My Stupid Baby - Chapter 3
नयन खाते-खाते जैसे ही मुड़ा, अचानक एक शख्स से टकरा गया। कपकेक नयन के कपड़ों पर गिर गया। उसने गुस्से में उस शख्स को देखा, तो उसके चेहरे के भाव बदल गए। क्योंकि जिससे वह टकराया था, वह चंद्र था। वह भी एकटक नयन को देख रहा था। नयन के होठों पर अभी भी थोड़ा-सा केक लगा हुआ था, जिसे देखकर चंद्र के होठों पर हल्की-सी मुस्कान आ गई।
ये देखकर अब नयन को गुस्सा आ गया था। एक तो उसके कपड़े खराब हो गए, और ऊपर से यह इंसान मुस्कुरा रहा है।
“एक तो तुम्हारी वजह से मेरे कपड़े खराब हो गए, और तुम मुझसे सॉरी कहने की बजाय मुस्कुरा रहे हो।” नयन ने अपने कपड़ों की तरफ देखते हुए गुस्से में कहा।
“एक मिनट, इसमें मेरी क्या गलती है? जल्दबाजी में तुम थे, मैं नहीं।” चंद्र ने जवाब देते हुए कहा।
“लेकिन मुझे क्या पता था कि तुम मेरे पीछे ही खड़े हो? तुम्हारी वजह से मेरे कपड़े खराब हो गए। अब मेरे पास इतना टाइम भी नहीं है कि मैं इन्हें चेंज कर सकूँ। आज सिर्फ तुम्हारी वजह से मेरे जॉब के पहले दिन ही मेरा सारा इंप्रेशन खराब हो जाएगा।” ये कहते हुए नयन ने उखड़ी सूरत बना ली।
विकी और आदित्य भी स्टोर रूम से बाहर आ गए थे। जब उन्होंने उन दोनों को देखा, तो जहाँ खड़े थे, वहीं खड़े रह गए।
“तुम जॉब करते हो!” चंद्र ने अचरज भरे भाव से कहा। “मुझे तो लगा था कि तुम अभी स्कूल में ही होंगे। इसीलिए तो कल बच्चा समझकर उठा लिया था तुम्हें।”
ये सुनकर जोगी अंकल के साथ-साथ विकी और आदित्य भी हैरान रह गए। नयन तो यह सुनकर और भी चिढ़ गया और चंद्र से बोला, “क्या? तुम मुझे बच्चा समझ रहे थे! इतना भी नादान मत समझो तुम मुझे। मैं सब जानता हूँ तुम्हारी नियत क्या थी। अरे तुम तो…” ये बोलते-बोलते वह खुद ही रुक गया और अपने चारों ओर देखने लगा, जहाँ जोगी अंकल के साथ-साथ विकी और आदित्य भी उसे शक़ी निगाहों से देख रहे थे।
ये देखकर चंद्र हल्के से हँसा और बोला, “सचमुच नादान हो तुम। बोलने से पहले सोचते नहीं हो और खुद को मैच्योर समझते हो। केवल उल्टी-सीधी बातों की समझ होना ही मैच्योरिटी नहीं होती बच्चे।” उसके मुँह से फिर से ‘बच्चा’ सुनकर नयन बुरी तरह चिढ़ गया।
नयन ने गुस्से में दाँत पीसते हुए चंद्र की ओर देखा और अपनी उंगली उसकी ओर पॉइंट करते हुए बोला, “ऐ मिस्टर! लिसन टू मी केयरफुली, आई एम 23 इयर्स ओल्ड, लास्ट ईयर आई हैव डन पोस्ट ग्रेजुएशन इन कॉमर्स एण्ड टुडे इज़ द फर्स्ट डे ऑफ़ माय जॉब, अण्डरस्टैण्ड।”
ये सुनकर आदित्य ने तो धीरे से उसके लिए ताली बजाई। जब विकी और जोगी अंकल ने उसे देखा, तो वह उन्हें देखकर रुक गया।
नयन को इस तरह काँफिडेंस से बोलते हुए देखकर चंद्र अपनी आईब्रो ऊँची करते हुए उससे बोला, “जब तुम्हारे पास बोलने का इतना काँफिडेंस है, तो तुम ये क्यों सोच रहे हो कि पहले दिन तुम्हारे कपड़ों की वजह से तुम्हारा इंप्रेशन खराब हो जाएगा? क्या वो लोग तुम्हारे टैलेंट से ज़्यादा तुम्हारे कपड़ों को इम्पोर्टेंस देंगे?”
“मेरे पास अभी तुमसे बहस करने का टाइम नहीं है।” ये कहते हुए नयन ने वहाँ रखा पानी का गिलास उठाया और अपनी शर्ट को साफ करने लगा और साथ ही साथ चंद्र को घूरते हुए बोला, “तुमसे तो मैं बाद में आकर बात करूँगा। जाना मत यहाँ से जब तक मैं वापस ना आ जाऊँ।” उसकी यह बात सुनकर चंद्र ने हल्के से हँसते हुए अपना रूमाल निकालकर उसकी ओर बढ़ा दिया। जिसे देखकर नयन को और भी गुस्सा आ गया। “इतना भी भिखारी नहीं हूँ मैं, रूमाल मेरे पास भी है।” नयन ने चीखकर कहा।
वहाँ खड़े जोगी अंकल के साथ-साथ विकी और आदित्य हँस दिए। उसकी चिढ़चिढ़ी शक्ल देखकर तो चंद्र भी मुस्कुरा दिया।
नयन अपने रूमाल से कपड़े साफ कर वहाँ से जाने लगा, तो चंद्र ने उसे रोककर कहा, “एक चीज़ तो साफ करना तुम भूल ही गए।” नयन ने असमंजस भरे भाव से उसकी ओर देखा। इससे पहले कि वह कुछ बोल पाता, चंद्र अपने रूमाल से उसके होंठों पर लगा केक साफ करने लगा। विकी, आदित्य और जोगी अंकल की आँखें हैरानी से बड़ी हो गईं। वो लोग मुँह गोल किए यह नज़ारा देखने लगे।
नयन का दिमाग तो कुछ देर के लिए ब्लैंक हो गया, और वह भी वैसे ही खड़ा रहा। जब चंद्र उसके होंठ साफ करके दूर हटा, तब जाकर नयन को होश आया। उसे अब खुद पर ही गुस्सा आ रहा था कि उसने इसे यह साफ करने क्यों दिया? वह अब खिसिया गया था, इसलिए वह गुस्से में चंद्र को देखते हुए चिल्लाकर बोला, “जोगी अंकल, जब तक मैं वापस ना आऊँ, इस इंसान को यहाँ से जाने मत देना।” उसने जोगी अंकल को देखा, फिर चलते-चलते भी चंद्र की ओर देखकर उसे उंगली दिखाकर बोला, “छोड़ूँगा नहीं तुम्हें, याद रखना।” ये कहकर वह जल्दी से बाहर भाग गया।
उसके जाने के बाद चंद्र ने लंबी साँस लेकर मुँह गोल करते हुए उसे छोड़ दिया, फिर जोगी अंकल की तरफ देखकर बोला, “क्या आप सचमुच मुझे यहाँ पकड़कर रखेंगे?”
उसकी यह बात सुनकर जोगी अंकल के साथ-साथ विकी और आदित्य भी हँस दिए।
“अरे नहीं-नहीं, हम ऐसा क्यों करेंगे? वह तो कुछ भी कहता रहता है। अगर उसकी बातों को सीरियसली लेने लगे, तो हम पागल ही हो जाएँगे।” जोगी अंकल ने हँसकर कहा।
“हाँ, बाद में तो उसे खुद भी याद नहीं रहेगा कि उसे किसी को सबक भी सिखाना था।” विकी ने हँसते हुए उनके पास आकर कहा।
“वैसे आप दोनों पहले भी मिल चुके हो क्या?” आदित्य ने चंद्र से सवाल किया।
जिसे सुनकर चंद्र ने सिर हिलाया और कहा, “हाँ, कल ट्रेन में मिले थे। सीट को लेकर थोड़ी मिसअण्डरस्टैण्डिंग हो गई थी बस।”
“ओओओ…” विकी और आदित्य एक साथ मुँह गोल करते हुए बोले। फिर जोगी अंकल चंद्र के कंधे पर हाथ रखकर कहने लगे, “तुम उसकी बात का बुरा मत मानना। वह कभी-कभी गुस्से में ऐसा बोल जाता है, लेकिन दिल का बहुत अच्छा है।”
“कोई बात नहीं अंकल, इट्स ओके! मैं तो बस आपसे यह पूछने आया था कि मेरा काम हो गया।” चंद्र ने जोगी अंकल से पूछा।
“हाँ, ये लो चाबी।” ये कहते हुए जोगी अंकल ने उसे चाबी थमा दी।
चंद्र ने अपनी घड़ी में टाइम देखा और उन्हें देखकर बोला, “ओके, थैंक्स। अभी तो मैं चलता हूँ, शाम को आ जाऊँगा।” चंद्र भी यह कहते हुए वहाँ से चल दिया।