Our Arranged Love Ch. 3

Our Arranged Love - Chapter 3

Posted by Desire World • Jan 18, 2025 03:00 PM

जैसे ही नंदिनी ने इप्शिता की शादी तय होने की बात सुनी, वह स्तब्ध होकर बोली, "क्या? क्या कहा तूने? शादी? लेकिन यार, तेरे मम्मी-पापा इतनी जल्दी ऐसी कैसे शादी तय कर सकते हैं? तूने क्या बोला उन्हें? साफ-साफ शादी के लिए मना कर देती ना?"

इप्शिता ने एक ठंडी साँस भरते हुए कहा, "क्या कह रही हो तुम? हम भला मम्मी-पापा की बात को मना करेंगे? तुम जानती हो ना हम अपने मम्मी-पापा का दिल नहीं दुखा सकते। हमारे पास शादी न करने का या फिर मना करने का कोई विकल्प ही नहीं है।"

नंदिनी ने हड़बड़ाते हुए कहा, "What do you mean तुम्हारे पास विकल्प नहीं है? तुम ऐसे कैसे किसी से भी शादी करने के लिए तैयार हो सकती हो?"

इप्शिता ने धीमी आवाज में कहा, "आज नहीं तो कल, और किसी न किसी से तो शादी होनी ही है। इसलिए अपने मम्मी-पापा के खातिर हम यह शादी कर लेंगे।"

नंदिनी ने ना में अपना सिर हिलाते हुए कहा, "पागल हो गई हो तुम! और तुमने मेरे साथ मिलकर अपने भविष्य की जो योजना बनाई है उसका क्या? और सबसे बड़ी बात इप्शिता, तुम्हारा सपना? तुम ऐसे कैसे अपना इतना बड़ा सपना छोड़ सकती हो?"

इप्शिता नंदिनी की बात सुनकर कुछ नहीं बोली, बस उसने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं।

फोन की दूसरी तरफ से आवाज आई, "मतलब तुम अपने मम्मी-पापा के खातिर अपने सपनों का गला घोंट दोगी?"

इप्शिता ने कहा, "नंदिनी! तुम नहीं जानती, एक शाही परिवार में होना इतना आसान नहीं होता है। तुम्हें अपने साथ-साथ अपनी फैमिली और अपने पूरे राजपरिवार को ध्यान में रखना होता है। और हम शायद कुछ दिनों के लिए यह बात भूल गए थे कि हम एक राजघराने की बेटियाँ हैं।"

नंदिनी ने ना में अपना सिर हिलाते हुए कहा, "मतलब तूने अपने सारे सपनों की कुर्बानी देने का फैसला कर लिया है? That's not right यार! मैं तो अभी भी तुझे यही सुझाव दूँगी कि तुम अपने मम्मी-पापा से बात कर लो और अभी फिलहाल के लिए शादी से मना कर दो।"

इप्शिता ने निराश होते हुए कहा, "एक ही बात को बार-बार बोलना बंद करो, नंदिनी! हम ऐसा नहीं कर सकते। तुम नहीं जानती मेरे मम्मी-पापा ने हमारे लिए क्या-क्या नहीं किया है? बचपन से लेकर आज तक उन्होंने हमें एक असली राजकुमारी की तरह रखा है और हमें इतनी आलीशान ज़िन्दगी दी है। हमारे मुँह से कोई बात निकल नहीं पाती थी और हमारी सारी चीज़ें, सारी ज़रूरतें एक सेकंड में पूरी हो जाती थीं। उन्होंने आज तक कभी भी हमें किसी चीज़ की कमी नहीं होने दी। यहाँ तक कि उन्होंने हमें उदयपुर से बाहर दूसरे शहर पढ़ने के लिए भी भेजा, जबकि यहाँ की लड़कियों को घर से इतनी दूर जाकर रहने की इजाज़त नहीं होती। लेकिन हमारे मम्मी-पापा ने हमारी यह ज़िद भी पूरी की। अब तुम ही समझ जाओ कि वे दोनों हमें कितना प्यार करते हैं, यह सिर्फ़ हम ही जानते हैं और हम उनके खिलाफ़ नहीं जा सकते।"

नंदिनी ने उसे समझाते हुए कहा, "अरे तो मैं भी तुम्हें कहाँ उनके खिलाफ़ जाने के लिए बोल रही हूँ? मैं तो बस तुम्हें अपनी बात रखने के लिए...."

नंदिनी बोल ही रही थी कि इप्शिता ने उसे चुप कराते हुए कहा, "रहने दो नंदिनी! हमें इस बारे में कोई बात नहीं करनी। हम तुमसे बाद में बात करेंगे। अभी हम सो कर उठे हैं और हमें बिल्कुल भी अच्छा महसूस नहीं हो रहा। हम फ्रेश होने जा रहे हैं, बाय।"

इतना बोलकर इप्शिता ने कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया और सीधे बाथरूम की तरफ चली गई।

वहीं नीचे, नाश्ते की मेज़ पर मिस्टर और मिसेज़ सूर्यवंशी आपस में बातें कर रहे थे। इप्शिता के पिता ने कहा, "सुहासिनी जी! आपकी रानी सा से बात हो गई ना?"

इप्शिता की माँ ने हाँ में अपना सिर हिलाते हुए कहा, "जी हाँ, हमने उनसे बात कर ली है और उन्होंने शाम को इप्शिता और कुंवर सा की मुलाकात तय कर दी है। वह भी अपने ही होटल में। और मैंने तो उनसे साफ-साफ कह दिया कि हम अपनी इप्शिता को अकेले नहीं भेजेंगे। इप्शिता के साथ उसका बॉडीगार्ड संजय ज़रूर जाएगा। और उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात से कोई दिक्कत नहीं है। वे तो बस चाहती हैं कि बच्चे एक-दूसरे के साथ आराम से बात कर सकें और एक-दूसरे को थोड़ा जान सकें।"

इप्शिता के पिता ने मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ, चलो अच्छी बात है। जितनी जल्दी वे दोनों एक-दूसरे को समझ लेंगे, तो आगे सब उतना ही अच्छी तरह से होगा।"

इप्शिता अपने कमरे से बाहर निकल आई थी और उसने जैसे ही अपने माँ-बाप को यह सारी बातें करते हुए सुना, वह वहीं सीढ़ियों के पास ही रुक गई। तभी सुहासिनी जी ने इप्शिता की तरफ देखकर कहा, "अरे इप्शिता बेटा, इधर आइए। आप वहाँ क्यों खड़ी हैं? आइए हमारे साथ नाश्ता करिए।"

इप्शिता थोड़ा असहज महसूस कर रही थी, लेकिन तभी उसने हाँ में अपना सिर हिलाया और वह चुपचाप डाइनिंग टेबल के पास आई और कुर्सी खिसकाकर वहाँ बैठ गई। उसने भी माँ से मुस्कुराते हुए कहा, "मम्मी, भैया कहाँ है?"

इप्शिता के पिता ने सुहासिनी जी के जवाब देने से पहले ही कहा, "उदय ऑफिस चला गया है। आज हमारी एक बहुत महत्वपूर्ण मीटिंग थी, लेकिन हमें उठने में थोड़ी देर हो गई, इसलिए हमने उदय को जल्दी ऑफिस भेज दिया। बस हम भी निकलने ही वाले हैं। आप अपनी मम्मी के साथ बैठकर बातें करिए।"

इतना बोलकर इप्शिता के पिता भी ऑफिस के लिए निकल गए। इप्शिता धीरे-धीरे नाश्ता कर रही थी और तभी सुहासिनी जी ने कहा, "बेटा, हमें आपसे यह बात स्पष्ट करनी थी।"

इप्शिता अपनी माँ की बात सुनकर कहते-कहते रुक गई और उसने धीमी आवाज में कहा, "जी मम्मी, बोलिए क्या बात करनी है आपको हमसे?"

इप्शिता की माँ ने उठकर उसके बगल में आकर बैठते हुए कहा, "इप्शिता, आप हमारे इस फैसले से खुश तो हैं ना?"

इप्शिता को समझ नहीं आया, वह सच बोले या फिर झूठ? यह सोचकर उसने अपनी माँ के उम्मीद भरे चेहरे की तरफ देखा।

जिसे देखकर इप्शिता ने बस धीरे से हाँ में अपना सिर हिला दिया। तभी इप्शिता की माँ काफी ज़्यादा खुश हुई और उन्होंने उसे बगल से गले लगाते हुए कहा, "हमें आपसे यही उम्मीद थी। हम जानते थे कि हमारी बेटी को हमारे फैसले से कभी ऐतराज़ हो ही नहीं सकता। अब आप जल्दी से नाश्ता करके तैयार हो जाइए, आपको कुंवर सा से मिलने जाना है।"

इप्शिता ने जैसे ही यह बात सुनी, उसे खांसी आने लगी और उसने अपने मुँह पर हाथ रखते हुए कहा, "क्या! क्या बोल रही हैं आप मम्मी? आज?"

सुहासिनी जी ने हाँ में अपना सिर हिलाते हुए कहा, "हाँ, आज ही तुम्हें लंच पर कुंवर अभिमन्यु राजवंशी से मिलना है। इसलिए जल्दी से नाश्ता करो और अपने कमरे में जाकर तैयार हो जाओ।"

इप्शिता अपनी माँ की बात सुनकर सोच में डूब गई और उसे उसके चेहरे को देखकर ही लग रहा था कि जैसे वह कुछ सोच रही है।

इप्शिता की माँ ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, "क्या सोच रही हैं आप बेटा?"

इप्शिता ने ना में अपना सिर हिलाया और वह चुपचाप नाश्ता करने लगी। और तभी सुहासिनी जी ने कहा, "और हाँ, आप सूर्यवंशी परिवार की इकलौती बेटी हैं, इसलिए सबसे बेहतरीन ड्रेस पहनकर कुंवर सा से मिलने जाइएगा।"

इप्शिता ने अपने कपड़ों की तरफ़ देखा। इस समय उसने साधारण जींस और टॉप पहना हुआ था।

इप्शिता ने असमंजस में कहा, "लेकिन मम्मी, हमारे इन कपड़ों में क्या बुराई है?"

सुहासिनी जी ने अपने सिर पर हाथ रखते हुए कहा, "हे भगवान! आप समझ क्यों नहीं रही हैं कि आप एक राजघराने की बेटी हैं और राजघराने की लड़कियाँ ऐसे कपड़े पहनकर अपने होने वाले पति के सामने नहीं जाती हैं।"

इप्शिता ने जैसे ही यह बात सुनी, उसने अपने हाथों की कसकर मुट्ठी बांध ली और चुपचाप नाश्ता करने लगी। और तभी सुहासिनी जी उठकर खड़ी हुईं और उन्होंने अपनी साड़ी के पल्लू को बड़े ही स्टाइल के साथ अपने हाथ में पकड़ा और वहाँ से वे सीधे अपने कमरे में चली गईं।

बार-बार राजघराने और कुंवर की बात सुनकर इप्शिता अब तक काफी चिढ़ चुकी थी। इसलिए अपनी माँ के वहाँ से जाते ही इप्शिता ने खुद से बात करते हुए चिढ़कर कहा, "पता नहीं कौन है यह कुंवर सा अभिमन्यु राजवंशी? हमने तो इनका नाम भी नहीं सुना है, पता नहीं हम उनसे मिलकर क्या बात करेंगे?"

इप्शिता नाश्ता करने के बाद सीधे अपने कमरे में गई और अपने बड़े से अलमारी को खोलकर खड़ी हो गई। उसने अपनी सारी जींस, टॉप और वन-पीस ड्रेस को देखते हुए कहा, "अब हम इनमें से ऐसा क्या पहनें जो हमें शाही रूप दे? मम्मी भी ना, हमें छोटी-छोटी सी बातों पर टेंशन दे देती हैं।"

इप्शिता ने एक गुलाबी रंग की वन-पीस लॉन्ग फ्रॉक ड्रेस निकाली और उसे पहनकर कमरे में आई और बड़े से आईने के सामने खड़े होते हुए बोली, "आई होप! यह ड्रेस मम्मी को मेरे ऊपर ठीक लगे।"

इप्शिता इतना ही बोली थी कि तभी उसके पीछे से आवाज आई, "नहीं, बिल्कुल भी नहीं। हम आपको यह ड्रेस पहनकर कुंवर सा के सामने कभी नहीं जाने देंगे। बदल लीजिए इसे बेटा।"

इप्शिता ने जैसे ही अपनी माँ की आवाज सुनी, वह पीछे घूमकर अपनी ड्रेस की तरफ देखते हुए बोली, "लेकिन क्यों मम्मी? हमारे इस ड्रेस में क्या बुराई है?"

इप्शिता की माँ के पीछे एक नौकर खड़ा था, जो उनके पीछे-पीछे चलकर इप्शिता के कमरे के अंदर आया। इप्शिता ने उस नौकर के हाथ में तीन-चार शॉपिंग बैग देखे। सुहासिनी जी ने उस नौकर की तरफ देखकर उन बैग्स को इप्शिता के सामने रखने का इशारा किया और वह नौकर अपना सिर झुकाकर वहाँ से चला गया।

क्रमशः...

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