"लाईफ इज़ नॉट अ फैरी टेल"...... सीज़न –3 - Chapter 1
राहुल ने जाती हुई अरु को टोका, "मुझे माफ़ कर दे अरु…बस एक बार मुझे माफ़ कर दे…प्लीज़…बस एक बार…फिर कभी कुछ नहीं माँगूँगा तुझसे!"
अरु रुक कर बोली, "माफ़ी…वो भी तुझे…अगर ईश्वर भी आकर कहें कि मैं तुझे माफ़ कर दूँ…तब भी मैं तुझे कभी माफ़ नहीं करूँगी। क्योंकि तूने ख़ून किया है…मेरी दोस्ती का…मेरे भरोसे का…और मेरे रिश्तों का…जिसके लिए कभी माफ़ नहीं करूँगी मैं तुझे…कभी भी नहीं!!"
इतना कहकर अरु बिना रुके वहाँ से चली गई। बाहर आकर गाड़ी में बैठकर वह फौरन निकल गई। गाड़ी में बैठी अरु ने अपना सिर पीछे की सीट से टिका लिया और एक बार फिर वह अतीत के गलियारों में पहुँच गई जहाँ उसने अपनी ज़िंदगी के सबसे कड़वे और धोखे के पल जिए थे, और जिसका तसव्वुर उसने कभी अपने बुरे से बुरे सपनों में भी नहीं किया था।
(फ़्लैशबैक…अरु और थर्ड पर्सन के POV से…)
अबॉर्शन वाली बात झूठ कहने और रिदांश के उसे सच मान लेने के बाद, रिदांश हॉस्पिटल से चला गया। डॉक्टर ने जो अरु को इंजेक्शन दिया था, उसकी वजह से कुछ ही देर में उसकी आँखें भारी होने लगीं और वह नींद के आगोश में चली गई। जिसकी वजह से कुछ देर के लिए सही, लेकिन उसकी सारी टेंशन और परेशानियों से वह मुक्त हो गई। अगली बार जब अरु की नींद खुली, तो कुछ पल तक उसे समझ ही नहीं आया कि वह कहाँ है। कुछ देर बाद राहुल की आवाज उसके कानों में पड़ी और उसने खुद को एक नए कमरे में देखा। कुछ पल बाद उसे एहसास हुआ कि आखिर वह कहाँ थी और अपने पापा की याद आते ही अरु झट से बिस्तर से उठ बैठी।
राहुल अरु के पास बैठते हुए फिक्र भरे लहजे में बोला, "अरु कैसी है तू? और अब तेरी तबीयत कैसी है? तू ठीक तो है ना?"
अरु चिंतित स्वर में बोली, "मैं ठीक हूँ पर पापा…पापा कैसे हैं?"
राहुल, "डोंट वरी अरु…सब ठीक हो जाएगा!"
अरु परेशानी भरे स्वर में बोली, "बताना राहुल…अब कैसे हैं पापा…वो ठीक तो है ना?"
राहुल ने एक गहरी साँस लेकर मायूसी भरे लहजे से कहा, "मैंने कहा ना…सब ठीक हो जाएगा…इस वक्त तू सिर्फ़ अपनी हेल्थ पर ध्यान दे… दरअसल, अंकल को इस क़दर इतनी भारी मात्रा में शॉक देने की वजह से उनकी…"
अरु, "उनकी क्या?"
राहुल ने एक गहरी साँस लेकर कहा, "अरु, रिजल्ट वही के वही है जो डॉक्टर ने पहले ही बताया था…अंकल की दिमागी हालत ठीक नहीं है…और उनके इलाज के लिए हमें उन्हें कुछ दिन के लिए…मेंटल एसेलम शिफ्ट करना पड़ेगा।"
अरु नाराज़गी से बोली, "तू पागल हो गया है राहुल…मैं ऐसा कभी नहीं करूँगी…मैं अपने पापा को कभी भी पागलखाने नहीं भेजूँगी!"
राहुल दुखी भाव से बोला, "और तुझे लगता है कि ऐसा करने में मुझे खुशी मिलेगी? नहीं अरु, बिल्कुल भी नहीं…लेकिन इस वक्त हमारे पास कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है…और अंकल की बेहतरी के लिए ही हमें उन्हें कुछ दिन वहाँ शिफ्ट करना ही पड़ेगा…ताकि डॉक्टर अच्छे से उनका ट्रीटमेंट कर सकें।"
अरु भावुकता के साथ बोली, "लेकिन राहुल, पापा वहाँ कैसे रहेंगे…नहीं राहुल, पापा वहाँ नहीं रह पाएँगे…और…"
राहुल अरु का हाथ थामते हुए बोला, "डोंट वरी अरु…सब ठीक हो जाएगा…डोंट वरी…लेकिन इस वक्त तू अपना ख़्याल रख…क्योंकि तेरी हालत अभी बिल्कुल भी ठीक नहीं है…और तूने जो भी फ़ैसला किया…बिल्कुल सही किया।"
अरु राहुल से अलग होते हुए बोली, "उस इंसान ने मेरे साथ जो कुछ भी किया है…उसके बाद मुझे नहीं लगता कि मैंने जो कुछ भी किया है…गलत किया है…उसकी वजह से मेरे पापा की आज ये हालत हो गई है…मैं उसे कभी माफ़ नहीं करूँगी…कभी भी नहीं!!"
राहुल, "जानता हूँ मैं…और तूने जो कुछ भी किया बिल्कुल ठीक किया है…ऐसे घटिया इंसान के अंश को जन्म देने का कोई मतलब ही नहीं…जिसने हमारी सारी खुशियाँ छीन ली!"
अरु असमंजस से बोली, "लेकिन राहुल मैंने…"
राहुल बीच में ही अरु की बात काटते हुए बोला, "तुझे मुझे कोई भी एक्सप्लेनेशन देने की कोई ज़रूरत नहीं है…तूने उस राक्षस के बच्चे को जन्म ना देने का फ़ैसला करके बिल्कुल ठीक किया है…और वह डिज़र्व ही नहीं करता…ना तुझे और ना किसी भी खुशी को!"
अरु अपनी गर्दन ना में हिलाते हुए बोली, "राहुल मगर मैंने अपने बच्चे को…"
अरु अपनी बात पूरी कह पाती, कि उससे पहले ही कमरे में नैना दाखिल हुई और राहुल को डॉक्टर से मिलने को कहा। राहुल जल्दी आने का कहकर वहाँ से चला गया।
अरु नैना से बोली, "तुमने राहुल को सच नहीं बताया कि मैंने अपने बच्चे को अबॉर्ट नहीं किया है?"
नैना, "दरअसल जब राहुल वापस आया था…तो उसने तेरी तबीयत और बेहोशी का रीज़न पूछा…तो मैंने उसे बताया कि तूने ये फ़ैसला लिया था कि तू इस बच्चे को जन्म नहीं देगी…लेकिन इससे पहले कि मैं उसे पूरी बात बता पाती…वहाँ डॉक्टर अंकल के बारे में बात करने आ गए…और फिर उसके बाद से ही मुझे मौका नहीं मिला कि मैं उसे सच बता पाती…ख़ैर छोड़…ये सब हम उसे बाद में आराम से समझा देंगे…फ़िलहाल तू अपनी तबीयत पर ध्यान दे।"
अरु उदासी और टेंशन भरे भाव से बोली, "नैना मुझे डैड से मिलना है!"
नैना अपनी गर्दन हाँ में हिलाते हुए बोली, "ठीक है!"
इसके बाद नैना अरु को मिस्टर कपूर से मिलवाने के लिए लेकर गई जहाँ मिस्टर कपूर के हाथ बंधे हुए थे। इसे देखकर अरु घबराकर वहीं पास खड़े डॉक्टर के पास गई।
अरु घबराहट भरी भावुकता के साथ बोली, "डॉक्टर मेरे पापा को ऐसे जानवरों की तरह बांधकर क्यों रखा गया है?"
डॉक्टर, "मैं समझता हूँ कि आपको अपने पापा की फ़िक्र है…लेकिन इस वक्त उनकी दिमागी हालत बिल्कुल भी ठीक नहीं है…जिसकी वजह से उनसे दूसरे लोगों को ख़तरा हो सकता है…जैसे अभी कुछ देर पहले ही उन्होंने एक नर्स पर हमला कर दिया…हम और रिस्क नहीं ले सकते…इसलिए हमें इन्हें जल्द से जल्द मेंटल एसेलम शिफ्ट करना होगा।"
अरु ने यह बात सुनी तो शॉक्ड से अपने मुँह पर दोनों हाथ रख लिए और भावुकता से उसकी सुबकियाँ शुरू हो गईं। नैना और राहुल ने उसे संभाला, लेकिन इस वक्त जो अरु अपने पिता के लिए महसूस कर रही थी वह लफ़्ज़ों से परे था और उसे चाहकर भी कोई नहीं समझ सकता था। उसका दिल दर्द और दुख से फटने को तैयार हो रहा था। अरु बिल्कुल भी नहीं चाहती थी कि वह अपने पिता को खुद से दूर भेजे, लेकिन उनकी भलाई के लिए उसने अपने दिल पर पत्थर रखकर आखिर में इस कड़े क़दम के लिए इजाज़त दे दी। कुछ फ़ॉर्मेलिटीज़ के बाद, कुछ वक़्त बाद मिस्टर कपूर को वहाँ से हॉस्पिटल से निकालकर मेंटल एसेलम के लिए भेज दिया गया। अरु और राहुल के साथ नैना भी मिस्टर कपूर से मिलने वहाँ पहुँची और कुछ वक़्त वहाँ बिताने के बाद तीनों वापस घर लौट आए। अरु का हाल बेहाल था। एक दिन में उसकी पूरी ज़िंदगी मानो पूरी तरह पलट गई थी और सब कुछ तितर-बितर सा हो गया था। उसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि वह कैसे अपनी बिखरी हुई ज़िंदगी के पन्नों को समेटे और कैसे सब कुछ ठीक करे।
अरु को सांत्वना देने और उसे संभालने के लिए, आज नैना भी उसके साथ उसके घर ही रुक गई थी और उसने इस बात के लिए अपने माता-पिता को भी इन्फ़ॉर्म कर दिया था। जैसे-तैसे जिद करके नैना और राहुल ने अरु को दो-चार निवाले खिलाए और फिर नैना ने उसे दवाई देकर बड़ी मुश्किल से सुलाया। राहुल और नैना भी मिस्टर कपूर के लिए परेशान थे, लेकिन उनसे भी ज़्यादा इस वक़्त वह अरु के लिए परेशान थे। सब कुछ बहुत ही उलझा और बिखरा सा नज़र आ रहा था। अगले दिन नैना अरु को ब्रेकफ़ास्ट कराने के बाद अपने घर के लिए निकल गई क्योंकि उसके पापा बीमार थे, तो उसे घर और अपने पापा का भी देखना था और अरु ने भी उसे जाने की इजाज़त दे दी। कुछ देर बाद राहुल भी किसी ज़रूरी काम से बाहर चला गया और वह अब घर में अकेली ही थी। शाम के वक़्त नैना फिर से अरु से मिलने उसके घर पहुँची। कुछ देर बाद राहुल घर लौटा और सीधा लिविंग एरिया में बैठी अरु और नैना के पास पहुँच गया और अरु के सामने जाकर उसने एक लिफ़ाफ़ा अरु की ओर बढ़ा दिया।
अरु असमंजस से लिफ़ाफ़े की ओर देखते हुए बोली, "ये क्या है राहुल?"
राहुल, "खुद ही देख ले!"
अरु ने एक नज़र राहुल को देखा, फिर उसने उस लिफ़ाफ़े को खोला और उसमें रखे पेपर्स को देखकर…जो और कुछ नहीं बल्कि अरु और रिदांश के डायवोर्स पेपर्स थे…इन पेपर्स को देखकर अचानक ही एक पल को अरु के दिल को एक धक्का सा लगा और इन पेपर्स पर रिदांश के सिग्नेचर देखकर ना जाने क्यों पर उसकी आँखों में हल्की नमी सी उतर आई और अनायास ही कुछ सोचते हुए उसका हाथ अपने पेट पर रुक गया।
राहुल अरु के चेहरे पर उभरे दर्द को देखकर नाराज़गी भरे लहजे से बोला, "वाकई में क्या तुझे अभी भी उस घटिया इंसान से रिश्ता टूटने का दुख हो रहा है अरु?"
नैना, "राहुल प्लीज़…उसकी हालत पहले से ठीक नहीं है…इन सब बातों का ये सही वक़्त नहीं है अभी राहुल!"
राहुल, "यही सही वक़्त है नैना…क्योंकि नासूर बने ज़ख़्म को शरीर से जितनी जल्दी काटकर फेंक दिया जाए…इतना ही बेहतर होता है…और वैसे भी जब इस बेमाने रिश्ते के कोई मायने ही नहीं…तो क्यों इसका बोझ लेकर चलना…(अरु की ओर देखकर)…मैंने अपने एक दोस्त के थ्रू अंकल के लिए स्पेन के एक सबसे अच्छे डॉक्टर से बात की है…और उन्होंने अंकल के ट्रीटमेंट के लिए हमें वहाँ बुलाया है…(एक पल को रुककर)…जो कुछ भी हुआ…उसके बाद भी अगर तेरे दिल में उस घटिया इंसान के लिए कोई जगह बाकी है…या फिर भी तुझे इस बेमाने रिश्ते के बोझ तले…और अतीत की जंजीरों से ही बंधकर रहना है…तो आगे तेरी मर्ज़ी…मैं तुझे बिल्कुल भी फ़ोर्स नहीं करूँगा…और रही अंकल की बात…तो उन्होंने ज़िंदगी भर मेरे लिए एक बाप होने का फ़र्ज़ निभाया है…अब मैं भी एक बेटे का फ़र्ज़ निभाते हुए उनकी ज़िम्मेदारी उठा लूँगा…तुझे फ़िक्र करने की ज़रूरत नहीं!"
इतना कहकर राहुल उन दोनों को वहाँ छोड़ अपने रूम में जाने लगा तो अरु ने उसे टोका।
अरु राहुल को टोकते हुए बोली, "एक मिनिट राहुल!"
राहुल ने सवालिया नज़रों से अरु की ओर देखा तो अरु ने अपनी आँख से छलके एक आँसू अपनी उंगली से साफ़ किया और टेबल से पेन उठाते हुए उसने बिना एक पल भी सोचे डायवोर्स पेपर्स साइन कर दिए।
अरु राहुल की ओर पेपर्स बढ़ाते हुए बोली, "मेरे लिए मेरे पापा से बढ़कर कभी कुछ नहीं था…और ना ही कभी हो सकता है!"
इतना कहकर अरु वहाँ से अपने कमरे में चली गई। नैना अरु के पीछे जाती कि उसके घर से अर्जेंट कॉल आ गई और नैना को ना चाहते हुए भी वहाँ से जाना पड़ा और वह राहुल को अरु का ख़्याल रखने को कहकर कुछ देर बाद वहाँ से चली गई। राहुल ने भी अरु को वक़्त देने का सोचकर इस वक़्त उससे कुछ बात नहीं की और अपने कमरे में चला गया। अगले दिन दोपहर को अरु स्पेन वाले डॉक्टर के बारे में पूछने के लिए राहुल के कमरे में आई। अरु ने पूरा कमरा देखा मगर राहुल वहाँ कहीं भी नहीं था। अरु ने सोचा शायद राहुल बाथरूम में होगा, लेकिन बाथरूम का दरवाज़ा भी खुला था और राहुल पूरे कमरे में कहीं भी मौजूद नहीं था।
अरु बाद में आने का सोचकर वापस जाने के लिए मुड़ी कि अचानक उसकी नज़र राहुल के थोड़े से खुले अलमारी पर पड़ी जिसमें से किसी तरह की रोशनी बाहर आ रही थी। अरु ने अपने क़दम राहुल के अलमारी की ओर बढ़ा दिए और उसने अलमारी के पीछे दीवार से निकलती उस रोशनी को असमंजस से देखा और अनायास ही उसका हाथ किसी बटन को छू गया जिसकी वजह से अचानक ही अलमारी का पिछला हिस्सा खुल गया जो एक गुप्त कमरे के रूप में अलमारी के पीछे छुपा हुआ था और आज तक जिसका इल्म तक किसी को नहीं था। अरु ने जब ये कमरा देखा तो हैरानी और शॉक्ड से उसकी आँखें खुली की खुली रह गईं।