Obbsessed with Zoya, Ch. 3

Obbsessed with Zoya, - Chapter 3

Posted by Shayna choudhary • Feb 20, 2025 08:03 PM

अरमान ठाकुर शहर का सबसे बड़ा बिजनेसमैन था जिसने बहुत कम उम्र में वह मुकाम हासिल किया था, जिसे हासिल करना हर किसी का सपना होता है।

बिजनेस में बेशुमार सफलता हासिल करने वाले अरमान ठाकुर को केवल दो ही चीजों का चस्का था: पार्टी और सफलता। ऊपर से यह उसकी बर्थडे पार्टी थी।

और साथ ही साथ उसकी विदेश में एक बहुत बड़ी डील फाइनल होने वाली थी; विदेश से भी कुछ लोग आने वाले थे।

इसलिए पार्टी को लेकर वह किसी तरह की कोई गलती बर्दाश्त नहीं कर सकता था। होटल वालों को अलग से यह हिदायत दे दी गई थी कि कोई किसी भी तरह की कोई गलती न हो, क्योंकि पार्टी के लिए अरमान ठाकुर ने अच्छी खासी बड़ी रकम अदा की थी।

होटल में सब के सब जोर-शोर से पार्टी की तैयारियों में लग गए। पार्टी का सारा इंतज़ाम होटल के बड़े से हाल में हुआ।

हॉल वैसे भी काफी खूबसूरत था, लेकिन अब इतना काफी नहीं था। उसको और आकर्षक बनाने के लिए शहर के बेस्ट से बेस्ट डेकोरेटर बुलाए गए। दूसरी ओर खाने का मेनू तैयार किया गया।

जोया, जिसको कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे, वह आयशा के साथ उसके कामों में हाथ बटा रही थी।

अभी जोया ने कुछ बड़ा काम नहीं किया था; वह बस आयशा की ही मदद कर रही थी। रश्मि का ध्यान काम से ज़्यादा जोया पर था क्योंकि उसको उससे बहुत जलन हो रही थी।

इसलिए वह बात-बात पर उस पर अपना हुकुम चलाती जा रही थी। खैर, जैसे-तैसे दिन बीता और जोया घर पहुँच गई।

उसने पहली बार कहीं पर कुछ काम किया था जिससे उसको बहुत थकावट और कमज़ोरी महसूस हो रही थी। उसने सारा दिन कुछ खाया भी नहीं था। वेल, जब वह घर गई, रहीम ने पहले से ही खाना तैयार रखा था। जोया ने फ्रेश होकर सबसे पहले खाना खाया, अपनी माँ के हालचाल लिए और सीधा बिस्तर में घुस गई।

सारा दिन थकी होने के बावजूद उसकी आँखों में दूर-दूर तक नींद नहीं थी। उसे अरहम और उसकी साथ जो कुछ हुआ, वह सब याद आ रहा था।

उसके भाई-बाबा, जिनकी वह आँखों का तारा थी...

कैसे भाई-बहनों की खट्टी-मीठी सी लड़ाई और बात-बात पर जोया का बाबा से शिकायत लगाना और सबकी हँसी से पूरी हवेली की दीवारें भी मुस्कुरा उठती थीं! कितना हँसता-खेलता परिवार था, और फिर इस एक तूफान ने कैसे उसकी पूरी ज़िंदगी उजाड़ दी।

सब कुछ याद करते-करते वह इतना रोई कि पूरा तकिया कब का उसके आँसुओं से भीग चुका था और वह रोते-रोते ना जाने कब नींद की वादियों में उतर गई थी।

दूसरी ओर अरहम, जिसकी टेबल पर अरमान ठाकुर की पार्टी का कार्ड पड़ा हुआ था, उसको ध्यान से देख रहा था। जोया के बाद उसने जैसे जीना छोड़ दिया था; वह ज़्यादा से ज़्यादा समय अपने कमरे में ही बिताता था।

वह निराश हो चुका था। पुलिस, टीवी, मीडिया, उसके खुद के फ्रेंड्स सर्कल और जाने कहाँ-कहाँ उसने उसे तलाशा था, पर उसका कहीं कुछ भी पता नहीं चल पाया था।

आज उसके कॉलेज दोस्त अरमान ठाकुर का इनविटेशन कार्ड देखकर वह चौंका था।

क्योंकि उन दोनों में अब पहले जैसी दोस्ती कहाँ थी? सफल होने की रेस में अरमान ने सफलता को चुना था, दोस्ती को नहीं।

उस दिन अरहम के फ्रेंड्स सर्कल में नवीन का एक्सीडेंट हो गया था। उसको ब्लड की बहुत ज़रूरत थी; केवल अरमान का ब्लड ही उसे बचा सकता था। लेकिन उसी दिन अरमान की ज़िंदगी की पहली मीटिंग थी, जिसके लिए उसने दिन-रात मेहनत की थी। एक ओर उसको कामयाबी थी और दूसरी ओर उसका दोस्त। अरमान ने कामयाबी को चुना था।

उस दिन जैसे-तैसे नवीन की जान तो बच गई थी, पर अब सबके मन में अरमान के लिए वह दोस्ती नहीं थी और सबने उससे बातचीत भी ना के बराबर कर दी थी।

वेल, इतने टाइम बाद अरमान का कार्ड देखकर अरहम को पिछली सब बातें याद आ गई थीं। उसने कितनी रिक्वेस्ट की थी उस दिन, पर अरमान नहीं आया था। पर आज यह कार्ड भेजने का मतलब क्या है? वह यह सब सोच ही रहा था कि तभी उसकी डोरबेल बजी।

इतने में नौकर ने आकर बताया, "आपसे कोई मिलने आए हैं।" अरहम ने उनको हॉल में बिठाने को बोला और खुद थोड़ा फ्रेश होकर बाहर आया।

उसने देखा अरमान ठाकुर खुद आया है और उसे देखकर मुस्कुरा रहा है। अरहम को ऐसे हैरानी से देखते हुए देखकर अरमान खुद उठा और उसके गले लगा।

अरहम ने भी फ़ॉर्मेलिटी पूरी की और चाय-कॉफी पूछा।

"अरहम, देखो मैं जानता हूँ तुम मुझसे नाराज़ हो, या मैं यह कहूँ, मुझसे नफ़रत करते हो," अरमान बोला।

"और तुम अपनी जगह सही भी हो। लेकिन मुझे एक बात बताओ, जिस इंसान ने बचपन से ही गरीबी देखी हो, उसकी माँ-बाप को दूसरों के हाथों ज़लील होते देखा हो, एक टाइम का खाना मुश्किल से मिलता हो, वह इंसान कब तक दुनिया के बारे में सोचेगा? हाँ, मैंने अपने बारे में सोचा, अपने परिवार के लिए सोचा।"

"अगर मैं उस दिन हॉस्पिटल चला जाता, तो मैं आज द अरमान ठाकुर नहीं बन पाता। मैं सेल्फ़िश हूँ, पर मेरे दोस्त, एक बात बता दूँ, अगर इस दुनिया में जीना है, तो थोड़ा तो सेल्फ़िश होना ही पड़ेगा।"

"और हाँ, तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूँ, नवीन को मैंने अपनी स्टेनलेस वाली फ़ैक्ट्री में मैनेजर बनाया है और मैं उसे अच्छी खासी तनख्वाह देता हूँ।"

"मैं यहाँ पर तुम्हें सफ़ाई देने नहीं आया, बस अपने अच्छे दोस्त को अपनी ज़िंदगी में वापस लेने आया हूँ। प्लीज़, मेरी बर्थडे पार्टी में अगर तुम आ गए, तो मैं समझूँगा तुमने मुझे मेरा प्यारा दोस्त लौटा दिया।"

"मैं अब चलता हूँ। मुझे तुम्हारा बेसब्री से इंतज़ार रहेगा।" इतना कहकर अरमान चला गया, और अरहम जो अभी तक हैरानी से उसे जाता हुआ देखता रहता है।

वह हल्के से मुस्कुराया और अपने मुलाज़िम को आवाज़ लगाकर पार्टी के लिए कपड़े तैयार करने को कहा।

बाकी अगले भाग में।

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