The Manali Trip - Chapter 3
श्रेया (कॉफी पीते हुए): "आखिर क्या हुआ है अबीर को?"
अमर (थोड़ा सा सोचते हुए): "वो रास्ते से ही कुछ खोया हुआ सा लग रहा था।"
शिवम (मायूस होते हुए): "और यहाँ आने के बाद अभी एक दिन भी नहीं हुआ और यह सब..."
विनय (मुँह बनाकर): "इससे अच्छा तो होता कि मैं दिल्ली में ही अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर लेता।"
श्रेया: "तुम अपना मूड क्यों खराब कर रहे हो, बेबी? ठीक है अबीर अब।"
अमर: "उसने ज़्यादा ड्रिंक ही कर लिया होगा, इसलिए अब उसे याद नहीं कुछ।"
(अमर को तो यही लग रहा था कि उसने ज़्यादा ड्रिंक कर ली होगी, इसलिए वह बार-बार इस बात पर ज़ोर दे रहा था क्योंकि वे सब अपने साथ बियर और व्हिस्की की बोतल भी लेकर आए थे, विनय का बर्थडे सेलिब्रेट करने के लिए।)
विनय: "हाँ, हो सकता है।"
शिवम: "वैसे आज का क्या प्लान था?"
विनय: "था मतलब, अभी भी है। आज का प्लान ऑन।"
श्रेया (खुश होते हुए): "रियली? वाओ! मैं रेडी होकर आती हूँ!"
विनय: "और नहीं तो क्या? सब साथ में घूमना चाहते हैं। अभी बारह ही तो बजे हैं दिन के, पूरा दिन यही घर में थोड़ी ना रहना है।"
अमर: "लेकिन अबीर? उसे ऐसे अकेले तो नहीं छोड़ सकते ना..."
विनय: "उसे भी साथ ले चलेंगे। घूमेगा-फिरेगा तो यह सब जल्दी भूल जाएगा।"
शिवम: "हाँ, यह ठीक रहेगा।"
क्रमशः
उसके बाद सभी लोग अपने-अपने सामान के साथ तैयार होकर हॉल में इकट्ठा हुए और शिवम अबीर को बुलाने गया।
वह देखता है कि अबीर सोया हुआ है। उसे जगाने से पहले वह विनय को भी बुला लाता है और उसे भी दिखाता है। फिर कहता है –
"यार, अबीर तो सोया हुआ है, अब क्या करें?"
"क्या करें क्या? मैंने पहले भी कहा था कि उसे ऐसे अकेला छोड़कर नहीं जा सकते। यह बिल्कुल अनजान जगह है उसके लिए, और अगर फिर से कल रात जैसी कोई घटना हुई तो वह अकेला क्या करेगा?" – विनय ने कहा।
उन दोनों की आवाज सुनकर अबीर खुद ही जाग गया और उठकर बिस्तर पर बैठते हुए बोला –
"क्या हुआ तुम दोनों को? ऐसे दरवाजे पर खड़े होकर क्या बातें कर रहे हो?"
"अरे, अबीर जाग गया तू! अब तेरी तबीयत कैसी है? हम वही पूछने आए थे।" – शिवम ने कहा।
"सिर्फ़ तबीयत ही नहीं, साथ ट्रैकिंग पर ले जाने के लिए भी आए थे। चल अब जल्दी से तैयार हो जा, कुछ नहीं हुआ तुझे।" – विनय बोला।
"क्या ट्रैकिंग? ट्रैकिंग का प्लान कब बना? मुझसे पूछा भी नहीं तुम में से किसी ने। मुझे नहीं लगता मैं जा पाऊँगा। मेरा सिर अभी भी दर्द कर रहा है।" – अबीर ने अपना सिर पकड़ते हुए कहा।
"बाहर चलेगा घूमने तो सारा सर दर्द ठीक हो जाएगा तेरा। क्यों विनय, तू भी तो यही कह रहा था।" – शिवम ने कहा।
"मैं ज़रूर चलता यार, वैसे भी मैं यहाँ मनाली घूमने-फिरने ही तो आया था। लेकिन अभी सच में मैं नहीं चढ़ पाऊँगा पहाड़ पर। तबीयत ठीक नहीं लग रही। आज रेस्ट कर लूँगा तो कल पक्का चलूँगा। और कल तो तेरा बर्थडे भी है।" – अबीर ने कहा।
"ठीक है, फिर हम लोग भी नहीं जाते। तुझे यहाँ अकेला छोड़कर। कल ही चलेंगे सब साथ में।" – विनय बोला।
"अरे नहीं, अब तुम लोग तैयार हो तो बेकार में मेरी वजह से अपना प्लान क्यों कैंसिल कर रहे हो? एक काम करो, आज तुम चारों चले जाओ। कल फिर मैं भी चलूँगा साथ।" – अबीर ने उन सब को कहा।
"लेकिन यार, तू यहाँ ऐसे अकेला, और तेरी तबीयत भी नहीं ठीक है।" – शिवम बोला।
"मैं ठीक हूँ यार, बस थोड़ा रेस्ट करूँगा तो और बेहतर महसूस करूँगा पहले से। तुम लोग मेरी फ़िक्र मत करो, जाओ और इन्जॉय करो।" – अबीर ने उन सब को मनाते हुए कहा।
"पक्का तू ठीक है ना?" – विनय ने दोबारा पूछा।
"हाँ, मैं ठीक हूँ यार। जाओ तुम लोग, मैं अपना ध्यान रखूँगा और तुम लोग भी ध्यान से जाना ट्रैकिंग पर।" – अबीर ने कहा।
"अच्छा, ठीक है। हम सभी चलते हैं।" – दरवाजे से बाहर निकलते हुए अमर ने कहा।
तभी अबीर ने चिल्लाकर उनसे पूछा –
"वापस कब तक आओगे तुम लोग?"
"रात हो जाएगी लौटने में, क्योंकि पूरा पहाड़ चढ़कर फिर वापस भी उतरना होता है।" – विनय ने कहा।
"अच्छा, ठीक है। गुड बाय, टेक केयर। यू ऑल एंजॉय।" – अबीर ने उन सब से कहा। और फिर वह सभी कार में बैठकर वहाँ से चले गए और अबीर घर में अकेला रह गया।
घर के अंदर आकर उसने दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया और किचन में जाकर कुछ खाने के लिए ढूँढने लगा। उसके सर में अभी भी दर्द हो रहा था, लेकिन अब पहले से कम था। फिर भी उसने सोचा कि वह अपने लिए एक और कॉफ़ी बना लेता है।
उसे कुछ कुकीज़ मिल गईं और फिर अपने रूम में जाकर कॉफ़ी के साथ कुकीज़ खाने लगा। अबीर के कमरे की खिड़की से गार्डन के पीछे का हिस्सा दिखाई देता था। कॉफ़ी पीते-पीते अबीर की नज़र गार्डन में टहल रही एक लड़की पर पड़ी। उसे पहले तो लगा कि यह उसका वहम है, लेकिन फिर काफ़ी देर तक जब वह लड़की वहीं पर चलती हुई उसे दिखाई दी तो वह समझ गया कि वहाँ असल में कोई लड़की है। यह उसका वहम नहीं है।
लेकिन अगर यह सच है तो वह लड़की कौन है? और इस वक़्त यहाँ गार्डन में क्या कर रही है? – अबीर अपने मन में यह सब सोचता हुआ अपने कमरे से बाहर आया और पीछे गार्डन की तरफ़ जाने लगा।
अब यह तो उस लड़की से पूछने के बाद ही पता चलेगा कि वह कौन है? और यहाँ क्या कर रही है? – यह सोचकर ही वह उस लड़की के एकदम पास पहुँच गया और उससे बोला –
"हेलो मिस! आप कौन? यहाँ क्या कर रही हैं?"
ऊपर से नीचे तक अबीर को देखने के बाद उस लड़की ने बोला –
"यह तो मैं आपसे भी पूछ सकती हूँ कि आप कौन और यहाँ क्या कर रहे हैं? मिस्टर!"
"मैं...वो...लेकिन पहले मैंने पूछा है तो पहले आप बताइए!" – अबीर ने कहा।
"मैं तो यहाँ काम करती हूँ, मेरा मतलब है अपने बाबा की काम करने में मदद करती हूँ। मेरा नाम खुशी और वह है मेरे बाबा।" – उस लड़की ने दूर खड़े दीनू काका की तरफ़ उंगली से इशारा करते हुए कहा।
"अच्छा, तो तुम दीनू काका की बेटी हो। उनसे तो मैं कल ही मिल चुका हूँ, जब मैं यहाँ आया था!" – अबीर ने कहा।
"अच्छा, तो आप हैं विनय बाबू, इस फ़ार्म हाउस के मालिक। लेकिन आप यहाँ अकेले? इतने दिनों के बाद कोई काम था क्या यहाँ पर?" – खुशी ने कहा।
"अरे नहीं, आप गलत समझ रही हैं; मैं विनय नहीं, मैं तो उनका दोस्त अबीर हूँ। विनय तो बाकी दोस्तों के साथ ट्रैकिंग पर गया है।" – अबीर ने कहा।
"और आप क्यों नहीं गए? उन सब के साथ? आपको पहाड़ पसंद नहीं है क्या?" – खुशी ने अबीर की तरफ़ देखते हुए उससे पूछा।
"नहीं, ऐसी बात नहीं है। मुझे तो यह पहाड़, पेड़, बर्फ़ और घाटियाँ सब कुछ बहुत ही ज़्यादा पसंद है। जब से मैंने यह सब देखा है, मेरा तो वापस जाने का ही मन नहीं है।" – अबीर चारों तरफ़ का सुंदर नज़ारा देखते हुए कहा।
"तो फिर आप क्यों नहीं गए उन सब के साथ?" – खुशी ने फिर से पूछा।
"मेरी तबीयत ठीक नहीं थी आज, बस इसलिए। और शायद किस्मत में आपसे मिलना भी लिखा था।" – अबीर मुस्कुराता हुआ बोला।
"शाम हो गई। अब मैं घर जाती हूँ, नहीं तो माँ मुझे ढूँढने लगेगी।" – खुशी ने कहा।
"तुम्हारा घर तो पास में ही है। तुम्हारे बाबा ने बताया था कल। और थोड़ी देर रुक जाओ, कोई साथ होता है तो समय जल्दी बीत जाता है। नहीं तो मैं अकेले बोर हो जाऊँगा जब तक मेरे दोस्त वापस आते हैं।" – अबीर ने कहा।
"ठीक है, मैं थोड़ी देर बाद वापस आती हूँ। अभी जाना ज़रूरी है।" – इतना बोलकर खुशी वहाँ से चली गई।
इतना ज़्यादा और कोई बहाना भी नहीं मिला अबीर को उसे रोकने का। लेकिन अबीर को पता नहीं क्यों; उस अनजान लड़की का साथ अच्छा लग रहा था। लेकिन वह उसकी वापस आने का इंतज़ार ही कर सकता था, बस। कि वह बोलकर गई है शायद वापस आ जाए।
जब तक अबीर ने सोचा कि वह राधिका को कॉल कर ले, उसने अपने पॉकेट में मोबाइल चेक किया तो उसे याद आया कि मोबाइल तो रूम में ही है। यह सोचकर वह गार्डन से वापस रूम की तरफ़ भागा। और रूम में जाकर उसने अपना मोबाइल फ़ोन ढूँढा, लेकिन उसे अपना मोबाइल नहीं मिला। रूम के बाद उसने पूरे घर में अपना मोबाइल ढूँढा, लेकिन उसे अपना मोबाइल फ़ोन कहीं नहीं मिला। उसे याद भी नहीं आ रहा था कि उसने कहाँ रख दिया।
उसे बस इतना याद था कि आखिरी बार रात को उसने राधिका से भी बात की थी और उसके बाद से मोबाइल में नेटवर्क ही नहीं आ रहा था, इसलिए उसने मोबाइल का कोई यूज़ ही नहीं किया। और आज सुबह से तो इतना कुछ हो गया था उसके साथ कि इन सब में उसे मोबाइल का ध्यान ही नहीं रहा।
क्रमशः