My Stupid Baby Ch. 2

My Stupid Baby - Chapter 2

Posted by Sanyogita • Jan 18, 2025 03:42 AM

लोटस सोसायटी (काल्पनिक नाम)

मकान नम्बर 99 में एक लड़की किसी से फ़ोन पर बात कर रही थी।

"वाओ! हमें इतना बड़ा प्रोजेक्ट मिला है!" वह खुशी से चहकते हुए बोली।

यह गीता चौहान थीं, जो एक फैशन डिज़ाइनर थीं। थोड़ी ओपन माइंडेड और चंचल स्वभाव की थीं। इनकी उम्र 28 साल थी और ये एक मॉडल की तरह खूबसूरत थीं।

तभी दरवाज़े की घंटी बजी।

"अच्छा मिनी, मैं तुझसे बाद में बात करती हूँ।" यह कहते हुए गीता ने फ़ोन रखा और दरवाज़ा खोलने चली गई। जब उसने दरवाज़ा खोला, तो सामने खड़े इंसान को देखकर थोड़ा कंफ़्यूज़ हो गई।

"हाय मौसी!" सामने खड़ा नयन मुस्कुराते हुए बोला और अंदर आ गया।

"तू तो कल आने वाला था न, फिर आज कैसे आ गया?" गीता नयन के पीछे से आते हुए बोली।

"कल से तो मुझे जॉइन करना है, फिर कल क्यों आऊँगा? लगता है मौसी, आपने मम्मा की बात ध्यान से सुनी नहीं।" यह कहते हुए नयन ने पलटकर गीता की ओर देखा।

"पहले तो तू मुझे मौसी बोलना बंद कर, मुझे बहुत अजीब लगता है, केवल पाँच साल ही तो बड़ी हूँ मैं तुझसे।" गीता चिढ़ गई।

नयन हँस दिया और बोला, "तो क्या बोलूँ? मैंने तो नहीं कहा था आपसे कि आप मम्मा से इतने साल बाद पैदा हों।"

गीता ने उसके कंधे पर मारते हुए कहा, "तेरी मम्मा मेरे बड़े पापा की बेटी हैं, इसलिए मेरे और उनके बीच इतनी उम्र का इतना फ़ासला हो सकता है। गलती तेरी है, तू जल्दी पैदा हो गया।"

"इसमें मेरी क्या गलती? मैंने थोड़े ही बोला था भगवान से कि मुझे इतनी जल्दी दुनिया में भेज दो।" नयन ने भोलेपन से कहा।

"बिल्कुल नादान है तू।" गीता उसके भोलेपन को देखकर बोली और मुस्कुराकर नयन के सिर पर चपत लगा दी।

नयन घर में नज़रें घुमाते हुए गीता से बोला, "मामा कहीं दिखाई नहीं दे रहे?"

"मैं यहाँ हूँ भांजे।"

यह आवाज़ सुनकर नयन और गीता ने दरवाज़े की ओर देखा जहाँ खड़ा एक लड़का नयन को घूर रहा था।

यह विक्रम चौहान था, लेकिन इन्हें सब विकी बुलाते थे। उम्र 23 साल, दिखने में तो अच्छे थे, लेकिन इनका नेचर समझ नहीं आता था। कभी तो आक्रामक हो जाते थे और कभी चंचल। अपनी बहन से तो ना जाने कौन-सी दुश्मनी निभाते थे ये? यह तो आज तक किसी को समझ नहीं आया।

विक्रम अंदर आया और नयन को देखकर गीता से बोला, "तू तो फिर भी पाँच साल बड़ी है इससे, तब तुझे इतना अजीब लगता है, जरा मेरी सोच, मेरा क्या हाल होगा जब यह मुझे मामा कहता है, जबकि मैं तो इसी की उम्र का हूँ।"

यह सुनकर नयन और गीता दोनों ही हँस दिए।

उन्हें हँसता देख विक्रम चिड़चिड़ाते हुए बोला, "ऐ..अब तुम दोनों दांत दिखाना बंद करो।"

"तू तो काम पर गया था न, फिर वापस क्यों आ गया?" गीता ने विक्रम से सवाल किया।

विक्रम ने एक नज़र गीता को देखा, फिर बोला, "आज जोगी अंकल को एक ज़रूरी काम आ गया था, इसलिए वह रेस्टोरेंट बंद करके चले गए।"

"चलो अच्छा हुआ मामा, आज आप फ्री हो। आज सारा दिन हम मस्ती करेंगे, हैं न मामा!" यह कहते हुए नयन ने उसके कंधे पर से गले में हाथ डाल लिया, जिससे विक्रम फिर चिढ़ उठा उसके मुँह से अपने लिए "मामा" सुनकर। गीता मुँह फेरकर हँस दी।

इधर चन्द्र और राज एक अपार्टमेंट में आ गए थे। राज ने चन्द्र से पूछा, "भाई, आपकी कार कहाँ गई? बाहर तो नहीं थी, बेच दी क्या?"

चन्द्र मना करते हुए बोला, "नहीं, सर्विस के लिए गई है।"

"ओह!" यह कहते हुए राज काउच पर पसर गया।

चन्द्र उसे देखकर बोला, "सोना नहीं है, कल हमें यह अपार्टमेंट छोड़ना पड़ेगा, इसलिए सामान निकालने में मेरी हेल्प कर।"

राज को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई। "क्यों भाई? कितना अच्छा अपार्टमेंट तो है, फिर इसे छोड़ने की क्या ज़रूरत?"

चन्द्र गंभीर स्वर में बोला, "ज़रूरत है तभी कह रहा हूँ, और अब तू ज़्यादा सवाल ना कर और मेरी हेल्प कर, वरना खाना नहीं दूँगा तुझे।" यह धमकी देकर वह कमरे की तरफ़ चला गया।

राज भी बेमन से उठा और उसके पीछे-पीछे चल दिया।

अगले दिन सुबह नयन नीले रंग की शर्ट और काले रंग की पैंट पहनकर अच्छे से तैयार हुआ था, और हो भी क्यों ना, आज उसका जॉब पर पहला दिन था। उसने अपने कंधे पर बैग टाँगा और मुस्कुराते हुए चल दिया।

"नयन! एक मिनट रुक।" पीछे से गीता उसे रोकते हुए बोली।

नयन पलटा और उसे देखकर बोला, "क्या अब आप भी मम्मा की तरह दही-शक्कर खिलाने वाली हो?"

यह सुनकर गीता ने अजीब सा मुँह बना लिया। "जी नहीं, यह पकड़।" यह कहते हुए गीता ने उसे एक बैग पकड़ा दिया।

"ये सब क्या है?" नयन ने उस बैग के अंदर रखे पैकेट्स को देखकर कहा।

"मैं जोगी अंकल के यहाँ से कुछ सामान लाई थी, नई डिश ट्राई करने के लिए, जिसमें कुछ एक्स्ट्रा चीज़ें भी आ गईं जो काम की नहीं हैं, इसलिए तू इन्हें वापस करते हुए चले जाना।" गीता ने कहा।

यह सुनकर नयन अपनी भौंह को खुजाकर उस बैग को देखते हुए बोला, "लेकिन यह काम तो आप मामा से भी करवा सकती थीं, वह तो वहीं रेस्टोरेंट में काम करता है ना?"

"वह मेरी कोई बात नहीं सुनता।" गीता ने विक्रम के बारे में सोचते हुए मुँह बना लिया।

"बचपन से देख रहा हूँ, लेकिन मुझे यह समझ नहीं आया कि आप दोनों की आपस में क्यों नहीं बनती?" नयन ने कहा।

गीता उसे देखते हुए बोली, "यह मुझे नहीं पता, तू उसी से जाकर पूछ। मैं तो फिर भी बचपन से उसे बहुत प्यार करती थी, लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ा हुआ और उसने मुझे उल्टा-सीधा बोलना शुरू किया, मुझे उससे नफ़रत सी हो गई। पता नहीं वह काला-कलूटा बंदर अपने आप को समझता क्या है।" गीता गुस्से में विक्रम को भला-बुरा कहने में लगी हुई थी और नयन मुँह दबाकर हँस रहा था।

गीता अपने मन की भड़ास निकालने के बाद नयन को देखकर बोली, "अगर मैं उससे कह भी देती न इस काम के लिए, तो भी वह नहीं करता, इसलिए तू ही यह उन्हें देते हुए निकल जाना, रास्ते में ही पड़ेगा उनका रेस्टोरेंट।"

"ओके! मैं देता हुआ चला जाऊँगा।" यह कहते हुए नयन जाने लगा।

"अच्छा, बेस्ट ऑफ़ लक।" गीता ने पीछे से कहा, जिसे सुनकर नयन मुस्कुराते हुए पलटा, "थैंक यू मौसी।"

"फिर मौसी!" यह कहते हुए गीता ने अजीब सी शक्ल बना ली, जिसे देखकर नयन हँसते हुए उसे बाय कहकर चला गया।

सोसायटी से निकलकर नयन बाहर मेन रोड पर आ चुका था। उस रोड पर चलते-चलते उसने एक रेस्टोरेंट की ओर नज़र उठाई, "जोगिन्दर रेस्टोरेंट" यह नाम पढ़कर वह उस रेस्टोरेंट के अंदर चला गया।

रेस्टोरेंट अंदर से काफ़ी खूबसूरत था। उसने चारों ओर नज़रें घुमाईं, तभी उसकी नज़र सामने काउंटर पर गई जहाँ विक्रम एक लड़की के साथ बैठा हँस-हँसकर बातें कर रहा था। वे दोनों ही वेटर की ड्रेस में थे; विक्रम यहाँ वेटर का ही काम करता था।

उन्हें देखकर नयन मन ही मन हँसा, "मामा तो यहाँ मामी के साथ बैठे हैं।"

तभी उसके पीछे से किसी ने खांसते हुए उसके कंधे पर हाथ रखा। नयन ने जब पीछे मुड़कर देखा, तो एक अधेड़ उम्र के शख्स खड़े थे। "इतना ख्याली पुलाव मत पकाओ बच्चे, तुम्हारे मामा जिससे बात कर रहे हैं, एक बार उसे ध्यान से देख तो लो।"

उस शख्स की यह बात सुनकर नयन थोड़ा कंफ़्यूज़ हो गया। उसने फिर से पलटकर उन लोगों को देखा और कहने लगा, "क्या मतलब है आपका?"

नयन की बात सुनकर उस शख्स ने आवाज़ लगाई, "आदित्य! विकी! तुम दोनों काम छोड़कर गप्पे लगा रहे हो।"

"नहीं जोगी अंकल.....!!!" वे दोनों एकदम से हड़बड़ाते हुए बोले और उन्हें देखने लगे। नयन का मुँह तो हैरानी से खुला रह गया, क्योंकि जिसे वह लड़की समझ रहा था, वह एक लड़का था जिसके बाल थोड़े लंबे थे, जो पीछे से देखने पर लड़कियों जैसा ही लग रहा था, और उसका नाम था आदित्य।

विक्रम ने जब नयन को देखा, तो वह बोला, "तू यहाँ क्या कर रहा है?"

"मुझे तो मौसी ने जोगी अंकल को यह सामान वापस करने को बोला था।" नयन ने विक्रम को बैग दिखाकर कहा। फिर जोगी अंकल की तरफ़ देखकर बोला, "ये लीजिए जोगी अंकल, आपका सामान जो मौसी ने एक्स्ट्रा ले लिया था।"

जोगी अंकल नयन को पहचानने की कोशिश करते हुए बोले, "तुम नयन हो ना, विकी और गीता के भांजे!"

"हाँ, आपने पहचान लिया।" नयन ने हैरानी और खुशी के मिले-जुले भावों से कहा।

यह सुनकर आदित्य भी वहाँ आ गया और नयन को देखते हुए विक्रम से बोला, "तू इसका मामा है!"

विक्रम ने कुछ नहीं कहा, बस मजबूरी में हाँ में सिर हिला दिया, क्योंकि अब जो सच है वो तो है।

यह देखकर आदित्य हँस दिया और नयन से हाथ मिलाते हुए बोला, "हाय! मैं आदित्य! तुम्हारे मामा का दोस्त।" उसने जानबूझकर विक्रम की तरफ़ देखकर ऐसा कहा, जिससे विक्रम चिढ़ गया, लेकिन शायद आदित्य को पता नहीं था कि नयन भी शरारती है।

"हाय अंकल!" नयन मुस्कुराते हुए आदित्य से बोला, जिसे सुनकर विक्रम और जोगी अंकल ठहाके लगाकर हँस दिए।

"मैं अंकल कहाँ से दिखता हूँ!" आदित्य ने चिढ़कर कहा।

विक्रम हँसते हुए उनके बीच आकर बोला, "जब मैं इसका मामा हो सकता हूँ, तो तू अंकल नहीं हो सकता।" यह सुनकर आदित्य और भी चिढ़ गया। वह कुछ बोलता, उससे पहले ही जोगी अंकल बोल पड़े...

"अच्छा, बहुत हो गई बातें, अब तुम दोनों जाकर अपना काम करो, और हाँ, पहले स्टोर रूम में जाकर सामान सेट करो जो कल आया था।" जोगी अंकल ने विक्रम और आदित्य से कहा। वे दोनों अच्छे बच्चों की तरह उनकी आज्ञा का पालन करते हुए वहाँ से चले गए। जोगी अंकल ने नयन की ओर देखा और बोले, "हाँ तो नयन बेटा, इतने दिनों बाद यहाँ कैसे?"

"मेरी जॉब लग गई है यहाँ पर और आज मेरा जॉब पर पहला दिन है।" नयन ने खुश होकर उन्हें बताया, जिसे सुनकर वे भी बहुत खुश हुए।

"यह तो बहुत अच्छी बात है।" जोगी अंकल बात करते हुए काउंटर पर खड़े हो गए। नयन ने वह बैग भी काउंटर पर रख दिया।

"मेरी तरफ़ से तुम्हें ऑल दी बेस्ट और साथ में यह भी।" यह कहते हुए उन्होंने कपकेक निकालकर नयन के सामने रख दिया, जिसे देखकर नयन खुश होते हुए बोला, "वाओ अंकल! माय फेवरिट कपकेक।" यह कहते हुए उसने जल्दी से उसे उठा लिया और जल्दी-जल्दी खाने लगा।

"अरे! आराम से खाओ, मैं इसे वापस छीन नहीं लूँगा तुमसे।" जोगी अंकल हँसते हुए बोले।

"नहीं अंकल, अगर आराम से खाया तो मैं लेट हो जाऊँगा और इसे छोड़ना मैं नहीं चाहता हूँ।" नयन ने केक को देखकर कहा।

नयन खाते-खाते जैसे ही मुड़ा, अचानक से एक शख्स से टकरा गया। कपकेक नयन के कपड़ों पर गिर गया। उसने गुस्से में उस शख्स को देखा, तो उसके चेहरे के भाव बदल गए, क्योंकि जिससे वह टकराया था, वह चन्द्र था। वह भी एकटक नयन को ही देख रहा था। नयन के होठों पर अभी भी थोड़ा सा केक लगा हुआ था, जिसे देखकर चन्द्र के होठों पर हल्की सी मुस्कान आ गई।

जारी है......

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