"लाईफ इज़ नॉट अ फैरी टेल"...... सीज़न –3 Ch. 2

"लाईफ इज़ नॉट अ फैरी टेल"...... सीज़न –3 - Chapter 2

Posted by Farheen Rajput • Mar 01, 2025 10:48 PM

उसने अलमारी के पीछे दीवार से निकलती उस रोशनी को असमंजस से देखा। और अनायास ही उसका हाथ किसी बटन को छू गया। जिसकी वजह से अचानक ही अलमारी का पिछला हिस्सा खुल गया। जो एक गुप्त कमरे के रूप में अलमारी के पीछे छुपा हुआ था। और आज तक जिसका इल्म तक किसी को नहीं था। अरु ने जब यह कमरा देखा, तो हैरानी और शॉक से उसकी आँखें खुली की खुली रह गईं। कुछ पल तक अरु हैरानी से बस उस कमरे को यूँ ही देखती रही। आखिर में, अरु अपने शॉक से बाहर आई, तो उसने अलमारी के पीछे बने उस सीक्रेट कमरे की ओर अपने कदम बढ़ा दिए। लेकिन अरु ने जैसे ही उस कमरे में कदम रखा, उसका शॉक और हैरानी दस गुना ज्यादा बढ़ गए। और अविश्वास से उसने अपने मुँह पर अपनी हथेलियाँ रख लीं।

यह कमरा ज्यादा बड़ा नहीं था। लेकिन इस कमरे की हर एक दीवार और कमरे के ज़र्रे-ज़र्रे पर सिर्फ़ अरु ही अरु का अक्स छाया था। हर जगह कमरे में बस अरु की ही तस्वीरें लगी थीं। और ये तस्वीरें आज-कल या कुछ अरसे की ही नहीं थीं, बल्कि इनमें सालों पुरानी तस्वीरें भी शामिल थीं। और कुछ तस्वीरें ऐसी भी थीं, जिसका इल्म तक अरु को नहीं था कि ये तस्वीरें कब और कहाँ ली गई थीं। कहीं अरु खिलखिला कर हँस रही थी, तो कहीं क्यूट एंग्री एक्सप्रेशन लिए हुए थी। कहीं प्यारी सी मुस्कान लिए, कहीं कुछ सोचते हुए, तो कहीं छोटे बच्चे की तरह सुकून से सोई हुई थी। और कई तस्वीरों में वो अपने गीले बालों को सुखाते हुए थी। अरु का दिमाग इन सारी तस्वीरों को देखकर जैसे सुन्न सा पड़ गया था।

तभी अरु की नज़र अपने सामने लगी अपनी एक बड़ी सी तस्वीर पर पड़ती है, जिसमें अरु अपने गाल पर हाथ रखे, मुस्कुराते हुए बड़ी ही प्यारी लग रही थी। अरु को याद आया कि यह तस्वीर उसके 18वें जन्मदिन की थी। अरु बस असमंजस भरे शॉक से अपनी इन तस्वीरों को देख रही थी। उसे समझ ही नहीं आ रहा था, इन्हें देखकर वह क्या और कैसे रिएक्ट करे। अरु अभी अपने शॉक में ही थी कि तभी उसे अपने पीछे हड़बड़ाहट से अंदर आए राहुल की आहट होती है। और वह आँखों में नमी के साथ गुस्से भरी नज़र से राहुल की ओर पलटती है।

"क्या है ये सब???" अरु ने राहुल की ओर देखकर गुस्से भरी नज़रों से पूछा।

"अरु मैं समझाता हूँ तुझे..." राहुल ने अपनी खुश्क होंठों पर अपनी जुबान फिराते हुए कहा।

"मैंने कुछ पूछा है राहुल, क्या है यह सब...और मेरी तस्वीरें यहां क्यों हैं? और क्यों तूने मेरी तस्वीरों को ऐसे छुपा कर रखा है???" अरु गुस्से से लगभग चिल्लाते हुए बोली।

"अब अगर तुझे सच जानना ही है, तो मैं भी यह सच और नहीं छुपाऊँगा।" राहुल ने गंभीर भाव से कहा, "और क्या वाकई में तू इतनी नासमझ और नादान है जो इस बात का मतलब, इन तस्वीरों का मतलब नहीं समझ पा रही???"

"हाँ मैं नहीं समझ पा रही हूँ...और ना ही मैं अब मैं कुछ समझना ही चाहती हूँ।" अरु ने अपनी तीखी नज़रों से कहा।

"लेकिन आज मैं तुझे यह सच समझाना चाहता हूँ..." राहुल ने गुस्से से जाती हुई अरु की बाजू पकड़कर कहा, "आई लव यू...प्यार करता हूँ मैं तुझ से...और..."

राहुल अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाया था कि एकाएक अरु ने एक जोरदार थप्पड़ राहुल के दाएँ गाल पर रसीद कर दिया।

"खबरदार...खबरदार...जो ये घटिया शब्द दुबारा कभी अपनी जुबान से निकाले भी तो...शेम ऑन यू राहुल...शेम ऑन यू!!!" अरु ने गुस्से भरी नम आँखों से कहा।

"नहीं है मुझे रत्ती भर भी शर्म इस बात को एक्सेप्ट करने में कि मैं तुझे प्यार करता हूँ...और वो भी तब से जब से मुझे प्यार का असल मतलब भी नहीं पता था!!" राहुल ने गुस्से से अपने दाँत पीसते हुए कहा।

"बकवास बंद कर राहुल अपनी...बंद कर बकवास..." अरु ने बेइंतहा गुस्से भरे भाव से कहा, "जानता है ना तू...अच्छे से जानता है...कि मैंने तुझे हमेशा सिर्फ़ एक अच्छे दोस्त...एक भाई की तरह समझा...उसके बाद भी तूने मेरे लिए ऐसा सोचा...छी राहुल...तुझ से यह उम्मीद नहीं थी मुझे!!!"

"तो क्या उम्मीद थी तुझे हाँ...क्या उम्मीद थी...कि अपनी कलाई पर तेरे नाम की राखी बाँध कर घूमता मैं..." राहुल ने तेज़ आवाज़ में कहा, "(एक पल को रुक कर)...बहुत हुआ...और बहुत सह भी लिया है मैंने...अब और नहीं...अब मैं अपने और तेरे बीच किसी को नहीं आने दूँगा...किसी को नहीं..." (अरु के करीब आने की कोशिश करते हुए) "...अरु मैं तुझे सच में बहुत चाहता हूँ...और तुझे हमेशा खुश रखूँगा...जस्ट ट्रस्ट मी अरु...और बिलीव मी...मुझसे ज्यादा खुश तुझे और कोई नहीं रख सकता!!!"

"जस्ट शटअप...बंद कर बकवास अपनी...शर्म आ रही है मुझे तुझे अपना दोस्त कहते हुए भी...आखिर इतनी घटिया बात तूने सोची भी कैसे...तू अच्छे से जानता है...कि मैंने हमेशा से तुझे एक दोस्त से बढ़कर...एक भाई का दर्जा दिया है...उसके बावजूद भी...तूने ना सिर्फ़ ऐसा सोचा...बल्कि पूरी बेशर्मी के साथ तू मुझसे यह बात कह भी रहा है...चला जा अभी यहाँ से राहुल!!" अरु ने गुस्से और नफ़रत भरे भाव से कहा।

"प्यार में कोई शर्म या बेशर्मी नहीं होती...मैं तुझे चाहता हूँ...प्यार करता हूँ...और इस बात को एक्सेप्ट करने में...मुझे कोई शर्म कोई झिझक नहीं है!!!" राहुल ने कहा।

"मुझे अपनी शक्ल भी मत दिखाना दोबारा!!!" अरु ने कहा।

इतना कहकर अरु गुस्से से उस रूम से बाहर आकर, जैसे ही राहुल के कमरे से बाहर निकलने को होती है, कि राहुल जाती हुई अरु की कलाई पकड़ कर उसे वापस खींच लेता है।

"हाथ छोड़ मेरा राहुल!!" अरु ने कसमसाते हुए कहा।

"नहीं...आज जब तक मेरी बात क्लियर नहीं हो जाएगी...और तू मेरी बात पूरी सुनने के साथ ही...जब तक उसे समझेगी नहीं...मैं तुझे यहाँ से कहीं भी नहीं जाने दूँगा!!!" राहुल ने कहा।

"तेरा दिमाग खराब हो गया है...पागल हो गया है तू!!!" अरु लगभग चिल्लाते हुए बोली।

"हाँ हो गया हूँ मैं पागल...दिमाग खराब हो गया है मेरा...और यह सब कुछ सिर्फ़ तेरी वजह से है...ऐसा कोई लम्हा...ऐसा कोई पल नहीं होता...जब तू मेरे ज़हन...मेरे दिल पर सवार नहीं होती...मैं लाख कोशिश करने के बावजूद भी...तुझे भुला नहीं सकता...तुझे इतनी सी बात समझ क्यों नहीं आती???" राहुल ने उसी चिल्लाहट के साथ कहा।

"सच में तेरा दिमाग खराब हो गया है...और तुझे यह भी समझ नहीं आ रहा...कि तू असल में कह क्या रहा है...फॉर गॉड सेक...बीवी हूँ मैं किसी की!!" अरु ने गुस्से से चिल्लाते हुए कहा।

"है नहीं...थी!!!" राहुल ने सख्त भाव से कहा।

"जो भी है...मगर जैसा तू सोच रहा है...ऐसा कभी पॉसिबल नहीं है!!!" अरु ने एक पल को अपनी आँखें बंद करते हुए कहा।

"और क्यों पॉसिबल नहीं है...और आखिर कमी क्या है मुझ में...तू उस घटिया रिदांश अग्निहोत्री को अपनी ज़िंदगी में आने का...अपने करीब आने का...अपनी ज़िंदगी पर पूरा इख्तियार और हक दे सकती है...तो मैं तो तेरा दोस्त हूँ ना...जो तुझसे इस क़दर मोहब्बत करता है...तो उसे अपने करीब आने से तुझे क्यों दिक्कत हो रही है?? और आखिर मैं क्यों नहीं आ सकता तेरे करीब?? और मैं क्यों..." राहुल ने कहा।

राहुल अपनी बात पूरी भी नहीं कह पाया था कि अरु ने उसे एक और जोरदार थप्पड़ दे मारा।

"घिन आ रही है मुझे तेरी सोच से...तू इतना घटिया सोच सकता है...मैंने सपनों में भी नहीं सोचा था...हाँ दिया मैंने मिस्टर अग्निहोत्री को अपने करीब आने की इजाज़त...और दी अपनी ज़िंदगी पर पूरा इख्तियार...क्योंकि एक पति होने के नाते हक़ था उनका मुझ पर...लेकिन तू...डिस्गस्टिंग राहुल...डिस्गस्टिंग..." अरु ने नफ़रत और गुस्से के मिले-जुले भाव से कहा, "(एक पल रुक कर)...आइन्दा कभी भी मुझे अपनी शक्ल भी मत दिखाना...शर्म आ रही है मुझे खुद पर...कि मैंने तुझ जैसे इंसान को अपना भाई जैसा दोस्त माना...छी...नफ़रत हो रही है मुझे तुमसे...तुम्हारे वजूद से!!!"

एक बार फिर जैसे ही अरु जाने को हुई कि राहुल ने गुस्से से वापस उसकी कलाई पकड़ते हुए उसे अपनी ओर खींच लिया। और अरु को अपने करीब करते हुए उसके कंधों को कसकर पकड़ लिया। अरु खुद को छुड़ाने के लिए कसमसाती रही। लेकिन राहुल जैसे इस वक्त ना कुछ देखना चाहता था और ना ही कुछ समझना ही चाहता था। उस पर इस वक्त पूरी तरह से पागलपन और दीवानापन सवार था। वह वह राहुल लग ही नहीं रहा था जिसे अरु जानती थी। इस वक्त उसकी आँखों के सामने जो राहुल था, वह बिल्कुल अलग और पागल नज़र आ रहा था।

"अगर मेरी किसी बात से तू हर्ट हुई है...या तुझे बुरा लगा है...तो मैं उसके लिए माफ़ी माँगता हूँ...एम सॉरी...एम रियली सॉरी...लेकिन प्लीज मुझे अब खुद से दूर जाने के लिए मत कह...मैं सच में तेरे बगैर नहीं रह सकता..." राहुल ने अरु के खुद को छुड़ाने की जद्दोजहद को पूरी तरह नज़रअंदाज़ करते हुए कहा, "(एक पल रुक कर)...देख सब कुछ सही हो गया है...हम यहाँ से बहुत दूर चले जाएँगे...और अपनी ज़िंदगी की एक नई शुरुआत करेंगे...जहाँ अतीत का कोई साया या कोई परछाई भी हमें छू नहीं पाएगी...हम एक नए सिरे से खुशी-खुशी अपनी ज़िंदगी की शुरुआत करेंगे..." (अरु खुद को छुड़ाने की जद्दोजहद करते हुए) "...जहाँ बस मैं तू और हमारी मोहब्बत होगी...और अरु अब हमारे बीच आने के लिए कोई दीवार नहीं बची है...ना वो रिदांश अग्निहोत्री...और ना ही उसका अंश..." (गुस्से से अपने दाँत पीसते हुए) "...अच्छा ही हुआ कि उस सपोले को तूने अपनी कोख में ही मार दिया...वरना मैं खुद उसे..."

अरु ने राहुल के मुँह से अपने बच्चे के लिए यह बात सुनी, तो उसका गुस्सा उसके सर पर हावी हो गया। और उसने अपनी पूरी ताकत लगाते हुए राहुल को पीछे धक्का देते हुए एक साथ दो-चार थप्पड़ राहुल के गाल पर रसीद कर दिए।

"तू मोहब्बत तो क्या...नफ़रत करने के लायक भी नहीं है...बहुत बड़ी भूल की है मैंने तुझे समझने में..." अरु ने सख्त भाव से कहा, "(नफ़रत भरे भाव से)...अरे तुझ से लाख गुना बेहतर तो मिस्टर अग्निहोत्री हैं...भले ही उन्होंने मेरे साथ कितना भी और कुछ भी गलत किया हो...लेकिन कभी भी मेरे साथ डबल फ़ेसेस नहीं रहे...कभी भी मुझे पीठ पीछे खंजर घोपने की कोशिश नहीं की...जो किया हमेशा सामने से आकर किया...पीठ पीछे छुपकर नहीं...लेकिन तू...तूने तो मेरा मान ही तोड़ दिया आज...तुझसे मुझे घिन आ रही है राहुल...तू ऐसा सोच भी कैसे सकता है...और तुझे क्या लगता है...कि मैं तेरी तरह वहशी हूँ...जो अपने गुस्से और पागलपन में अपने बच्चे को ही ख़त्म कर दूँ..." (राहुल ने अरु की बात सुनी तो उसे असमंजस से देखा) "...हाँ मैंने अपने बच्चे को नहीं मारा...मैंने कोई अबॉर्शन नहीं कराया..." (भावुकता से अपने पेट को छूते हुए) "...मेरा बच्चा अभी भी सही-सलामत...मेरे साथ है..." (एक पल रुक कर) "...और मैं कभी भी अपने बच्चे को मार ही नहीं सकती थी...क्योंकि यह सिर्फ़ मिस्टर अग्निहोत्री का ही नहीं...बल्कि मेरा भी अंश है...और इन सबसे अलग मैं किसी मासूम की जान कभी नहीं ले सकती...कभी नहीं!!!"

"जो तब नहीं हुआ वो अब होगा..." राहुल ने जुनून भरे भाव से कहा। (अरु राहुल की बात सुनकर एक पल को बिल्कुल जड़वत हो गई) "...(अरु को खुद को असमंजस से एकटक देखते हुए)...हाँ जो काम तूने अधूरा छोड़ दिया था...आज मैं उसे पूरा करूँगा...अभी और इसी वक्त!!!"

"राहुल तू ऐसा कुछ भी नहीं करेगा!!" अरु घबराते हुए बोली।

"जो तेरे मेरे बीच दीवार बनेगा...उस हर दीवार को मिटा दूँगा मैं...मैंने इतनी मेहनत की है तुझे हासिल करने के लिए...मैं उसे इस रिदांश अग्निहोत्री के बच्चे के लिए जाया नहीं होने दूँगा!!!" राहुल ने अलग ही दीवानगी लिए कहा।

इतना कहकर राहुल ने अरु को जोर से बेड पर धक्का दिया। वो तो एन मौके पर अरु ने अपनी हथेलियों को बेड पर टिकाते हुए अपने पेट पर चोट लगने से बचा लिया। और वो अविश्वास भरी नज़रों से राहुल की ओर देखने लगी।

"हमेशा तूने मेरे जज़्बात और इमोशंस को नकारा...हमेशा तूने मेरे जज़्बात, मेरी केयर, मेरी फीलिंग्स को बस दोस्ती का नाम दिया...जब तू मुझे भाई कहती थी ना...मेरे तन-बदन में आग लग जाती थी...मगर मैं फिर भी शांत रह लेता था...कि वक़्त के साथ तू हमारे रिश्ते को एक्सेप्ट कर लेगी...और उस दिन जब अंकल ने हमारा रिश्ता तय किया...तो मुझे जैसे दुनिया की सबसे बड़ी खुशी मिल गई थी...लेकिन उसमें भी तूने अपनी ना-खुशी ही जाहिर की...मैंने तुझे कहा भी कि मैं अंकल को समझाऊँगा...हालांकि मैं ऐसा कभी नहीं करता...क्योंकि मैं जानता था...कि अंकल ही वो सीढ़ी हैं...जिनके ज़रिए मैं तुझे हासिल कर सकता था...मैं बिल्कुल बेफ़िक्र होकर अपनी नई ज़िंदगी के सपने बुन रहा था..." राहुल ने सख्त भाव से अपनी जेब में अपने हाथ डालते हुए कहा, "(गुस्से से अपने दाँत पीसते हुए)...लेकिन फिर उस रिदांश अग्निहोत्री ने बीच में आकर एक पल में...मेरी सारी खुशियों की दुनिया को आग लगा दी...जब भी वो तेरे करीब आता था...तुझे छूता था...दिल करता था...कि..." (नफ़रत भरे भाव से) "...कि जान ले लूँ उस कमीने की अपने हाथों से...उसकी वो आँखें नोच लूँ...जिनसे वो तुझे देखता है...उन हाथों को काट फेंकूँ...जिनसे वो तुझे छूता था...मगर मैं मजबूर था..." (एक दीवानगी लिए अरु की ओर देखकर) "...जानती है तेरे लिए क्या कुछ किया है मैंने...तुझे उस रिदांश से बचाने के लिए ही...मैं यूएस गया...ताकि कुछ इंतज़ाम कर सकूँ...और तुझे उसके चंगुल से निकाल सकूँ...लेकिन उस कमीने ने इतने दिनों तक मुझे फ़्रॉड केस में फ़ँसाकर...वहीं बंद करवा दिया...अंकल भी चाहकर भी मेरी मदद नहीं कर पाए...और मैं इतने दिनों बाद कितनी मुश्किल से वहाँ से यहाँ लौट पाया..." (एक ज़हरीली विक्ट्री स्माइल के साथ) "...पर भले ही मैं देर से आया...मगर दुरुस्त आया...आखिरकार तुझे मैंने उस रिदांश के चंगुल से आजाद करवा ही लिया...और जानती है यह कोशिश मेरी तेरी शादी के साथ से ही जारी है..." (एक पल रुक कर) "...याद है तुझे वो डेस्टिनी वाला शख्स...जो तुझे प्यार भरे मैसेज करता था..." (एक ज़हरीली विक्ट्री स्माइल के साथ) "...वो मैं ही था!!!"

"तू???" अरु ने हैरानी भरे अविश्वास से पूछा।

"हाँ मैं...और थैंक्स टू यू...यह आइडिया तूने ही मुझे दिया...जब तू उस दिन नैना को अपने डेस्टिनी वाले शख्स का सपना सुना रही थी...बस मैंने उसे सच में ज़िंदा कर दिया...सोचा कि इस तरह से वो रिदांश तुझे अपने घर से निकाल फेंके...लेकिन नहीं और एक बार फिर सब उल्टा हो गया...और वो करन बीच में आ गया...लेकिन यह कहीं ना कहीं अच्छा ही हुआ...और यह इल्ज़ाम भी उसी कमीने के सर मढ़ दिया गया...और मैं बच निकला!!" राहुल ने बिना किसी अफ़सोस के कहा।

"राहुल तू इतना कैसे गिर गया...तूने मेरे कैरेक्टर को भी दांव पर लगा दिया...हाउ..." अरु ने भावुकता से कहा।

अरु राहुल को बोलना तो बहुत कुछ चाहती थी, लेकिन उसके पास शब्द ही ख़त्म हो गए थे। एक-एक करके उसके सारे रिश्ते उसे धोखा देकर उससे दूर हो रहे थे। और आज राहुल का जो घिनौना चेहरा उसके सामने आया, उसके बाद तो उसका भरोसा हर रिश्ते से तार-तार ही हो गया था जैसे। उसके बचपन का साथी ही इतना बड़ा विश्वासघाती निकलेगा, उसने सपनों में भी यह नहीं सोचा था। अरु अपने शॉक और सदमे से तब बाहर आई जब उसने राहुल को अपने एक अलमारी से एक इंजेक्शन निकालकर उसे भरते देखा।

"य...ये...की...क्या है???" अरु ने डरते हुए पूछा।

"कुछ नहीं मेरी जान...बस यह एक ड्रग है...जो तेरी कोख से उस गंदगी को हमेशा-हमेशा के लिए दूर करके...तुझे आजाद करने के लिए है!!!" राहुल ने खाली शीशी को फेंकते हुए, इंजेक्शन ले कर अरु की दिशा में बढ़ते हुए कहा।

"न...नहीं तू ऐसा नहीं कर सकता राहुल!!!" अरु ने अपनी गर्दन ना में हिलाते हुए कहा।

"मैं बिल्कुल कर सकता हूँ ऐसा...इनफैक्ट मैं ऐसा ही करूँगा!!!" राहुल ने सख्त भाव से कहा।

अरु ने राहुल की बात सुनी तो वो झट से बिस्तर से उठकर बाहर भागने के लिए हुई। लेकिन राहुल ने बीच रास्ते में ही उसका हाथ पकड़ कर उसे जाने से रोक लिया।

"तुझे मेरी कसम है राहुल...तु...तुझे हमारी दोस्ती का वास्ता...प्लीज मु...मुझे जाने दे...छो...छोड़ दे मुझे...मैं मर जाऊँगी...अगर मेरे बच्चे को कुछ भी हुआ...सिर्फ़ यही बचा है मेरे जी...जीने की वजह...मैं म...मर जाऊँगी राहुल...पी...प्लीज उसे कुछ मत कर...मुझे जाने दे...मैं तेरे हा...हाथ जोड़ती हूँ...प्लीज जा...जाने दे मुझे!!!!" अरु ने भावुकता से इंजेक्शन को देखकर कहा।

"शशशशशहहहहहह...तू जानती है ना मैं तुझे रोता हुआ...परेशान नहीं देख सकता...और फिर मैं जो कुछ भी कर रहा हूँ...अपने और तेरे भले के लिए ही कर रहा हूँ...सो बी अ गुड गर्ल...और मुझे मेरा काम करने दो!!!!" राहुल ने कहा।

अरु ने राहुल की बात सुनी तो वो खुद को छुड़ाने के लिए और भी ज्यादा जद्दोजहद करने लगी। राहुल को जब लगा कि अरु उसकी पकड़ से छूट जाएगी, तो उसने अरु को घुमाते हुए उसकी दोनों बाजुओं को अपने एक हाथ की गिरफ्त में ले लिया। जो भी था, राहुल अरु के मुक़ाबले काफ़ी स्ट्रॉन्ग था। तो अरु अब चाहकर भी राहुल की पकड़ से छूट नहीं पा रही थी। राहुल ने अपने मुँह से इंजेक्शन का केप खोला और अपने दूसरे हाथ से अरु को इंजेक्ट करने के लिए इंजेक्शन उसके दाईं बाजू की ओर बढ़ा दिया।

"नो...नो...प्लीज...नो...नो..." अरु डर और घबराहट से लगभग चिल्लाते हुए बोली।

राहुल ने अभी वो इंजेक्शन अरु की बाजू से टच ही किया था कि एकाएक किसी ने उसके सर पर जोरदार वार किया। और वो इंजेक्शन उसके हाथ से छूटकर नीचे गिर गया। और अरु को छोड़ते हुए उसने अपने सर को दोनों हाथों से पकड़ लिया। और अरु झट से उससे दूर हो गई कि एकाएक पीछे से एक जोरदार लात पड़ने से राहुल नीचे ज़मीन पर जा गिरा।

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