Magical girl Ch. 3

Magical girl - Chapter 3

Posted by Shayna choudhary • Jan 28, 2025 06:19 AM

जैसे ही अवनी ने सबके सामने वीर को चांटा मारा, उसे अपनी बेइज्जती का एहसास हुआ और वह गुस्से से भर गया।

लेकिन सारा पहले ही उसे चांटा मारकर जा चुकी थी। तब वीर गुस्से से बोला, "तुम्हें इसकी कीमत चुकानी होगी। देखना, बहुत जल्द तुम्हारा ऐसा हाल करूँगा कि तुम सोच भी नहीं सकती।"

ऐसा कहकर वीर चला गया। अवनी अपने घर भागना चाहती थी क्योंकि सबकी चुभती नज़रें उसे महसूस हो रही थीं। वह उनसे बचने के लिए जल्दी से घर पहुँचना चाहती थी।

और जल्दी ही वह घर पहुँच गई। जैसे ही अवनी घर गई, उसने देखा कि उसका सौतेला बाप लगातार ड्रिंक कर रहा था और उसकी माँ उसे चकना परोस रही थी। अवनी पहले से ही गुस्से में थी और अब उसका गुस्सा और बढ़ गया।

बिना सोचे-समझे उसने आगे बढ़कर अपनी माँ के हाथ से चकना छीनकर जमीन पर फेंक दिया।

और अपनी माँ की ओर गुस्से से देखते हुए बोली, "आखिर आप यह सब क्या कर रही हैं? इस आदमी को घर में, अपने जवान बच्चों के रहते हुए, दिन-दहाड़े शराब पिला रही हैं? क्या यह आपको शोभा देता है? क्या इस घर को चलाने के लिए किसी मर्द की ज़रूरत है? क्या औरतें घर में काफी नहीं हैं?"

अवनी के कहने और करने पर उसकी माँ को गुस्सा आ गया। उसने खींचकर अवनी के मुँह पर एक चांटा मारा और कहने लगी, "तू जानती भी है हम किस हालात में गुज़र रहे हैं और तुझे अभी भी इस शराब की पड़ी है? शायद तू भूल रही है, यह तुम्हारा बाप है, सौतेला ही सही, लेकिन यह तुम्हारा बाप है। और हाँ, अब तू इन्हें 'पिताजी' कहने की आदत डाल लो। और अगर तुझे ज़्यादा ही खुद्दारी सूझ रही है, तो क्यों नहीं कोई नौकरी ढूँढ लेती हो और उससे घर का खर्चा चलाने लग जाती हो? घर का खर्चा, तुम्हारे भाई की पढ़ाई, इस घर की सब्ज़ी, और घर का किराया भी देना होता है। और यह अगर अपने कमाए हुए पैसों से दारू पीता है, तो कुछ हिस्सा मुझे भी देता है जिससे मैं इस घर का किराया देती हूँ। समझी तू?"

अवनी ने अपनी माँ की बातें सुनीं। वह गुस्से से रोते हुए अपने कमरे में चली गई। उसे अपनी किस्मत पर रोना आ रहा था। पहले उसके पिता, जो हमेशा उसे प्यार करते थे और आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करते थे, ने उसे पढ़ाने के लिए क्या कुछ नहीं किया था!

उन्होंने उसे कभी यह एहसास नहीं होने दिया था कि घर में सब्ज़ी, रोटी, राशन, या स्कूल की फीस देनी है। सारे काम उसके पिता वक़्त से पहले ही पूरे कर दिया करते थे। अवनी को बहुत बाद में पता चला था कि उसके पिता तीन-तीन जगह काम किया करते थे।

दिन-रात वह काम किया करते थे, जिसकी वजह से उन्होंने अपनी सेहत का कभी ख्याल नहीं रखा और वही उनकी मौत का कारण बन गया।

अवनी कितनी देर तक अपने पिता के बारे में सोचती रही, पता नहीं, लेकिन गहरी नींद में सो गई। अगली सुबह जैसे ही अवनी उठी, वह परेशान हो गई क्योंकि उसे याद आया कि उसका एक दुपट्टा कॉलेज में फट गया था और अब उसके पास पहनने लायक कपड़े नहीं थे।

उसके पास सिर्फ़ एक जोड़ी अच्छा सा दुपट्टा था। उसे किसी तरह से एक दुपट्टा खरीदना होगा ताकि वह सूट पर पहन सके, और हो सके तो एक जोड़ी कपड़े ज़्यादा खरीद लेगी। काफी महीने से उसने अपने लिए कोई नया कपड़ा नहीं खरीदा था।

और कल गुस्से की वजह से उसने किसी बच्चे को ट्यूशन भी नहीं दिया था, जिसकी वजह से कुछ बच्चों के माँ-बाप ने उसे पैसे नहीं दिए थे।

अवनी आज ज़्यादा उदास थी। ऊपर से उसकी माँ ने उसे घर का किराया भरने को कहा था। अवनी ने सोचा कि वह ज़्यादा मेहनत करेगी और घर का किराया खुद देगी। अगले दिन सुबह उठकर, बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर, नहा-धोकर तैयार होकर कॉलेज गई तो उसके चेहरे पर उदासी साफ़ दिखाई दे रही थी।

तभी दिव्या ने अवनी को देखा और पूछा, "क्या बात है अवनी? तुम इतनी उदास क्यों हो?" तब अवनी ने अपनी परेशानी दिव्या को बताई, "क्या बताऊँ यार, घर में बहुत टेंशन है। मुझे घर का किराया देना है, लेकिन कोई ढंग की नौकरी नहीं मिल रही है। मैंने सोचा था कि पढ़ाई के साथ-साथ घर का भी कुछ खर्चा कम कर लूँगी, लेकिन कुछ नहीं हो पा रहा है।"

अवनी की बात सुनकर दिव्या कुछ सोचने लगी और बोली, "अगर तू बुरा ना माने, तो मेरे पास एक काम है। अगर तू चाहे, तो रात में एक घंटा काम कर सकती है, और एक घंटे के तुझे पूरे ₹2500 मिलेंगे।"

"क्या?! क्या कह रही हो तुम? ऐसा कौन सा काम है जिसके लिए एक घंटे में ₹2500 मिलेंगे? मैं बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर मुश्किल से ₹2000 कमा पाती हूँ, और उससे अपना और अपने भाई का खर्चा निकाल रही हूँ।"

दिव्या ने कहा, "देखो, मैं तुझे बताती हूँ। कॉलेज से फ्री होकर कुछ लोग स्ट्रेस दूर करने के लिए एक जगह जाते हैं। बस उस जगह पर तुझे लोगों को जूस, पानी, या ड्रिंक सर्व करनी होगी। और सिर्फ़ एक घंटे के लिए ₹2500 मिलेंगे।"

अवनी कुछ सोचने लगी और बोली, "नहीं-नहीं, मैं इस तरह की जगह नहीं जा सकती। तुम नहीं जानती वहाँ कितने घटिया लोग होते हैं। मैंने टीवी में देखा है, वहाँ लड़कियों का जाना ठीक नहीं है।"

दिव्या ने अवनी को समझाया, "देख, मैंने तुझे काम बताया, और मैं तेरी मदद कर सकती हूँ। ऐसा नहीं है कि वहाँ सब बिगड़े हुए लोग ही आते हैं। सब कुछ तुम्हारे ऊपर डिपेंड है। अगर तुम अपना काम ठीक करोगी, तो कोई तुम्हें कुछ नहीं कहेगा। तुम्हें सिर्फ़ एक घंटा काम करना है और ₹2500 लेने हैं।"

दिव्या के प्यार से समझाने पर अवनी मान गई। "इस वक़्त मेरी मजबूरी बहुत बड़ी है। और मैं अपनी माँ को दिखाना चाहती हूँ कि मैं भी कमा सकती हूँ और इस घर का किराया भी भर सकती हूँ। कमाने के लिए मुझे उस सौतेले बाप को घर में शराब पिलाने की ज़रूरत नहीं है, और इस घर में किसी मर्द की कोई ज़रूरत नहीं है।"

अवनी मन ही मन में ये बातें सोचने लगी और दिव्या से बोली, "ठीक है यार, अगर ऐसी बात है, तो मैं आज शाम को तुम्हारे साथ चलूँगी।"

दिव्या मुस्कुराई, आगे बढ़कर अवनी को गले लगा लिया और बोली, "मुझे पूरी उम्मीद थी कि तू मानेगी। मैं आज ही तेरी बात अपने अंकल से कर लेती हूँ।"

अवनी ने हल्का सा हाँ में अपनी गर्दन हिलाई और क्लास में चली गई। दिव्या छुपते-छुपाते कॉलेज के पार्क में चली गई। वहाँ उसकी नज़र वीर ओबेराय पर पड़ी। वीर भी दिव्या को देख रहा था। वह दिव्या के पास आया और बोला, "आओ आओ मिस दिव्या आहूजा, कैसे आना हुआ?"

दिव्या ने आगे बढ़कर वीर को गले लगा लिया, उसके होंठों को चूमा और बोली, "तुम्हारा काम हो गया है।"

वीर ने खुशी से दिव्या के होंठों को चूमा, उसे टाइट हग किया और बोला, "वाह मेरी जान! मुझे पूरी उम्मीद थी तुम मेरा काम जरूर करोगी। अब तुम देखना, उस लड़की का घमंड कैसे तोड़ता हूँ। बस तुम उसे आज रात बार में ले आओ।"

दिव्या मुस्कुराई और बोली, "देखो, उसके साथ तुम एक रात गुज़ार सकते हो, लेकिन उसके बाद तुम हमारी कमिटमेंट मत भूलना। तुम सिर्फ़ मेरे ही बनकर रहना और हमेशा मुझे खुश रखना है।"

वीर ने मुस्कुराते हुए फिर उसके होंठों को चूमा और बोला, "मेरी जान, तुम्हें परेशान होने की कोई ज़रूरत नहीं है। तुम जैसा कहोगी, मैं वैसा ही करूँगा।"

अवनी आज ख़ुश थी क्योंकि दिव्या ने उसे पैसे कमाने का रास्ता बताया था। उसे पैसों की ज़रूरत थी क्योंकि घर के हालात बुरे थे। उसने फैसला कर लिया था कि वह एक घंटे का काम ज़रूर करेगी। सिर्फ़ एक घंटे की बात थी, जितना वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती है।

अवनी अपने घर तैयार होने लगी। जैसे ही वह बाहर जाने लगी, उसकी माँ आ गई और बोली, "यह लड़की इतना सज-धज के कहाँ जा रही है? तेरे पिता घर आने वाले हैं, और तू इस वक़्त घर से बाहर जा रही है। अगर तुझे घर पर नहीं पाएँगे, तो परेशान हो जाएँगे। इस वक़्त तू कहीं मत जा।"

अवनी को बहुत गुस्सा आया। "मैंने आपसे कितनी बार कहा है, वह सिर्फ़ आपके पति हैं, मेरे पिता नहीं। और मैं एक ज़रूरी काम से बाहर जा रही हूँ। मैं जल्दी आ जाऊँगी, और मैं कहाँ जा रही हूँ, यह बात मैं उन्हें बताना ज़रूरी नहीं समझती हूँ।"

उसकी माँ को गुस्सा आया। उन्होंने उसके बाजू को पकड़कर मरोड़ दिया और बोली, "तू पागल हो गई है! कितनी बार तुझे समझा चुकी हूँ? आखिर किस बात का घमंड है तुझे? तेरा बाप मुझे विधवा करके तुम दोनों को अनाथ करके जा चुका है। जिसे मैंने तेरा बाप बनाया है, उसे चुपचाप कबूल कर ले। समझी तू? वह घर का आधा किराया देता है। तुझे यह बात समझ में क्यों नहीं आती? और मैं तुमसे कितनी बार कह चुकी हूँ, पैसे किसी भी इंसान के लिए ज़रूरी होते हैं, और उससे ज़्यादा ज़रूरी किसी मर्द का घर में साया होता है। समझी तू?"

अवनी को अपनी बाजू में दर्द हो रहा था। "माँ, मेरा हाथ छोड़िए, मुझे तेज दर्द हो रहा है। और रही बात पैसों की, मेरी एक नौकरी लगी है। मैं इस सिलसिले में बात करने जा रही हूँ। और अगर सब कुछ ठीक रहा, तो बहुत जल्दी इस घर का किराया मैं ही भर दूँगी। उसके बाद आप वादा कीजिए, आप उस इंसान के साथ किसी तरह का कोई रिश्ता नहीं रखेगी।"

उसकी माँ को बहुत गुस्सा आया। उन्होंने खींचकर एक चांटा उसके मुँह पर मारा और बोली, "यह क्या बकवास कर रही है तू? काम करने जाएगी? हां, क्यों जाएगी तू काम करने के लिए? और यह रात के टाइम कौन सा काम है जो करने जा रही है? कहीं तू खुद को बेचने तो नहीं जा रही है? किसी का बिस्तर गर्म करने तो नहीं जा रही है तू?"

अवनी को उन पर बहुत गुस्सा आया। "मैंने सपने में भी नहीं सोचा था आप अपनी बेटी के लिए ऐसी बातें करेंगी! अब मेरी बात ध्यान से सुनिए, आप अपनी ये फालतू की बकवास बंद कीजिए! मैंने आपसे कहा ना, मैं काम करने जा रही हूँ!"

अवनी के लिए वहाँ खड़े रहना मुश्किल हो गया था। अपनी माँ के मुँह से ऐसी बातें सुनकर उसका दिल दुखने लगा था। पहले उसका मन किया कि वह सब कुछ छोड़कर अपने कमरे में जाकर लेट जाए, लेकिन तभी दिव्या का फ़ोन आ गया। अवनी ने फ़ोन उठाया, और दिव्या ने कहा, "अवनी, आखिर तू कहाँ रह गई है?"

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