The Manali Trip - Chapter 2
"क्या.... क्या कह रहे हो अबीर! ठीक से आवाज़ नहीं आ रही तुम्हारी?" - राधिका की आवाज़ काफ़ी कट कर आने लगती है।
"हाँ, शायद यहाँ पर नेटवर्क इशू भी है; टेक्स्ट मैसेज कर देना तुम राधिका, अगर कोई बात हो तो, बाकी जब नेटवर्क होगा तो मैं खुद कॉल कर लूँगा, बाय!" - अबीर कॉल डिस्कनेक्ट करते हुए बोलता है।
"ओके बाय! टेक केयर एंड एन्जॉय योरसेल्फ़...." - राधिका की एकदम धीमी सी आवाज़ अबीर के कानों में पड़ती है और कॉल डिस्कनेक्ट हो जाता है।
अबीर परेशान सा अपने फोन की तरफ देखने लगा...
"क्या यार अबीर, इतनी ख़ूबसूरत जगह पर आकर भी तो अभी भी कॉल पर ही लगा हुआ है।" - अमर ने अबीर के कंधे पर पीछे से हाथ रखते हुए कहा।
"अरे नहीं यार, राधिका का कॉल था, उसे बस फ़िक्र हो रही थी हम सब की, कि हम सब ठीक से पहुँच गए या नहीं, बस वही बता रहा था। बाकी यहाँ पर तो नेटवर्क इशू भी है, ठीक से बात नहीं हो पाई।" - अबीर ने सफ़ाई देते हुए कहा।
"कोई बात नहीं यार, कल जब यहाँ से बाहर कहीं घूमने जाएँगे, तो वहाँ शायद नेटवर्क आ जाए, तब बात कर लेना तुम राधिका से जी भर के।" - अमर ने उसे छेड़ते हुए कहा।
"तुम लोग भी ना यार, वैसे ये विनय कहाँ गया?" - अबीर ने इधर-उधर देखते हुए पूछा।
"वह भी तेरी तरह गर्लफ़्रेंड के साथ ही बिज़ी है, हम दोस्तों के लिए वक़्त कहाँ, तुम लोगों के पास।" - शिवम हँसता हुआ बोला।
"वैसे तुझे क्या काम है विनय से?" - अमर ने पूछा।
"कुछ नहीं, बस मेरा रूम कौन सा है, वह पूछना था।" - अबीर ने कहा।
"इतने सारे रूम हैं, कोई सा भी ले ले यार, जो भी पसंद हो तुझे।" - शिवम ने कहा।
"ठीक है, मैं वह लास्ट वाले रूम में सो जाता हूँ, मुझे बहुत तेज नींद आ रही है। सुबह मिलते हैं यारों, गुड नाइट।" - इतना बोलकर अबीर कमरे में सोने के लिए चला गया और उसके बाद शिवम और अमर भी अपने-अपने कमरों में चले गए।
विनय श्रेया को उसके कमरे में छोड़कर वापस आने लगा कि तभी श्रेया ने विनय से कहा - "तुम भी यहीं रुक जाओ ना बेबी, मुझे अकेले डर लग रहा है, नई जगह है ना इसलिए।"
"अच्छा जी, सच में डर लग रहा है या फिर मुझे रोकने का कोई बहाना है?" - विनय श्रेया को छेड़ते हुए बोला।
"तुम बहुत शैतान हो गए हो विनय, मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है, तुम चुपचाप से काउच पर सो जाना।" - बोलकर श्रेया हँसने लगी।
"अच्छा जी, फिर उससे तो अच्छा है मैं अपने रूम में ही जाकर सो जाऊँ।" - विनय मुँह बनाते हुए बोला।
"मुझे तो नींद नहीं आ रही और अकेले तो और भी ज़्यादा नींद नहीं आएगी, डर भी लगेगा, बस इसलिए तुम्हें रुकने बोला।" - श्रेया बोली।
"मैं तो बस मज़ाक कर रहा था बेबी, मुझे भी कहाँ नींद आएगी? इतना अच्छा मौसम और तुम्हें छोड़कर भला मैं कैसे सो सकता हूँ?" - विनय श्रेया के करीब आता हुआ बोला।
विनय को अपनी तरफ़ आता देख श्रेया पीछे सरकने लगी, लेकिन विनय उसकी तरफ़ बढ़ता गया और फिर पीछे दीवार आने की वजह से श्रेया वहीं रुक गई, लेकिन विनय उसकी ओर करीब आता गया। विनय का चेहरा अपने चेहरे के एकदम सामने देखकर श्रेया ने अपनी दोनों आँखें कसकर बंद कर ली और फिर विनय ने उसके माथे पर किस किया। तो श्रेया ने धीरे से अपनी आँखें खोली और विनय के गाल पर किस कर दिया।
उसके बाद दोनों बेड पर बैठकर काफ़ी देर तक बातें करते रहे और बातें करते-करते उन्हें पता ही नहीं चला कब उनकी आँख लग गई और श्रेया विनय के कंधे पर अपना सर रखकर सो गई।
उसके बाद अगली सुबह...
श्रेया अपने कमरे से निकलकर कॉफ़ी बनाने के लिए किचन में आई तो उसने वहाँ दरवाज़े के पास ज़मीन में किसी आदमी को पेट के बल गिरा पड़ा हुआ देखा; उसे देखकर श्रेया बहुत ज़ोर से चीख निकल गई।
श्रेया की आवाज़ सुनकर विनय, अमर और शिवम तीनों अपने-अपने कमरों से बाहर निकलकर दौड़ते हुए श्रेया के पास आए और उससे पूछने लगे कि क्या हुआ श्रेया? तुम इतनी ज़ोर से चीखी क्यों?
"लगता है कोई कॉकरोच या छिपकली देख लिया।" - विनय ने हँसते हुए श्रेया को पीछे से हग करते हुए कहा।
"अरे नहीं, वह..... वह उधर देखो, वह कौन है?" - श्रेया ने उँगली से इशारा करते हुए उन तीनों को भी वह दिखाया।
तीनों लड़कों ने एक साथ उस तरफ़ देखा और बोले - "यह कौन है और यहाँ कैसे आया?"
जैसे ही उन्होंने उस आदमी को पलटा, वे सब हैरान रह गए।
"हे भगवान! अबीर, क्या हुआ? यह यहाँ कैसे आया?" - श्रेया ने सामने गिरे आदमी के चेहरे की ओर देखते हुए बाकी सब से सवाल किया।
फर्श पर बेहोश पड़ा आदमी कोई और नहीं, बल्कि उनका दोस्त अबीर था।
"मेन गेट खुला हुआ है। शायद वह रात को बाहर गया होगा!" विनय ने दरवाजे की ओर देखते हुए अबीर के बारे में अपना अनुमान लगाते हुए कहा।
"नहीं, हम दोनों ने उसे रात को अपने कमरे में सोते हुए देखा था, क्या अमर?" शिवम ने अमर की ओर देखते हुए पुष्टि करते हुए कहा।
अमर ने उसकी बात पर सिर हिलाया और उसी तरह, उलझन में अबीर की ओर देखता रहा।
"लेकिन वह बेहोश कैसे हुआ?" श्रेया ने फिर पूछा।
"पता नहीं, बेबी। वह तो होश में आने के बाद ही बता पाएगा। अमर, जल्दी से पानी ला, यार!" विनय ने पानी मंगाने के लिए थोड़ा चिल्लाते हुए कहा।
अमर जल्दी से पानी लेकर आया और अबीर के चेहरे पर छिड़कने लगा। अबीर को हल्का-हल्का होश आ रहा था, लेकिन वह पूरी तरह से होश में नहीं आया था।
फिर तीनों लड़के उसे उठाकर उसके कमरे में ले गए और बिस्तर पर लिटा दिया। उसके बाद उसे पानी पिलाया और शिवम ने उससे पूछा, "क्या हुआ था, अबीर?"
"पता नहीं, मुझे कुछ भी याद नहीं..." अबीर ने उठकर बैठने की कोशिश करते हुए कहा।
"तूने ड्रिंक की हुई है, अबीर, वह भी बहुत ज्यादा।" अमर ने उससे कहा।
"हाँ, स्मेल भी आ रही है!" श्रेया ने अपनी नाक पर हाथ रखते हुए कहा।
"मैं कसम खाता हूँ, यार, मैंने शराब तो क्या, बियर तक नहीं पी कल रात को। मुझे अच्छी तरह से याद है!" अबीर ने उन सब से कहा।
"तो फिर तू वहाँ गेट के पास कैसे पहुँचा और बेहोश कैसे हो गया?" शिवम ने उससे पूछा।
"मैंने कहा ना, मुझे कुछ भी याद नहीं। कल रात का आखिरी मुझे बस इतना याद है कि शिवम और अमर को गुड नाईट बोलकर मैं इसी कमरे में आकर सो गया था और थके होने की वजह से मुझे बहुत जल्दी नींद आ गई थी। उसके बाद क्या हुआ, मुझे कुछ याद नहीं..." अबीर ने एक साँस में सब कुछ बोल दिया।
"ज्यादातर तो ड्रिंक करने की वजह से ही ऐसा होता है कि कुछ याद ना रहे सुबह। मुझे भी एक-दो बार ऐसा हैंगओवर हुआ है ज्यादा ड्रिंक करने की वजह से।" श्रेया ने कहा, तो विनय उसकी ओर घूरने लगा।
"श्रेया, तुम अपने लिए कॉफी बनाने जा रही थी ना, जाओ जाकर सबके लिए कॉफी बना लो!" विनय ने श्रेया को कमरे से हटाने के लिए कहा क्योंकि वह नहीं चाहता था कि वह अपनी बेवकूफी भरी बातें उन तीनों के बीच करे।
"श्रेया, प्लीज, मेरे लिए एक स्ट्रांग कॉफी बना देना। मेरे सर में बहुत तेज दर्द हो रहा है!" अबीर ने रूम से बाहर जाती हुई श्रेया से कहा।
"ओके, बना दूंगी!" बोलकर श्रेया वहाँ से निकलकर किचन में आ गई।
"चल अब साफ-साफ बता दे, अबीर!" श्रेया के वहाँ से निकलते ही अमर ने फिर पूछा।
"लेकिन क्या बता दूँ मैं?" अबीर ने उसके इस तरह से पूछने पर थोड़ा झुँझलाते हुए कहा।
"यही कि तूने ड्रिंक क्यों इतनी ज्यादा की? राधिका की याद आ रही थी या फिर कोई और प्रॉब्लम है?" शिवम ने एक शरारत भरी मुस्कान से अबीर की ओर देखते हुए पूछा।
"अब तो श्रेया भी यहाँ नहीं है। यू कैन शेयर विद अस, तू हमें बता सकता है यार!" विनय ने कहा क्योंकि उसे भी ऐसा लग रहा था कि श्रेया के वहाँ पर होने की वजह से अबीर उनसे कोई बात छुपा रहा है।
"लेकिन मैं क्या बताऊँ? जब मुझे कुछ याद ही नहीं। मैं सच बोल रहा हूँ, तुम सब मेरा यकीन क्यों नहीं करते?" इस बार अबीर झल्लाकर बोला।
"अच्छा ठीक है, मान लेते हैं तेरी बात। लेकिन फिर भी यह सवाल है कि तू अपने कमरे से बाहर वहाँ मेन गेट के पास बेहोश कैसे मिला?" अमर ने अबीर को शांत करवाते हुए थोड़ा सोचते हुए कहा।
"वही तो मुझे भी समझ नहीं आ रहा यार, और मुझे कुछ याद भी नहीं आ रहा!" अबीर ने दिमाग पर ज़ोर डालकर सोचने की कोशिश करते हुए कहा जिससे उसके सर का दर्द और ज़्यादा बढ़ गया और वह चिल्लाकर वापस वहीं पर बैठ गया।
उसकी ऐसी हालत देखकर उसके दोस्त समझ गए कि वह शायद सच बोल रहा है कि उसे कुछ भी याद नहीं और उसे ज़्यादा परेशान नहीं करना चाहिए इस वक्त।
इस बात को समझते हुए विनय ने कहा, "ठीक है यार, तू रेस्ट कर। इस बारे में हम बाद में बात करते हैं।"
और अबीर को कमरे में अकेला छोड़कर बाकी दोनों लड़के वहाँ से बाहर आ गए।
थोड़ी देर बाद श्रेया उसके रूम में ही उसे कॉफी दे आई और फिर बाहर आकर विनय और बाकी दोस्तों के साथ हॉल में बैठकर कॉफी पीने लगी।
वे चारों आपस में बात करने लगे।