My Dream Love - Chapter 3
part 3
दूसरी तरफ, धरती पर, अपने घरवालों से परेशान होकर शशांक आज ऑफिस के अपने समय से पहले ही घर से निकल गया था। घर में रहकर वह अपना मूड और भी ज़्यादा खराब नहीं करना चाहता था। लेकिन आज सोमवार था और सुबह के 10:00 बज रहे थे। सड़क पर बहुत ज़्यादा ट्रैफिक था, और उस पूरी सड़क पर कार ही कार दिख रही थीं।
रेड सिग्नल आते ही सारी कारें रुक गईं। वहाँ पर आ रही हॉर्न की आवाज़ से शशांक काफी ज़्यादा इरिटेट हो गया और अपने आगे वाली कार को आगे बढ़ने के लिए लगातार हॉर्न बजाता रहा। और तभी रेड लाइट येलो और उसके बाद तुरंत ही ग्रीन हो गई। लेकिन आगे की कार काफी धीमी स्पीड से बढ़ रही थी, तो शशांक का इरिटेशन और भी ज़्यादा बढ़ रहा था। उसने साइड से अपनी कार निकालते हुए एकदम से कार को आगे बढ़ाया। उसका मूड पहले ही खराब था, घरवालों और फिर ट्रैफिक की वजह से। इसलिए वह जल्दी से वहाँ से निकलना चाहता था और दोबारा से सिग्नल रेड होने से पहले वहाँ से निकलना चाहता था। और दोबारा ट्रैफिक में नहीं फंसना चाहता था। इस बीच उसने कार की स्पीड काफी तेज कर दी। सामने से सड़क पार हो रही लड़की को वह देख नहीं पाया और एकदम ही वह लड़की वहाँ सड़क पर उसके सामने आ गई। शशांक ने जल्दी से अपनी कार के ब्रेक लगाए।
लेकिन स्पीड काफी ज़्यादा तेज थी, तो कार एकदम आगे आकर उस लड़की के नज़दीक रुकी और वह लड़की एक झटके से जमीन पर गिर गई। शशांक को समझ नहीं आया कि कार की उस लड़की से टक्कर हुई या फिर सदमे की वजह से वह लड़की सड़क पर गिर गई, लेकिन शशांक को काफी गिल्ट हुआ। उसने अपना सिर पीटते हुए कहा,
"ohh shit.. ये क्या कर दिया मैंने? अपनी बाकी चीज़ों की एरिटेशन इस तरह से कार ड्राइविंग पर निकाल दी और सामने से आ रही इस बेचारी सी लड़की को हिट कर दिया।"
जिस लड़की का बस अभी एक्सीडेंट होते-होते बचा था, और उस लड़की की तो इन सब में कोई भी गलती नहीं थी। इसलिए शशांक तुरंत ही अपनी कार से बाहर निकला और बोला,
"मिस आप ठीक तो हैं ना? आपको कहीं चोट तो नहीं लगी?"
कार से बाहर उतर कर शशांक उसके पास आया। उसने भी सड़क के किनारे ही अपनी कार रोक दी थी। उस लड़की का एक्सीडेंट हो गया था। उसके आसपास के लोग भी रुक गए थे, लेकिन उस लड़की को कार से कुछ भी चोट नहीं आई थी। लेकिन जमीन पर गिरने की वजह से उसके कपड़ों पर थोड़ी मिट्टी लग गई थी। जिसे झाड़ते हुए वह उठ कर खड़ी हुई और उस लड़के ने जैसे ही उस लड़की के चेहरे की तरफ देखा,
वो एकटक ही उसकी तरफ देखता रह गया।
उस लड़की के पास एक बड़ा सा बैग था। वह भी जमीन पर गिर गया था। उसमें से कुछ सामान भी निकल गया था। वह लड़की झुक कर अपना सारा सामान वापिस से बैग में रखने लगी। उसने अब तक एक शब्द भी नहीं बोला था, जबकि शशांक की तो बोलती उसका चेहरा देखकर ही बंद हो गई थी। उसने एकदम से कहा,
"नहीं, यह नहीं हो सकता। मैं फिर से सपना ही देख रहा हूँ शायद!"
शशांक वहाँ सड़क के बीचो-बीच खड़ा था, अपने सामने खड़ी उस लड़की को देख रहा था, जो कि खोई-खोई सी लग रही थी। और अजीब तरह से चारों तरफ देख रही थी।
उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे कि वह एकदम अचानक से ही यहाँ पर सड़क के बीच आ गई हो और उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा हो। अपने आसपास से निकलती हुई गाड़ियों की स्पीड और हॉर्न की आवाज़ और बाकी के शोर-शराबे से वह काफी घबराई हुई सी लग रही थी और बार-बार इधर-उधर सिर घुमा कर चारों तरफ की चीज़ें देखने की कोशिश कर रही थी। एक नासमझ बच्चे की तरह वो सारी चीज़ों को समझने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। और शशांक के होश तो उस लड़की को देखकर ही उड़ गए थे।
क्योंकि यह वही लड़की थी जो इतने सालों से उसके सपने में आती थी। और आज उसे अपने सपने से हकीकत में बदलता देख उसे ना तो अपनी आँखों पर यकीन हो रहा था और ना ही अपनी किस्मत पर।
इसीलिए उसे वह एकदम आँखें फाड़कर हैरानी से उसकी तरफ देख रहा था। उसे देखते हुए वो एक बार भी अपनी पलकें नहीं झपका रहा था और एकटक उस लड़की को ही देखे जा रहा था। और धीमे-धीमे से अपने मुँह में ही कुछ बुदबुदा रहा था।
"नहीं नहीं, यह वह लड़की नहीं हो सकती। वो… वो.. इस तरह से सपनों से निकलकर सामने कैसे आ सकती है? मैं सच में सपना ही देख रहा हूँ।"
शशांक खुद से ये सारी बातें कह रहा था और तभी? सिग्नल ग्रीन हो गया और उसके पीछे से हॉर्न की आवाज़ आई। जिससे वह अपने ख्यालों की दुनिया से बाहर आया और उसने सामने उसी लड़की को देखा जो सड़क क्रॉस करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन लगातार तेज स्पीड में निकलती हुई गाड़ियों की वजह से रोड क्रॉस नहीं कर पा रही थी।
शशांक जल्दी से आगे आया और उसने उस लड़की का हाथ पकड़कर उसे पीछे खींचा क्योंकि वह फिर से एक गाड़ी से टकराने ही वाली थी।
"क्या कर रही हो, दिखाई नहीं देता है क्या?"
शशांक बस इतना ही बोल पाया। और उस लड़की ने पीछे मुड़कर फिर से शशांक की तरफ देखा तो शशांक उसकी नीली आँखों में एकदम ही खो गया, क्योंकि आज पहली बार ही उसने वह नीली आँखों वाली खूबसूरत लड़की अपने सामने देखी थी। इससे पहले वह अपने सपने से यकीन में मिलता था। लेकिन इस वक्त भी वह एकदम उसके सपनों की तरह ही खूबसूरत लग रही थी। वही नीली आँखें, वही भूरे बाल, वही एकदम मासूम सा चेहरा!
शशांक ने जैसे ही उस लड़की का हाथ पकड़ा,
उस लड़की को अपने सामने एकदम से ही कुछ नज़र आया, लेकिन वह समझ नहीं पाई और उसने तुरंत ही शशांक से अपना हाथ वापस छुड़ाते हुए बोली,
"कौन है आप? हमारा हाथ मत पकड़ें।"
इतना बोलते हुए वह फिर अपनी जगह से पीछे हुई। तो शशांक को भी समझ में आया कि एकदम ही उसने उसका हाथ पकड़ लिया था, लेकिन उसने उसे कार के सामने से बचाने के लिए हाथ पकड़कर खींचा था। उसकी और कोई भी ऐसी इंटेंशन नहीं थी। लेकिन फिर भी वह तुरंत माफ़ी माँगते हुए बोला,
"सॉरी… सॉरी.. आई एम रियली सॉरी। लेकिन वह कार.. तुम देखकर नहीं चल सकती क्या? अभी मेरी कार से टकराते हुए बची हो और फिर दूसरी कार..? पहली बार ही सड़क पर निकली हो क्या?"
"क्या? ये क्या कह रहे हो तुम? और तुम इस तरह से हमें डाँट क्यों रहे हो?" उस लड़की ने बड़ी ही मासूमियत से शशांक की तरफ देखते हुए बहुत ही धीमी आवाज़ में कहा।
शशांक को समझ नहीं आया कि वह इस तरह से बात क्यों कर रही है, लेकिन तभी शशांक ने उससे पूछा,
"अरे बाबा, मैं तुम्हें डाँट नहीं रहा हूँ। मैं बस समझा रहा हूँ। इतना ट्रैफिक, कितनी गाड़ियाँ हैं। यहाँ पर चलो बताओ, तुम्हें कहाँ जाना है? मैं तुम्हें ड्रॉप कर देता हूँ।"
शशांक उससे वह अपनी कार के पास खड़ा होकर बात कर रहा था, जिसकी वजह से पीछे काफी सारा ट्रैफिक लग गया था क्योंकि उसकी कार सड़क के एकदम बीचो-बीच खड़ी हुई थी। कुछ कारें साइड से निकल कर जा रही थीं, लेकिन उसके पीछे भी एक लंबी लाइन लग गई थी और लोग उसी तरह कार को लाइन में लगाए हुए अपनी कार का हॉर्न बजा रहे थे। जिससे कि शशांक अपनी कार रास्ते से हटा कर आगे ले जाए। और वह शोर सुनकर उस लड़की ने उस तरफ देखा और शशांक भी पीछे की तरफ मुड़ा और अपनी कार के पीछे वाले लोगों की तरफ देख कर बोला,
"हाँ हाँ, बस हटा रहा हूँ।"
इतना बोलकर वह वापस जैसे ही पीछे लड़की की तरफ मुड़ा, वहाँ पर वो लड़की नहीं थी। वो एकदम अचानक से ही वहाँ से गायब हो गई थी। शशांक उसे चारों तरफ ढूँढने लगा, लेकिन वह उसे कहीं भी नज़र नहीं आई।
उस लड़की ने पिंक ब्लू शेड वाला सूट पहना था, लेकिन अब वहाँ पर कोई भी नज़र नहीं आ रहा था।
शशांक वापस उस जगह पर आया जहाँ पर वह लड़की जमीन पर गिरी थी और वो अपने आप से बोला,
"पता नहीं कहाँ चली गई, वो। मैं उसका नाम भी नहीं पूछ पाया। क्या करूँ? अब कहाँ ढूँढूँ? पता नहीं दोबारा मिलेगी भी या नहीं?"
इतना बोलते हुए वह काफी उदास हो गया। अभी थोड़ी देर पहले उसके चेहरे पर चमक आई थी, वह एकदम गायब हो गई थी। उसी में उसने अपना सिर नीचे झुका लिया। तभी उसकी नज़र जमीन पर पड़ी हुई किसी चीज़ पर पड़ी और वह चीज़ दिखने में बहुत इंटरेस्टिंग और अट्रैक्टिव लग रही थी, तो शशांक ने हल्का सा झुक कर उसे देखा। वह छोटा सा प्लास्टिक टॉय था। और उसे वहाँ पर पड़ा देखकर शशांक समझ गया कि यह ज़रूर उस लड़की के बैग से गिरा होगा। क्योंकि एक्सीडेंट जब हुआ था और वह लड़की कार के सामने आकर जमीन पर गिर गई थी,
तब उसके बैग से भी कुछ सामान जमीन पर गिर गया था और वह अपना सामान बैग में रख रही थी। तब ही शायद यह रह गया होगा। और शशांक ने यह सोचते हुए वह छोटा सा प्लास्टिक का पक्षी अपने हाथ में उठाया और गौर से उसकी तरफ देखा तो वह उसे वह पक्षी एकदम असली पक्षी की तरह लगा। यहाँ तक शशांक को ऐसा लगा जैसे कि उसकी आँखें भी चमक रही हैं। लेकिन फिर उसे ऐसा लगा कि धूप का रिफ्लेक्शन पड़ने की वजह से ऐसा लगा होगा, क्योंकि दिन का वक्त था और वह सड़क के बीचो-बीच खड़ा था। उसने जल्दी से वह छोटा सा प्लास्टिक का खिलौना अपनी जेब में रखा और वापिस अपनी कार में आकर ड्राइविंग सीट पर बैठ गया।
उसे इस बात का बहुत ही अफ़सोस हो रहा था कि इतने दिनों से जो लड़की उसे सपने में नज़र आती थी,
वो आज पहली बार उसे हकीकत में दिखी थी, तब भी पर वह उससे ज़्यादा कुछ पूछ नहीं पाया और ना ही उससे कोई बात कर पाया।
और तो और, यहाँ तक उसका नाम, पता कुछ भी पूछ नहीं पाया। इसलिए अब वह सोच रहा था कि वह दोबारा उसे कैसे ढूँढेगा। शशांक ये सब सोच ही रहा था कि तभी फिर से वह कार के हॉर्न की आवाज़ आने लगी। तो आखिरकार शशांक ने कार स्टार्ट करके अपनी कार को सिग्नल से आगे बढ़ा दिया और अपने ऑफिस की तरफ़ ही ड्राइव करने लगा, लेकिन उसके दिल-दिमाग पर वह लड़की पूरी तरह से छा चुकी थी। और वो अब किसी भी तरह से उसे ढूँढना चाहता था।
लेकिन उसे इस बात की खुशी थी, कि कम से कम उस लड़की का एक सामान उसके पास है, जिसके बहाने वह कभी उससे दोबारा मिल सकता है और उसका सामान भी उसे वापस कर देगा।
यही सब सोचते हुए वो अपने ऑफिस आ गया और अपने केबिन में आकर बैठ गया। लेकिन उसका दिमाग उसी लड़की के बारे में सोच रहा था, जिस तरह वह उसकी कार के सामने आई थी और टकराते हुए बची थी। फिर जब वह कार से उतरा था और उसने उसकी शक्ल देखी थी। किस तरह से वह उसकी उन नीली आँखों में एकदम खो गया था।
शशांक अभी भी वह उसी के ख्यालों में खोया हुआ था, क्योंकि इतनी देर से उसका असिस्टेंट नीरज उसका दरवाज़ा नॉक कर रहा था, लेकिन शशांक अपनी उस सपने वाली लड़की के ख्यालों में इस तरह से खोया हुआ था कि उसे नीरज की आवाज़ ही नहीं सुनाई दी थी।
तभी नीरज चुपचाप केबिन के अंदर आया और उसने शशांक की टेबल पर अपना हाथ टैप करते हुए कहा,
"शशांक सर, व्हाट हैपेंड? कहाँ खोए हैं आप? मैं कितनी देर से केबिन का डोर नॉक कर रहा था, बट आपने कोई जवाब ही नहीं दिया, इसलिए मुझे अंदर आना पड़ा।"
शशांक ने जैसे ही नीरज की बात सुनी, उसने हड़बड़ाते हुए कहा,
"क्या हुआ? क्या बात है? कुछ कहा क्या तुमने?"
नीरज ने हैरानी से शशांक को देखकर कहा,
"कहाँ खोए हैं शशांक सर आप?"
शशांक ने ना में अपना सिर हिलाते हुए कहा,
"कहीं तो नहीं, तुम बताओ तुम यहाँ क्या कर रहे हो?"
शशांक की बात सुनते ही नीरज ने एक गहरी साँस लेते हुए कहा,
"वह अपने न्यू मॉडल्स के लिए एडवर्टाइजमेंट दी थी ना?"
शशांक ने हाँ में अपना सिर हिलाया और अपने लैपटॉप पर कुछ करने लगा। तभी नीरज ने कहा,
"तो उसे एडवर्टाइजमेंट को देखकर कई सारी न्यू मॉडल्स इंटरव्यू देने के लिए आई हैं और मैं चाहता हूँ कि आप एक बार चलकर उन्हें देख लें।"
To be continued
comment ज़रूर करिएगा buddies 💚🌹