हमारी अधूरी कहानी - Chapter 1
एक नवविवाहित जोड़ा, जिनकी कुछ घंटे पहले ही शादी हुई थी, अपने शादी के कपड़ों में बेहद प्यारे लग रहे थे। उन दोनों को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वे दोनों बस एक-दूसरे के लिए ही बने हों। उनकी गाड़ी भी पूरी तरह से सजी हुई थी।
लड़की ने लड़के के कंधे पर अपना सिर रखा हुआ था, और दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थाम रखा हुआ था। लड़की लड़के से बोली, "राहुल, तुम्हें पता है ना, मैंने इस दिन का कितने सालों से इंतज़ार किया है, और आज मेरा वो इंतज़ार ख़त्म हुआ… नहीं-नहीं, आज हमारा वो इंतज़ार ख़त्म हुआ, क्योंकि हम दोनों ने ही तो कितने सालों से इस पल का बेसब्री से इंतज़ार किया है। और आज के दिन हमारा वो सालों का इंतज़ार ख़त्म हुआ। अब हम दोनों ही शादी के अटूट बंधन में बंध चुके हैं।"
लड़की की बात सुनकर राहुल बोला, "तुमने बिलकुल सही कहा, खुशी। आज हमारे सालों का इंतज़ार ख़त्म हुआ… वैसे हमारे घरवालों ने तो हमारी शादी बचपन में ही तय कर दी, पर उन्हें भी नहीं पता था कि हम बड़े होने के बाद इस रिश्ते को निभाएँगे भी या नहीं… हम दोनों बचपन से ही साथ रहे, साथ पढ़े और साथ में ही बड़े भी हुए हैं।"
"और आज देखो, हमारा प्यार भी जीत गया… और हम शादी जैसे पवित्र बंधन में बंध गए। अब हम दोनों हमेशा ही एक साथ रहेंगे… और हम अब कभी अलग नहीं होंगे… ना ही कोई हमें अलग कर सकता है, क्योंकि हमारा प्यार इतना भी कमज़ोर नहीं कि कोई हमारे बीच आ सके या हमें दूर कर सके…" राहुल की बात सुनकर खुशी भी मुस्कुरा देती है।
और उसे साइड हग करते हुए ही बोली, "तुम्हें पता है राहुल, मैंने ना हमारे लिए बहुत सारी प्लानिंग कर रखी है। मैंने सोच लिया है कि हम ना अपने हनीमून के लिए स्विट्ज़रलैंड या फिर पेरिस चलेंगे… उसके बाद घर लौटने पर मैं सुबह जल्दी उठकर तुम्हारे लिए नाश्ता बनाऊँगी, और तुम्हारा टिफ़िन बॉक्स तैयार करूँगी… फिर तुम ऑफ़िस जाओगे तो मैं दिन में तीन से चार बार कॉल करूँगी और शाम को तुम्हारे घर लौटने का इंतज़ार करूँगी।"
"और फिर डिनर के बाद रात में मैं तुम्हें इतना… अपने दोनों हाथों को फैलाकर… नहीं, इतना सारा प्यार करूँगी… और फिर शादी के दो-तीन महीने बाद ही मैं तुम्हारी मॉम को दादी और तुम्हें डेडी बना दूँगी…" खुशी बस अपनी खुशी में ही सारी बातें बोल रही होती है, और राहुल बस उसे प्यार से निहार रहा होता है। जब खुशी को एहसास होता है कि वो कब से बस बोल ही रही है, तो वो शांत होकर राहुल को देखकर बोली, "मैं बहुत ज़्यादा बोलती हूँ ना, राहुल?" इस पर राहुल उसे प्यार से देखते हुए बोला, "नहीं, खुशी। मैं तो अपनी पूरी ज़िंदगी तुम्हें ऐसे ही बिना रुके सुन सकता हूँ।"
राहुल की बात सुनकर खुशी राहुल के गले लग जाती है। वहीं उनकी गाड़ियों के पीछे ही उनके घरवालों की गाड़ियाँ भी चल रही होती हैं, जिसमें दोनों की ही फैमिली होती है, जो अपने बच्चों की शादी से काफ़ी ज़्यादा खुश होते हैं।
सभी लोग खुश हो रहे होते हैं। ड्राइवर भी, जो उनका काफ़ी पुराना और वफ़ादार ड्राइवर होता है, जो इस वक़्त राहुल और खुशी की गाड़ी ड्राइव कर रहा होता है, वो भी इन दोनों को ऐसे खुश देखकर काफ़ी ज़्यादा खुश हो रहा होता है। ड्राइवर अपनी कार आराम से चला रहा होता है, मगर तभी वहाँ पर एक बहुत ही बड़ा कंटेनर अचानक से ही सामने आ जाता है और उनकी गाड़ी को टक्कर मार देता है।
जिससे ड्राइवर खुद को संभाल नहीं पाता है, और टक्कर की वजह से उनकी गाड़ी 15 से 20 फ़ीट दूर जाकर गिर जाती है, और उनकी गाड़ी का क़िरा मच जाता है। मगर जब राहुल को जैसे ही टक्कर का एहसास होता है, वो खुशी को अपनी बाहों में कसकर ले लेता है, जिससे उसे ज़्यादा चोट ना लगे। मगर उसकी इस कोशिश का भी कोई फ़ायदा नहीं होता और उनकी गाड़ी जाकर पलट जाती है, और उसकी सारी खिड़कियाँ टूट जाती हैं।
वहीं वो कंटेनर भी एक साइड जाकर लुढ़क जाता है। वहीं जब घर वाले, जिनकी कार उनसे काफ़ी ज़्यादा दूर थी, जब उनकी नज़र उनकी कार पर पड़ती है, तो उन लोगों की दर्द भरी चीख निकल जाती है, और सभी उनके तरफ़ दौड़कर जाने लगते हैं। वहीं ड्राइवर तो मर चुका था, वहीं राहुल और खुशी दोनों ही पूरी तरह ख़ून से नहा चुके थे। राहुल खुशी को देखते हुए बोला, "तुम ठीक तो हो ना, खुशी? तुम्हें कहीं कुछ लगा तो नहीं ना?" खुशी भी अपनी बंद होती आँखों से उसे देखकर बोली, "मैं ठीक हूँ, राहुल। पर अगर तुम्हें कुछ हो गया तो मैं भी जी नहीं पाऊँगी।" इतना बोलकर वो बेहोश हो जाती है।
वहीं अब राहुल को भी काफ़ी ज़्यादा चोट लगने के कारण उसकी भी आँखें बंद हो जाती हैं। वहीं अब खुशी और राहुल के घर वाले बड़ी ही मुश्किल से खुद को संभालकर उन दोनों को बाहर निकालते हैं और उन्हें दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल की तरफ़ लेकर निकल जाते हैं। वहीं उन दोनों की ही फैमिली का काफ़ी ज़्यादा बुरा हाल हो चुका था। दोनों की माँ का रो-रोकर बुरा हाल था, वहीं उनके पति खुद को संभालकर उन्हें भी संभाल रहे होते हैं, मगर कोई फ़ायदा नहीं। और वो शांत होंगी भी कैसे? उन्होंने अपनी आँखों के सामने अपने बच्चों को ऐसे ज़ख्मी देखा। आज ही उनकी शादी हुई और आज ही के दिन उनका इतना बड़ा हादसा हो गया…!!!
वहीं अब तक वो सभी हॉस्पिटल पहुँच चुके थे, और उन दोनों को ऑपरेशन रूम में ले जाया गया था। और उस रूम की रेड लाइट ऑन हो चुकी थी। बाहर सभी लोग अपनी आँखों में आँसू लिए, परेशान नज़रों से बस उस रूम को ही देख रहे होते हैं।
वहीं दूसरी तरफ, इसी हॉस्पिटल में एक और एक्सीडेंट का केस अभी-अभी आया होता है, जो दिल्ली शहर के सबसे अमीर परिवार का बेटा राहुल मित्तल होता है, जिसका अभी-अभी ही एक कार रेस के चक्कर में एक्सीडेंट हुआ होता है, और उसे भी इमरजेंसी वार्ड में शिफ़्ट कराया जाता है।
और वहीं मित्तल परिवार के सारे गार्ड्स वहाँ पर तैनात होते हैं। उस फ़्लोर को पूरी तरह से खाली करा दिया गया था, क्योंकि बात मित्तल परिवार के एकलौते बेटे की थी। मगर वो लोग शेखावत और राजवंश फैमिली को वहाँ से नहीं भेज पाए थे, क्योंकि ये दोनों फैमिली भले ही दिल्ली की नहीं थीं, मगर दिल्ली में भी इनकी पहचान कोई मामूली नहीं थी। क्योंकि ये दोनों ही फैमिली एक रॉयल फैमिली थीं, जो किसी भी पहचान की मोहताज नहीं थीं।
वहीं ऑपरेशन रूम में राहुल और खुशी दोनों का ही बेस्ट डॉक्टर इलाज कर रहे थे, मगर इन दोनों की हालत इतनी ख़राब थी कि इन्हें बचा पाना लगभग मुश्किल ही था। तभी राहुल के रूम का दरवाज़ा खुला और एक डॉक्टर उन सभी के पास आकर बोले, "आई एम सॉरी, पर हमने अपनी पूरी कोशिश कर ली, पर हम उन्हें बचा नहीं सकते। उनके पास बस कुछ मिनट ही हैं। तो आप लोग उनसे एक आख़िरी बार मिल लीजिए…"
डॉक्टर की बात सुनकर वो सभी लोगों की आँखें आँसुओं से भर जाती हैं, और उन सबका बुरा हाल था। तभी वो सभी राहुल के रूम में जाते हैं, तो देखते हैं कि राहुल अपनी आख़िरी साँसें ले रहा होता है। राहुल अपनी मॉम, डैड और सभी को देखकर अपनी लड़खड़ाती हुई आवाज़ में बोला, "मु… मुझे पता है… मेरे पास ज़्यादा समय नहीं है… पर मुझे पता है कि खुशी को कुछ नहीं होगा… और वो एकदम ठीक रहेगी।"
"आप सब मेरी एक लास्ट विश पूरी करना… मेरा ये दिल किसी ऐसे लड़के को डोनेट करना जो खुशी के काबिल हो… जो खुशी को मेरे ही तरह प्यार करे और उस लड़के से खुशी की शादी करवा देना… क्योंकि मेरा ये दिल खुशी के बगैर धड़क भी नहीं पाएगा…" "मु… मुझसे… ज़्यादा… कुछ… नहीं…" आप मेरी ये आख़िरी इच्छा पूरी करोगे?" राहुल के पापा उसके हाथ पर अपना हाथ रखकर बोले, "हाँ बेटा, हम ऐसा ज़रूर करेंगे।" इतना सुनते ही राहुल की साँसें थम सी जाती हैं।
और उसकी साँसें थमती देख सभी की साँसें अटक जाती हैं, और सभी वहीं पर बैठकर रोने लगते हैं। और राहुल की माँ तो बेहोश ही हो जाती है।
वहीं दूसरे वार्ड में डॉक्टर मिस्टर मित्तल के पास आकर बोले, "मिस्टर मित्तल, आपके बेटे की हालत काफ़ी ज़्यादा ख़राब हो गई है, और उनका काफ़ी बुरा एक्सीडेंट हुआ है, जिससे उनका हार्ट पूरी तरह से डैमेज हो गया है। हमें अर्जेंट ही उनके लिए हार्ट डोनर ढूँढ़ना होगा और उनका ऑपरेशन करना होगा, वर्ना हम इन्हें बचा नहीं पाएँगे।" वहीं डॉक्टर की बात सुनकर वो परेशान हो गए… और वो बोले, "इतने जल्दी हार्ट डोनर कहाँ मिलेगा… और उससे भी बड़ी बात, उसे मैच भी होना चाहिए।"
मिस्टर मित्तल परेशान से रूम के बाहर आकर बैठ जाते हैं और बाजू के रूम में इतना सब सुनकर एक नर्स से पूछते हैं, तो नर्स उन्हें सब बता देती है। और इस उम्मीद में कि उनके बेटे की जान बच सकती है, वो डॉक्टर से बात करते हैं। तब उन्हें पता चलता है कि उनके बेटे का हार्ट उस लड़के से बिलकुल मैच करता है।
ये सुनकर उनकी आँखों में चमक आ जाती है। वहीं खुशी के रूम का दरवाज़ा खुलता है, और एक नर्स राहुल के रूम में सबको जाकर बताती है कि खुशी कोमा में जा चुकी है। वहीं खुशी के कोमा की बात सुनकर तो उन्हें एक तसल्ली रहती है, मगर राहुल का सोचकर उन्हें फिर से दर्द होने लगता है।
वहीं ऐसे समय में बात तो नहीं करना चाहिए था, पर फिर भी मिस्टर मित्तल अपने बेटे की जान बचाने के लिए मिस्टर शेखावत से बात करने आते हैं, और उन दोनों के बीच एक सौदा हो जाता है।
वहीं अब खुशी और राहुल की मोहब्बत की कहानी अधूरी ही रह जाती है, और बैकग्राउंड में गाना बजने लगता है…
"हमारी अधूरी कहानी… हमारी अधूरी कहानी…"
यहाँ पर तो राहुल और खुशी की कहानी अधूरी रह गई, मगर क्या दूसरे राहुल के साथ खुशी की कहानी पूरी हो पाएगी? क्या वो दोनों कभी मिल पाएँगे या उनकी भी कहानी अधूरी ही रह जाएगी? जानने के लिए पढ़िए मेरी ये नई रचना, "हमारी अधूरी कहानी…"