Magical girl Ch. 1

Magical girl - Chapter 1

Posted by Shayna choudhary • Jan 27, 2025 11:23 AM

मुंबई के एक मशहूर नाइट क्लब के बाहर, रात के ठीक 11:30 बजे, एक लड़की को तीन-चार गार्डों ने बुरी तरह नाइट क्लब से बाहर निकालकर सड़क पर फेंक दिया था। उस वक्त तेज बारिश हो रही थी। गिरने से लड़की के शरीर पर कीचड़ लग गया था। उसके आँसू बारिश में छिप गए थे। उसे अपनी किस्मत पर बहुत रोना आ रहा था। उसे पहले भी कई जगह बेइज़्ज़ती सहनी पड़ी थी, लेकिन आज की बेइज़्ज़ती ने उसे पूरी तरह तोड़ दिया था। उसने जीने की इच्छा भी छोड़ दी थी।

वह रात के अंधेरे में, दौड़ती-भागती गाड़ियों के बीच, सड़कों पर आगे बढ़ने लगी। उसने सोचा था कि वह अपनी ज़िंदगी खत्म कर देगी, क्योंकि उसकी ज़िंदगी में सिर्फ़ दुख, दर्द और बेइज़्ज़ती ही थी।

अवनी ने सोच लिया था कि वह अपनी बेमतलब ज़िंदगी खत्म कर देगी। इसलिए वह तेज़ी से, गाड़ियों की परवाह किए बिना, सड़कों पर दौड़ने लगी। उसे नहीं पता था कि वह कहाँ जा रही है। दौड़ते-दौड़ते उसे एहसास हुआ कि उसके पीछे गली के कुछ कुत्ते पड़ गए हैं।

अवनी को कुत्तों से बहुत डर लगता था। वह अपनी जान देना चाहती थी, लेकिन कुत्ते के काटे जाने से नहीं। उसने अपनी तेज़ी बढ़ा दी और उल्टा-सीधा दौड़ने लगी। कुत्तों से डर के मारे छुपते-छुपाते, वह जो भी दिखाई दिया, उसी में छुप गई।

अवनी ने देखा कि वह शहर के कूड़ेघर में छुपी है, जहाँ सारा कूड़ा जमा होता था। वहाँ भयानक बदबू आ रही थी, लेकिन अवनी के पास कोई और रास्ता नहीं था। उसे कुत्तों से बचना था। अवनी ने अपना नाक-मुँह बंद करके, कुत्तों के जाने का इंतज़ार करने लगी।

वह सोच रही थी कि जैसे ही कुत्ते जाएँगे, वह किसी गाड़ी के आगे या किसी ऊँचाई से कूदकर अपनी जान दे देगी। उसने यह फैसला कर लिया था; इतनी बेइज़्ज़ती और दर्द उसका जिस्म झेल नहीं पा रहा था।

कुछ देर और कुत्तों से छिपी रही। फिर, जब अवनी को कुत्तों के भौंकने की आवाज़ बंद हुई, उसने हल्का सा सिर बाहर निकालकर देखा। चारों तरफ कुछ नहीं दिखा, तो उसने आगे बढ़ने का फैसला किया।

लेकिन तभी अवनी को एहसास हुआ कि उसकी पीठ में कुछ चुभ रहा है। वह एक कूड़े के पास छुपी थी, इसलिए सोचा कि कोई कूड़ा चुभ रहा होगा। वहाँ की भयानक बदबू उसे ज़्यादा देर वहाँ नहीं रहने दे रही थी।

तब अवनी ने सोचा कि वह कहीं से कूदकर या किसी बड़ी गाड़ी के आगे कूदकर अपनी जान दे देगी, लेकिन इस कूड़े की बदबू में नहीं।

जैसे ही अवनी वहाँ से जाने लगी, उसका ध्यान एक जगह अटक गया। ध्यान से देखने पर वह हैरान रह गई।

उस अंधेरे में, कूड़े के ढेर में कुछ जगमगा रहा था। अवनी हैरान हो गई कि इतनी रात को यह क्या जगमगा रहा था। पहले उसने सोचा कि शायद किसी की बैटरी या इमरजेंसी लाइट गिर गई होगी, लेकिन जब उसमें से अजीब सी आवाज़ आने लगी, तो उसने देरी किए बिना कूड़े के ढेर में हाथ दे दिया।

कुछ खास दिखाई नहीं दे रहा था, लेकिन हल्की जगमगाहट के साथ एक घड़ी उसके हाथों में आ गई। अवनी हैरान थी कि यह घड़ी किसकी थी। जैसे किसी छोटे बच्चे के पास लाइट और बोलने वाली घड़ी होती है, उस घड़ी को देखकर अवनी को ऐसी ही घड़ी की याद आई। वह सोचने लगी कि किसी बच्चे की यह घड़ी गलती से कूड़े में आ गई होगी।

अवनी ने सोचा, वह इस बच्चे की घड़ी का क्या करेगी? वह तो मरने वाली थी। जैसे ही अवनी घड़ी फेंकने लगी, उसमें से आवाज़ आई, "मुझे मत फेंको!"

"क्या? या... या... या..." अवनी की हैरानी का कोई ठिकाना नहीं था। वह सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि कोई घड़ी बोल सकती थी।

अवनी को लगा कि क्लब में पिलाई गई ड्रिंक के नशे से उसे यह घड़ी बोलती हुई सुनाई दे रही है।

फिर अवनी ने घड़ी फेंकने की कोशिश की, लेकिन फिर से आवाज़ आई, "मुझे मत फेंको!" अब अवनी को काफी अजीब लगा। उसने सोचा कि उसे सुबह देखना चाहिए कि यह क्या है। बिना सोचे-समझे उसने घड़ी अपने बाएँ हाथ पर बाँध ली और आँखें बंद करके सोचने लगी, "या तो कहीं जाकर मर जाए या सीधा उठकर अपने घर पहुँच जाए।"

जैसे ही अवनी ने मन ही मन में यह सोचा और आँखें खोली, तो उसकी हैरत का कोई ठिकाना नहीं था। वह अपने घर के कमरे में थी। अवनी को यकीन नहीं हो रहा था कि वह वाकई अपने कमरे में है, क्योंकि अभी थोड़ी देर पहले वह कूड़े के ढेर के पास थी। लेकिन अवनी का दिल इस बात को मानने को तैयार नहीं था। दिमाग सोच रहा था कि ड्रिंक के साइड इफेक्ट हो रहे हैं, क्योंकि पहली बार उसने ड्रिंक की थी, तो शायद इसी वजह से उसे उल्टी-सीधी चीज़ दिखाई और सुनाई दे रही है।

जब अवनी को एहसास हुआ कि वह अपने कमरे में है, तो उसने अपने कपड़े बदल लिए और सीधा बिस्तर में लेट गई। वह जल्द से जल्द हैंगओवर से छुटकारा पाना चाहती थी। वह नहीं चाहती थी कि हैंगओवर उसे उल्टी-सीधी चीज़ दिखाए। उसे किसी तरह का कुछ होश नहीं था और वह गहरी नींद में सो गई।

उन्नीस साल की अवनी मेहता एक मिडिल-क्लास लड़की थी, जो अपनी ज़िंदगी को सामान्य तरीके से जीने की कोशिश कर रही थी। उसके घर में सिर्फ़ उसकी माँ और एक छोटा भाई था। उसके पापा का बहुत समय पहले देहांत हो गया था, लेकिन अवनी की माँ ने उसके पिता के एक दोस्त से दूसरी शादी कर ली थी।

लेकिन अवनी इस शादी के ख़िलाफ़ थी। उसने अपने पिता के दोस्त, यानी अपने अंकल को, कभी अपना पिता नहीं माना। उसके सौतेले पिता की अवनी पर बुरी नज़र थी और वह ज़्यादा शराब पीते थे। इसीलिए अवनी अपने सौतेले पिता और अपनी माँ से कटी-कटी सी रहती थी।

जब भी अवनी अपनी माँ को अपने सौतेले पिता की बुरी नियत के बारे में बताती, उसकी माँ उसे टोंकती रहती थी और कहती थी कि इस घर को चलाने के लिए किसी मर्द की ज़रूरत है। "अगर मैं यह शादी नहीं करती, तो या तो मुझे अपना जिस्म बेचना पड़ता या तुम्हें बेचकर इस घर का ख़र्चा चलाती। हम लोग कोई अमीर या टाटा-बिड़ला नहीं हैं। हम लोग मिडिल-क्लास लोग हैं, और हमें हम लोगों की कुछ ज़रूरत है, जिसे एक आदमी ही पूरा कर सकता है। एक औरत कभी भी मर्दों की भीड़ में बाहर अकेले नहीं कमा सकती।"

अवनी की माँ रो-धोकर अवनी को इसी तरह की बातें सुनाकर उसे अपने सौतेले पिता को अपनाने के लिए मजबूर करती थी।

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