Obbsessed with Zoya, Ch. 2

Obbsessed with Zoya, - Chapter 2

Posted by Shayna choudhary • Feb 20, 2025 08:02 PM

जोया ने काम करने का फैसला किया था। इसके लिए उसने रहीम खान से कहा कि वह उसे कोई काम दिलाए। रहीम खान, जो एक रसोइया था, एक होटल गया जहाँ से वह कभी-कभी बड़े साहब के कहने पर हवेली के लिए खाना ले जाता था। जब भी हवेली में कोई फंक्शन होता था, उसकी सारी तैयारी रहीम खान ही करता था। इसलिए उसका शहर के होटल में आना-जाना लगा रहता था। वह जानता था कि वह अकेला मालकिन और जोया का ख्याल नहीं रख सकता। जोया को काम करने से वह रोकना तो चाहता था, पर रोक नहीं पाया।

बहरहाल, रहीम खान होटल में काम करने वाले अब्दुल साहब को जानते थे। उनसे बात करके उन्होंने जोया को वेट्रेस के काम पर लगवा दिया। और काफी दुखी होकर, डरते-डरते, जोया से बोला, "बीबी साहिबा, आपके पास आपकी कोई डिग्री या डॉक्यूमेंट नहीं है, इसलिए आपको कहीं कुछ काम नहीं मिल सकता। उस होटल में मेरी अब्दुल साहब से थोड़ी जान-पहचान है। उन्होंने मेरी ज़िम्मेदारी पर आपको काम दिया है।"

यह सुनकर जोया ने रहीम खान से कहा, "बाबा, आपने हमारी जान बचाई, हमें सही-सलामत यहाँ ले आए और अब मुझे काम भी दिला दिया। आपका बहुत बड़ा एहसान है हम पर। हम मरते दम तक नहीं भूलेंगे आपने जो हमारे लिए किया है। अगर आप हमारी मदद नहीं करते, तो ना जाने हम कब के इस दुनिया से चले गए होते। और रही बात काम की, आप परेशान मत होइए। कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता, हम कर लेंगे। हम सब सीख लेंगे और आपको शिकायत का मौका नहीं देंगे। हम पूरी मेहनत और लगन के साथ काम करेंगे। हम वादा करते हैं।"

रहीम खान ने यह सब सुना तो वह रो दिए। महल में एक राजकुमारी की तरह रहने वाली लड़की, जिसने आज तक अपनी हवेली की किचन तक नहीं देखी, कोई काम नहीं किया, वह आज किसी के लिए खाना परोसेगी और गंदे बर्तन उठाएगी। ऊपर वाला भी ना जाने क्या-क्या दिन दिखाता है। वह सोच ही रहा था...

तभी जोया बोली, "रहीम बाबा, अब से आप माँ का ध्यान रखने के लिए घर में रहेंगे।" जोया की माँ, जो शौहर और बेटों की मौत से सदमे में चली गई थी, उनको बस अपनी आँखों के सामने अपने शौहर और बेटों का खून ही दिखाई देता था, जिससे वह घबराकर चीखने-चिल्लाने लगती थी। इसलिए घर पर उनकी देखरेख के लिए किसी एक का होना बेहद ज़रूरी था। रहीम खान ने हाँ में सिर हिला दिया।

दूसरी ओर, अरहम ने जोया की तलाश जोर-शोर से शुरू कर दी थी। पुलिस, मीडिया, हर जगह उसने अपने बंदे काम पर लगा दिए थे, पर जोया की उसके पास कोई तस्वीर ना होने के कारण कोई कुछ भी नहीं कर पा रहा था। अरहम के पास जोया की कोई फ़ोटो नहीं थी; उसकी सूरत तो उसके दिलो-दिमाग में छपी हुई थी। उसने हर जगह अनाउंसमेंट कराई, इनाम की राशि रखी, पर कहीं कुछ पता नहीं चला। निराश होकर अरहम ने दुआओं का रास्ता अपनाया, जगह-जगह गरीबों को खाना-पैसा सब दिया और दुआ कराई, पर ऐसा लग रहा था जैसे खुदा भी उससे रूठ गया था। कहीं से कुछ भी उसे पता नहीं चल पाया।

वहीं, जोया ने अब काम पर जाना शुरू कर दिया था। उसका पहला दिन था। जोया को पहले दिन रहीम बाबा छोड़ने गए। जोया ने जैसे ही होटल में एंट्री की, वह वहाँ की साज-सज्जा देखती रह गई। वह शहर का नामी-गिरामी होटल था, जो बहुत ही शानदार बना हुआ था। जोया ने पहली बार कोई होटल देखा था; उसके लिए तो सब नया था। उसे वहाँ बहुत खुशी मिली थी। वह काफी चाव से सारी चीज़ों को ध्यान से देख रही थी।

तभी अब्दुल साहब वहाँ आते हैं और रहीम खान से बोलते हैं, "क्या यह वही लड़की है जिसके बारे में आपने बात की थी?" रहीम खान हाँ में सिर हिला देते हैं। "अच्छा, तो आपका नाम क्या है, मिस?" इतने में रहीम बीच में ही बोल पड़े, "साहब, इनका नाम शनाया खान है।" इस पर जोया ने चौंकते हुए रहीम को देखा, पर कुछ बोली नहीं। तभी अब्दुल ने एक लेडी वेट्रेस को बुलाया और उससे जोया उर्फ शनाया से मिलवाया और काम समझाने को कहा। और बोला, "मेहनत से काम करना, मिस शनाया। मैंने आपको खाली अपनी ज़िम्मेदारी पर रखा है। वरना बिना आइडेंटिटी के शहर में कोई किसी को काम पर नहीं रखता।" जोया ने हाँ में सिर हिला दिया। "आपको शिकायत का मौका नहीं मिलेगा।"

इतना कहकर अब्दुल साहब वहाँ से चले गए। उनके जाने के बाद जोया ने धीरे से रहीम से पूछा, "आपने मेरा गलत नाम क्यों बताया?" इस पर रहीम ने कहा, "आपके दुश्मन अभी आपको चारों ओर ढूँढ़ रहे हैं। कब कौन आपके मामा का आदमी निकले, कुछ पता नहीं। इसलिए आपकी पहचान छुपाने के लिए मैंने ऐसा बोला।" जोया अच्छे से समझ चुकी थी। रहीम खान बिलकुल सही थे। अपनी जगह, उसको और उसकी माँ को उसके मामा के गुंडे हर जगह ढूँढ़ रहे थे; इसलिए उसका नाम-पहचान सब छुपी रहनी ही चाहिए थी।

इतने में रश्मि, जो काफी देर से वहाँ खड़ी थी, वह बीच में बोल पड़ी, "हैलो! मैं कब तक आप लोगों की बातें खत्म होने का इंतज़ार करूँ? मुझे और भी काम है। मैं सारा टाइम तुम पर तो बर्बाद नहीं कर सकती!"

तभी जोया अचानक से घबराकर पलटी और माफी मांगते हुए बोली, "माफ़ कीजिए, मैं अभी आपके साथ चलती हूँ।" ऐसा कहकर उसने रहीम को घर जाकर माँ की देखरेख करने को बोला और रश्मि के साथ अंदर चली गई। रश्मि जो कि उस होटल की पुरानी मुलाज़िमा थी, उसका वहाँ पर काफी रुतबा था; इसलिए सब उसकी हर बात मानते थे। नए लोगों को क्या काम करना है, कैसे करना है, सब कुछ वही देखती थी।

बहरहाल, जोया को अब वहाँ पर काम करना था। रश्मि उसे एक बड़े से हॉल में ले गई। जोया ने जैसे ही हॉल को देखा, वह देखती रह गई। उसने कभी अपनी ज़िन्दगी में इतनी खूबसूरत जगह नहीं देखी थी। कहने को तो उसकी हवेली भी बहुत बड़ी और शानदार थी, लेकिन वह पुरानी तौर-तरीकों से बनी हुई पुश्तैनी हवेली थी। लेकिन यह होटल नए जमाने के तमाम तामझाम के साथ, साज-सज्जा से भरपूर, बेहद आकर्षक लग रहा था। उसकी चारों ओर की काँच की दीवारों पर तरह-तरह की कलाएँ और बड़े-बड़े पानी के फुव्वारे, झरने उसमें चार-चाँद लगा रहे थे। जोया इन सब चीज़ों में खोई हुई थी कि एकाएक रश्मि उस पर झुंझलाकर बोली, "हेलो, मिस शनाया! आप यहाँ पर काम करने आई हैं या ताक-झाँक करने?"

इस पर जोया झेंप गई। उसने कहा, "नहीं मैडम, आप बताइए मुझे क्या करना है।" रश्मि जोया को हॉल क्रॉस करते हुए बावर्चीखाने में ले गई। वहाँ पर काफी सारे लोग थे, जो अलग-अलग काम कर रहे थे; कोई खाना बना रहा था तो कोई सब्ज़ी काट रहा था। जोया हर चीज़ का मुआयना करने लगी; बदले में वहाँ मौजूद हर कोई उसे देख रहा था। हल्के नीले रंग के सलवार-सूट में करीने से दुपट्टा लपेटे हुए, वह बेहद सिम्पल और खूबसूरत लग रही थी। शायद यही कारण था कि रश्मि बात-बात पर उस पर झुंझला रही थी। जोया थी भी तो बहुत सुंदर।

वहाँ जाकर रश्मि ने थोड़ी आवाज़ तेज करते हुए बोला, "सब ध्यान से सुनो! यह इस लड़की का नाम शनाया है। यह आज से आप लोगों के साथ काम करेगी।" सब ने हाँ में सिर हिला दिया और एक-दूसरे की ओर देखने लगे। इन सब लोगों में कुछ लड़के थे, कुछ लड़कियाँ थीं, २-४ बड़े उम्रदराज भी थे, जो शायद काफी बरसों से वहाँ खाना बनाने का काम कर रहे थे। जोया को काम समझा दिया गया। उसको तैयार हुआ खाना बाहर खाने वाले रूम में ले जाने का काम दिया गया, क्योंकि अभी उसको खाना बनाना या होटल में आए मेहमानों को खाना सर्व करना, यह सब नहीं आता था। पर यह सब काम सिखाने की ज़िम्मेदारी वहीं काम करने वाली आयशा को दे दी गई थी।

आयशा और जोया कुछ ही देर में काफी घुल-मिल गई थीं। तभी अमन अंदर आया; अमन जो उस होटल का मैनेजर था। अमन ने रश्मि को बुलाया और बोला, "जितने भी कुकिंग स्टाफ हैं, बनाने से लेकर सर्व करने वाले तक, सबको इकट्ठा करो। मुझे कुछ ज़रूरी अनाउंसमेंट करनी है।" रश्मि ने सब मुलाज़िमों को सूचित कर दिया। कुछ ही देर में सब के सब एक-एक करके जमा हो गए। जोया और आयशा, जो अभी तक नहीं आ पाए थे, वह दोनों साथ में थे और खाने का कुछ सामान लेने स्टोर रूम चले गए थे। चूँकि उन्हें भी सबके एक साथ अनाउंसमेंट रूम में जमा होने की खबर मिल गई थी, आयशा जल्दी से जोया को रूम की ओर लेकर भागी। "जल्दी चलो! वरना जान आफ़त में पड़ जाएगी!"

"अमन: आ गए सब के सब?" इतने में ही आयशा और जोया वहाँ पहुँच गए। अमन ने जोया को देखा और पूछा, "यह कौन है?" अमन को ऐसे जोया को देखते हुए देखकर रश्मि, आयशा और जोया पर झुंझला उठी और तेज आवाज़ से बोली, "कहाँ थी तुम दोनों? तुम्हें क्या अनाउंसमेंट सुनाई नहीं दिया था? जो इतनी देर लगा दी आने में!" इतने में आयशा ने कहा, "रश्मि मैम, हम सामान लेने स्टोर रूम चले गए थे। वहीं से भागते हुए आ रहे हैं।"

अमन, जिसकी नज़रें अभी भी जोया पर टिकी थीं, उसने फिर पूछा, "यह लड़की कौन है?" तब रश्मि बोली, "अब्दुल साहब के एक जानने वालों में से है। यह एक मामूली सी लड़की है। छोटा-मोटा काम के लिए इसको ज़रूरत ना होने के बाद भी यहाँ रख लिया है।" अमन: "ओह, अच्छा! चलो अब आप सब मेरी बात ध्यान से सुनो। आज से ठीक २ दिन बाद हमारे होटल में शहर की सबसे बड़ी पार्टी होने वाली है, जिसकी तैयारी आप सबको अभी से शुरू करनी है। पार्टी में 56 भोग बनेंगे; हर वैरायटी का खाना रेडी होगा। कुछ और दूसरे शहर से शेफ आएंगे, जो आप लोगों की खाना बनाने में मदद करेंगे। किसी तरह की कोई कमी नहीं आनी चाहिए। इस पार्टी में शहर के सब बड़े लोग शामिल होंगे; मिनिस्टर, एक्टर, टीवी रिपोर्टर, बिज़नेसमैन आदि। इसलिए आप लोग सब तैयारी शुरू कर दो। ओके?"

सबने हाँ में सिर हिला दिया और सब अपने-अपने कामों को करने के लिए निकल गए। तभी अमन ने जोया को रोकते हुए पूछा, "तुम्हारा नाम क्या है?" जोया ने थोड़ी झिझक के साथ जवाब दिया, "शनाया खान।" "ओके! तो मिस शनाया, आपको किसी तरह की मदद की ज़रूरत हो तो मुझे याद करना। ओके? नाउ गो बैक टू योर वर्क।" जोया ने हाँ में सिर हिला दिया और चली गई। दूसरी ओर, अमन का जोया को यह सब बोलना रश्मि को अंदर तक तपा गया था।

वेल, सब पार्टी की तैयारियों में लग गए; आखिर शहर के सबसे बड़े बिज़नेसमैन अरमान ठाकुर की पार्टी थी। बाकी अगले भाग में...

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