हमारी अधूरी कहानी - Chapter 2
2 साल बाद राजस्थान की राजावत हवेली के एक बड़े कमरे में एक लड़की बिस्तर पर बेजान लाश की तरह पड़ी होती है। कमरे में बहुत सारी बड़ी-बड़ी मशीनें हैं। तभी लड़की की उंगलियों में कुछ हरकत होती है।
और उसे कुछ पुरानी धुंधली यादें दिखाई देने लगती हैं, जिन्हें याद करते ही उसके माथे पर ठंडे पसीने आने लगते हैं। उसके चेहरे पर बेहोशी की हालत में भी दर्द की लकीरें आ जाती हैं।
इन धुंधली यादों को याद करते हुए लड़की जोर से चीखती है, "राहुल..." इतना बोलते ही वह लड़की झटके से उठकर बिस्तर पर बैठ जाती है और इधर-उधर देखने लगती है। उसकी आँखों से मोटे-मोटे आँसू बहने लगते हैं। वह बिस्तर से नीचे उतरने की कोशिश करती है और जैसे ही अपने पैर जमीन पर रखती है, वह लड़खड़ाकर गिर जाती है।
नीचे के हॉल में सुबह का समय है। सारे लोग नाश्ते की मेज पर बैठकर नाश्ता करने वाले होते हैं। वहाँ लगभग छह से सात लोग बैठे हैं, मगर किसी के भी चेहरे पर कोई खुशी नहीं है, ना ही कोई भाव है।
ऐसा लगता है जैसे वे सब ज़िंदा तो हैं, पर उनमें जीने की कोई उम्मीद नहीं है। तभी उनके कानों में जोर से चिल्लाने की आवाज़ आती है, जिसे सुनकर सारे लोग एकदम जम जाते हैं।
और तभी सबके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। राधा जी कहती हैं, "लगता है खुशी को होश आ गया है, मेरी बेटी को होश आ गया है।" बोलते हुए वह अपनी जगह से उठने लगती हैं। उनकी बात सुनकर वहाँ बैठे सारे लोग उठ जाते हैं और ऊपर कमरे की तरफ़ देखते हुए कहते हैं, "हाँ, खुशी को होश आ गया है।
हम सबको ऊपर चलना चाहिए।" इतना बोलकर वे सब सीढ़ियों से होते हुए खुशी के कमरे तक आ जाते हैं। जब वे सब कमरे में आते हैं, तो यह देखकर हैरान हो जाते हैं कि खुशी अपने बिस्तर से नीचे जमीन पर पड़ी है और उसकी आँखों में ढेर सारे आँसू हैं।
इन्हें देख वे सब जल्दी से खुशी के पास आकर उसे उठाते हुए कहते हैं, "ये क्या कर रही हो खुशी बेटा? तुम्हें चोट आ सकती है।"
पर खुशी उनकी बातों को अनसुना करते हुए कहती है, "रा...हुल... राहुल कहाँ है? मुझे उससे मिलना है, उसे मेरी ज़रूरत है। वह मुझे बुला रहा है, मुझे उसके पास ले चलो, मुझे राहुल के पास जाना है।" बोलते हुए वह ज़िद करने लगती है।
और खुशी की बात सुनकर सबकी आँखें नम हो जाती हैं। किसी को भी अब समझ नहीं आता कि खुशी की बातों का क्या जवाब दें। तभी खुशी फिर से रोते हुए कहती है, "माँ, मुझे राहुल के पास जाना है। उसे कितनी चोट आई होगी, कितना बड़ा एक्सीडेंट हुआ था हमारा! उसे काफी ज़्यादा चोट लगी होगी।
खून... हाँ, बहुत सारा खून बह गया होगा उसका। उसे काफी ज़्यादा चोट आई होगी। मुझे राहुल के पास जाना है। कहाँ है वह? मुझे उसके पास ले चलो, मुझे उसे देखना है। उसे मेरी ज़रूरत होगी। वह तो मेरे बिना अकेला पड़ गया होगा ना, उसे मेरी याद आ रही होगी।" बोलकर वह बाहर जाने की कोशिश करने लगती है।
पर वह एक भी कदम आगे नहीं बढ़ पाती और लड़खड़ाने लगती है। उसे ऐसे देख निशा जी उसे संभाल लेती हैं और कहती हैं, "शांत हो जा खुशी बेटा, अभी तेरी तबीयत ठीक नहीं है। तुझे आराम करने की ज़रूरत है।"
पर खुशी उनकी सारी बातों को अनसुना करते हुए कहती है, "नहीं, मुझे आराम नहीं करना, बहुत आराम कर लिया। मुझे राहुल के पास जाना है, मुझे मेरे राहुल के पास जाना है। मुझे उसके पास ले चलो माँ, मुझे राहुल को देखना है। वह ठीक तो होगा ना? उसे कहीं ज़्यादा चोट तो नहीं लगी ना? मुझे उससे मिलना है।"
वह कहती है, "वह मेरा इंतज़ार कर रहा होगा और अगर मैं उसके पास नहीं गई तो वह मुझसे नाराज़ हो जाएगा। मुझे छोड़ो, मुझे जाने दो। वह हॉस्पिटल... हाँ, हॉस्पिटल में ही तो होगा। कितनी... कितनी सारी चोट आई थी उसे? कितना सारा खून बह रहा था उसका? मुझे उसके पास जाना होगा। उसे मेरी ज़रूरत होगी। वह इस समय काफी ज़्यादा दर्द में होगा।" बोलते हुए ही वह पागलों की तरह हरकत करने लगती है।
और उसकी इस हरकत को देख सारे घर वाले परेशान हो जाते हैं और किसी को भी कुछ समझ ही नहीं आता कि क्या करें और क्या ना करें।
और खुशी की ऐसी हालत भी किसी से देखी नहीं जा रही होती है। इसलिए निशा जी कहती हैं, "खुशी बेटा, ऐसे ज़िद मत कर। तू शांत हो जा, पहले हम तुझे सब बता देंगे।" बोलते हुए उनकी आँखें बहने लगती हैं।
और वे रोते हुए ही कहती हैं, "शांत हो जा बेटा, इस समय तेरा ऐसे पैनिक होना ठीक नहीं है। वैसे भी तू एक लंबी नींद से जागी है। शांत हो जा ना।" निशा जी की बात सुन खुशी चिल्लाकर रोते हुए कहती है, "नहीं माँ, मैं शांत नहीं रह सकती। वहाँ पर मेरा राहुल ज़ख्मी होगा, उसका खून बह रहा था माँ, खून! और वह काफी ज़्यादा घायल हो गया था। अभी उसे मेरी ज़रूरत होगी।
मुझे उसके पास जाना होगा, मुझे जाने दो माँ, मुझे राहुल के पास जाना है।" बोलते हुए ही वह पागलों की तरह खुद को राधा की पकड़ से छुड़ाने लगती है और बाहर की तरफ़ जाने लगती है। उसे ऐसे रोते और ज़िद करते देख राधा कहती है, "खुशी, क्यों ज़िद कर रही है बेटा? तू समझ क्यों नहीं रही? तेरा राहुल अब नहीं आने वाला है। वह बहुत दूर जा चुका है, इतना दूर जहाँ से वह अब कभी भी हमारे पास नहीं आ सकता है।
ना ही हम अब कभी भी उसे देख सकते हैं। तू समझ क्यों नहीं रही बेटा?" बोलकर वह रोने लगती है। और उनकी बात सुनकर खुशी रोते हुए उन्हें देखकर कहती है, "कहाँ... कहाँ गया मेरा राहुल? वह तो हॉस्पिटल... हाँ, हॉस्पिटल में ही होगा। उसे चोट आई है, इसलिए आप सब ऐसा बोल रहे हैं।
और मैं रोने लगूँगी उसे देखकर, इसलिए आप मुझे जाने नहीं दे रहे ना? पर मुझे उसे देखने जाना है। अगर आप सब मुझे जाने नहीं देंगे तो..." बोलते हुए वह वहाँ रखा एक चाकू उठा लेती है।
इसे देख सारे लोग डर जाते हैं। तभी खुशी कहती है, "अगर आप सबने मुझे जाने नहीं दिया तो मैं अपनी नस काट लूँगी। मुझे जाने दो, मुझे राहुल के पास जाना है। उसे मेरी ज़रूरत होगी।" बोलकर वह एकदम पागल जैसा ही बर्ताव करने लगती है।
और उसकी ऐसी हालत देख निशा जी से सहन नहीं होता, तो वह जोर से चिल्लाकर कहती है, "अब कभी नहीं आने वाला तेरा राहुल, वह मर गया है, समझी तू? तेरा राहुल मर गया है।"
दूसरी तरफ,
मित्तल एंटरटेनमेंट कंपनी:
राहुल मित्तल इस समय अपने केबिन में बैठा आराम से काम कर रहा होता है। तभी उसके केबिन का दरवाज़ा खुलता है और बाहर से एक लड़की आती है, जिसने अपने चेहरे पर काफी सारा मेकअप लगा रखा है। साथ ही वह काफी ज़्यादा सेक्सी और रिवीलिंग सी ड्रेस पहन रखी है।
और उस लड़की के चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान है। वह केबिन के अंदर आते ही कहती है, "राहुल बेबी, मैं आ गई...!" इतना बोलते हुए ही वह लड़की जाकर सीधे राहुल की गोद में बैठ जाती है। राहुल मित्तल भी उस लड़की को अपने पास देखकर काफी ज़्यादा खुश हो जाता है।
और उसे अपनी बाहों में भर लेता है। ऐसा करते ही वह लड़की, जिसका नाम मोनिका है और जो राहुल मित्तल की गर्लफ्रेंड है, राहुल के चेहरे पर बड़े ही सेडक्टिव तरीके से अपनी एक उंगली फेरते हुए कहती है, "राहुल बेबी, क्या तुमने अपने घर में बात की हमारी शादी को लेकर?"
राहुल, मोनिका के स्पर्श से बेहकते हुए कहता है, "तुम्हें तो पता ही है मोनिका, मेरे घर वाले मेरी शादी भले ही एक गरीब या अनाथ लड़की से करवा देंगे, मगर वे कभी भी किसी भी मॉडल या एक्ट्रेस से मेरी शादी नहीं करवाएँगे। और तुम्हें भी पता है कि मैं अपने माँ-बाप के ख़िलाफ़ नहीं जा सकता हूँ।
मगर तुम फ़िक्र मत करो, मैं दादा जी को मना लूँगा।" इतना बोलकर राहुल मोनिका को देखने लगता है, जिसने अब तक उसके कोट की सारी बटन खोल चुकी थी।
मोनिका बड़े ही सेडक्टिव अंदाज़ में कहती है, "राहुल बेबी, तुम्हें नहीं लगता हम दोनों एक लंबे ब्रेक के बाद मिले हैं? तो हमें कुछ मस्ती और काफी सारा प्यार करना चाहिए? तुम बताओ, हम यहीं पर प्यार करें? या फिर केबिन में बने रूम में चलें?"
मोनिका की बात सुनकर राहुल उसे अपनी गोद में उठा लेता है और वे दोनों राहुल के ही केबिन में बने रूम में चले जाते हैं। वहाँ जाते ही दोनों बिस्तर पर चढ़ जाते हैं और बिस्तर पर चढ़ते ही दोनों अपने कपड़े निकालकर वहीं ज़मीन पर फेंक देते हैं और एक-दूसरे को बड़ी ही सिद्दत के साथ चूमने लगते हैं।
और थोड़ी ही देर में मोनिका की सिसकियों की आवाज़ से वह रूम गूंज उठता है।