Magical girl Ch. 2

Magical girl - Chapter 2

Posted by Shayna choudhary • Jan 28, 2025 06:19 AM

उन्नीस साल की अवनी मेहता एक मध्यमवर्गीय लड़की थी जो अपनी ज़िन्दगी को सामान्य रूप से जीने का प्रयास कर रही थी। उसके घर में परिवार के नाम पर सिर्फ़ उसकी माँ और एक छोटा भाई था। उसके पिता का बहुत समय पहले देहांत हो गया था।

लेकिन अवनी की माँ ने उसके पिता के एक दोस्त से दूसरी शादी कर ली थी।

लेकिन अवनी इस शादी के ख़िलाफ़ थी। अवनी ने कभी अपने पिता के दोस्त, यानी अपने अंकल को अपना पिता नहीं माना था।

एक तो उसके सौतेले पिता की अवनी पर बुरी नज़र थी, दूसरा वह ज़्यादा शराब पीते थे।

इसलिए अवनी हमेशा अपने सौतेले पिता के साथ-साथ अपनी माँ से भी तनावपूर्ण व्यवहार रखती थी।

जब भी अवनी अपनी माँ को अपने सौतेले पिता की बुरी नियत के बारे में बताती, तब उसकी माँ दिन भर अवनी को डाँटती रहती थी।

"इस घर को चलाने के लिए किसी मर्द की ज़रूरत है। अगर मैं ये शादी नहीं करती, तो या तो मुझे अपना शरीर बेचना पड़ता, या तुम्हें बेचकर इस घर का खर्चा चलाना पड़ता। हम लोग कोई अमीर या टाटा-बिड़ला नहीं हैं, हम लोग मध्यमवर्गीय लोग हैं और हमें अपनी कुछ ज़रूरतें हैं जिन्हें एक आदमी ही पूरा कर सकता है। एक औरत कभी भी मर्दों की भीड़ में अकेले बाहर नहीं कमा सकती।"

अवनी की माँ रो-धोकर अवनी को इसी तरह की बातें सुनाकर उसे सौतेले पिता को अपनाने के लिए मजबूर करने का प्रयास करती थी।

लेकिन अवनी ने कभी भी अपने अंकल को अपना पिता नहीं माना था। क्योंकि वह अपने पिता से बहुत प्यार करती थी। अपने पिता के जाने के बाद अवनी बहुत अकेली हो गई थी। वह रोज़ रात को रोया करती थी और सोचा करती थी कि एक दिन वह इतने पैसे कमा लेगी कि अपनी माँ की इस गलतफहमी को दूर कर देगी कि एक घर को चलाने के लिए किसी मर्द की ज़रूरत होती है।

अवनी एक किराए के घर में रहती थी। उसका सौतेला पिता जैसे-तैसे कुछ रुपये कमाकर उसकी माँ को दे दिया करता था, और कुछ रुपये शराब पी जाता था।

इतना ही नहीं, अवनी की माँ भी बड़े घरों में झाड़ू-पोछा और बर्तन का काम किया करती थी।

इस बीच, अवनी जैसे-तैसे कुछ बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपने कॉलेज की फीस भर रही थी और अपने छोटे भाई की पढ़ाई का भी ख़र्चा उठा रही थी। जैसे-तैसे उन लोगों की ज़िन्दगी चल रही थी।

फिर एक दिन कॉलेज में कुछ अमीर लड़कियों ने अवनी का खूब मज़ाक उड़ाया था, क्योंकि अवनी के पास पहनने के लिए सिर्फ़ कुछ ही जोड़ी कपड़े थे, जिन्हें वह बारी-बारी से पहन लिया करती थी। लेकिन आज जब अवनी कॉलेज गई थी, तो अचानक उसका दुपट्टा एक दरवाज़े में लगी कील पर अटक गया था।

जिससे उसका पूरा दुपट्टा फट गया था। अवनी को बहुत रोना आ रहा था, क्योंकि उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अपने लिए नया दुपट्टा खरीद लेती। जैसे ही अवनी का दुपट्टा फटा, वहाँ मौजूद लड़के-लड़कियाँ जोर-जोर से हँसने लगे।

एक मनचला लड़का अवनी के पास आकर खड़ा हो गया और कहने लगा, "क्या हुआ है? अगर तुम मुझे अपनी ओर आकर्षित करना चाहती हो, तो मैं तो ऐसे ही तुम पर मरता हूँ। तुम्हें इस तरह से अपना दुपट्टा फाड़कर मुझे अपनी ओर आकर्षित करने की कोई ज़रूरत नहीं थी।"

जैसे ही उस मनचले लड़के ने यह कहा, क्लास के सभी लड़के-लड़कियाँ जोरों से हँसने लगे। अवनी का दिल किया कि धरती फट जाए और वह उसमें समा जाए।

तभी अचानक एक लड़की वहाँ आई और अवनी का मज़ाक उड़ाते हुए कहने लगी, "अरे अवनी, तुम्हारे पास तो एक ही दुपट्टा था, और वह भी फट गया, तो अब क्या करोगी तुम?"

अवनी ने उसकी किसी बात का जवाब नहीं दिया।

तभी उस भीड़ में से एक लड़की, दिव्या, आगे आई। उसने वहाँ आकर अवनी का हाथ पकड़ लिया और कहने लगी, "तुम लोगों को शर्म आनी चाहिए! एक तो उस बेचारी का दुपट्टा फट गया है, ऊपर से तुम लोग उसका इस तरह से मज़ाक उड़ा रहे हो।"

दिव्या शुरू से ही अवनी का थोड़ा बहुत साथ देती थी। लेकिन अवनी के कुछ ख़ास दोस्त नहीं थे। अवनी किसी से ज़्यादा बात नहीं करती थी। वह ज़्यादा समय अपनी पढ़ाई में बिताती थी।

क्योंकि उसका मानना था कि जितना ज़्यादा वह पढ़ेगी, उतना वह आगे बढ़ेगी और सफल होगी। उसे पूरी उम्मीद थी कि एक न एक दिन उसे एक अच्छी नौकरी ज़रूर मिलेगी।

क्योंकि अवनी ने पहले भी कई जगह नौकरी के लिए कोशिश की थी, लेकिन उसके पिछले अनुभव और गरीबी को देखकर कोई भी उसे काम देने को तैयार नहीं हुआ करता था।

क्योंकि सभी लोगों की यही मान्यता थी कि अगर ये गरीब घर की लड़कियाँ हमारे बड़े-बड़े ऑफिस में काम करेंगी, तो हमारे घरों का काम कौन करेगा?

क्योंकि सभी लोगों का मानना था कि अवनी जैसी लड़कियाँ सिर्फ़ घरों में काम करने, झाड़ू-पोछा और बर्तन करने के लिए ही बनी हैं। जो काम उनकी माँ करती है, उन्हें भी वही काम करना चाहिए। कई जगह अवनी को तरह-तरह की बातें सुनने को मिलती थीं।

इसलिए अवनी ने थक-हारकर इंटरव्यू देना छोड़ दिया था और उसने सोच लिया था कि वह पढ़ाई के बल पर अपने आप को मज़बूत करेगी और कामयाबी हासिल करेगी।

यह सोचते हुए अवनी हर रोज़ सुबह सुबह की शिफ़्ट में बच्चों को ट्यूशन देकर कॉलेज जाती थी, फिर कॉलेज से आने के बाद शाम की शिफ़्ट में कुछ और बच्चों को ट्यूशन देती थी।

लेकिन उसके ट्यूशन के बच्चे भी ज़्यादातर गरीब घरों से ही आते थे। कुछ लोग तो उसे फीस दे दिया करते थे, और कुछ लोग उसकी फीस को हर बार टालते रहते थे। इसलिए अवनी का गुज़ारा बड़ी मुश्किल से हो पाता था। इसलिए वह कॉलेज के खाली समय में कैंटीन में काम किया करती थी, जिससे वह किसी न किसी तरह से अपनी और अपने भाई की कॉलेज की फीस मैनेज किया करती थी।

आज जैसे ही अवनी का दुपट्टा फटा, उसे बार-बार रोना आ रहा था। वह सोच रही थी कि किसी की किस्मत इतनी भी क्या बुरी हो सकती है! एक तो पहनने के नाम पर उसके पास कुछ ही कपड़े थे, और आज उसके इस दुपट्टे ने भी उसका साथ छोड़ दिया था।

तभी दिव्या अवनी का हाथ पकड़कर उसे डेस्क पर ले गई। अवनी की आँखों से आँसू निकलने लगे। तभी दिव्या ने स्टेपलर से अवनी के दुपट्टे को सिल दिया। लेकिन दुपट्टा काफी फट चुका था, इस छोटे से सिलाई से उसका कुछ नहीं होने वाला था।

लेकिन तब तक के लिए काम चल गया था। तभी क्लास में थोड़ी सी हलचल मच गई, क्योंकि क्लास का सबसे हैंडसम लड़का, वीर ओब्रॉय, क्लास में आया था।

पिछले तीन साल से वीर अवनी को इम्प्रेस करने की कोशिश कर रहा था, क्योंकि अवनी सबसे अलग और खूबसूरत लड़की थी। लेकिन कभी भी अवनी वीर के झांसे में नहीं आई थी।

क्योंकि अवनी वीर को अच्छी तरह जानती थी। वीर हर तीसरे दिन किसी न किसी नई लड़की के साथ घूमता रहता था। लेकिन आज तक अवनी ने उसे कोई मौका नहीं दिया था। कहीं न कहीं इस बात से वीर के मन में अवनी के प्रति कुछ अलग ही तरह की इच्छा जाग चुकी थी।

और आज अवनी के दुपट्टे के फटने की खबर वीर को मिल चुकी थी। कहीं न कहीं वह भी अवनी को अपनी आँखों से देखने के लिए आ गया था।

क्लास में आते ही उसने अवनी को ग़ौर से देखना शुरू कर दिया था। हालाँकि अवनी का दुपट्टा नीचे से फटा था, और दिव्या ने उसे स्टेपलर से सिल दिया था, लेकिन फटा हुआ दुपट्टा हर किसी की नज़रों में इस तरह आ रहा था मानो अवनी के शरीर का एक हिस्सा सबके सामने नज़र आ रहा हो।

जैसे ही अवनी ने देखा कि वीर की नज़रें उसके उभरे हुए अंगों पर टिकी हुई हैं, उसने जल्दी से खुद को ढँकने की कोशिश की।

और दिव्या से कहा, "मुझे लगता है मुझे आज बाकी की क्लासेस अटेंड नहीं करनी चाहिए, मैं घर चलती हूँ।"

जैसे ही अवनी ने यह कहा, दिव्या ने कहा, "अरे छोड़ो, तुम इतनी छोटी सी बात को लेकर इतना बड़ा मुद्दा क्यों बना रही हो? क्या तुमने नहीं देखा पूरी क्लास में अकेली तुम ही हो जो दुपट्टा पहनकर कॉलेज आती हो। बाकी सारी लड़कियाँ या तो शॉर्ट्स पहनती हैं, या हाफ निक्कर, या जीन्स। और तुम हो कि एक दुपट्टा न होने पर भी इतना परेशान हो रही हो। और फिर इससे फ़र्क क्या पड़ेगा? बस रिलैक्स रहो।"

जैसे ही दिव्या ने यह बातें कही, अवनी उसे देखने लगी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह उस वक्त दिव्या को क्या जवाब दे।

क्योंकि अवनी को हर किसी की नज़रें अपने ऊपर असहज लग रही थीं। उसे ऐसा लग रहा था कि हर कोई उसे अपनी गंदी नज़रों से घूर रहा हो।

जैसे-तैसे उस दिन का कॉलेज ख़त्म हुआ। जैसे ही सभी लोग अपने-अपने घर जाने लगे, अचानक वीर ने अवनी का रास्ता रोक लिया।

अवनी अचानक वीर को देखकर थोड़ी घबरा गई और धीमी आवाज़ में बोली, "वीर, तुम क्या कर रहे हो? तुम इस तरह से मेरा रास्ता क्यों रोक रहे हो?"

तभी वीर ने अवनी पर गौर से देखते हुए कहा, "अवनी डार्लिंग, मैं तुम्हारे लिए एक बेहतरीन ऑफर लेकर आया हूँ। मैंने सुना है कि तुम्हारा इकलौता दुपट्टा फट गया है। तो मैं चाहता हूँ कि क्यों ना तुम आज मेरे साथ चलो, मैं तुम्हें मॉल ले जाता हूँ और तुम्हें बढ़िया-बढ़िया ब्रांडेड कपड़े दिलाता हूँ।"

तब अवनी ने वीर की ओर देखते हुए कहा, "वीर, मुझे किसी तरह के कपड़ों की ज़रूरत नहीं है। और मैंने कब कहा कि मुझे कपड़े चाहिए? मुझे लगता है तुम्हें अपने काम से काम रखना चाहिए।"

यह कहकर अवनी वहाँ से जाने लगी। लेकिन वीर को उसका यह जवाब सुनकर गुस्सा आ गया और उसने उसका हाथ पकड़कर अपनी ओर खींच लिया और कहने लगा, "आखिरकार किस बात का घमंड है तुम्हें? तुम्हारी दो पैसे की औकात नहीं है मेरे सामने। तुम दो कोड़ी की लड़की होकर इस तरह से मेरे सामने शेर बनती फिरती हो। तुम जानती हो, तुम्हारे जैसी कितनी ही लड़कियों को मैं अपने बिस्तर पर सुला चुका हूँ। लेकिन तुम ही हो जो आज तक नखरे कर रही हो।"

यह कहते हुए वीर ने अपने होंठों पर हाथ फेरा।

वीर की बातें और उसका व्यवहार सुनकर अवनी को बहुत गुस्सा आया और उसने वीर के मुँह पर जोरदार तमाचा मार दिया।

जैसे ही अवनी ने वीर को तमाचा मारा, वीर का चेहरा गुस्से से लाल हो गया, क्योंकि उसकी नज़रें वहाँ खड़े लड़के-लड़कियों पर पड़ी थीं।

जैसे ही अवनी ने सबके सामने वीर को तमाचा मारा, उसे अपनी बहुत बेइज़्ज़ती महसूस हुई और वह गुस्से से भर गया। लेकिन अवनी पहले ही वहाँ से जा चुकी थी।

तभी वीर गुस्से से बोला, "बहुत जल्द..."

आखिर अपनी को नीचा दिखाने के लिए वीर किस हद तक जाएगा? और क्या अवनी वीर की साज़िशों से बच पाएगी? जानने के लिए बने रहिए। कृपया अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रियाएँ कमेंट में दें।

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