हमें बताया कि उन्होंने हमारी शादी राजस्थान के सबसे बड़े राजघराने में तय कर दी है।"

जैसे ही नंदिनी ने यह बात सुनी, वह शॉक्ड होते हुए बोली, "क्या? शादी? लेकिन यार, तेरे माँ-बाप इतनी जल्दी ऐसी कैसे शादी तय कर सकते हैं? तूने क्या बोला उन्हें? तू साफ़-साफ़ शादी के लिए मना कर देती ना?"

क्रमशः

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