Substitute bride ( Complete✅) Ch. 1

Substitute bride - Chapter 1

Posted by Shadow Author 24 • Jan 31, 2025 02:34 AM

माधवी, चंडीगढ़ में अपनी काकी सुनैना जी के साथ रहती थी। गोरा रंग, झील सी गहरी कजरारी आँखें, कमर तक लहराते काले लंबे बाल, 5.4 की ऊँचाई, 23 वर्ष की आयु, सुर्ख गुलाबी होठ जो सर्दियों में गहरे लाल हो जाते थे, और निचले होंठ के बगल में एक तिल – सब मिलकर उसका रूप मनमोहक था। जो भी उसे देखता, देखता ही रह जाता था।

माधवी अनाथ थी और अनाथ आश्रम में रहती थी। सुनैना काकी, पूरे आश्रम की बड़ी अम्मा थीं, और माधवी को अपनी बेटी की तरह मानती थीं। माधवी भी उनके साथ मिलकर आश्रम को संभालने में मदद करती थी। कॉलेज की उसकी दोस्त तान्या, एक बड़े घराने से ताल्लुक रखती थी, वह भी आश्रम आया करती थी और बच्चों के साथ समय बिताती थी। दोनों बहुत अच्छी दोस्त थीं, क्योंकि दोनों ने हॉस्टल में रहकर साथ पढ़ाई की थी।

आज भी तान्या माधवी से मिलने आई थी, पर मिलने नहीं, उसे ले जाने। उसकी ममेरी बहन की शादी थी, इसलिए वह उसे मुंबई ले जाना चाहती थी। पहले वह सुनैना काकी से इजाज़त लेना चाहती थी, क्योंकि दोनों उनकी मर्ज़ी के बिना कोई काम नहीं करती थीं।

तान्या ने काकी से जिद करते हुए कहा, "काकी, प्लीज़ माधवी को मेरे साथ भेज दीजिए। सिर्फ़ दो दिन की ही तो बात है। आई प्रॉमिस, मैं उसका पूरा ख्याल रखूँगी!"

काकी ने जवाब दिया, "मैं जानती हूँ बेटा, तू उसका पूरा ख्याल रखेगी, लेकिन माधवी के जाने के बाद ये बच्चे मुझसे नहीं संभाले जाएँगे। अभी भी दिन में काम की वजह से वह मुझसे दूर जाती है, तो ये बच्चे मेरी नाक में दम कर देते हैं। और अब तो वह दो दिन के लिए जाएगी, मैं कैसे इन्हें संभालूंगी?"

तान्या ने कहा, "आप तो ऐसे बात कर रही हैं काकी, जैसे कभी माधवी को खुद से दूर करोगी ही नहीं। अरे, अब नहीं तो एक-दो साल में, जब उसकी शादी होगी, तब क्या आप उसे हमेशा ऐसे ही अपने पास रख पाएँगी?"

उसकी बात सुनकर काकी माधवी की तरफ़ देखने लगीं। माधवी बच्चों के साथ हँस रही थी और कई बच्चों को अपने हाथ से खाना खिला रही थी। सच में, शादी लायक उम्र तो हो ही गई थी उसकी, और एक न एक दिन उन्हें माधवी को अपने से दूर करना ही था। दुनिया का यही दस्तूर है – बेटे चाहे दस हों, उन्हें घर में ही रखना होता है, पर बेटी चाहे एक ही क्यों न हो, उसे पराए घर जाना ही होता है। वह किसी और के घर की लक्ष्मी होती है। अगर उनकी खुद की बेटी होती, तो भी उन्हें उसे डोली में बिठाकर विदा करना ही होता। ये सब सोचते हुए काकी की आँखें नम हो गईं।

फिर उन्होंने साफ़ शब्दों में तान्या से कहा, "ठीक है, जाकर दोनों अपना बैग पैक करो। और हाँ, दो दिन बाद अगर तुम दोनों यहाँ पर नहीं दिखीं, तो मैंने तुम्हारी टाँगें तोड़कर तुम्हारे हाथ में दे देनी हैं!"

तान्या हँसते हुए बोली, "फिर तो काकी आपको हमारे लिए लंगड़े लड़के ढूँढ़ने पड़ेंगे, क्योंकि अच्छा-खासा तो हमें अपने घर ले जाने से रहा!" इतना कहकर वह वहाँ से भाग गई।

काकी, "रुक, तुझे तो मैं अभी बताती हूँ," कहकर उसके पीछे गईं। तब तक तान्या माधवी के पास पहुँच चुकी थी और उसे काकी की सहमति की बात बताई। माधवी बहुत खुश हो गई, क्योंकि बहुत समय बाद उसे कहीं बाहर जाने का मौका मिला था। पिछली बार वह कॉलेज के साथ राजस्थान की ट्रिप पर गई थी; तब से उसका कहीं बाहर जाना नहीं हो पाया था। वह काकी के पास आकर उनके गले लग गई।

माधवी ने काकी से कहा, "आई प्रॉमिस काकी, मैं जल्दी वापस आ जाऊँगी। और थैंक यू, जो आप मुझे भेजने के लिए मान गईं। अनुष्का दीदी भी बहुत खुश होंगी जब उन्हें पता चलेगा कि मैं भी उनकी शादी में आ रही हूँ। मेरे मना करने से वह बहुत उदास हो गई थी। मैं अभी जाकर उन्हें फ़ोन कर यह खुशखबरी सुनाती हूँ!" इतना कहकर वह उनसे अलग होकर जाने लगी।

पर तान्या ने उसका हाथ पकड़कर कहा, "अरे, उन्हें मत बताओ। हम लोग वहाँ पहुँचकर उन्हें सरप्राइज़ देंगे!"

माधवी ने हाँ में सर हिला दिया और कपड़े पैक करने चली गई। थोड़ी देर में दोनों मुंबई एयरपोर्ट के लिए निकल गईं।

माधवी निकल चुकी थी एक ऐसे सफ़र पर जहाँ वह खुशी के कुछ पल बिताने जा रही थी। लेकिन उसे नहीं पता था कि जहाँ वह जा रही है, वहाँ से उसकी किस्मत ही बदलने वाली है। उसके जीवन में एक ऐसा मोड़ आने वाला था जो उसकी पूरी ज़िंदगी बदलकर रख देगा।

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