My Dream Love Ch. 1

My Dream Love - Chapter 1

Posted by Any Ansari • Jan 18, 2025 06:02 PM

"रुको… सुनो, मैं तुमसे बात करना चाहता हूँ। रुको भी… तुम मुझसे बात क्यों नहीं करती हो?"

आसमानी रंग के कपड़ों में एक लंबा-चौड़ा, गेहूंए रंग का, अच्छी पर्सनालिटी वाला लड़का, सुनहरे रंग के चमकदार कपड़े पहने एक सुंदर लड़की का पीछा कर रहा था। लड़की के काले, घने, लंबे बाल हवा में लहरा रहे थे। वह आगे की तरफ हँसते-मुस्कुराते हुए भाग रही थी।

वह एक बड़ी ही सुंदर जगह थी। वहाँ हरे-भरे छोटे-बड़े, हर तरह के पौधे थे। चारों तरफ हल्की धुंध थी। ठंडी हवाओं के साथ कई सारे खरगोश और गिलहरी इधर-उधर भाग रहे थे। वह जगह ऐसी लग रही थी मानो वह धरती नहीं, कोई अलग ही दुनिया है।

वह लड़का उस खूबसूरत लड़की का पीछा करता जा रहा था, और लड़की अदाओं के साथ उससे दूर भाग रही थी। लड़का उसे पुकार रहा था। तभी दौड़ते-दौड़ते वह हांफने लगा और घुटनों पर हाथ रखते हुए कहा,

"ठहर जाओ, मैं थक गया। अब और नहीं भाग सकता।"

उस खूबसूरत लड़की ने अपना सिर घुमाया। उसके लहराते बाल उसके मुँह पर आ गए। उसने अपने बालों को कान के पीछे किया और लड़के की तरफ देखकर मुस्कुराई।

उस लड़की की नीली, बड़ी-बड़ी आँखें, पतली-तीखी नाक, गोरा रंग और गुलाबी होंठों पर बड़ी सी मुस्कराहट थी। वह लड़की इतनी खूबसूरत थी मानो नूर उसके चेहरे से टपक रहा हो। आँखों में मासूमियत और चेहरे पर मुस्कराहट उसकी खूबसूरती को और भी बढ़ा रही थी।

उस लड़की को देखते ही लड़का दोबारा आगे बढ़ा। उसने उसे पकड़ने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया।

जैसे ही लड़के का हाथ लड़की के हाथ पर छुआ, वह लड़की वहाँ से गायब हो गई।

लड़के की आँखों के सामने धुआँ ही धुआँ हो गया। अचानक उसकी आँख खुली और वह बेड पर चिल्लाते हुए उठकर बैठ गया।

"नहीं…!"

उसने अपने गाल को थपथपाया। उसका पूरा चेहरा पसीने से भरा हुआ था। उसने अपने सीने पर हाथ रखते हुए कहा,

"ओ गॉड! फिर से वही सपना! आखिर क्यों आता है मुझे बार-बार इस लड़की का सपना? कौन है यह लड़की? आखिर क्या मतलब है मेरे इस सपने का? इस तरह से बार-बार एक ही चीज को देखना, उस लड़की का बार-बार मेरे सपने में आना और मेरा उसके करीब जाते ही उसका यूँ गायब होना… आखिर इसका मतलब क्या है? आखिर कौन है यह लड़की?"

वह लड़का अपने सिर पर हाथ रखकर यह बात सोच ही रहा था कि तभी उसके बड़े किंग साइज़ रूम का दरवाज़ा खुला। उसने दरवाज़े की ओर देखा। एक अधेड़ उम्र की औरत अंदर आकर उसके पास बैठ गई और बोली,

"गुड मॉर्निंग बेटा!"

लड़के ने सामने बैठी औरत की ओर देखते हुए कहा,

"गुड मॉर्निंग मम्मा।"

उस लड़के की माँ ने कहा,

"मैं तुम्हें उठाने ही आ रही थी, लेकिन तुम तो पहले से ही उठ गए हो। चलो, रेडी होकर नीचे आओ। हम साथ में ब्रेकफास्ट करते हैं और कुछ बात भी करनी है।"

उसने हाँ में अपना सिर हिलाया और अधेड़ उम्र की औरत वहाँ से चली गई।

वह लड़का उठा और कुछ देर तक अपने सपने के बारे में सोचता रहा। काफी देर बाद रेडी होकर वह नीचे गया। उसे नीचे उतरते देख डाइनिंग टेबल पर बैठी एक लड़की ने मुस्कुराते हुए कहा,

"गुड मॉर्निंग शशांक भैया।"

लड़के ने सिर्फ़ हाँ में अपना सिर हिलाया और चुपचाप उसके बगल वाली कुर्सी में आकर बैठ गया। सामने की चेयर पर एक 45 साल का आदमी बैठा था और वह अपना ब्रेकफास्ट करने में बिजी था।

उसने लड़के की तरफ़ देखते हुए कहा,

"शशांक, तुम्हारी मॉडलिंग एजेंसी कैसी चल रही है? मैंने सुना है कि तुमने अपनी मॉडलिंग एजेंसी के लिए कुछ नए मॉडल को हायर करने के लिए एडवर्टाइज़मेंट दी थी?"

लड़के ने हाँ में अपना सिर हिलाते हुए कहा,

"यस डैड, एवरीथिंग इज़ फाइन। डोंट वरी, आई कैन हैंडल दिस।"

आदमी ने हाँ में अपना सिर हिलाया और सब एक साथ ब्रेकफास्ट करने लगे। तभी शशांक के सामने बैठी औरत ने उस आदमी से कहा,

"सुनिए जी, शशांक की बुआ शशांक के लिए कोई रिश्ता बता रही है…!"

शशांक ने जैसे ही अपनी माँ की यह बात सुनी, उसने उनकी तरफ़ देखते हुए कहा,

"क्या मम्मा, फिर से वही सारी बातें?"

शशांक की माँ ने उसे आँख दिखाते हुए कहा,

"मैं तुम्हारे डैड से बात कर रही हूँ शशांक!"

शशांक अपनी माँ की तरफ़ देख रहा था और वह कुछ बोलने ही जा रहा था कि तभी उसकी बहन ने उसका हाथ पकड़कर उसे चुप रहने का इशारा किया। वह कुछ देर के लिए चुप हुआ और अपने डैड की तरफ़ देखने लगा।

शशांक के डैड ने अपनी पत्नी की तरफ़ देखते हुए कहा,

"मालती जी, यह आप और सुधा के बीच की बात है। और वैसे भी हमें इस बात में शामिल ना करें तो ज़्यादा अच्छा होगा। जब तक आप लोगों को लड़की ढूँढनी है तो ढूँढिए। जब कोई लड़की पसंद आ जाए तब मुझे बताइएगा। अभी वैसे भी…"

शशांक के माँ-बाप आपस में बात ही रहे थे कि शशांक अब और उनकी बात नहीं सुन सकता था। उसने तेज़ी से अपना हाथ टेबल पर पटकते हुए कहा,

"बस! बहुत हुआ! मेरी शादी की बात हो रही है और कोई मेरी बात सुन ही नहीं रहा। मम्मा, मैं आपसे कितनी बार बोल चुका हूँ, मुझे अभी शादी नहीं करनी। और इस तरह से अगर आप रिश्‍तेदारों के कहने पर मेरे लिए लड़की ढूँढ रही हैं तो मैं आपसे साफ़-साफ़ बता दे रहा हूँ, मैं अभी शादी नहीं करूँगा। आप लोगों को जितनी लड़कियाँ देखनी हैं देख लीजिए।"

शशांक को इस तरह से गुस्से में चिल्लाते देखकर उसके डैड ने उसे घूरते हुए कहा,

"शशांक! बिहेव योरसेल्फ़! अपनी माँ से कोई ऐसी बात करता है? और मैंने तुमसे कितनी बार कहा है, अपने गुस्से को कंट्रोल किया करो! क्या तुम्हें मेरी बात समझ में नहीं आती?"

शशांक ने अपने डैड की तरफ़ देखा और अपने खाने की प्लेट टेबल पर छोड़ते हुए विला से बाहर निकल आया। उसने अपनी कार स्टार्ट की और वहाँ से चला गया।

वहीं दूसरी तरफ़,

चारों तरफ़ बादलों के धुएँ के बीच, एक रोशनी से भरा हुआ, चमकता सुनहरे रंग का बहुत बड़ा महल गिरा हुआ था। वह किसी भी ज़मीन पर नहीं था, वह आसमान की परतों के बीच, बादलों की दुनिया में, हवा में तैरता हुआ खूबसूरत महल था। यह परिस्तान के एकदम बीचोबीच बना हुआ था। परिस्तान में एक परियों की छोटी सी दुनिया बसी हुई थी। हर तरफ़ उजाला ही उजाला, हर तरफ़ एक अलग ही चमक नज़र आती थी। वहाँ रंग-बिरंगे फूलों का एक बड़ा सा बगीचा था।

उस बगीचे के आसपास कई सारी खूबसूरत परियाँ घूम रही थीं। कुछ दूर पर एक सुनहरे रंग का बड़ा सा दरवाज़ा था, और उस दरवाज़े के पीछे एक बड़ा सा सफ़ेद और सुनहरे रंग का महल था।

उस महल के पीछे वाले खुले हिस्से में एक बड़ा सा सुनहरा सिंहासन ऊँची जगह पर रखा हुआ था। उसके दोनों तरफ़ चाँदी की तरह चमकते हुए बहुत सारे छोटे-छोटे सिंहासन रखे हुए थे। लेकिन इस वक़्त वह सारे के सारे सिंहासन एकदम खाली थे। वहाँ ज़मीन पर बहुत सारी परियाँ, जिन्होंने अलग-अलग रंग के कपड़े पहने हुए थे, एक साथ एक-दूसरे का हाथ पकड़कर खड़ी हुई थीं। जैसे कि एक घेरा बनाकर खड़ी हों। उनके बीच में सुनहरे रंग के कपड़ों में, नीली आँखों वाली एक खूबसूरत लड़की बैठी हुई थी। वह भी एक परी थी, लेकिन उसके चेहरे की उदासी यह साफ़ जाहिर कर रही थी कि उन परियों के परिस्तान में कुछ ऐसा हुआ है जिस वजह से उसके चेहरे की मुस्कराहट गायब है और वह इतनी उदास है।

उसके आसपास खड़ी सारी परियाँ आपस में कुछ कुसुफ़-फ़ुसफ़ कर रही थीं। लेकिन उस लड़की की आँखों में आँसू थे। वह उनकी बातें सुन रही थी, लेकिन फिर भी कुछ नहीं बोल रही थी।

तभी उसकी आँखों से सुनहरे मोती जैसे आँसू टपके। जैसे ही वे आँसू वहाँ की ज़मीन पर गिरे, वहाँ पर एक छोटा सा पीला फूल निकल आया।

उस परी की आँखों से निकलने वाले आँसू का परिस्तान की उस ज़मीन पर गिरना और आँसू के गिरते ही वहाँ एक पीले रंग के फूल का निकलना इस बात की गवाही दे रहा था कि उस खूबसूरत और नेकदिल परी का दिल कितना दुखी है।

उस सुनहरे कपड़ों वाली परी को देखकर पीछे से एक दूसरी, गुलाबी रंग के कपड़े पहने हुई, उसी की तरह दिखने वाली खूबसूरत परी ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा,

"परीशा! यहाँ पर और कितने दिन तक इसी तरह से बैठकर रोती रहोगी? तुम्हारी बहन अब वापस नहीं आने वाली। सात दिन हो गए हैं और सात दिनों में तुमने यहाँ पर इन पीले फूलों का पूरा बगीचा तैयार कर दिया है। अब रोना बंद भी करो।"

उसी के पीछे हल्के हरे रंग के कपड़ों वाली दूसरी परी, जिसके हाथ में छोटी सी छड़ी थी और उसके सिर पर सुनहरे रंग का छोटा सा ताज भी था, आगे आते हुए बोली,

"हम सबको भी अरीशा परी के जाने का दुःख है। लेकिन तुम्हारा इस तरह से पिछले सात दिनों से यहाँ पर इस तरह से बैठे रहना, यह सही नहीं है।"

जैसे ही परीशा ने उस दूसरी परी की तरफ़ अपनी नज़रें उठाकर देखी, उसने बिलकुल धीमी आवाज़ में कहा,

"वाणी! तुम यहाँ पर क्यों आई हो? मुझे अकेला छोड़ दो। मेरी बहन को कुछ नहीं हो सकता। वह ज़रूर वापस आएगी। और अगर वह नहीं आती तो जब तक रानी परी मुझसे मिलने नहीं आएगी, मैं यहाँ से कहीं नहीं जाऊँगी।"

गुलाबी कपड़ों वाली परी ने फिर से उस सुनहरे कपड़ों वाली परी के सिर पर हाथ फेरते हुए उसे समझाया,

"सब कुछ अच्छे से जानते हुए भी तुम इस तरह बेवजह की ज़िद कैसे कर सकती हो परीशा! तुम्हें पता है रानी माँ अभी अपनी शक्तियाँ अर्जित करने दस दिनों के लिए ध्यान में गई हुई हैं और अभी भी तीन दिन से पहले वह यहाँ पर नहीं आएंगी। क्या तब तक तुम यहाँ पर ही बैठी रहोगी?"

परीशा ने नज़र उठाकर उसकी तरफ़ देखते हुए कहा,

"दस दिन नहीं, मैं दस साल भी यही बैठी रहूँगी। लेकिन मैं रानी माँ से मिले बिना यहाँ से कहीं भी नहीं जाऊँगी। क्योंकि मुझे अनुमति चाहिए अपनी बहन को ढूँढने जाने के लिए… मुझे पता है मेरी बहन को कुछ नहीं हुआ होगा। वह बस कहीं भटक गई होगी या फिर कहीं फँस गई होगी। धरती पर वैसे भी इतने बुरे लोग रहते हैं, इसीलिए तो रानी माँ हमें वहाँ जाने नहीं देती!"

"हाँ, लेकिन फिर भी तुम्हारी बहन वहाँ पर गई, वह भी अपनी मर्ज़ी से बिना किसी को बताए। इसलिए उसके साथ यह सब हुआ। और तुम मानो या ना मानो, लेकिन सच यही है कि तुम्हारी बहन मर चुकी है। ध्यान से देख लो, उसकी मणि पूरी काली पड़ चुकी है। और तुम्हें भी अच्छी तरह से पता है ऐसा कब होता है?"

उस परी की बात सुनकर परीशा, जो ज़मीन पर हाथ टिकाकर एकदम बेहाल होकर रोती हुई वहाँ पर बैठी थी, अब उसके चेहरे के भाव एकदम ही बदल गए। उसकी नीली आँखों में एक गहरा रंग किनारे से बदलता हुआ नज़र आने लगा। उसने एकदम गुस्से से घूरकर उस दूसरी परी की तरफ़ देखा और तेज आवाज़ में कहा,

"तेजस्वी परी! चुप हो जाओ! तुम्हें कोई हक़ नहीं है मेरी बहन के बारे में कुछ भी बोलने का! और परी की शक्तियाँ कमज़ोर पड़ जाने पर, या जब उसमें शक्तियाँ नहीं रह जाती, तब भी ऐसा ही होता है। और हम परियाँ इतनी आसानी से नहीं मरतीं। यह बात तुम्हें भी पता है। और शायद इसीलिए तुम अभी तक मेरे सामने ज़िंदा खड़ी हो।"

परीशा ने एकदम गुस्से में उसे धमकी देते हुए यह बात कही तो तेजस्वी परी थोड़ा सा घबरा गई और अपनी जगह से दो कदम पीछे हो गई, क्योंकि उसे पता था कि परीशा उससे कहीं ज़्यादा शक्तिशाली है।

To be continued

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